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लोकायुक्त जांच के दौरान ट्रॉमा सेंटर प्रभारी को पद से हटाने की मांग, कुलपति को सौंपा ज्ञापन...

लोकायुक्त जांच के दौरान ट्रॉमा सेंटर प्रभारी को पद से हटाने की मांग, कुलपति को सौंपा ज्ञापन...
May 26, 2026, 12:25 PM
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Posted By Diksha Mishra

वाराणसी : बीएचयू के छात्र नेता डॉ. मृत्युंजय तिवारी के नेतृत्व में छात्रों के एक प्रतिनिधिमंडल ने ट्रॉमा सेंटर प्रभारी डॉ. सौरभ सिंह के विरुद्ध प्रचलित लोकायुक्त जांच के दौरान निष्पक्ष एवं स्वतंत्र जांच सुनिश्चित किए जाने की मांग को लेकर विश्वविद्यालय के कुलपति को ज्ञापन सौंपा. ज्ञापन में कहा गया है कि डॉ. सौरभ सिंह के विरुद्ध भ्रष्टाचार, वित्तीय अनियमितता, पद के दुरुपयोग तथा आयुष्मान भारत योजना से संबंधित गंभीर आरोपों के संबंध में लोकायुक्त संगठन, उत्तर प्रदेश द्वारा जांच प्रक्रिया प्रचलित है. उप लोकायुक्त कार्यालय द्वारा जारी समन के माध्यम से संबंधित अधिकारी से अभिलेख, तथ्यात्मक आख्या एवं शपथपत्र सहित स्पष्टीकरण भी तलब किया गया है.


छात्रों ने अपने ज्ञापन में कहा कि जब किसी अधिकारी के विरुद्ध गंभीर वित्तीय एवं प्रशासनिक आरोपों की जांच चल रही हो, तब जांच की निष्पक्षता एवं पारदर्शिता बनाए रखने के लिए संबंधित अधिकारी को जांच अवधि तक प्रशासनिक दायित्वों से पृथक किया जाना आवश्यक है. वर्तमान में ट्रॉमा सेंटर से जुड़े महत्वपूर्ण वित्तीय अभिलेख, खरीद संबंधी पत्रावलियां, आयुष्मान भारत योजना के दस्तावेज तथा अन्य प्रशासनिक रिकॉर्ड संबंधित अधिकारी के नियंत्रण में हैं, जिससे साक्ष्यों एवं गवाहों के प्रभावित होने की आशंका बनी रहती है.


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छात्र नेता डॉ. मृत्युंजय तिवारी ने कहा कि काशी हिंदू विश्वविद्यालय जैसे प्रतिष्ठित केंद्रीय विश्वविद्यालय में पारदर्शिता एवं जवाबदेही सर्वोच्च प्राथमिकता होनी चाहिए. यदि किसी अधिकारी के विरुद्ध गंभीर आरोपों की जांच प्रचलित है तो विश्वविद्यालय प्रशासन का दायित्व है कि जांच को प्रभावित होने से बचाने के लिए आवश्यक प्रशासनिक कदम उठाए जाएं. उन्होंने कहा कि यह मांग किसी व्यक्ति विशेष के विरोध में नहीं बल्कि निष्पक्ष जांच और संस्थागत गरिमा की रक्षा के लिए उठाई गई है.

इस अवसर पर छात्र प्रतिनिधि सुजीत पासवान ने कहा कि जब तक जांच पूरी नहीं हो जाती, तब तक संबंधित अधिकारी को प्रशासनिक दायित्वों पर बनाए रखना जनसामान्य एवं विश्वविद्यालय समुदाय के बीच अनेक प्रश्न खड़े करता है. उन्होंने कहा कि छात्र केवल इतना चाहते हैं कि जांच पूरी तरह निष्पक्ष, स्वतंत्र और पारदर्शी वातावरण में संपन्न हो तथा किसी भी प्रकार से साक्ष्यों या संभावित गवाहों पर प्रभाव डालने की आशंका समाप्त की जाए.


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छात्र नेता हर्ष त्रिपाठी ने ट्रॉमा सेंटर, आयुष्मान भारत योजना एवं संबंधित वित्तीय लेन-देन से जुड़े सभी भौतिक एवं डिजिटल अभिलेखों के संरक्षण, संभावित गवाहों को किसी प्रकार के दबाव से मुक्त रखने तथा जांच को पूर्णतः स्वतंत्र वातावरण में संपादित कराने की भी मांग की है. इस अवसर पर मुख्य रूप से हर्ष त्रिपाठी, सुजीत पासवान, अंकित पूर्वे, रजत सिंह, अभय सिंह "मिक्कू", कृष्णकांत पाठक, कुमार अभिषेक, हिमांशु राय तथा वर्चस्व सिंह आदि छात्र उपस्थित रहे.

बीएचयू में 'एक वृक्ष माँ के नाम' अभियान के तहत 111 पौधों का रोपण.
बीएचयू में 'एक वृक्ष माँ के नाम' अभियान के तहत 111 पौधों का रोपण.
वाराणसी : काशी हिन्दू विश्वविद्यालय (बीएचयू) में पर्यावरण संरक्षण और हरित परिसर के विकास को बढ़ावा देने के उद्देश्य से सोमवार को 'एक वृक्ष माँ के नाम' अभियान के अंतर्गत केंद्रीय कार्यालय परिसर में विशेष पौधरोपण कार्यक्रम आयोजित किया गया। अभियान का शुभारंभ कुलपति प्रो. अजित कुमार चतुर्वेदी और कुलसचिव राजन श्रीवास्तव ने केंद्रीय कार्यालय के सामने नीलमोहर का पौधा लगाकर किया।अभियान के तहत विश्वविद्यालय परिसर के विभिन्न स्थानों पर कुल 111 पौधों का रोपण किया गया। इनमें 100 रक्तमंजरी और 11 नीलमोहर के पौधे शामिल हैं। खास बात यह रही कि बीएचयू परिसर में पहली बार नीलमोहर के पौधे लगाए गए हैं। आकर्षक नीले-बैंगनी फूलों वाला नीलमोहर (जैकारैंडा मिमोसिफोलिया) अपनी प्राकृतिक सुंदरता के लिए विश्वभर में प्रसिद्ध है। विश्वविद्यालय प्रशासन का मानना है कि इन पौधों के रोपण से परिसर की जैव विविधता समृद्ध होगी और हरित वातावरण को बढ़ावा मिलेगा।ALSO READ: सावन में कांवड़ मार्गों पर बंद रहेंगी मांस-मछली की दुकानें, उल्लंघन करने पर होगी कानूनी कार्रवाई.कुलपति प्रो. अजित कुमार चतुर्वेदी ने कहा कि यह अभियान पर्यावरण संरक्षण के साथ-साथ प्रकृति के प्रति जिम्मेदारी निभाने का संदेश देता है। वहीं, रक्तमंजरी के पौधे भी परिसर की हरित आभा और सौंदर्य को और आकर्षक बनाएंगे।पौधरोपण कार्यक्रम का आयोजन उद्यान विशेषज्ञ इकाई के आचार्य प्रभारी प्रो. सरफराज आलम के नेतृत्व में किया गया। इस अवसर पर प्रो. अनुराग दवे, प्रो. राकेश कुमार सिंह, डॉ. संजीव सर्राफ, अश्विनी देशवाल, भरत पांडे सहित उद्यान इकाई एवं केंद्रीय कार्यालय के अधिकारी और कर्मचारी उपस्थित रहे।
सावन में कांवड़ मार्गों पर बंद रहेंगी मांस-मछली की दुकानें, उल्लंघन करने पर होगी कानूनी कार्रवाई.
सावन में कांवड़ मार्गों पर बंद रहेंगी मांस-मछली की दुकानें, उल्लंघन करने पर होगी कानूनी कार्रवाई.
वाराणसी : सावन माह में कांवड़ यात्रा के दौरान श्रद्धालुओं और कांवड़ियों की धार्मिक भावनाओं का सम्मान सुनिश्चित करने के लिए नगर निगम ने बड़ा निर्णय लिया है। निगम प्रशासन ने शहरी सीमा के अंतर्गत आने वाले सभी कांवड़ मार्गों पर अवैध रूप से संचालित मांस, मछली और मुर्गा विक्रेताओं की दुकानों को तत्काल प्रभाव से बंद रखने के निर्देश जारी किए हैं।नगर निगम के पशु चिकित्सा कल्याण अधिकारी डॉ. विजय अमृतराज ने बताया कि कांवड़ यात्रा के दौरान मार्गों पर मांस-मछली की दुकानों का संचालन श्रद्धालुओं की आस्था को प्रभावित कर सकता है। इसे देखते हुए सभी जोनों में विशेष अभियान चलाने का निर्णय लिया गया है। नगर निगम की टीमों को अपने-अपने क्षेत्रों में नियमित निरीक्षण कर अवैध रूप से संचालित दुकानों को बंद कराने की जिम्मेदारी सौंपी गई है।निगम प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि आदेश का सख्ती से पालन कराया जाएगा। यदि कोई दुकानदार निर्देशों की अनदेखी करते हुए मांस, मीट या मछली की बिक्री करता पाया गया, तो उसके खिलाफ नियमानुसार कड़ी दंडात्मक और कानूनी कार्रवाई की जाएगी।ALSO READ: बीएचयू के डॉ. राघवेंद्र रमन मिश्र विश्व के शीर्ष 5% वैज्ञानिकों में शामिल.उत्कृष्ट शोध और वैज्ञानिक योगदान के लिए मिला सम्माननगर निगम ने सभी संबंधित विक्रेताओं से अपील की है कि वे सावन माह के दौरान जारी निर्देशों का पालन करें और कांवड़ यात्रा की पवित्रता बनाए रखने में प्रशासन का सहयोग करें।
बीएचयू के डॉ. राघवेंद्र रमन मिश्र विश्व के शीर्ष 5% वैज्ञानिकों में शामिल.उत्कृष्ट शोध और वैज्ञानिक योगदान के लिए मिला सम्मान
बीएचयू के डॉ. राघवेंद्र रमन मिश्र विश्व के शीर्ष 5% वैज्ञानिकों में शामिल.उत्कृष्ट शोध और वैज्ञानिक योगदान के लिए मिला सम्मान
वाराणसी : काशी हिन्दू विश्वविद्यालय (बीएचयू) के राजीव गांधी दक्षिण परिसर, बरकच्छा (मिर्जापुर) स्थित चिकित्सा प्रयोगशाला प्रौद्योगिकी विभाग के सहायक प्रोफेसर डॉ. राघवेंद्र रमन मिश्र ने विश्वविद्यालय का गौरव बढ़ाया है। उन्हें वर्ष 2025 की एससीआई ग्लोबल रजिस्ट्री में विश्व के शीर्ष 5 प्रतिशत वैज्ञानिकों की सूची में स्थान मिला है।डॉ. मिश्र को यह प्रतिष्ठित उपलब्धि उनके उत्कृष्ट वैज्ञानिक अनुसंधान, नवाचारपूर्ण कार्यों और उच्च स्तरीय शैक्षणिक योगदान के आधार पर प्राप्त हुई है। एससीआई ग्लोबल रजिस्ट्री की यह वैश्विक रैंकिंग शोध की गुणवत्ता, प्रकाशित शोधपत्रों के प्रभाव, उद्धरण (साइटेशन) और अन्य शैक्षणिक मानकों के व्यापक मूल्यांकन पर आधारित होती है। इसमें एससीआई जर्नल और कंट्री रैंक (SCR) जैसे महत्वपूर्ण सूचकांकों का उपयोग किया जाता है, जो स्कोपस डाटा के आधार पर तैयार किए जाते हैं।ALSO READ: नगर निगम ने 100 करोड़ की सरकारी संपत्ति मुक्त कराई, 38 साल पुराने विवाद का अंतविश्वविद्यालय ने डॉ. मिश्र की इस उपलब्धि को संस्थान के लिए गर्व का क्षण बताया है। यह सम्मान न केवल बीएचयू की शोध परंपरा को नई पहचान देता है, बल्कि देश के युवा शोधकर्ताओं और विद्यार्थियों के लिए भी प्रेरणा का स्रोत है। डॉ. मिश्र की सफलता वैज्ञानिक अनुसंधान के क्षेत्र में समर्पण, गुणवत्ता और उत्कृष्टता का उदाहरण मानी जा रही है।