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लंबे समय तक मेथी को कर सकते हैं स्टोर, ऐसे रहेगा ताजा

लंबे समय तक मेथी को कर सकते हैं स्टोर, ऐसे रहेगा ताजा
Feb 03, 2026, 01:25 PM
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Posted By Preeti Kumari

सर्दियों का मौसम खान-पान के लिए होता है, इसलिए ये मौसम हरी सब्जियों का सीजन कहलाता है. इस समय बाजार में हरी पत्तेदार सब्जियां खूब मिलती हैं. मेथी, पालक और सरसों का साग लोग चाव से खाते हैं. लेकिन क्या आप जानते है कि मेथी के पत्तों को स्टोर करके भी रखा जा सकता हैं. स्टोर किए हुए पत्तों को सुखाकर बनाई कसूरी मेथी को एक साल तक स्टोर किया जा सकता हैं. तो चलिए आज हम आपको इसके बारे में बताते है.


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स्टोर किए हुए मेथी को सही तरीके से सुखाकर काफी समय तक रखा जा सकता है, सर्दियां जाने में अब दिन नहीं बचें और इस समय मेथी बहुत महंगी भी नहीं मिलती है तो आप खरीद कर स्टोर कर ले तो ज्यादा बेहतर होगा. क्योंकि, स्टोर किया हुआ मेथी ताजा और खुशबूदार भी रहता है उसके खराब होने के चांसेज बिलकुल भी नहीं रहते है. जिसका इस्तेमाल आप सीजन खत्म होने के बाद कभी भी कर सकते हैं. जिसका स्वाद जरा भी बदल नहीं सकता है. वो खाने में ताजे माथे की तरह ही स्वादिष्ट लगेगा.


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पहले समझो कसूरी मेथी और नॉर्मल मेथी में अंतर


आपको बता दें, कुछ लोगों को यह लगता है कि बाजार में मिलने वाली नॉर्मल मेथी को सुखाकर ही कसूरी मेथी बनाई जाती है, पर ऐसा बिलकुल भी नहीं है. बल्कि सच तो यह है कि इन दोनों मेथी में बड़ा ही अंतर होता है. मेथी और कसूरी मेथी का मुख्य अंतर उनकी वानस्पतिक किस्म और ग्रोथ रेट से पता चलता है.


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कसूरी मेथी


बता दें कसूरी मेथी एक स्लो ग्रोइंग वैरायटी है, इसका पौधा धीरे-धीरे बढ़ता है और पत्तियां साधारण मेथी की तुलना में छोटी और अधिक खुशबूदार होती हैं. कसूरी मेथी के बीज साधारण मेथी की तुलना में छोटे और पतले होते हैं, जबकि सामान्य मेथी के बीज, जिन्हें मेथी दाना कहते हैं वो मोटे और बड़े होते हैं. ऐसे में आप कौन सी मेथी सुखाकर स्टोर कर रहे हैं यह समझ सकते हैं.


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स्टोर करने से पहले करें वॉश


मेथी स्टोर करने के लिए अगर आपके बगीचे में लगी है तो तोड़ लें या बाजार से खरीदकर ले आएं. ताजा मेथी लाने के बाद आराम से बैठकर इसे साफ कर लीजिए, उसके बाद मेथी को नल के नीचे बहते हुए पानी में वॉश कर लें, ताकि मिट्टी निकल जाए. फिर किचन टॉवल पर रख के हल्के हाथों से पोंछ लें.


स्टोर से पहले मेथी को करें ये


स्टोर करने के लिए आपको मेथी को पूरी तरह से सुखाना होगा, इसके लिए अगर आपके पास एयर फ्रायर है तो उसका इ्स्तेमाल करें. एयर फ्रायर में 15 मिनट का टाइमर लगाएं और 110° पर सेट करें. एक बार 7 मिनट होने पर एयर फ्रायर को ओपन करें और सारे पत्तों को शेक कर दीजिए, फिर 7 मिनट बाद निकाल लें, इस तरह से आपकी कसूरी मेथी बनकर तैयार हो जाएगा. मेथी को सुखाने के लिए एयर फ्रायर की सुविधा भी काफी अच्छी होती है पर अगर आपके पास नहीं है तो इसका ऑप्शन भी बहुत आसान है.


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इसमें मेथी को धोकर हल्का सुखाने तक प्रोसेस सेम रहेगी, बस आपको एयर फ्रायर की जगह छांव में मेथी को पूरी तरह से सुखाना है, इसके लिए 4 से 5 दिन काफी रहेंगे। जब मेथी एकदम सूखकर कड़क हो जाए, तो समझ जाएं कि स्टोर करने के लिए तैयार है.

सावन में कांवड़ मार्गों पर बंद रहेंगी मांस-मछली की दुकानें, उल्लंघन करने पर होगी कानूनी कार्रवाई.
सावन में कांवड़ मार्गों पर बंद रहेंगी मांस-मछली की दुकानें, उल्लंघन करने पर होगी कानूनी कार्रवाई.
वाराणसी : सावन माह में कांवड़ यात्रा के दौरान श्रद्धालुओं और कांवड़ियों की धार्मिक भावनाओं का सम्मान सुनिश्चित करने के लिए नगर निगम ने बड़ा निर्णय लिया है। निगम प्रशासन ने शहरी सीमा के अंतर्गत आने वाले सभी कांवड़ मार्गों पर अवैध रूप से संचालित मांस, मछली और मुर्गा विक्रेताओं की दुकानों को तत्काल प्रभाव से बंद रखने के निर्देश जारी किए हैं।नगर निगम के पशु चिकित्सा कल्याण अधिकारी डॉ. विजय अमृतराज ने बताया कि कांवड़ यात्रा के दौरान मार्गों पर मांस-मछली की दुकानों का संचालन श्रद्धालुओं की आस्था को प्रभावित कर सकता है। इसे देखते हुए सभी जोनों में विशेष अभियान चलाने का निर्णय लिया गया है। नगर निगम की टीमों को अपने-अपने क्षेत्रों में नियमित निरीक्षण कर अवैध रूप से संचालित दुकानों को बंद कराने की जिम्मेदारी सौंपी गई है।निगम प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि आदेश का सख्ती से पालन कराया जाएगा। यदि कोई दुकानदार निर्देशों की अनदेखी करते हुए मांस, मीट या मछली की बिक्री करता पाया गया, तो उसके खिलाफ नियमानुसार कड़ी दंडात्मक और कानूनी कार्रवाई की जाएगी।ALSO READ: बीएचयू के डॉ. राघवेंद्र रमन मिश्र विश्व के शीर्ष 5% वैज्ञानिकों में शामिल.उत्कृष्ट शोध और वैज्ञानिक योगदान के लिए मिला सम्माननगर निगम ने सभी संबंधित विक्रेताओं से अपील की है कि वे सावन माह के दौरान जारी निर्देशों का पालन करें और कांवड़ यात्रा की पवित्रता बनाए रखने में प्रशासन का सहयोग करें।
बीएचयू के डॉ. राघवेंद्र रमन मिश्र विश्व के शीर्ष 5% वैज्ञानिकों में शामिल.उत्कृष्ट शोध और वैज्ञानिक योगदान के लिए मिला सम्मान
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वाराणसी : काशी हिन्दू विश्वविद्यालय (बीएचयू) के राजीव गांधी दक्षिण परिसर, बरकच्छा (मिर्जापुर) स्थित चिकित्सा प्रयोगशाला प्रौद्योगिकी विभाग के सहायक प्रोफेसर डॉ. राघवेंद्र रमन मिश्र ने विश्वविद्यालय का गौरव बढ़ाया है। उन्हें वर्ष 2025 की एससीआई ग्लोबल रजिस्ट्री में विश्व के शीर्ष 5 प्रतिशत वैज्ञानिकों की सूची में स्थान मिला है।डॉ. मिश्र को यह प्रतिष्ठित उपलब्धि उनके उत्कृष्ट वैज्ञानिक अनुसंधान, नवाचारपूर्ण कार्यों और उच्च स्तरीय शैक्षणिक योगदान के आधार पर प्राप्त हुई है। एससीआई ग्लोबल रजिस्ट्री की यह वैश्विक रैंकिंग शोध की गुणवत्ता, प्रकाशित शोधपत्रों के प्रभाव, उद्धरण (साइटेशन) और अन्य शैक्षणिक मानकों के व्यापक मूल्यांकन पर आधारित होती है। इसमें एससीआई जर्नल और कंट्री रैंक (SCR) जैसे महत्वपूर्ण सूचकांकों का उपयोग किया जाता है, जो स्कोपस डाटा के आधार पर तैयार किए जाते हैं।ALSO READ: नगर निगम ने 100 करोड़ की सरकारी संपत्ति मुक्त कराई, 38 साल पुराने विवाद का अंतविश्वविद्यालय ने डॉ. मिश्र की इस उपलब्धि को संस्थान के लिए गर्व का क्षण बताया है। यह सम्मान न केवल बीएचयू की शोध परंपरा को नई पहचान देता है, बल्कि देश के युवा शोधकर्ताओं और विद्यार्थियों के लिए भी प्रेरणा का स्रोत है। डॉ. मिश्र की सफलता वैज्ञानिक अनुसंधान के क्षेत्र में समर्पण, गुणवत्ता और उत्कृष्टता का उदाहरण मानी जा रही है।
नगर निगम ने 100 करोड़ की सरकारी संपत्ति मुक्त कराई, 38 साल पुराने विवाद का अंत
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वाराणसी : सरकारी संपत्तियों पर अवैध कब्जे के खिलाफ नगर निगम का अभियान जारी है. इस क्रम में सोमवार को बीएलडब्ल्यू रोड ( ककरमत्ता ) में करीब एक बीघा बेशकीमती सरकारी जमीन को निगम ने पूरी अतिक्रमण मुक्त करा लिया है. बाजार दर इस भूमि की कुल कीमत करीब 100 करोड़ रुपये आंकी जा रही है. दरअसल ​यह प्रकरण मौजा ककरमत्ता (परगना देहात अमानत) स्थित अराजी नंबर 411 का है, जिसके संबंध में रामनरायन पुत्र स्व. गज्जन द्वारा वर्ष 1988 में धारा 229(ख) के तहत उत्तर प्रदेश सरकार व अन्य को विपक्षी बनाते हुए भूमिधरी अधिकार का दावा योजित किया गया था.वादी पक्ष का कहना था कि उनके दादा पुनवासी वर्ष 1356 व 1359 फसली से उक्त भूमि पर काबिज चले आ रहे हैं, इसलिए उन्हें स्थायी भूमिधर दर्ज किया जाए. लंबे समय से चल रहे इस कानूनी विवाद में कई बार अपील और निगरानी याचिकाएं भी दाखिल की गईं. महापौर अशोक कुमार तिवारी के निर्देश पर निगम की ओर से इस प्रकरण की प्रभावी पैरवी की गई. मामले की विस्तृत सुनवाई करते हुए न्यायालय अतिरिक्त उपजिलाधिकारी सदर (प्रज्ञा सिंह) की पीठ ने वाद संख्या 1987/2025 में पत्रावली व राजस्व अभिलेखों का गहन अवलोकन किया.अदालत ने पाया कि फसली वर्ष 1356 व 1359 खसरे के कॉलम आठ में सिंघाडा तथा कॉलम 19 में 'पोखरी दर्ज है. उप्र जमींदारी विनाश एवं भूमि व्यवस्था अधिनियम, 1950 की धारा 132 के अनुसार पोखरी व तालाब सार्वजनिक उपयोग की भूमि की श्रेणी में आते हैं. ​अदालत ने धारा 132 में वर्णित सार्वजनिक उपयोग की पोखरी भूमि पर किसी असामी को पांच वर्ष से अधिक अवधि के लिए पट्टे का अधिकार नहीं दिया जा सकता और न ही उसे संक्रमणीय भूमिधर घोषित किया जा सकता है. अदालत ने वादी के दावे को बलहीन मानते हुए खारिज कर दिया तथा अराजी संख्या 411 से समस्त खातों के नाम निरस्त कर राजस्व अभिलेखों में पुनः 'पोखरी' दर्ज करने का आदेश सुनाया.ALSO READ: वाराणसी में हवाई फायरिंग करने वाले को पब्लिक ने पुलिस को सौंपा, पिस्‍टल और कारतूस बरामद...तीन जेसीबी लगाकर खुदाई शुरून्यायिक आदेश का पालन कराते हुए महापौर के निर्देश पर निगम सहायक नगर आयुक्त अनिल यादव के नेतृत्व में राजस्व विभाग की टीम ने तत्काल कार्रवाई शुरू कर दी. जिस तालाब को भू-माफिया द्वारा कूड़े से पाट दिया गया था, वहां निगम ने मौके पर ही तीन जेसीबी लगाकर तालाब खोदवाना शुरू करा दिया है, ताकि पोखरे को पुनः उसके वास्तविक अस्तित्व में लाया जा सके.कब्जामुक्त कराई गई इस जमीन पर स्थित पोखरे को उसके मूल स्वरूप में सौंदर्यीकरण कर आकर्षक ढंग से विकसित किया जाएगा. पोखरे के पुनरुद्धार से क्षेत्र का भू-गर्भ जलस्रोत का स्तर (ग्राउंड वॉटर लेवल) बेहतर होगा और पर्यावरण संरक्षण को बढ़ावा मिलेगा.