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वाराणसी में दिखा अद्भुभुत होली का उत्सव, मुस्लिम महिलाओं ने हिंदू बहनों के संग खेली होली

वाराणसी में दिखा अद्भुभुत होली का उत्सव, मुस्लिम महिलाओं ने हिंदू बहनों के संग खेली होली
Mar 02, 2026, 01:13 PM
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Posted By Preeti Kumari

वाराणसी: इंद्रेश नगर (लमही) में सोमवार को रंगों का ऐसा उत्सव सजा, जिसने केवल गलियों को ही नहीं, बल्कि दिलों को भी रंग दिया. विशाल भारत संस्थान और मुस्लिम महिला फाउंडेशन के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित “अद्भुत होली” ने सांप्रदायिक सौहार्द, स्त्री-शक्ति और सामाजिक समरसता का एक ऐसा दृश्य रचा, जो लंबे समय तक स्मृतियों में अंकित रहेगा. यह केवल रंगों का उत्सव नहीं था—यह विश्वास का उत्सव था, संवाद का उत्सव था और उस साझी संस्कृति का उत्सव था जिसे सदियों से काशी अपनी सांसों में संजोए हुए है.


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इंद्रेश नगर की सुबह जैसे ही सुनहरी हुई, सुभाष भवन में अबीर-गुलाल की हल्की-हल्की खुशबू फैलने लगी. मंच पर सादगी और सौहार्द का संयमित संयोजन था. एक ओर केसरिया, हरा, गुलाबी और पीला रंग हवा में उड़ रहे थे, तो दूसरी ओर महिलाओं की हँसी और फाग गीत से वातावरण गुंजायमान हो रहा था. हिंदू और मुस्लिम महिलाओं ने एक-दूसरे के माथे पर अबीर लगाया, गुलाल की बौछार की और गले मिलकर बधाई दी. किसी ने ढोलक की थाप पर फगुआ गाया, तो किसी ने सूफियाना अंदाज़ में मुहब्बत का पैग़ाम सुनाया. आयोजन के दौरान बार-बार एक ही स्वर उभरा—“खून की होली खेलना बंद करें, रंगों से होली खेलें.”


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महिलाओं ने सामूहिक स्वर में कहा कि त्योहारों का उद्देश्य हृदयों को जोड़ना है, तोड़ना नहीं. यदि रंगों से रिश्ते मजबूत हो सकते हैं, तो रक्त से केवल पीड़ा और पश्चाताप ही जन्म लेते हैं. वाराणसी को सदियों से गंगा-जमुनी तहज़ीब का प्रतीक माना जाता रहा है. यहाँ मंदिर की घंटियों और मस्जिद की अज़ान की ध्वनि एक साथ सुनाई देती है. इंद्रेश नगर की यह होली उसी परंपरा की जीवंत अभिव्यक्ति थी. यहाँ किसी ने किसी की आस्था पर प्रश्न नहीं उठाया, बल्कि एक-दूसरे की आस्थाओं का सम्मान करते हुए रंगों की साझी छटा बिखेरी.


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मंच से वक्ताओं ने कहा कि काशी की आत्मा समावेश में बसती है. यहाँ भिन्नता बाधा नहीं, बल्कि सौंदर्य है. इस आयोजन की सबसे उल्लेखनीय बात यह रही कि इसकी कमान महिलाओं ने संभाली. हिंदू और मुस्लिम महिलाओं ने मिलकर यह सिद्ध किया कि यदि संवाद की शुरुआत घरों और मोहल्लों से हो, तो बड़े-बड़े विवाद भी सुलझ सकते हैं.

कार्यक्रम में साहित्यिक प्रस्तुतियों ने वातावरण को और अधिक भावपूर्ण बना दिया. कविताओं और गीतों के माध्यम से प्रेम, भाईचारे और शांति का संदेश दिया गया.


इस संस्था के राष्ट्रीय अध्यक्ष, रामपंथ के पीठाधीश्वर राजीव गुरुजी ने अपने संबोधन में कहा कि यह पहल प्रधानमंत्री के संसदीय क्षेत्र से एक सकारात्मक संदेश के रूप में पूरे विश्व तक पहुँचे. उन्होंने कहा कि इस प्रकार की रचनात्मक और समरसता-आधारित होली पहलें से ही निरंतर विशाल भारत संस्थान द्वारा की जा रही हैं, जो देश की एकता को सुदृढ़ करती हैं. उन्होंने आशा व्यक्त की कि यह संदेश राष्ट्रीय स्तर पर भी प्रेरणा बनेगा और अन्य क्षेत्रों में भी इस प्रकार के आयोजन होंगे. कार्यक्रम के अंत में सभी ने एक स्वर में संकल्प लिया कि वे अपने-अपने क्षेत्रों में शांति और सद्भाव को बढ़ावा देंगे, और आने वाली पीढ़ियों को एक ऐसा समाज सौंपेंगे जो प्रेम और विश्वास पर आधारित हो.

गंगा की लहरों पर तिरंगा, राफेल-सुखोई और तेजस की गर्जना से गूंजा आसमान
गंगा की लहरों पर तिरंगा, राफेल-सुखोई और तेजस की गर्जना से गूंजा आसमान
वाराणसी : नमो घाट पर शनिवार को एयर शो के दूसरे दिन आसमान में भारतीय वायुसेना के विमानों की गर्जना गूंज उठी. गंगा की लहरों के ऊपर हेलिकॉप्टर से तिरंगा प्रदर्शन और राफेल, सुखोई व तेजस लड़ाकू विमानों के हैरतअंगेज कलाबाजियों ने दर्शकों को रोमांचित कर दिया. नमो घाट से लेकर अस्सी घाट तक एयर शो देखने के लिए लोगों की भारी भीड़ उमड़ी. विमानों के करतब देखकर कहीं तालियां गूंजती रहीं, तो कहीं लोग मोबाइल से इन यादगार पलों को कैमरे में कैद करते नजर आए.म‍िड एयर रिफ्यूलिंग का प्रदर्शनआयोजन जब अपने समाप्‍त‍ि की ओर पहुंचा तो बीच हवा में भारी भरकम टैंकर व‍िमान के पीछे राफेल व‍िमान उड़ते नजर आए. दो पाइपों के सहारे बीच हवा में पर्याप्‍त दूरी बनाकर व‍िमान एक समान गत‍ि से उड़े और म‍िड एयर रिफ्यूलिंग का प्रदर्शन क‍िया गया. इस प्रकार के फार्मेशन के माध्‍यम से भारतीय वायु सेना ने प्रदर्श‍ित कि‍या क‍ि लंबी दूरी में जंग के दौरान व‍िमानों को उतरने की जरूरत नहीं होगी और बीच हवा में ईंधन भरा जा सकता है. इससे लंबी दूरी की मारक क्षमता का भी भारतीय वायु सेना की दक्षता साब‍ित होती है.ALSO READ : रामनगर रामलीला में हाथी के हमले में घायल महावत की मौत, 18 अक्टूबर को हुई थी घटनादर्शक हुए रोमांचितएयर शो शुरू होते ही नमो घाट पर उत्साह का माहौल बन गया. आसमान में तेज गर्जना के साथ लड़ाकू विमानों ने अपनी रफ्तार और कौशल का प्रदर्शन किया. राफेल के हवा में अचानक मुड़ने, नीचे की ओर आने और फिर तेजी से ऊंचाई पकड़ने जैसे करतबों ने दर्शकों को रोमांचित कर दिया. वहीं, सुखोई के हवाई करतबों ने भी लोगों का ध्यान खींचा. तेजस की दमदार गर्जना से गंगा के घाट गूंज उठे.इस दौरान भारतीय सेना का हेलिकॉप्टर तिरंगा लेकर गंगा के ऊपर से गुजरा. आसमान में लहराते तिरंगे को देखकर घाटों पर मौजूद लोगों में खासा उत्साह दिखाई दिया. लोगों ने तालियां बजाकर इस दृश्य का स्वागत किया. एयर शो के दौरान नमो घाट पर सांस्कृतिक कार्यक्रमों का भी आयोजन किया गया, जिससे आयोजन का उत्साह और बढ़ गया. एयर शो को लेकर शहर के गंगा घाटों पर सुबह से ही लोगों की भीड़ जुटने लगी. नमो घाट, अस्सी घाट समेत विभिन्न घाटों पर लोग विमानों के करतब देखने पहुंचे. कई लोगों ने अपने घरों की छतों से भी एयर शो का आनंद लिया. शहर के 84 गंगा घाटों पर सुरक्षा और भीड़ प्रबंधन के मद्देनजर बैरिकेडिंग की गई है. नमो घाट पर भारतीय रेलवे के अधिकारियों और उनके परिजनों के लिए अलग से बैठने की व्यवस्था की गई है. वहीं, मीडियाकर्मियों और अन्य दर्शकों के लिए भी अलग-अलग इंतजाम किए गए हैं. एयर शो देखने के लिए एनसीसी कैडेट्स भी पहुंचे. पूरे आयोजन के दौरान काशीवासियों में देशभक्ति और रोमांच का माहौल देखने को मिला.हर पल को बनाया यादगारगंगा के ऊपर भारतीय तिरंगे का प्रदर्शन, लड़ाकू विमानों की गर्जना और आसमान में उनके हैरतअंगेज करतबों ने एयर शो के दूसरे दिन को यादगार बना दिया. घाटों पर उमड़ी भीड़ और दर्शकों का उत्साह इस आयोजन के प्रति लोगों के आकर्षण को दर्शाता रहा. मणिकर्णिका घाट पर जलती चिता के सामने भी लोग एयर शो का लुत्फ उठाते हुए काशी में नजर आए. वहीं दशाश्वमेध घाट पर नाव पर बैठकर देखने में जो आनंद पब्लिक को आ रहा है वह नमो घाट पर नहीं आ रहा है. कुछ इसी तरह के भाव से पर्यटक भी अन्‍य घाटों पर भरे नजर आए. जबक‍ि गंगा में नमो घाट की ओर नौका संचालन पर प्रत‍िबंध होने से नाव‍िक कुछ उदास भी दिखे.
रामनगर रामलीला में हाथी के हमले में घायल महावत की मौत, 18 अक्टूबर को हुई थी घटना
रामनगर रामलीला में हाथी के हमले में घायल महावत की मौत, 18 अक्टूबर को हुई थी घटना
वाराणसी : रामनगर की रामलीला में हाथी के हमले में घायल महावत घपलू नट उर्फ छपलू की आजमगढ़ के निजी अस्पताल में उपचार के दौरान मौत हो गई. 18 अक्टूबर को हाथी को नहलाने ले जाते समय हाथी अचानक बेकाबू हो गया था और उसने महावत को सूंड से उठाकर जमीन पर पटक दिया था. गंभीर रूप से घायल होने के बाद संक्रमण फैलने से डॉक्टरों को उसका बायां पैर काटना पड़ा, लेकिन उसे बचाया नहीं जा सका.घपलू चार भाइयों में तीसरे नंबर पर था. उसको चार साल का बेटा है. उसकी मौत से पत्नी सरीकुन और मां कलावती का रो-रोकर बुरा हाल है. परिवार की आर्थिक स्थिति बेहद कमजोर है और घटना से गांव में शोक का माहौल है.ALSO READ : वाराणसी एयर शो: दूसरे दिन चरमराई यातायात व्यवस्था, शहर में लगा भीषण जाम, रहगीर परेशानगत 18 अक्‍टूबर को रामनगर में उस समय हड़कंप मच गया था, जब रामलीला में आया हाथी अचानक बेकाबू होकर इधर-उधर भागने लगा. हाथी का उत्‍पात देख लोगों में भगदड़ मच गई. महावत ने उसे काबू करने की कोशिश की, लेकिन हाथी ने उसे पटक दिया, जिसमें वह गंभीर रूप से घायल हो गया. उसका इलाज अस्पताल में चल रहा था. हाथी को आजमगढ़ से रामलीला में लाया गया था, जहां वह पंचवटी मैदान से निकलकर सड़क पर भागने लगा. 12 घंटे बाद थककर एक जगह हाथी रुक गया. मौके पर वन विभाग के कर्मी व पुलिस फोर्स मौजूद रहे. इसके साथ ही गोरखपुर से भी वन विभाग की स्पेशल टीम पहुंची. हाथी पर मशक्‍कत के बाद काबू पाया जा सका. हाथी के हमले में घायल महावत को 50 टांके लगे थे. हाथी के बेकाबू होने की वजह से रविवार को लीला भी प्रभावित हुई. लीला का मंचन नहीं हुआ, बल्कि भगवान की आरती हुई थी.
वाराणसी एयर शो: दूसरे दिन चरमराई यातायात व्यवस्था, शहर में लगा भीषण जाम, रहगीर परेशान
वाराणसी एयर शो: दूसरे दिन चरमराई यातायात व्यवस्था, शहर में लगा भीषण जाम, रहगीर परेशान
वाराणसी : एयर शो के दूसरे दिन शनिवार को शहर की यातायात व्यवस्था चरमरा गई. विभिन्न मार्गों पर लागू डायवर्जन और वाहनों के प्रवेश पर प्रतिबंध के चलते शहर के भीतर से लेकर बाहरी इलाकों तक कई स्थानों पर जाम की स्थिति बनी रही. सुबह करीब 9:30 बजे के बाद यातायात एडवाइजरी लागू होने के साथ ही प्रमुख सड़कों पर वाहनों का दबाव बढ़ने लगा. कुछ ही समय में कई मार्गों पर वाहनों की लंबी कतारें लग गईं, जिससे आम नागरिकों, राहगीरों और वाहन चालकों को आवागमन में परेशानी का सामना करना पड़ा. शहर के अलग-अलग हिस्सों में यातायात नियंत्रित करने के लिए पुलिसकर्मी तैनात रहे, लेकिन प्रतिबंधों के कारण बदले मार्गों पर वाहनों की संख्या बढ़ने से कई जगह जाम की समस्या बनी रही.हाईवे से शहर में प्रवेश पर प्रतिबंध, रिंग रोड पर कतारएयर शो के मद्देनजर शहर में यातायात को व्यवस्थित रखने के लिए हाईवे से शहर के अंदर वाहनों के प्रवेश पर प्रतिबंध लगाया गया. इसके साथ ही गंगा घाटों की ओर जाने वाले वाहनों की आवाजाही भी रोकी गई. इन प्रतिबंधों का असर शहर में प्रवेश करने वाले प्रमुख रास्तों पर दिखाई दिया. आजमगढ़-लालपुर रिंग रोड मार्ग पर सुबह से ही वाहनों का दबाव बना रहा और लंबी कतारों के चलते आवागमन प्रभावित हुआ. बसों, कारों और अन्य वाहनों को आगे बढ़ने में परेशानी हुई. यातायात व्यवस्था में बदलाव के कारण निर्धारित रास्तों से गुजरने वाले वाहन चालकों को वैकल्पिक मार्गों का सहारा लेना पड़ा, जिससे दूसरे मार्गों पर भी दबाव बढ़ने की स्थिति बनी. पहडिया-पांडेयपुर मार्ग, अंधरापुल, चौकाघाट समेत अन्‍य मार्गों पर जाम की स्थिति बनी रही.राजघाट पुल पर पाबंदी, सामनेघाट पुल पर अनुमतिपड़ाव चौराहे पर वाहनों की एंट्री बंद किए जाने से आसपास के मार्गों पर यातायात का सामान्य संचालन प्रभावित रहा. वहीं, राजघाट पुल पर वाहनों के साथ पैदल आवागमन भी बंद कर दिया गया. इस व्यवस्था के चलते पुल से होकर आने-जाने वाले लोगों को दूसरे रास्तों का उपयोग करना पड़ा. दूसरी ओर, सामनेघाट पुल पर केवल दोपहिया वाहनों को आवाजाही की अनुमति दी गई, जबकि अन्य वाहनों पर प्रतिबंध रहा. पुलों और प्रमुख संपर्क मार्गों पर लागू इन पाबंदियों के कारण यातायात का दबाव वैकल्पिक रास्तों की ओर बढ़ा. इससे शहर के कुछ हिस्सों में लोगों को अपने गंतव्य तक पहुंचने में सामान्य से अधिक समय लगा.ALSO READ : PET 2026 के अभ्यर्थियों के लिए रेलवे चलाएगा परीक्षा स्पेशल ट्रेन, 24, 29 और 31 अक्टूबर को मिलेगी सुविधासामनेघाट से लंका तक भीषण जामशहर के दक्षिणी हिस्से में सामनेघाट से लंका तक जाम की स्थिति बनी रही. मार्ग पर वाहनों की लंबी कतार लगने से स्थानीय लोगों और इस रास्ते से गुजरने वाले वाहन चालकों को परेशानी हुई. एयर शो के चलते लागू यातायात प्रतिबंधों और सीमित आवाजाही का असर इस क्षेत्र में भी देखने को मिला. लंका तथा आसपास के इलाकों की ओर जाने वाले लोगों को जाम के कारण देरी का सामना करना पड़ा. जिन मार्गों से सामान्य दिनों में वाहन सीधे अपने गंतव्य तक पहुंच जाते हैं, वहां प्रतिबंधों के कारण यातायात की गति प्रभावित रही. सामनेघाट और लंका के बीच वाहनों का दबाव बढ़ने से इस क्षेत्र में आवागमन सुचारु बनाए रखना चुनौतीपूर्ण रहा.गोदौलिया और मैदागिन भी फुल शहर के प्रमुख व्यावसायिक और भीड़भाड़ वाले इलाकों गोदौलिया तथा मैदागिन की ओर भी यातायात व्यवस्था बनाए रखने के लिए पुलिसकर्मी निगरानी करते रहे. इन क्षेत्रों में भीड़ और वाहनों की आवाजाही को नियंत्रित करने का प्रयास किया गया. एयर शो के कारण शहर में लागू प्रतिबंधों का असर केवल आयोजन स्थल के आसपास तक सीमित नहीं रहा, बल्कि शहर के दूसरे हिस्सों में भी लोगों की रोजमर्रा की आवाजाही प्रभावित हुई. बाहर से वाराणसी आने वाले वाहन चालकों के साथ ही स्थानीय नागरिकों को भी बदले हुए यातायात मार्गों और प्रतिबंधों के कारण परेशानी का सामना करना पड़ा.