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वाराणसी को एक विश्‍वस्‍तरीय फुटबाल मैदान की सौगात, 60 करोड़ का होगा निवेश

वाराणसी को एक विश्‍वस्‍तरीय फुटबाल मैदान की सौगात, 60 करोड़ का होगा निवेश
Jan 09, 2026, 10:05 AM
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Posted By Gaandiv

वाराणसी : काशी आध्यात्म, मंदिर और मोक्ष की नगरी है. साथ ही यहां का संगीत, विद्वता, खान-पान, मौज-मस्ती और खेलकूद आदि का भी विशेष महत्व है. संगीत और कला के क्षेत्र में यदि काशी ने भारतरत्न दिया है, तो खेल के क्षेत्र में भी अनेकों ओलंपियन दिए हैं. हॉकी, कुश्ती, बास्केटबाल, मुक्केबाजी, क्रिकेट और फुटबॉल में भी काशी के खिलाड़ियों ने अपनी महत्वपूर्ण उपस्थिति दर्ज कराई है. बनारसियों का फुटबॉल भी पसंदीदा खेल है. इसी परिप्रेक्ष्‍य में काशी में फुटबॉल प्रतियोगिताओं और फुटबॉल से बच्चों और युवाओं को जोड़ने के लिए एक विश्वस्तरीय, सर्वसुविधायुक्त, फुटबॉल मैदान बनाने का निर्णय लिया गया है. यह केवल काशी ही नहीं बल्कि उत्तर प्रदेश और देश के फुटबॉल जगत के लिए भी एक महत्वपूर्ण उपलब्धि है.


फुटबाल क्‍लब और एंग्‍लो बंगाली कालेज के बीच अनुबंध


VARANASI


देश के प्रख्यात फुटबॉल क्लब Inter Kashi और सीएम एंग्लो बंगाली इंटर कॉलेज के बीच इसके लिए एक अनुबन्ध हुआ है. जिसके तहत Inter Kashi, एंग्लो बंगाली के मैदान को विकसित करेगा. इसके लिए लगभग 60 करोड़ रुपये का निवेश किया जाएगा. एक विश्वस्तरीय फुटबाल मैदान बनाया जाएगा. दर्शक दीर्घा का निर्माण होगा. साथ ही कॉलेज की आर्थिक स्थिति को सुधारने के लिए प्रतिवर्ष दस लाख रुपये कॉलेज के फण्ड में दिए जाएंगे. देश के नामी फुटबॉल खिलाड़ियों द्वारा काशी की खेल प्रतिभाओं को निःशुल्क प्रशिक्षण भी मिलेगा.


विधायक और अधिकारियों ने की बैठक


VARANSI UPDATES


भाजपा विधायक सौरभ श्रीवास्‍तव ने बताया कि उन्‍हें बतौर मुख्य अतिथि, इस ऐतिहासिक क्षण का साक्षी बनने का सौभाग्य प्राप्त हुआ. काशी का प्राचीन एंग्लो बंगाली इन्टर कॉलेज अपने शैक्षणिक उन्नयन के साथ-साथ खेल गतिविधियों का भी एक प्रमुख केंद्र बने, यह मेरी प्राथमिकता में है. काशी के पुराधिपति और हम सभी के आराध्य बाबा विश्वनाथ की कृपा और काशी के सांसद औरप्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की प्रेरणा से ही यह संभव हो सका है. काशी में विकसित किया जाने वाला यह मैदान शीर्ष स्तरीय घरेलू फुटबॉल और अंतरराष्ट्रीय मुकाबलों की मेजबानी करने में सक्षम होगा. जिससे काशी को राष्ट्रीय फुटबॉल मानचित्र पर एक सशक्त स्थान मिलेगा.


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नगर आयुक्त हिमांशु नागपाल, जिला विद्यालय निरीक्षक भोलेन्द्र सिंह, प्रसिद्ध फुटबॉलर और लक्ष्मण अवार्ड विनर मुश्ताक अली, प्रधानाचार्य अनुराग मिश्रा, इन्टर काशी क्लब के अध्यक्ष श्री पृथीजीत दास व अन्य की गरिमामयी उपस्थिति रही.

महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ का 48वां दीक्षांत समारोह 28 जुलाई को, कैप्टन बी.के. त्यागी होंगे मुख्य अतिथि...
महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ का 48वां दीक्षांत समारोह 28 जुलाई को, कैप्टन बी.के. त्यागी होंगे मुख्य अतिथि...
वाराणसी. महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ का 48वां दीक्षांत समारोह 28 जुलाई 2026 (मंगलवार) को सिगरा स्थित रुद्राक्ष कन्वेंशन सेंटर में आयोजित होगा। समारोह के मुख्य अतिथि सीपीआई (एम) शिपिंग कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया के चेयरमैन एवं प्रबंध निदेशक कैप्टन बी.के. त्यागी होंगे। वे "विगत एक दशक में भारत की उपलब्धियां : विकसित भारत 2047 की आधारशिला" विषय पर दीक्षांत व्याख्यान देंगे।यह जानकारी रविवार को विश्वविद्यालय के केंद्रीय पुस्तकालय स्थित समिति कक्ष में आयोजित प्रेसवार्ता में कुलपति प्रो. आनंद कुमार त्यागी ने दी। उन्होंने बताया कि इस वर्ष विश्वविद्यालय एवं संबद्ध महाविद्यालयों के 63,184 विद्यार्थियों को स्नातक, स्नातकोत्तर एवं शोध की उपाधियां प्रदान की जाएंगी।दीक्षांत समारोह में विभिन्न संकायों के 26 मेधावी विद्यार्थियों को कुल 43 स्वर्ण पदक प्रदान किए जाएंगे। इनमें स्नातक स्तर के 8 तथा स्नातकोत्तर स्तर के 16 टॉपर शामिल हैं। इसके अलावा विश्वविद्यालय के दो उत्कृष्ट खिलाड़ियों सुमित कुमार भारती और डॉ. कंचन शर्मा को भी स्वर्ण पदक से सम्मानित किया जाएगा। वर्ष 2025-26 में विश्वविद्यालय के 49 पाठ्यक्रमों में 56 विद्यार्थियों ने सर्वोच्च अंक प्राप्त किए हैं।ALSO READ : प्रधानमंत्री ने मन की बात के 136 वें संस्करण मे कारगिल शहीदों को किया याद...कुलपति ने बताया कि समारोह की अध्यक्षता उत्तर प्रदेश की राज्यपाल एवं विश्वविद्यालय की कुलाधिपति श्रीमती आनंदीबेन पटेल करेंगी। विशिष्ट अतिथि के रूप में प्रदेश के उच्च शिक्षा मंत्री योगेंद्र उपाध्याय तथा उच्च शिक्षा राज्य मंत्री रजनी तिवारी उपस्थित रहेंगी।उन्होंने बताया कि दीक्षांत समारोह से पूर्व आयोजित 'दीक्षोत्सव-2026' के तहत विश्वविद्यालय परिसर एवं गोद लिए गए गांवों में गीता कार्यक्रम, भाषण, निबंध, लेखन, काव्य, चित्रकला, कहानी-कथन, लोक एवं एकल नृत्य, समूह गीत, पारंपरिक खेल, पुस्तक पठन, स्वास्थ्य परीक्षण और स्वच्छता अभियान सहित विभिन्न प्रतियोगिताओं एवं कार्यक्रमों का आयोजन किया गया।कुलपति ने बताया कि समारोह का सीधा प्रसारण महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ के सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर भी किया जाएगा।
प्रधानमंत्री ने मन की बात के 136 वें संस्करण मे कारगिल शहीदों को किया याद...
प्रधानमंत्री ने मन की बात के 136 वें संस्करण मे कारगिल शहीदों को किया याद...
वाराणसी. भाजपा महानगर कार्यालय पर महानगर अध्यक्ष प्रदीप अग्रहरि द्वारा प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी द्वारा सम्बोधित ‘मन की बात’ कार्यक्रम के 136वें संस्करण का आयोजन किया गया।कार्यक्रम में प्रधानमंत्री ने कारगिल विजय दिवस के अवसर पर वर्ष 1999 के कारगिल युद्ध में देश की रक्षा के लिए अपने प्राणों की आहुति देने वाले वीर शहीदों एवं भारतीय सैनिकों को नमन किया। प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि कारगिल की ऊंची चोटियों, कठिन मौसम और विपरीत परिस्थितियों के बावजूद हमारे वीर जवानों का संकल्प हर चुनौती से बड़ा था। उन्होंने देशवासियों से वीर सैनिकों के त्याग और बलिदान को सदैव याद रखने का आह्वान किया।प्रधानमंत्री ने ‘शौर्य विजय यात्रा’ का भी उल्लेख किया, जो कारगिल विजय दिवस के उपलक्ष्य में दिल्ली स्थित राष्ट्रीय युद्ध स्मारक से 14 जुलाई को प्रारम्भ होकर कारगिल युद्ध स्मारक द्रास तक जा रही है। इस यात्रा का संदेश ‘वन राइड, वन नेशन, वन सैल्यूट’ है।मन की बात में प्रधानमंत्री ने आत्मनिर्भर भारत और स्वदेशी रक्षा तकनीक की बढ़ती ताकत पर भी प्रकाश डाला। उन्होंने भारतीय नौसेना में शामिल किए गए आधुनिक युद्धपोत आईएनएस महेंद्रगिरि का उल्लेख करते हुए भारत की बढ़ती स्वदेशी रक्षा क्षमता और तकनीकी सामर्थ्य की चर्चा की। प्रधानमंत्री मोदी ने देश के वैज्ञानिकों,इंजीनियरों और रक्षा क्षेत्र से जुड़े लोगों के प्रयासों की सराहना करते हुए आत्मनिर्भर भारत के संकल्प को मजबूत करने का आह्वान किया।प्रधानमंत्री ने पर्यावरण संरक्षण, स्वच्छता और जनभागीदारी से जुड़े अनेक प्रेरणादायी प्रयासों की भी चर्चा की। उन्होंने देश में स्थानीय स्तर पर किए जा रहे ऐसे कार्यों की सराहना की, जिनमें लोग अपने आसपास के वातावरण को स्वच्छ रखने के साथ-साथ कचरे को उपयोगी वस्तुओं में बदलकर ‘वेस्ट से वेल्थ’ की दिशा में काम कर रहे हैं।कार्यक्रम में हर्बल चाय जैसे पारंपरिक एवं प्राकृतिक विकल्पों,स्थानीय संसाधनों के उपयोग तथा पर्यावरण के अनुकूल जीवनशैली को बढ़ावा देने की चर्चा ने भी सभी को प्रेरित किया। प्रधानमंत्री जी के संदेश में प्रकृति के साथ संतुलन बनाकर आगे बढ़ने और भारतीय परम्पराओं में मौजूद पर्यावरण हितैषी जीवनशैली को अपनाने पर जोर दिया गया।इसी क्रम में इको-फ्रेंडली चटाई तथा पर्यावरण-अनुकूल उत्पादों को प्रोत्साहित करने की बात भी सामने आई। कार्यक्रम में उपस्थित लोगों ने इस संदेश को जन-जन तक पहुंचाने तथा दैनिक जीवन में प्लास्टिक के अनावश्यक उपयोग को कम करने का संकल्प लिया।ALSO READ : सारनाथ को वैश्विक सम्मान, बुद्ध की करुणा का संदेश अब और बुलंद: प्रो. वांगछुग दोर्जे नेगीप्लास्टिक कचरे से बेंच एवं अन्य उपयोगी वस्तुएं तैयार करने जैसे प्रयासों का उल्लेख करते हुए यह संदेश दिया गया कि कचरा केवल समस्या नहीं है, बल्कि सही तरीके से एकत्रीकरण, पुनर्चक्रण और जनभागीदारी के माध्यम से उसे उपयोगी संसाधन में बदला जा सकता है। इससे स्वच्छता के साथ-साथ पर्यावरण संरक्षण और स्थानीय स्तर पर रोजगार एवं नवाचार को भी बढ़ावा मिलता है। प्रधानमंत्री जी पहले भी प्लास्टिक कचरे से पार्क की बेंच जैसी उपयोगी वस्तुएं बनाने वाले प्रयासों को ‘वेस्ट टू वेल्थ’ की प्रेरणादायी मिसाल के रूप में रेखांकित कर चुके हैं।इको-फ्रेंडली गणपति को लेकर भी पर्यावरण संरक्षण की भावना को आगे बढ़ाने का संदेश दिया गया। गणेश उत्सव में प्लास्टर ऑफ पेरिस की जगह मिट्टी एवं पर्यावरण-अनुकूल प्रतिमाओं को अपनाने तथा प्रकृति और जलस्रोतों को प्रदूषण से बचाने की दिशा में जनभागीदारी बढ़ाने पर जोर दिया गया।कार्यक्रम में उपस्थित कार्यकर्ताओं एवं नागरिकों ने प्रधानमंत्री जी के संबोधन को ध्यानपूर्वक सुना और राष्ट्र की सुरक्षा, आत्मनिर्भरता, स्वच्छता, पर्यावरण संरक्षण तथा देशहित में जनभागीदारी को मजबूत करने का संकल्प लिया।
सारनाथ को वैश्विक सम्मान, बुद्ध की करुणा का संदेश अब और बुलंद: प्रो. वांगछुग दोर्जे नेगी
सारनाथ को वैश्विक सम्मान, बुद्ध की करुणा का संदेश अब और बुलंद: प्रो. वांगछुग दोर्जे नेगी
वाराणसी: केंद्रीय उच्च तिब्बती शिक्षा संस्थान (सीआईएचटीएस), सारनाथ के कुलपति प्रो. वांगछुग दोर्जे नेगी ने सारनाथ को यूनेस्को की विश्व धरोहर सूची में शामिल किए जाने को भारत की आध्यात्मिक विरासत की वैश्विक स्वीकृति बताया है। उन्होंने कहा कि यह केवल किसी ऐतिहासिक स्थल को मिला सम्मान नहीं, बल्कि भगवान बुद्ध के शांति, करुणा और मानव कल्याण के संदेश को पूरी दुनिया द्वारा स्वीकार किए जाने का प्रतीक है।उन्होंने कहा कि धम्मचक्कप्पवत्तन दिवस के 2605वें आयोजन से ठीक पहले मिली यह उपलब्धि सारनाथ की ऐतिहासिक और आध्यात्मिक महत्ता को नई ऊंचाई प्रदान करती है। यही वह पावन स्थल है, जहां भगवान बुद्ध ने ज्ञान प्राप्ति के बाद अपना पहला उपदेश देकर धर्मचक्र का प्रवर्तन किया था। आज भी यह स्थान विश्वभर के बौद्ध श्रद्धालुओं, शोधार्थियों और पर्यटकों के लिए प्रेरणा का प्रमुख केंद्र बना हुआ है।प्रो. नेगी ने कहा कि भारत की पहचान केवल अपनी प्राचीन सभ्यता से नहीं, बल्कि उन सार्वभौमिक मूल्यों से है जिन्हें भगवान बुद्ध ने मानवता के सामने रखा। सत्य, अहिंसा, करुणा और सह-अस्तित्व का उनका संदेश वर्तमान वैश्विक परिस्थितियों में पहले से अधिक प्रासंगिक हो गया है।ALSO READ : शादी का झांसा देकर दुष्कर्म करने का आरोपी गिरफ्तार, वाराणसी छोड़ने की फिराक में था.उन्होंने इस उपलब्धि का श्रेय भारत सरकार के संस्कृति मंत्रालय के संरक्षण और सांस्कृतिक धरोहरों के संरक्षण के प्रति उसकी प्रतिबद्धता को देते हुए केंद्रीय संस्कृति मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत तथा संस्कृति सचिव विवेक अग्रवाल के प्रयासों की सराहना की। उन्होंने कहा कि यह उपलब्धि देश की सांस्कृतिक विरासत को विश्व मंच पर नई पहचान दिलाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।कुलपति ने देशवासियों और विश्वभर के बौद्ध अनुयायियों को शुभकामनाएं देते हुए कहा कि सारनाथ अब केवल इतिहास का साक्षी नहीं, बल्कि विश्व शांति और मानवता के साझा भविष्य का भी प्रेरणा-स्थल बनकर उभरेगा। उन्होंने अंत में कामना की कि भगवान बुद्ध का करुणा और मैत्री का संदेश संपूर्ण विश्व में सद्भाव, शांति और मानव कल्याण का मार्ग प्रशस्त करता रहे।