बीएचयू के 100 सुरक्षा कर्मियों को मिला आपातकालीन जीवनरक्षक कौशल का प्रशिक्षण

वाराणसी: काशी हिन्दू विश्वविद्यालय के प्रॉक्टोरियल बोर्ड एवं चिकित्सा विज्ञान संस्थान (आईएमएस-बीएचयू) के संयुक्त तत्वावधान में सोमवार को विश्वविद्यालय के सुरक्षा कर्मियों के लिए ‘आपातकालीन जीवनरक्षक कौशल’ प्रशिक्षण कार्यक्रम का आयोजन न्यू लेक्चर थिएटर कॉम्प्लेक्स स्थित कॉन्फ्रेंस हॉल में किया गया। प्रशिक्षण में प्रॉक्टोरियल बोर्ड के 100 सुरक्षा कर्मियों ने भाग लिया, जिनमें 10 महिला सुरक्षा कर्मी भी शामिल रहीं।
प्रशिक्षण के दौरान प्रतिभागियों को हृदयाघात, स्ट्रोक, अत्यधिक रक्तस्राव, सड़क दुर्घटनाओं, बेहोशी, सिर की चोट सहित विभिन्न आपातकालीन परिस्थितियों की पहचान और प्राथमिक उपचार की विस्तृत जानकारी दी गई। विशेषज्ञ चिकित्सकों ने सुरक्षा कर्मियों को सीपीआर (कार्डियोपल्मोनरी रिससिटेशन), एयरवे प्रबंधन, रक्तस्राव नियंत्रण तथा अन्य जीवनरक्षक तकनीकों का व्यावहारिक प्रशिक्षण भी दिया। आधुनिक प्रशिक्षण मॉडल (मैनिकिन) की सहायता से वास्तविक परिस्थितियों के अनुरूप अभ्यास कराया गया, ताकि आपात स्थिति में त्वरित और प्रभावी प्रतिक्रिया देने की क्षमता विकसित हो सके।

इस अवसर पर बीएचयू के कुलपति प्रो. अजित कुमार चतुर्वेदी ने प्रशिक्षकों के प्रयासों की सराहना करते हुए कहा कि यदि इस प्रशिक्षण से अर्जित ज्ञान और कौशल के माध्यम से एक भी व्यक्ति का जीवन बचाया जा सका, तो यह पहल पूरी तरह सफल मानी जाएगी। उन्होंने सुरक्षा कर्मियों से प्रशिक्षण के दौरान प्राप्त जानकारी को अधिक से अधिक लोगों तक पहुंचाने का भी आह्वान किया। साथ ही विश्वविद्यालय परिसर की सुरक्षा व्यवस्था में उनकी निष्ठा और समर्पण की प्रशंसा की।
प्रशिक्षण कार्यक्रम में जनरल सर्जरी विभाग के प्रो. डॉ. शशि प्रकाश मिश्रा, एनेस्थीसिया विभाग की प्रो. मंजरी मिश्रा, न्यूरोसर्जरी विभाग की डॉ. शुभि दुबे तथा जनरल सर्जरी विभाग के सहायक आचार्य एवं सर सुंदरलाल चिकित्सालय व आईएमएस-बीएचयू के प्रॉक्टर डॉ. प्रखर जायसवाल ने विशेषज्ञ प्रशिक्षक के रूप में प्रशिक्षण प्रदान किया।
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कार्यक्रम का समन्वयन बीएचयू के मुख्य आरक्षाधिकारी डॉ. संदीप पोखरिया एवं प्रॉक्टोरियल बोर्ड के अन्य सदस्यों ने किया। विशेषज्ञों ने कहा कि सुरक्षा कर्मी किसी भी आपात स्थिति में सबसे पहले घटनास्थल पर पहुंचते हैं। ऐसे में उन्हें जीवनरक्षक कौशल का प्रशिक्षण मिलने से दुर्घटना या चिकित्सीय आपातकाल के दौरान प्रारंभिक सहायता उपलब्ध कराने की उनकी क्षमता में उल्लेखनीय वृद्धि होगी और इससे अनेक लोगों का जीवन बचाया जा सकेगा।



