VDA के नोटिस से नाराज वाराणसी के पेट्रोल पंप संचालक लामबंद, दी ये चेतावनी

Angered by VDA's notice, Varanasi petrol pump operators mobilize and issue this warning
वाराणसी: विकास प्राधिकरण वाराणसी (VDA) द्वारा जिले के पेट्रोल पंपों को भेजे जा रहे नोटिस के विरोध में पेट्रोलियम डीलर्स एसोसिएशन लामबंद हो गया है. पिछले दिनों स्थानीय पेट्रोलियम डीलर्स एसोसिएशन की एक महत्वपूर्ण बैठक बनारस क्लब में आयोजित की गई. जिसमें प्राधिकरण की कार्रवाई को 'उत्पीड़न' करार देते हुए एसोसिएशन ने दो टूक कहा कि यदि जल्द ही इस समस्या का समाधान नहीं हुआ, तो वे सामूहिक बंदी और हाईकोर्ट की शरण लेने से पीछे नहीं हटेंगे.

वाराणसी विकास प्राधिकरण का गठन
बैठक की अध्यक्षता करते हुए एसोसिएशन के अध्यक्ष विनोद सिंह ने कहा कि वाराणसी विकास प्राधिकरण का गठन 1973 में हुआ था. उस समय प्राधिकरण की सीमा काफी सीमित थी, लेकिन समय-समय पर महायोजना के तहत इसका विस्तार किया गया. डीलर्स का तर्क है कि जिले के कई पेट्रोल पंप प्राधिकरण के गठन से भी पहले के स्थापित हैं. कई पंप उन क्षेत्रों में हैं जो पहले प्राधिकरण की सीमा से बाहर थे, लेकिन बाद में सीमा विस्तार के कारण दायरे में आ गए. जो पंप प्राधिकरण के दायरे में बने, उनके पास बाकायदा स्वीकृत मैप मौजूद हैं. ऐसी स्थिति में, दशकों पुराने और स्वीकृत पंपों को नोटिस जारी करना पूरी तरह से तर्कहीन और अन्यायपूर्ण है.
समस्या से संसदीय कार्यालय को अवगत कराया
बैठक में एक महत्वपूर्ण कानूनी बिंदु उठाते हुए कहा गया कि जिलाधिकारी या विकास प्राधिकरण जो एनओसी (जारी करते हैं, वह ऑयल कंपनी के नाम पर होती है. पेट्रोल पंप लगाने का पूरा कार्य भी कंपनी ही करती है. ऐसे में यदि कोई तकनीकी या कानूनी नोटिस जारी करना है, तो वह ऑयल कंपनी को भेजा जाना चाहिए, न कि व्यक्तिगत रूप से डीलर्स को.
चूंकि वाराणसी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का संसदीय क्षेत्र है, इसलिए एसोसिएशन ने सर्वसम्मति से निर्णय लिया है कि सबसे पहले इस समस्या से संसदीय कार्यालय को अवगत कराया जाएगा. एक पत्र के माध्यम से मांग रखी जाएगी कि व्यापारियों का उत्पीड़न रोका जाए और इस जटिल समस्या का आवश्यक निदान निकाला जाए.

Also Read: 7 मई से शुरू होगी पहली डिजिटल जनगणना, नगर आयुक्त ने की ये अपील
पेट्रोल पंपों की सामूहिक बंदी करने के लिए बाध्य
एसोसिएशन ने स्पष्ट किया कि यदि बातचीत से हल नहीं निकला, तो वे कानूनी लड़ाई (हाईकोर्ट) के साथ-साथ सड़क पर उतरकर विरोध जताने और जिले भर के पेट्रोल पंपों की सामूहिक बंदी करने के लिए बाध्य होंगे. बैंठक में मुख्य रूप से महामंत्री महेंद्र सिंह, रणविजय सिंह, अजय अग्रवाल, विश्वनाथ शाह, सनी जौहर, दीपक सिंह, संतोष राय, विश्वतोष नारायण, श्याम केशरी और राघवेंद्र त्रिपाठी सहित कई अन्य पदाधिकारी मौजूद रहे.



