सस्टेनेबल सिटीज चैलेंज के विजेता समाधानों की घोषणा, वाराणसी में अब लागू होंगे वैश्विक नवाचार

वाराणसी: वाराणसी को अधिक सुरक्षित, सुगम और टिकाऊ (सस्टेनेबल) शहर बनाने की दिशा में रविवार को एक महत्वपूर्ण कदम उठाया गया। शहर के एक होटल में आयोजित "Varanasi Sustainable Cities Journey – From Challenge to Implementation" कार्यक्रम में सस्टेनेबल सिटीज चैलेंज वाराणसी के विजेता समाधानों की घोषणा की गई। कार्यक्रम में नगर निगम, वाराणसी स्मार्ट सिटी, टोयोटा मोबिलिटी फाउंडेशन (TMF), डब्ल्यूआरआई इंडिया (WRI India) तथा विभिन्न संस्थाओं के प्रतिनिधि और विशेषज्ञ मौजूद रहे।
कार्यक्रम में बताया गया कि वर्ष 2023 में शुरू हुई इस वैश्विक पहल का उद्देश्य वाराणसी जैसे व्यस्त और धार्मिक महत्व वाले शहर में भीड़ प्रबंधन, पैदल यात्रियों की सुरक्षित आवाजाही और शहरी गतिशीलता (अर्बन मोबिलिटी) को बेहतर बनाने के लिए नवीन और व्यावहारिक समाधान विकसित करना था। इसके लिए दुनिया भर के नवप्रवर्तकों (Innovators) से प्रस्ताव आमंत्रित किए गए, जिनमें से चयनित समाधानों का शहर के विभिन्न क्षेत्रों में पायलट परीक्षण किया गया।
करीब दो वर्षों तक चले अध्ययन, परीक्षण और मूल्यांकन के बाद अब उन विजेता समाधानों का चयन किया गया है जिन्हें वाराणसी में चरणबद्ध तरीके से लागू किया जाएगा। इन नवाचारों के माध्यम से शहर के प्रमुख धार्मिक स्थलों, पर्यटन क्षेत्रों और भीड़भाड़ वाले इलाकों में पैदल यात्रियों की सुविधा बढ़ाने, भीड़ को वैज्ञानिक तरीके से नियंत्रित करने और आवागमन को अधिक सुरक्षित एवं व्यवस्थित बनाने पर विशेष जोर दिया जाएगा।
कार्यक्रम के दौरान वक्ताओं ने कहा कि वाराणसी की भौगोलिक और सांस्कृतिक विशेषताओं को ध्यान में रखते हुए तैयार किए गए ये समाधान भविष्य की शहरी चुनौतियों से निपटने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे। साथ ही इससे स्थानीय नागरिकों, श्रद्धालुओं और देश-विदेश से आने वाले पर्यटकों को बेहतर सार्वजनिक सुविधाएं उपलब्ध होंगी।
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आयोजकों के अनुसार, सस्टेनेबल सिटीज चैलेंज केवल एक प्रतियोगिता नहीं, बल्कि वाराणसी को भविष्य के लिए तैयार करने की एक दीर्घकालिक पहल है। चयनित समाधानों के सफल क्रियान्वयन के बाद वाराणसी का मॉडल देश और दुनिया के अन्य शहरों के लिए भी प्रेरणा बन सकता है। नगर निगम और वाराणसी स्मार्ट सिटी ने विश्वास जताया कि इस पहल से शहर में स्मार्ट, सुरक्षित और पर्यावरण अनुकूल शहरी परिवहन व्यवस्था को नई दिशा मिलेगी।



