कर्णघंटा पोखरे की बदहाली, व्यवस्थाओं के अभाव की कब सुध लेगा नगर निगम

When will the Municipal Corporation take care of the poor condition of Karnaghanta pond and its lack of facilities?
वाराणसी: गर्मी बढ़ते ही शहर के तालाबों और कुंडों की हालत चिंताजनक होने लगी है. जल स्तर घटने और गंदगी बढ़ने से जलचरों को ऑक्सीजन की कमी का सामना करना पड़ता है, जिससे उनकी मौत तक होने लगती है. नगर निगम के जनसंपर्क अधिकारी संदीप श्रीवास्तव के अनुसार नगर निगम सीमा में 136 तालाब-कुंड और बाहरी क्षेत्र में 210 तालाब-कुंड आते हैं. निगम की ओर से इनके संरक्षण और देखरेख के लिए व्यवस्थाएं किए जाने का दावा किया जा रहा है.

इसी सिलसिले में आज गुरुवार को गांडीव डिजिटल की टीम जमीनी हकीकत जानने के लिए काशी के अति प्राचीन कर्णघंटा कुंड पहुंची, जो बुलानाला क्षेत्र के कर्णघंटा मोहल्ले में स्थित है. यहां की जमीनी हकीकत दावों से अलग नजर आई. कुंड परिसर में सफाई, लाइट व्यवस्था , पानी और मूलभूत सुविधाओं का अभाव साफ दिखाई दिया.
कुंड का पौराणिक महत्व
कुंड के पुरोहित विश्वनाथ दुबे ने बताया कि कर्णघंटा कुंड का पौराणिक महत्व काफी अधिक है. दक्षिण भारत से हजारों श्रद्धालु यहां दर्शन-पूजन के लिए आते हैं. इसके बावजूद पोखरे की हालत बेहद खराब है. मंदिर परिसर के बाहर नियमित सफाई नहीं होती. नगर निगम की ओर से लगाई गई लाइट बंदरों द्वारा तोड़ दिए जाने के बाद आज तक ठीक नहीं कराई गई. शिकायतों के बावजूद कोई कार्रवाई नहीं हुई.

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उन्होंने बताया कि वर्ष 2019 में कुंड की मरम्मत कराई गई थी, लेकिन उसके बाद से आज तक कोई देखरेख नहीं हुई. मरम्मत के दौरान निकला मलबा भी कुंड में ही डाल दिया गया था. कुंड के आसपास लगे पत्थर अव्यवस्थित पड़े हैं और दीवारों पर बनी धार्मिक पेंटिंग के रंग भी समय के साथ फीके पड़ चुके हैं. पुरोहित ने यह भी कहा कि पोखरे में मछलियों की सुरक्षा के लिए कोई व्यवस्था नहीं है. गंदगी और साफ-सफाई की कमी के कारण मछलियां मर जाती हैं. आसपास के लोग अपने स्तर पर मदद करते हैं, लेकिन यह पर्याप्त नहीं है.
गुरु पूर्णिमा पर उमड़ती है भीड़
गुरु पूर्णिमा के अवसर पर यहां बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचते हैं, लेकिन तालाब की बदहाल स्थिति के कारण लोग व्यवस्थित तरीके से धार्मिक अनुष्ठान नहीं कर पाते. बैठने की भी कोई व्यवस्था नहीं है, जिससे श्रद्धालुओं को परेशानी उठानी पड़ती है.

स्थानीय लोगों का कहना है कि कई बार शिकायत करने के बावजूद स्थायी समाधान नहीं किया जा रहा है. इससे समस्या लगातार बनी हुई है और लोगों में नाराजगी बढ़ती जा रही है.
इसी क्रम में गांडीव डिजिटल की टीम काशी के किसी दूसरे कुंडों के महत्व और उनकी जमीनी हकीकत जानेगी.



