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वर्षों की मेहनत पर फिरा पानी, नीट परीक्षा रद्द होते ही छात्रों का फूटा गुस्सा

वर्षों की मेहनत पर फिरा पानी, नीट परीक्षा रद्द होते ही छात्रों का फूटा गुस्सा
May 12, 2026, 11:51 AM
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Posted By Preeti Kumari

Years of hard work go to waste, students erupt in anger after NEET exam cancellation


सालों साल किए गए मेहनत पर पल भर में पानी फिर जाना कोई मामूली बात नहीं, बल्कि ये उन छात्रों की जिंदगी और सपना है जिसे चकनाचूर कर दिया गया है. नीट यूजी परीक्षा 2026 को रद्द कर दिया गया है, जो बीते 3 मई 2026 को आयोजित होने वाली NEET (UG) 2026 परीक्षा को रद्द करने के साथ-साथ परीक्षा को अलग से अधिसूचित तिथियों पर फिर से आयोजित कराने का फैसला लिया है. ये निर्णय भारत सरकार की मंजूरी मिलने के बाद से राष्ट्रीय परीक्षण एजेंसी ने इस तरह का बड़ा कदम उठाया है. जहां उनका कहना है कि, इस परीक्षा के रद्द होने से छात्रों को घबराने की जरूरत नहीं है. क्योंकि, इस परीक्षा को दुबारा से देने के लिए किसी भी छात्रों को ना ही रजिस्‍ट्रेशन कराने की जरूरत है और न ही फिर से एग्‍जाम फीस देने की. ऐसी किसी भी प्रक्रिया को पूरी नहीं करनी है.


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आरोपों की जांच की जा सके


वहीं इस मामले पर भारत सरकार ने केंद्रीय जांच ब्यूरो यानि (सीबीआई) को सौंपने का निर्णय लिया है, ताकि आरोपों की जांच की जा सके. एनटीए ब्यूरो को पूरा सहयोग देगा और जांच के लिए आवश्यक सभी सामग्री, रिकॉर्ड और सहायता प्रदान करेगा. वहीं, फिर से एग्‍जाम देने वाले छात्रों को दोबारा रजिस्‍ट्रेशन कराने की जरूरत नहीं होगी और कोई अतिरिक्त एग्‍जाम फीस भी नहीं ली जाएगी. इसके अलावा, पहले से भुगतान की गई फीस छात्रों को वापस कर दी जाएगी और परीक्षा एनटीए के आंतरिक संसाधनों का उपयोग करके फिर आयोजित की जाएगी. फिर से आयोजित परीक्षा की तिथियों और पुनः जारी किए गए प्रवेश पत्र की अनुसूची सहित आगे की सूचनाएं एजेंसी के आधिकारिक चैनलों के माध्यम से जारी की जाएंगी.


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अफवाह भरी खबरों पर ना दें ध्यान


हालांकि, एजेंसी इस बात को बखूबी जानती हैं कि परीक्षा दोबारा आयोजित करना, उम्मीदवारों और उनके परिवारों को वास्तविक और महत्वपूर्ण असुविधा होगी. NTA इस परिणाम को हल्के में नहीं लेता है. यह निर्णय इसलिए लिया गया है, क्योंकि इसका विकल्प उस भरोसे को अधिक और स्थायी नुकसान पहुंचा सकता था. मई 2026 चक्र के लिए पंजीकरण डेटा, उम्मीदवारी और चुने गए परीक्षा केंद्रों को पुन: परीक्षा के लिए आगे बढ़ाया जाएगा. किसी नए पंजीकरण की आवश्यकता नहीं होगी और कोई अतिरिक्त परीक्षा शुल्क नहीं लिया जाएगा.


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इसके अतिरिक्त, छात्रों द्वारा पहले से भुगतान किया गया शुल्क वापस कर दिया जाएगा और परीक्षा NTA के आंतरिक संसाधनों का उपयोग करके दोबारा आयोजित की जाएगी. फिर से NEET परीक्षा की तारीखों और एडमिट कार्ड के शेड्यूल सहित आगे की सभी सूचनाएं एजेंसी के आधिकारिक चैनलों के माध्यम से जारी की जाएंगी. उम्मीदवारों और अभिभावकों से अनुरोध है कि वे केवल इन आधिकारिक माध्यमों पर ही भरोसा करें, और सोशल मीडिया पर चल रही अफवाह भरी खबरों पर जरा भी ध्यान न देने की अपील भी की है.


नीट परीक्षा रद्द होने से छात्रों में नाराजगी


वहीं, नीट परीक्षा रद्द होने से छात्रों में नाराजगी देखने को मिल रही है. जहां छात्रों का कहना है कि लगातार पेपर लीक की घटनाओं ने उनकी मेहनत, समय और परिवार की आर्थिक स्थिति पर गहरा असर डाला है, कई छात्रों ने एनटीए और सरकार की व्यवस्था पर सवाल उठाते हुए निष्पक्ष और सुरक्षित परीक्षा कराने की मांग भी की है, कुछ छात्रों का ये कहना है कि, पेपर रद्द करना कोई छोटी-मोटी बात नहीं होती है, क्योंकि सालों-साल नीट परीक्षा के लिए हर छात्र मेहनत करता है ताकि वो अपनी भविष्य बना सकें, ऐसे में पेपर रद्द होने से उनका वो हौसला टूट जाता है जो पेपर की तैयारी के लिए बना होता है. छात्रों का ये हौसला उन्हें बुलंदियों की ऊंचाईयों को छूने में मदद करता है जिसे आज की सरकार को जरा फर्क नहीं पड़ता है.


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बीएचयू में 'एक वृक्ष माँ के नाम' अभियान के तहत 111 पौधों का रोपण.
बीएचयू में 'एक वृक्ष माँ के नाम' अभियान के तहत 111 पौधों का रोपण.
वाराणसी : काशी हिन्दू विश्वविद्यालय (बीएचयू) में पर्यावरण संरक्षण और हरित परिसर के विकास को बढ़ावा देने के उद्देश्य से सोमवार को 'एक वृक्ष माँ के नाम' अभियान के अंतर्गत केंद्रीय कार्यालय परिसर में विशेष पौधरोपण कार्यक्रम आयोजित किया गया। अभियान का शुभारंभ कुलपति प्रो. अजित कुमार चतुर्वेदी और कुलसचिव राजन श्रीवास्तव ने केंद्रीय कार्यालय के सामने नीलमोहर का पौधा लगाकर किया।अभियान के तहत विश्वविद्यालय परिसर के विभिन्न स्थानों पर कुल 111 पौधों का रोपण किया गया। इनमें 100 रक्तमंजरी और 11 नीलमोहर के पौधे शामिल हैं। खास बात यह रही कि बीएचयू परिसर में पहली बार नीलमोहर के पौधे लगाए गए हैं। आकर्षक नीले-बैंगनी फूलों वाला नीलमोहर (जैकारैंडा मिमोसिफोलिया) अपनी प्राकृतिक सुंदरता के लिए विश्वभर में प्रसिद्ध है। विश्वविद्यालय प्रशासन का मानना है कि इन पौधों के रोपण से परिसर की जैव विविधता समृद्ध होगी और हरित वातावरण को बढ़ावा मिलेगा।ALSO READ: सावन में कांवड़ मार्गों पर बंद रहेंगी मांस-मछली की दुकानें, उल्लंघन करने पर होगी कानूनी कार्रवाई.कुलपति प्रो. अजित कुमार चतुर्वेदी ने कहा कि यह अभियान पर्यावरण संरक्षण के साथ-साथ प्रकृति के प्रति जिम्मेदारी निभाने का संदेश देता है। वहीं, रक्तमंजरी के पौधे भी परिसर की हरित आभा और सौंदर्य को और आकर्षक बनाएंगे।पौधरोपण कार्यक्रम का आयोजन उद्यान विशेषज्ञ इकाई के आचार्य प्रभारी प्रो. सरफराज आलम के नेतृत्व में किया गया। इस अवसर पर प्रो. अनुराग दवे, प्रो. राकेश कुमार सिंह, डॉ. संजीव सर्राफ, अश्विनी देशवाल, भरत पांडे सहित उद्यान इकाई एवं केंद्रीय कार्यालय के अधिकारी और कर्मचारी उपस्थित रहे।
सावन में कांवड़ मार्गों पर बंद रहेंगी मांस-मछली की दुकानें, उल्लंघन करने पर होगी कानूनी कार्रवाई.
सावन में कांवड़ मार्गों पर बंद रहेंगी मांस-मछली की दुकानें, उल्लंघन करने पर होगी कानूनी कार्रवाई.
वाराणसी : सावन माह में कांवड़ यात्रा के दौरान श्रद्धालुओं और कांवड़ियों की धार्मिक भावनाओं का सम्मान सुनिश्चित करने के लिए नगर निगम ने बड़ा निर्णय लिया है। निगम प्रशासन ने शहरी सीमा के अंतर्गत आने वाले सभी कांवड़ मार्गों पर अवैध रूप से संचालित मांस, मछली और मुर्गा विक्रेताओं की दुकानों को तत्काल प्रभाव से बंद रखने के निर्देश जारी किए हैं।नगर निगम के पशु चिकित्सा कल्याण अधिकारी डॉ. विजय अमृतराज ने बताया कि कांवड़ यात्रा के दौरान मार्गों पर मांस-मछली की दुकानों का संचालन श्रद्धालुओं की आस्था को प्रभावित कर सकता है। इसे देखते हुए सभी जोनों में विशेष अभियान चलाने का निर्णय लिया गया है। नगर निगम की टीमों को अपने-अपने क्षेत्रों में नियमित निरीक्षण कर अवैध रूप से संचालित दुकानों को बंद कराने की जिम्मेदारी सौंपी गई है।निगम प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि आदेश का सख्ती से पालन कराया जाएगा। यदि कोई दुकानदार निर्देशों की अनदेखी करते हुए मांस, मीट या मछली की बिक्री करता पाया गया, तो उसके खिलाफ नियमानुसार कड़ी दंडात्मक और कानूनी कार्रवाई की जाएगी।ALSO READ: बीएचयू के डॉ. राघवेंद्र रमन मिश्र विश्व के शीर्ष 5% वैज्ञानिकों में शामिल.उत्कृष्ट शोध और वैज्ञानिक योगदान के लिए मिला सम्माननगर निगम ने सभी संबंधित विक्रेताओं से अपील की है कि वे सावन माह के दौरान जारी निर्देशों का पालन करें और कांवड़ यात्रा की पवित्रता बनाए रखने में प्रशासन का सहयोग करें।
बीएचयू के डॉ. राघवेंद्र रमन मिश्र विश्व के शीर्ष 5% वैज्ञानिकों में शामिल.उत्कृष्ट शोध और वैज्ञानिक योगदान के लिए मिला सम्मान
बीएचयू के डॉ. राघवेंद्र रमन मिश्र विश्व के शीर्ष 5% वैज्ञानिकों में शामिल.उत्कृष्ट शोध और वैज्ञानिक योगदान के लिए मिला सम्मान
वाराणसी : काशी हिन्दू विश्वविद्यालय (बीएचयू) के राजीव गांधी दक्षिण परिसर, बरकच्छा (मिर्जापुर) स्थित चिकित्सा प्रयोगशाला प्रौद्योगिकी विभाग के सहायक प्रोफेसर डॉ. राघवेंद्र रमन मिश्र ने विश्वविद्यालय का गौरव बढ़ाया है। उन्हें वर्ष 2025 की एससीआई ग्लोबल रजिस्ट्री में विश्व के शीर्ष 5 प्रतिशत वैज्ञानिकों की सूची में स्थान मिला है।डॉ. मिश्र को यह प्रतिष्ठित उपलब्धि उनके उत्कृष्ट वैज्ञानिक अनुसंधान, नवाचारपूर्ण कार्यों और उच्च स्तरीय शैक्षणिक योगदान के आधार पर प्राप्त हुई है। एससीआई ग्लोबल रजिस्ट्री की यह वैश्विक रैंकिंग शोध की गुणवत्ता, प्रकाशित शोधपत्रों के प्रभाव, उद्धरण (साइटेशन) और अन्य शैक्षणिक मानकों के व्यापक मूल्यांकन पर आधारित होती है। इसमें एससीआई जर्नल और कंट्री रैंक (SCR) जैसे महत्वपूर्ण सूचकांकों का उपयोग किया जाता है, जो स्कोपस डाटा के आधार पर तैयार किए जाते हैं।ALSO READ: नगर निगम ने 100 करोड़ की सरकारी संपत्ति मुक्त कराई, 38 साल पुराने विवाद का अंतविश्वविद्यालय ने डॉ. मिश्र की इस उपलब्धि को संस्थान के लिए गर्व का क्षण बताया है। यह सम्मान न केवल बीएचयू की शोध परंपरा को नई पहचान देता है, बल्कि देश के युवा शोधकर्ताओं और विद्यार्थियों के लिए भी प्रेरणा का स्रोत है। डॉ. मिश्र की सफलता वैज्ञानिक अनुसंधान के क्षेत्र में समर्पण, गुणवत्ता और उत्कृष्टता का उदाहरण मानी जा रही है।