देश भर में प्रभावी होगा वाराणसी का एआई आधारित ड्रेनेज माडल, समस्याओं से मिलेगी निजात

वाराणसी : जिले में आर्टिफिशियल इंटेलीजेंस (एआई) आधारित ड्रेनेज नेटवर्क प्लान पर काम चल रहा है. निजी संस्था डीप मैट्रिक्स की मदद से 86 रिचार्ज पिट और 8000 से अधिक सोक पिट बनाए गए हैं. इससे जलभराव से राहत और भूजल स्तर भी सुधरा है. अब इस मॉडल को देश भर में लागू करने की तैयारी चल रही है.
इससे गांव व शहर में खराब ड्रेनेज सिस्टम के कारण जलभराव जैसी समस्याओं से निजात मिलेगी. इस दिशा में जिले में पिछले दो साल से कार्य हो रहा है. अब प्रधानमंत्री के संसदीय गांवों में अब तक हुए कार्य को मॉडल के रूप में रखते हुए पूरे देश में प्रभावी किया जाएगा.
24 जनवरी को माडल का प्रदर्शन
इसी क्रम में पंचायतीराज मंत्रालय ने एआई की मदद से समाधान के प्रयास में महत्वपूर्ण पहल की जा रही है. निजी संस्था से जुड़े तकनीकी विशेषज्ञों के माध्यम से प्रधानमंत्री की ओर से गोद लिए सात ग्राम पंचायतों ने एआई आधारित ड्रेनेज नेटवर्क प्लान तैयार कराया है. केंद्र सरकार 24 जनवरी को वाराणसी में इन मॉडल का प्रदर्शन करने जा रही है ताकि अगले बरसात तक इसे धरातल पर उतारा जा सके. जिले में प्रधानमंत्री के संसदीय गांव समेत पूरे जिले में ग्राम पंचायतों में अब तक 86 रिचार्ज पिट व लगभग आठ हजार से अधिक सोक पिट का निर्माण हुआ है.
बकायदा ड्रोन सर्वे के जरिए जल जमाव वाली स्थिति की पहले पहचान की गई. इसमें गांव के खेत, खेल मैदान, स्कूल समेत अन्य स्थल शामिल रहे. इसके बाद इन स्थानों पर सोक पिट का निर्माण कराया गया. लगभग तीन गुणे पांच, चार गुणे छह फीट के चौकोर गड्ढे खोेदे गए.
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भूगर्भ जल का स्तर ठी करने की कवायद
इसमें कंक्रीट समेत मैटरियल डाले गए ताकि जल शोधित होकर भूगर्भ जल तक पहुंच सके. इसके पीछे मुख्य उद्देश्य यह भी था कि भूगर्भ जल का स्टेटा ठीक हो सके. इसी प्रकार गांवों में आठ हजार से अधिक हैंडपंप स्थल पर सोक पिट का निर्माण कराया गया. इसको भी तकनीकी ढंग से संवारा गया. इस कार्य में भूगर्भ जल विभाग समेत अन्य पंचायती राज विभाग की तकनीकी टीम को भी शामिल किया गया. इस टीम की मदद से सोक पिट निर्माण किया गया. अब इन गांवों में पानी इधर उधर फैला नहीं दिखता. खुली नाली की भी जरूरत नहीं होती है.



