अगस्त में अब तक 4542 ट्रांसफॉर्मर दे चुके दगा, निर्बाध और सुचारू विद्युत आपूर्ति की निकली हवा

वाराणसी : पूर्वांचल विद्युत वितरण निगम लिमिटेड (पीयूवीवीएनएल) द्वारा निर्बाध और सुचारू विद्युत आपूर्ति के दावों की हवा निकलती दिख रही है. करोड़ों रुपये के विकास कार्य और दावे खोखले साबित हो रहे हैं. गर्मी के सीजन में अगस्त महीने के शुरुआती 10 दिनों के आंकड़ों पर नजर डालें तो जमीनी हकीकत कुछ और ही बयां कर रही है.
प्राप्त आधिकारिक रिपोर्ट के अनुसार, पूर्वांचल के 21 जिलों के 9 जोनों में केवल 10 दिनों (1 अगस्त से 10 अगस्त) के भीतर ही 4,542 ट्रांसफॉर्मर फुक चुके हैं. इतनी बड़ी संख्या में ट्रांसफॉर्मरों का दगा देना यह स्पष्ट करता है. कि बुनियादी ढांचे को मजबूत करने के नाम पर कागजों पर तो योजनाएं खूब बनीं, लेकिन धरातल पर रखरखाव और गुणवत्ता बेहद लचर बनी हुई है. विद्युत विशेषज्ञों और स्थानीय नागरिकों का कहना है कि मानसून के दौरान उमस और गर्मी बढ़ते ही विद्युत व्यवस्था पूरी तरह ध्वस्त हो गई. ट्रांसफॉर्मरों के लगातार फुकने के पीछे अत्यधिक ओवरलोडिंग क्षमता से अधिक भार पड़ना, जर्जर व ढीले तार और पुरानी लाइनों का समय पर न बदला जाना प्रमुख वजह बताई जा रही है. ग्रीष्मकालीन और मानसूनी अनुरक्षण (रखरखाव) का समय पर न होना भी वजह है.
करोड़ों रुपये के बजट से नए ट्रांसफॉर्मर लगाने और एबी केबलिंग सुधारने का दावा किया गया था, लेकिन जमीनी स्तर पर पहली ही चुनौती में विभागीय ढांचा चरमरा गया. ग्रामीण व शहरी इलाकों में कई-कई दिनों तक बिजली ठप रहने से जनजीवन अस्त-व्यस्त है.
जोनवार ट्रांसफॉर्मर जलने के आंकड़े (1 से 10 अगस्त):
जोन / क्षेत्र दगे/जले ट्रांसफॉर्मरों की संख्या
प्रयागराज जोन (प्रथम व द्वितीय) 1,233
वाराणसी जोन (प्रथम व द्वितीय) 1,208
आजमगढ़ जोन 694
मिर्जापुर जोन 662
बस्ती जोन 294
गोरखपुर जोन (द्वितीय) 286
गोरखपुर जोन (प्रथम) 165
कुल योग (21 जिले, 9 जोन) 4,542
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स्थानीय लोगों का कहना है कि हर साल मरम्मत और इंफ्रास्ट्रक्चर के नाम पर करोड़ों का बजट जारी होता है, लेकिन जमीन पर स्थिति जस की तस बनी रहती है. ट्रांसफॉर्मर जलने के बाद उसे बदलने में भी निर्धारित समयसीमा से अधिक समय लग रहा है, जिससे पेयजल और अन्य दैनिक कार्य बुरी तरह प्रभावित हो रहे हैं.



