वाराणसी में नाविकों का विरोध, बोले- जलस्तर कम फिर भी बंद किया गया संचालन

वाराणसी : गंगा में जलस्तर खतरे के निशान से नीचे होने के बावजूद नौका और मोटर बोट संचालन पर लगाए गए प्रतिबंध को लेकर नाविक समाज आक्रोशित है. नाविकों का कहना है कि प्रतिबंध के कारण करीब 40 हजार नाविकों और उनके परिवारों के सामने रोजी-रोटी का गंभीर संकट खड़ा हो गया है. नाविक समाज के प्रतिनिधियों ने मुख्यमंत्री से प्रतिबंध पर पुनर्विचार कर नौका संचालन की अनुमति देने की मांग की है. उनका कहना है कि नाविक समाज अनादिकाल से गंगा में नौका संचालन कर अपने परिवार का भरण-पोषण करता आ रहा है.
काशी आने वाले तीर्थ यात्रियों और कांवरियों को नौका सेवा उपलब्ध कराने के साथ-साथ घाटों पर डूबने वाले लोगों को बचाने में भी नाविक और गोताखोर महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं. नाविकों ने कहा - नौका संचालन के दौरान यात्रियों की सुरक्षा का विशेष ध्यान रखा जाता है और उन्हें लाइफ जैकेट पहनाकर ही नौकायन कराया जाता है. उनका कहना है कि बाढ़ अथवा किसी बड़ी आपदा के समय जब गंगा का पानी खतरे के निशान तक पहुंच जाता है, तब भी नाविक समाज अपनी नावों के माध्यम से लोगों को सुरक्षित स्थानों तक पहुंचाने और खाद्य सामग्री उपलब्ध कराने में प्रशासन का सहयोग करता है.
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नाविक समाज के लोगों ने सवाल उठाया कि जब गंगा का जलस्तर खतरे के निशान से नीचे है तो नौका संचालन पर पूर्ण प्रतिबंध लगाने का औचित्य क्या है. उनका कहना है कि अन्य परिवहन साधनों पर परिस्थितियों के अनुसार प्रतिबंध लगाए जाते हैं, लेकिन केवल नाविकों की आजीविका प्रभावित होने से उनके परिवारों के सामने भुखमरी जैसी स्थिति पैदा हो सकती है.
नाविक प्रतिनिधियों ने मुख्यमंत्री से मांग की कि जलस्तर और सुरक्षा मानकों को ध्यान में रखते हुए नौका संचालन पर लगाए गए प्रतिबंध की समीक्षा की जाए तथा आवश्यक सुरक्षा नियमों के साथ नाविकों को अपनी आजीविका चलाने की अनुमति दी जाए.
विरोध में इनकी रही मौजूदगी
बैठक में दुर्गा मांझी (अध्यक्ष, राजघाट), राम किशन मांझी, ऋतिक साहनी, देव आनंद मांझी, पतलु साहनी, पिंटू साहनी, पप्पू साहनी, देवेंद्र साहनी, विजय मांझी, सुनील साहनी, सौरभ साहनी, राहुल साहनी और दीपक साहनी सहित अन्य नाविक मौजूद रहे.



