वाराणसी के चकबंदी शिविर में ग्रामीणों ने लगाया पक्षपात का आरोप, विरोध प्रदर्शन

वाराणसी : विकासखंड सेवापुरी के सत्तनपुर गांव में बुधवार को चकबंदी विभाग द्वारा तीन दिवसीय शिविर का आयोजन किया गया. शिविर के पहले ही दिन सैकड़ों किसानों ने चकबंदी व्यवस्था में अनियमितता और पक्षपात का आरोप लगाते हुए हाथ में बैनर-पोस्टर लेकर जमकर विरोध प्रदर्शन किया. किसानों ने चौपाल स्थल पर "आकार पत्र 23 रद्द करो", "फर्जी मालियत की जांच करो", "नहर की मालियत लगाई जाए" और "भ्रष्ट कर्मचारियों एवं अधिकारियों की जांच की जाए" जैसे नारे लगाए#.
किसानों ने आरोप लगाया कि गांव में चकबंदी के दौरान भूमि का बंटवारा न्यायसंगत नहीं किया गया. उनका कहना है कि कई बेशकीमती और सड़क किनारे की जमीनें अमीर तथा प्रभावशाली लोगों को आवंटित कर दी गईं, जबकि गरीब किसानों की भूमि को बंजर या उसर बता कम मालियत का घोषित कर दिया गया. इस अनियमितता को लेकर किसानों में गहरा रोष है.

गांव निवासी अशोक कुमार भारती ने बताया कि चकबंदी प्रक्रिया में गरीब किसानों के साथ अन्याय हुआ है. उन्होंने आरोप लगाया कि लगभग 20 एकड़ उपजाऊ भूमि एक निजी डिग्री कॉलेज को दे दी गई, जबकि गरीब किसानों की 10 से 12 बीघा जमीन बिना किसी जांच के खारिज कर दी गई. भारती ने मांग की कि आकार पत्र 23 को तत्काल रद्द किया जाए, अन्यथा गांव में गंभीर परिणाम हो सकते हैं. उन्होंने इसे धनबल और प्रभाव का परिणाम बताया.
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एक अन्य ग्रामवासी अनूप कुमार त्रिपाठी ने बताया कि चकबंदी से जुड़े कई आदेश फर्जी हैं और विरासत के नाम पर एकपक्षीय निर्णय लिए गए हैं. उन्होंने कहा कि प्रशासन की अनदेखी के कारण किसानों को वर्षों से समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है. जमीन की मालियत का निर्धारण भी गलत तरीके से किया गया है, जिससे कई परिवारों को नुकसान हुआ है. यदि जिला प्रशासन आकार पत्र 23 को निरस्त कर पुनः नए सिरे से बनाती है तो सभी की समस्याओं का निस्तारण हो जाएगा.



