गर्मी के बीच वाराणसी में बढ़ रहा हवा का प्रदूषण, सांस लेने में हो रही दिक्कतें

Air pollution is increasing in Varanasi, causing breathing problems.
Varanasi News: इन दिनों भीषण गर्मी का असर देशभर से लेकर यूपी तक का देखने को मिल रहा है. गर्मी की तपन से हर कोई परेशान हो चुका है. लेकिन, इसी बीच वाराणसी में हवा का प्रदूषण बढ़ रहा है, जिससे सांस और हृदय रोगियों की चिंता बढ़ गई है. हाल ही में शहर का एयर क्वालिटी इंडेक्स (एक्यूआई) सामान्य स्तर से ऊपर रहा है, जिसमें अर्दली बाजार में एक्यूआई 117 और भेलूपुर में 119 तक पहुंच गया.

कुछ जानकारों का कहना है कि प्रदूषण नियंत्रण पर ध्यान नहीं दिया गया तो स्वास्थ्य पर गंभीर असर पड़ सकता है. भीषण गर्मी के बीच बनारस की हवा लगातार प्रदूषित दिख रही है. पिछले दस दिन से शहर का एयर क्वालिटी इंडेक्स (एक्यूआई) सामान्य स्तर से ऊपर दर्ज किया जा रहा है. इस प्रदूषण ने खासकर सांस और हृदय रोगियों की चिंता बढ़ा दी है.
बीते बुधवार को शहर का औसत एक्यूआई 106 था, एक दिन पहले 186 तक पहुंच गया था. सबसे अधिक प्रभावित इलाकों में अर्दली बाजार में एक्यूआई 117 रिकॉर्ड किया गया. यहां पीएम 2.5 का स्तर 218 और पीएम 10 का स्तर 172 मिला. भेलूपुर में एक्यूआई 119 रहा, जबकि पीएम 2.5 का स्तर 121 और पीएम 10 219 तक पहुंचा दिखा. मलदहिया में एक्यूआई 89 और बीएचयू क्षेत्र में 101 दर्ज किया गया, मलदहिया और कुछ अन्य क्षेत्र अपेक्षाकृत बेहतर स्थिति में हैं, बाकी जगह प्रदूषण का स्तर तय मानकों से अधिक है.
कई निर्माण स्थलों पर लों पानी का छिड़काव
विशेषज्ञों के अनुसार पीएम 2.5 का सुरक्षित मानक 60 और पीएम 10 का 100 होता है, लेकिन शहर के कई इलाकों में यह स्तर दोगुना हो गया है. पीएम 2.5 के बेहद सूक्ष्म धूल कण फेफड़ों में पहुंचकर अस्थमा, एलर्जी और हृदय संबंधी बीमारियों को बढ़ा सकते हैं, विशेषज्ञों का कहना है कि गर्मी और तेज धूप के कारण वातावरण में धूल के महीन कण अधिक सक्रिय हो जाते हैं. इसके अलावा शहर में चल रहे निर्माण कार्य, सड़कों की खुदाई, उड़ती धूल, डीजल वाहनों का धुआं प्रदूषण बढ़ाने में बड़ी वजह हैं. कई निर्माण स्थलों पर लों पानी का छिड़काव और ग्रीन नेट लगाने जैसे नियमों का पालन नहीं हो रहा है, जिससे धूल सीधे हवा में घुल रही है.

धूल वाली जगह मुंह ढक लें
बीएचयू के चेस्ट एंड टीबी विभाग के पूर्व अध्यक्ष प्रो. जीएन श्रीवास्तव ने कहा कि अस्थमा और हृदय रोगियों को विशेष सतर्कता बरतने की जरूरत है. जहां भी धुल उड़ रही हो, वहां गमछा से मुंह ढक लें, उन्होंनेन्हों ने कहा कि यदि समय रहते प्रदूषण नियंत्रण पर ध्यान नहीं दिया गया तो बनारस की हवा लोगों की सेहत पर गंभीर असर डाल सकती है.
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