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हिमाद्रि संकल्प के साथ द्विजों ने किया श्रावणी उपाकर्म, पूर्णिमा में पतितपावनी के तट पर भूदेवों ने किया 'श्रावणी'....

हिमाद्रि संकल्प के साथ द्विजों ने किया श्रावणी उपाकर्म, पूर्णिमा में पतितपावनी के तट पर भूदेवों ने किया 'श्रावणी'....
Aug 28, 2026, 07:29 AM
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Posted By gagan arora

वाराणसी : सनातन धर्म में दशहरा क्षत्रियों का प्रमुख पर्व है. दीपावली वैश्यों व होली अन्य जनों के लिए विशिष्ट महत्व का पर्व है. रक्षाबंधन अर्थात् श्रावण शुक्ल पूर्णिमा को मनाया जाने वाला "श्रावणी उपाकर्म" ब्राह्मणों व द्विजों का सबसे बड़ा पर्व है.

वैदिक काल से द्विज समाज के लोग पवित्र नदियों व तीर्थ के तट पर आत्मशुद्धि का यह उत्सव मनाते आ रहे हैं. इस कर्म में आंतरिक व बाह्य शुद्धि गोबर, मिट्टी, भस्म, अपामार्ग, दूर्वा, कुशा एवं मंत्रों द्वारा की जाती है.

पंचगव्य महाऔषधि है. श्रावणी में दूध, दही, घृत, गोबर, गोमूत्र प्राशन कर शरीर के अंतःकरण को शुद्ध किया जाता है. प्रतिवर्षानुसार इस बार भी प्राचीन वैदिक परम्परा को जीवंत रखते हुए ब्राह्मणों ने श्रावणी उपाकर्म किया. शुक्रवार को प्रात: अहिल्याबाई घाट समेत अन्‍य घाटों पर विप्र समाज उत्तर प्रदेश एवं अति प्राचीन संस्था शास्त्रार्थ महाविद्यालय,दशाश्वमेध के संयुक्त तत्वावधान में शुक्लयजुर्वेदीय माध्यांदिनी शाखा के ब्राह्मणों द्वारा श्रावणी मनायी गयी. वहीं शिवाला घाट पर आचार्य पंडित दयाराम पाठक द्वारा श्रावणी उपाकर्म कराया गया. श्री रामदासकाठिया बाबा वेद विद्यालय,शिवाला के द्वारा श्रावणी मनायी गयी.ZYS


वैदिक पं.विकास दीक्षित के आचार्यत्व में सर्वप्रथम हेमाद्रि संकल्प लिया गया जो सनातन हिंदू परंपरा में एक अत्यंत महत्वपूर्ण और व्यापक वैदिक प्रायश्चित विधान है. यह मुख्य रूप से श्रावणी उपाकर्म (रक्षाबंधन/श्रावण पूर्णिमा) और ऋषि पंचमी के पावन अवसर पर ब्राह्मणों और सनातनी धर्मावलंबियों द्वारा सामूहिक या व्यक्तिगत रूप से लिया जाता है. इस संकल्प के मुख्य रूप में धार्मिक एवं ज्योतिषीय महत्व का पाठ करते हुए वैदिक रीति से सृष्टि की उत्पत्ति से लेकर वर्तमान समय तक के कालखंड का पूरा भूगोल और पंचांग बोला गया. इसमें अनंत कोटि ब्रह्मांड, सात लोक (भूर्लोक, भुवर्लोक आदि) और जम्बूद्वीप का वर्णन होता है.


भारतवर्ष की पवित्र नदियों (गंगा, यमुना, गोदावरी आदि) और पर्वतों का स्मरण किया गया. वर्तमान समय के मन्वन्तर (वैवस्वत मन्वन्तर), युग (कलियुग का प्रथम चरण), वर्तमान संवत्सर, अयन, ऋतु, मास, तिथि, नक्षत्र और ग्रहों की स्थिति का पूरा विवरण पढ़ा गया. द्विज ब्राह्मणों ने इस संकल्प को लेकर व्यक्ति वर्षभर में जाने-अनजाने में हुए अपने सभी कायिक, वाचिक और मानसिक पापों के निवारण की प्रार्थना की. इसके पश्चात दशविध स्नान जिसमें शरीर और आत्मा की शुद्धि के लिए 10 पवित्र पदार्थों का उपयोग हुआ.


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भस्म, मृत्तिका (मिट्टी), गोमय (गाय का गोबर), पंचगव्य, गोरज, धान्य, फल, सर्वौषधि, कुशोदक (कुश का जल) और सुवर्ण (सोना)। पश्चात इसके पंचगव्य का पान किया गया जिसमें गाय के गोमय (गोबर), गोघृत, गोदुग्ध, गोदधि तथा गोमूत्र मिश्रित पंचगव्य से स्नान तथा उसका पान किया गया तदुपरांत भस्मलेपन किया गया.


श्रावणी में अपामार्ग के पत्तों एवं कुशा एवं दूर्वा का भी नियमानुसार प्रयोग हुआ. संयोजक शास्त्रार्थ महाविद्यालय के पूर्व प्राचार्य तथा संस्कृत महाविद्यालय प्राध्यापक समिति उत्तर प्रदेश के अध्यक्ष डॉ.गणेश दत्त शास्त्री ने बताया कि श्रावणी उपाकर्म का आयोजन प्राचीन काल से ही नदियों,तालाबों के किनारे विधिपूर्वक ऋषियों-मुनियों द्वारा किया जाता रहा है.

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इस अवसर पर प्रमुख रूप से राष्ट्रपति पुरस्कृत डा. गणेश दत्त शास्त्री, ज्योतिषाचार्य डा. आमोद दत्त शास्त्री, डा. पवन शुक्ला, डा.अशोक पाण्डेय, पं. विशाल औढेंकर, पं. गुल्लू महाराज, पं.दिनेश शंकर दुबे, अविनाश पाण्डेय, राजेश त्रिपाठी, मुकुंद मुरारी पाण्डेय, चन्द्रमणि प्रसाद शुक्ल, संतोष झा सहित सैकड़ों विद्वान् व बटुक शामिल रहे.

33 पेड़ों की कटाई और 2.65 करोड़ के NGT जुर्माने को लेकर छात्रों ने EC को सौंपा ज्ञापन
33 पेड़ों की कटाई और 2.65 करोड़ के NGT जुर्माने को लेकर छात्रों ने EC को सौंपा ज्ञापन
वाराणसी : काशी हिंदू विश्वविद्यालय (BHU) में ‘GenZ For BHU’ छात्र आंदोलन के तहत सोमवार को छात्र प्रतिनिधिमंडल ने विश्वविद्यालय की कार्यकारी परिषद (Executive Council) को ज्ञापन सौंपा। छात्रों ने 33 पेड़ों की कटाई, राष्ट्रीय हरित अधिकरण (NGT) की ओर से लगाए गए 2.65 करोड़ रुपये के जुर्माने और छात्रों के साथ कथित मारपीट को लेकर कार्रवाई की मांग की।छात्र प्रतिनिधिमंडल में सत्यम सिंह, रवि सिंह, अमन मौर्य, विवर्त सिंह समेत अन्य छात्र शामिल रहे। छात्रों ने ज्ञापन के माध्यम से पेड़ों की कटाई के मामले में जिम्मेदार अधिकारियों की भूमिका की जांच कराने और दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की।छात्रों की प्रमुख मांगों में U.P. Trees Protection Act और BNS की संबंधित धाराओं के तहत निष्पक्ष जांच कर जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ नामजद एफआईआर दर्ज कराना शामिल है। छात्रों ने यह भी मांग की कि NGT द्वारा लगाए गए 2.65 करोड़ रुपये के जुर्माने की राशि छात्र फंड से नहीं वसूली जाए। उनका कहना है कि इसके लिए जिम्मेदार अधिकारियों से व्यक्तिगत स्तर पर वसूली की जानी चाहिए।इसके अलावा छात्रों ने कुलपति से मिलने गए छात्र-छात्राओं के साथ कथित मारपीट के मामले में सुरक्षाकर्मियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की। छात्र प्रतिनिधियों ने अपने खिलाफ गठित कमेटियों और जारी नोटिस को भी वापस लेने की मांग की है।ALSO READ : बीएचयू के छात्र दुर्गेश यादव का ‘सा रे गा मा पा 2026’ में हुआ चयनपरिसर में पेड़ों की जियो-टैगिंग की मांगछात्रों ने बीएचयू परिसर के सभी पेड़ों का ट्री सेंसस कराने, उनकी जियो-टैगिंग करने और पेड़ों की निगरानी के लिए ‘ट्री मॉनिटरिंग समिति’ गठित करने की मांग भी रखी।छात्रों का कहना है कि परिसर में पर्यावरण से जुड़े मामलों में पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित की जानी चाहिए। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि उनकी मांगों पर कार्रवाई नहीं हुई तो वे आगे शांतिपूर्ण आंदोलन करेंगे।
बीएचयू के छात्र दुर्गेश यादव का ‘सा रे गा मा पा 2026’ में हुआ चयन
बीएचयू के छात्र दुर्गेश यादव का ‘सा रे गा मा पा 2026’ में हुआ चयन
वाराणसी: काशी हिंदू विश्वविद्यालय (बीएचयू) के संगीत एवं मंच कला संकाय के गायन विभाग के छात्र दुर्गेश यादव का ज़ी टीवी के लोकप्रिय गायन रियलिटी शो ‘सा रे गा मा पा 2026’ के लिए चयन हुआ है। शो का प्रसारण 19 सितंबर 2026 से ज़ी टीवी पर शुरू हो चुका है।उत्तर प्रदेश के मऊ जिले के महलीपुर गांव निवासी दुर्गेश यादव, श्री इंद्रजीत यादव और श्रीमती कौशिल्या देवी के पुत्र हैं। उन्होंने बीएचयू से वर्ष 2020-23 में बीपीए (गायन-उत्तर भारतीय शास्त्रीय संगीत) और 2023-25 में एमपीए (गायन-उत्तर भारतीय शास्त्रीय संगीत) की शिक्षा प्राप्त की है। वर्तमान में वह संगीत एवं मंच कला संकाय में डॉ. सर्वपल्ली राधाकृष्णन इंटर्नशिप कर रहे हैं।दुर्गेश यादव ने पं. गिरजा शंकर त्रिपाठी के मार्गदर्शन में उत्तर भारतीय शास्त्रीय संगीत का प्रशिक्षण प्राप्त किया है। शास्त्रीय संगीत की इसी पृष्ठभूमि के साथ उन्होंने गायन के क्षेत्र में अपनी पहचान बनाने की दिशा में कदम बढ़ाया है।उनके ‘सा रे गा मा पा 2026’ में चयन पर संगीत एवं मंच कला संकाय की संकाय प्रमुख एवं गायन विभाग की विभागाध्यक्ष प्रो. संगीता पंडित, डॉ. सर्वपल्ली राधाकृष्णन इंटर्नशिप के समन्वयक प्रो. राम शंकर, प्रो. ज्ञानेश चंद्र पांडेय सहित अन्य संकाय सदस्यों ने उन्हें बधाई एवं शुभकामनाएं दीं।ALSO READ : बेनियाबाग से हड़हा सराय तक चला अतिक्रमण विरोधी अभियान, दुकानदारों से नोकझोंकबीएचयू से शास्त्रीय संगीत की शिक्षा प्राप्त कर राष्ट्रीय स्तर के लोकप्रिय गायन रियलिटी शो में चयन होने से विश्वविद्यालय के संगीत एवं मंच कला संकाय में भी उत्साह का माहौल है।
बेनियाबाग से हड़हा सराय तक चला अतिक्रमण विरोधी अभियान, दुकानदारों से नोकझोंक
बेनियाबाग से हड़हा सराय तक चला अतिक्रमण विरोधी अभियान, दुकानदारों से नोकझोंक
वाराणसी : बेनियाबाग चौराहे से हड़हा सराय मार्केट तक सोमवार को नगर निगम की प्रवर्तन टीम ने अतिक्रमण के खिलाफ अभियान चलाया. टीम ने सड़क पर दुकान लगाकर और अन्य तरीकों से किए गए अतिक्रमण को हटाते हुए मार्ग को कब्जामुक्त कराया. कार्रवाई के दौरान कुछ दुकानदारों की प्रवर्तन टीम से नोकझोंक भी हुई, लेकिन मौके पर मौजूद पुलिस बल के चलते स्थिति नियंत्रित रही.अभियान के दौरान सड़क पर दुकान लगाकर रखा गया सामान नगर निगम की टीम ने वाहनों में लादकर हटाया. सड़क किनारे गिट्टी, बालू और ईंट रखकर बिक्री किए जाने से यातायात प्रभावित हो रहा था. इसके अलावा सड़क पर अवैध रूप से ट्रांसपोर्ट गतिविधियां संचालित किए जाने की शिकायत भी सामने आई थी. नगर निगम की कार्रवाई की जानकारी मिलने पर मौके पर पहुंचे पार्षद इंद्रेश सिंह ने बताया कि बेनियाबाग क्षेत्र में सड़क जाम और अतिक्रमण की शिकायतों के बाद यह अभियान चलाया गया.ALSO READ : सीएम डैशबोर्ड की समीक्षा बैठक, बोले डीएम- किसी भी स्तर पर लापरवाही न बरती जाएउन्होंने कहा कि सड़क पर कब्जे के कारण लोगों को आवागमन में परेशानी हो रही थी. अतिक्रमण हटने से यातायात सुगम होगा और स्थानीय लोगों को अपने घरों तकपहुंचने में भी सुविधा मिलेगी. पार्षद ने कहा कि हड़हा सराय मार्केट तक आवागमन सुचारु रहने से व्यापारिक गतिविधियों को भी सुविधा मिलेगी और ग्राहकों को बाजार तक पहुंचने में परेशानी नहीं होगी. नगर निगम की प्रवर्तन टीम ने सड़क पर दोबारा अतिक्रमण न करने की हिदायत भी दी.