62 मंदिरों के पावन प्रसाद से सजा काशी विश्वनाथ धाम

वाराणसी : महाशिवरात्रि 2026 के पावन अवसर पर काशी विश्वनाथ मंदिर एक बार फिर आध्यात्मिक एकता का वैश्विक केंद्र बन गया है. इस वर्ष देश-विदेश के कुल 62 प्रमुख मंदिरों से पावन प्रसाद, पूजन सामग्री, पवित्र जल और वस्त्र बाबा विश्वनाथ के चरणों में अर्पित किए जाएंगे.
इन 62 मंदिरों में भारत के 54 मंदिरों के साथ-साथ विदेशों के 8 मंदिर शामिल हैं. अंतरराष्ट्रीय सहभागिता में मलेशिया के 7 और श्रीलंका के 1 प्रमुख मंदिर से विशेष भेंट भेजी गई है. यह आयोजन न केवल धार्मिक आस्था का प्रतीक है, बल्कि सनातन संस्कृति की वैश्विक एकता को भी दर्शाता है.
18 प्रमुख मंदिरों से विशेष भोग सामग्री
देश के 18 प्रमुख तीर्थ स्थलों से विशेष पूजन सामग्री और प्रसाद भेजा गया है. इनमें प्रमुख रूप से श्रीकृष्ण जन्मभूमि मंदिर सहित अन्य महत्वपूर्ण मंदिर शामिल हैं. इन मंदिरों से आए पवित्र जल, वस्त्र और प्रसाद को विशेष विधि-विधान के साथ बाबा को अर्पित किया जाएगा.
'वसुधैव कुटुम्बकम्’ का संदेश
इस भव्य आयोजन का मुख्य उद्देश्य सनातन समाज को एक सूत्र में पिरोना और ‘वसुधैव कुटुम्बकम्’ की भावना को सशक्त करना है.देश के विभिन्न राज्यों से लेकर विदेशों तक फैले श्रद्धालुओं की आस्था का संगम काशी में देखने को मिल रहा है.
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आध्यात्मिक संगम बना काशी
महाशिवरात्रि के अवसर पर काशी विश्वनाथ धाम में श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ी है. मंदिर परिसर भक्ति, श्रद्धा और आध्यात्मिक ऊर्जा से सराबोर है. देश-विदेश से आई भेंटों ने इस आयोजन को ऐतिहासिक बना दिया है.
महाशिवरात्रि 2026 में काशी केवल आस्था का केंद्र नहीं, बल्कि वैश्विक सनातन एकता का प्रतीक बनकर उभरा है—जहाँ बाबा के दरबार में पूरी दुनिया एक परिवार की तरह एकत्रित दिखाई दे रही है.



