वाराणसी में जर्जर फ्लैर्टों पर वीडीए का नया प्लान, किसे होगा लाभ

वाराणसी : विकास प्राधिकरण (वीडीए) ने शहर में जर्जर हो चुके पुराने फ्लैटों पर नया प्लान बनाया है. इसे पुनर्विकास की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम बताया जा रहा है. ‘उत्तर प्रदेश शहरी पुनर्विकास नीति-2026’ के तहत, वीडीए अब बहुमंजिला भवनों का निर्माण करेगा. यह निर्णय इसलिए लिया गया है क्योंकि विकास प्राधिकरण के पास लैंड बैंक की कमी है, और तीन दशक पहले बने फ्लैट अब जर्जर हो चुके हैं. इसके साथ ही, शहर में भूमि की कमी भी एक बड़ी समस्या बन चुकी है. इसकी पूर्ति के लिए और जर्जर फ्लैटों में रहने वाले लोगों की सुरक्षा हो सकेगी.
वीडीए के अनुसार, पुराने फ्लैटों को ध्वस्त करने के लिए सभी रहवासियों की सहमति आवश्यक नहीं है. यदि फ्लैट में रहने वाले 70 प्रतिशत लोग पुराने फ्लैटों को तोड़ने पर सहमत हैं, तो विकास प्राधिकरण कार्रवाई कर सकता है. इस योजना के अंतर्गत, निवासियों को एक नए टावर में बसाया जाएगा, जबकि दूसरे टावर के फ्लैटों को बाजार मूल्य पर बेचा जाएगा. इससे न केवल जर्जर फ्लैटों में रहने वालों की जानमाल की सुरक्षा होगी, बल्कि प्राधिकरण की आय में भी वृद्धि होगी. वीडीए ने यह निर्णय लिया है कि जिन कालोनियों का चयन किया जाएगा, वे 30 से 40 वर्ष पुरानी हैं. इन भवनों की मरम्मत पर खर्च बढ़ता गया है, लेकिन स्थायी समाधान नहीं निकल पाया. तकनीकी जांच में कई ब्लाकों को संरचनात्मक रूप से कमजोर पाया गया है. ऐसे में, वीडीए ने पुनर्विकास योजना को अपनाने का निर्णय लिया है, ताकि सीमित भूमि पर अधिक आवास उपलब्ध कराए जा सकें और निवासियों को सुरक्षित वातावरण मिल सके.
इस परियोजना के लिए विस्तृत कार्ययोजना तैयार की जाएगी. निर्माण कार्य शुरू करने से पहले सभी कानूनी और तकनीकी औपचारिकताएं पूरी की जाएंगी. प्राधिकरण की कोशिश होगी कि नई इमारतें भूकंपरोधी तकनीक से निर्मित हों और राष्ट्रीय भवन संहिता के अनुरूप हों. बहुमंजिला भवनों के निर्माण से न केवल आवास संकट कम होगा, बल्कि आसपास के इलाकों में भी विकास की गति तेज होगी. जल्द ही जर्जर फ्लैटों की कालोनियों को चिह्नित किया जाएगा.
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वीडीए के उपाध्यक्ष पुर्ण बोरा के अुनसार परियोजना के लिए विस्तृत कार्ययोजना तैयार की जाएगी. निर्माण कार्य शुरू करने से पहले सभी कानूनी और तकनीकी औपचारिकताएं पूरी की जाएंगी. प्राधिकरण की कोशिश होगी कि नई इमारतें भूकंपरोधी तकनीक से निर्मित हों और राष्ट्रीय भवन संहिता के अनुरूप हों.



