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आदि समाजवादी है अडभंगी शिव और काशी है उनका प्रतिरूप

आदि समाजवादी है अडभंगी शिव और काशी है उनका प्रतिरूप
Feb 15, 2026, 09:57 AM
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Posted By Diksha Mishra

आज महाशिवरात्रि है.सनातन परंपरा में इस रात्रि को लेकर कई मान्यतायें है जिसमे एक ये भी है कि आज के दिन ही माता पार्वती और अड़भंगी शिव का विवाह हुआ था.

शिव रूप पुरुष (चेतन) और पार्वती रूप प्रकृति (ऊर्जा ) का सुखद संयोग ही सृष्टि के सृजन का कारक है. आज का दिन सिर्फ शिव पार्वती के विवाह का सामान्य सालगिरह नहीं अपितु यह चेतन और उर्जा के मिलन का प्रतीक भी है जिससे जीवन एक संतुलन के साथ गतिमान होता है और सृष्‍टी का संचालन और नियमन भी. शिव का पूरा शिवत्‍व सामाजिक ताने बाने के एक देवत्व स्वरूप के रूप में हमारे सामने आता है. एक ऐसे देवता जिससे सामान्य भी खुद को उतना ही जुड़ा हुआ पाता है जितना की अभिजात्य. दूसरे किसी देव या भगवान की तरह स्‍वर्ण आभूषणों से सुसज्जित नहीं बल्कि प्रकृति से सीधा जुड़ाव. श्रृंगार किया तो गले में सर्प डाल लिया और शीश पर चंद्र को विराजमान करा दिया.


सिर्फ बारात नही, सामाजिक व्यवस्था


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माता पार्वती से विवाह करने गये बारात में भी समाज. शायद ही कोई ऐसा हो जो की छूटा हो. जहा हर कोई बाराती, देवता, मानव, राक्षस, साधु संत, गंधर्व किन्नर सब समाज के अंतिम व्यक्ति से लेकर राजा तक. खास ये है कि हर किसी को उसका अपना विशिष्‍ट स्‍थान, समाजवाद के सिद्धांत का मूलस्‍वरूप भी तो कुछ ऐसा ही है. हर एक को उसकी क्षमता के अनुसार, हर एक को उसके कार्य के अनुसार. बाबा की बारात इस बात को बखूबी प्रदर्शित करती है की निमंत्रण सभी को है. छोटे बड़े को कोई भेद नहीं. हर किसी का समाज में अपना महत्व है और उसका अपनी क्षमता है.


अव्‍यवस्‍था में सामाजिक व्यवस्था


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शिव व्यवस्थित नहीं हैं पर वह स्वयं में व्यवस्था है और सम्पूर्ण चराचर के व्यवस्था के कारक हैं. अव्यवस्थित होते हुए भी जो व्यवस्थित है वही शिव है. शिव की सारी व्यवस्था ही ऐसी है. न तो पहनने ओढ़ने में कोई व्यवस्था न तो खाने पीने में. कपड़े के नाम पर मृगछाल, गले मे भुजंग और ललाट पर चंद्रमा और केश में गंगधार. क्या देवता भी कोई ऐसा होता है? खाने की बात करें तो क्या पसंद है भांग, धतूरा, मदार. जो सामान्य जन के लिए अग्राह्य है वह इनके लिए ग्राह्य है. और तो और रहने को इन्हें कोई और जगह नही मिली तो कैलाश पर जा बैठे. चारो तरफ बर्फ ही बर्फ. जहां कोई घंटा भर जिंदा न रहे वहां शिव अनादि से व्यवस्थित हैं. सहचर भी कौन ? बैल नंदी. यानी की हर जगह व्यवस्था के विरुद्ध पर व्यवस्था में हर जगह समाज.


काशी को भी अपने जैसा बनाया


काशी को शिव ने अपना प्रिय बनाया तो इसे भी अपने जैसा भी बनाया. यहां के लोगों को भी. खुद अड़भंगी और उनके चेले भी. गरीब भी उतना ही मस्‍त और व्‍यस्‍त जितना की अमीर. चांडल भी इतना ज्ञानी कि शंकर को शंकराचार्य बना दे. डोम को भी राजा की संज्ञा. ये किसी समाजवादी व्‍यवस्‍था से कम है क्‍या. किसी ने पूछा कि काशी ऐसी क्यों है तो उत्तर मिला कि जिसके आराध्य ही ऐसे हों तो उनके अनुयायी वैसे हो तो इसमें गलत क्या है? काशी में शिव की व्यवस्था अव्यवस्थाओं के व्यवस्थित होने की सर्वमान्य व्यवस्था है. शिव योगी है लेकिन माता पर्वती के साथ उनका गृहस्थ और व्यवस्थित स्वरूप सामने आता है.

शिव को साधु, संत, असुर, नाग ,गंधर्व देवता, मानव, जलचर, नभचर और थलचर सभी ने माना है. और जब शिव मान्य है तो काशी भी मान्य हैं और यहां की अव्‍यवस्थित व्‍यवस्‍था भी. यही काशी है वाराणसी है और बनारस भी.


हमेशा रस से लबालब


अगर सामान्य किसी रस की बात करे तो यह रंगहीन, गंधहीन, स्वादहीन है लेकिन जब इसे मीठा , खट्टा, कड़वा जैसे विशेषणों का साथ मिलता है तब ये अपनी अर्थ की पूर्णता को प्राप्त करता हैं. पर बनारस का बना शब्द (बनाना, क्रिया )के साथ मिलकर रस शब्द अर्थ की पूर्णता को प्राप्त करता है, यानि कि यहां भी कुछ अलग. बनारस तो ऐसा ही है न. पर खास ये की यहां रस को बनाने की जरूरत नहीं है. ये अपने आप से "बना" है ठीक शिव की तरह. अपने आप से बने. अड़भंगी, समाज के साथ रहने वाले और समाजिक व्‍यवस्‍था का प्रतिरूप बनकर. ऐसे देव जो सर्व समाज के हैं और सबके लिए हैं.


(इस आर्टिकल के लेखक वरिष्ठ पत्रकार हिमांशु शर्मा हैं।)



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वाराणसी : रोहनिया के व्‍यवसायी जितेंद्र पटेल की गोली मारकर हुई हत्‍या को लेकर विधायक सुनील पटेल के नेतृत्‍व में एक प्रतिनधिमंडल ने शनिवार को पुलिस आयुक्‍त मोहित अग्रवाल से मुलाकात की. इस मुलाकात का मुख्य उद्देश्य अवलेशपुर में हुई हालिया घटना पर चर्चा करना था. प्रतिनिधिमंडल में वाराणसी के पूर्व महापौर, ब्लॉक प्रमुख, पार्षद सहित कई अन्य लोग भी शामिल थे.मुलाकात के मुख्य बिंदु पुलिस प्रशासन का आश्वासन: बैठक के दौरान पुलिस आयुक्त ने सभी को आश्वस्त किया कि पुलिस इस मामले पर पूरी गंभीरता और तत्परता से काम कर रही है. उन्होंने कहा कि जल्द ही दोषियों को पकड़ लिया जाएगा और उन्हें कड़ी सजा मिलेगी.दोषियों पर सख्त कार्रवाई: प्रतिनिधियों ने इस बात पर जोर दिया कि घटना में शामिल दोषियों को किसी भी हाल में बख्शा नहीं जाएगा, चाहे वे कहीं के भी हों. मामले की तह तक जाकर दोषियों को सजा दिलाने का आश्वासन दिया गया है.जांच का दायरा: मामले की जांच को लेकर यह जानकारी दी गई है कि इस घटना के लिए दो टीमें गठित की गई हैं, जो लखनऊ तक जांच करेंगी. इसके अलावा, चंदौली, बिहार और गुजरात के लिए भी टीमें लगाई गई हैं ताकि दोषियों को जल्द पकड़ा जा सके.ALSO READ : वाराणसी का स्‍वाद म‍िलेगा स्विगी के साथ, नगर निगम ने की साझेदारी...जनता से सहयोग की अपील: प्रतिनिधिमंडल ने जनता और सभी संबंधित लोगों से धैर्य बनाए रखने की अपील की है. उन्होंने कहा कि पुलिस विभाग अपना काम पूरी मजबूती से कर रहा है और अपराधियों को किसी भी हाल में भागने नहीं दिया जाएगा. प्रतिनिधिमंडल ने उम्मीद जताई है कि आने वाले दिनों में मामले का पूरा खुलासा हो जाएगा और पीड़ित पक्ष को न्याय मिलेगा. बता दें कि पिछले दिनों दुकान बंद कर घर लौट रहे व्‍यवसायी की गोली मारकर हत्‍या कर दी गई थी.
वाराणसी का स्‍वाद म‍िलेगा स्विगी के साथ, नगर निगम ने की साझेदारी...
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वाराणसी : खानपान की विरासत को लेकर नगर निगम ने भारत सरकार के पर्यटन मंत्रालय और स्विगी के साथ मिलकर "वाराणसी का स्वाद, स्विगी के साथ" नामक एक नई पहल की शुरुआत की है. इस पहल का उद्देश्य वाराणसी की समृद्ध खाद्य विरासत का जश्न मनाना और शहर के लाखों पर्यटकों तथा निवासियों को यहां के प्रसिद्ध स्थानीय व्यंजनों तक सुविधाजनक पहुंच प्रदान करना है. इस पहल का उद्घाटन मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने किया है.इस कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहे उत्तर प्रदेश के स्टाम्प, न्यायालय शुल्क और पंजीकरण राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) एवं विधायक (वाराणसी उत्तर) रवींद्र जायसवाल ने 12 प्रतिष्ठित स्थानीय खाद्य आउटलेट्स के प्रतिनिधियों को सम्मानित किया, जिनमें काशी चाट भंडार, चाची की प्रसिद्ध कचौरी, लक्ष्मी चाय, पहलवान लस्सी, गामा पान भंडार, नीलू कचौरी, टेस्ट किंग, पाठक जी ठंडाई वाला, नेताजी पान भंडार, गौरी शंकर कचौरी वाला और बनारसी पान मंदिर (लक्सा) शामिल हैं. इन सभी आउटलेट्स को एक औपचारिक प्रमाणन प्रदान किया गया, जो उनकी विरासत, गौरव और गुणवत्ता का प्रतीक है.जानकारी के अनुसार इस पहल के अंतर्गत वाराणसी के कुछ प्रमुख घाटों, जैसे नमो घाट, अस्सी घाट और दशाश्वमेध घाट पर पारंपरिक ठेले स्थापित किए जाएंगे. इन ठेलों पर आने वाले आगंतुक इन प्रसिद्ध स्थानीय भोजनालयों के लोकप्रिय व्यंजनों का आनंद ले सकेंगे. भारत सरकार के पर्यटन मंत्रालय के सचिव भुवनेश कुमार ने इस पहल पर टिप्पणी करते हुए कहा, "वाराणसी की खाद्य परंपराएं इसके इतिहास, संस्कृति और यहां के लोगों की रचनात्मकता का प्रतिबिंब हैं.बताया क‍ि स्थानीय विक्रेताओं द्वारा पीढ़ियों से तैयार किए जा रहे ये व्यंजन शहर के पर्यटन आकर्षण का एक महत्वपूर्ण हिस्सा हैं. स्विगी की इस पहल के माध्यम से स्थानीय विक्रेताओं को एक ऐसा मंच मिलेगा, जिससे वे शहर का दौरा करने वाले पर्यटकों सहित एक बड़े दर्शक वर्ग तक पहुंच सकेंगे. इस तरह के सहयोग से हमारे खाद्य उद्यमियों के लिए स्थायी अवसर पैदा होंगे और स्थानीय खाद्य विरासत को संरक्षित करने में मदद मिलेगी."जिलाधिकारी सत्येन्द्र कुमार ने कहा, "काशी को एक विश्व स्तरीय पर्यटन स्थल में बदलना हमारे प्रधानमंत्री का दृष्टिकोण है. उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा हाल ही में घोषित 'एक जिला, एक व्यंजन' (ओडीओसी) पहल का उद्देश्य वाराणसी की पाक विरासत को भारत और वैश्विक स्तर पर बढ़ावा देना है. स्विगी की इस पहल से शहर की पारंपरिक खाद्य संस्कृति को पर्यटकों और स्थानीय लोगों के बीच और अधिक दृश्यता मिलेगी, जिससे उनकी पहचान मजबूत होगी."ALSO READ : दालमंडी चौड़ीकरण परियोजना को झटका, अगली सुनवाई तक लगी रोक...स्विगी फूड मार्केटप्लेस के सीईओ रोहित कपूर ने कहा, "भोजन किसी भी शहर की सांस्कृतिक विरासत का एक अभिन्न अंग होता है. हमें विश्वास है कि यह पहल पवित्र शहर का दौरा करने वाले लाखों पर्यटकों के बीच यहां के स्थानीय और प्रतिष्ठित व्यंजनों को बढ़ावा देने में मदद करेगी. स्विगी सुविधाजनक पहुंच के लिए जानी जाती है और इस साझेदारी के साथ, हम इस खूबसूरत शहर की पाक विरासत को तलाशने के लिए और अधिक ग्राहकों को जोड़ने के लिए उत्साहित हैं. मैं भारत सरकार के पर्यटन मंत्रालय और वाराणसी नगर निगम का इस विज़न को धरातल पर उतारने में उनके सहयोग के लिए आभार जताता हूं."
दालमंडी चौड़ीकरण परियोजना को झटका, अगली सुनवाई तक लगी रोक...
दालमंडी चौड़ीकरण परियोजना को झटका, अगली सुनवाई तक लगी रोक...
वाराणसी : दालमंडी मार्ग चौड़ीकरण योजना के तहत प्रस्तावित भवन ध्वस्तीकरण की कार्रवाई पर इलाहाबाद हाईकोर्ट ने फिलहाल रोक लगा दी है.अदालत ने अगली सुनवाई तक संबंधित संपत्ति पर यथास्थिति बनाए रखने का आदेश दिया है, जिससे प्रभावित पक्ष को बड़ी राहत मिली है.जानकारी के अनुसार, इलाहाबाद हाईकोर्ट की खंडपीठ न्यायमूर्ति सलिल कुमार राय और न्यायमूर्ति स्वरूपमा चतुर्वेदी ने अलिमुन्निशा द्वारा दाखिल याचिका पर सुनवाई करते हुए यह आदेश पारित किया. याचिका में नगर निगम वाराणसी के जोनल अधिकारी एवं सहायक नगर आयुक्त द्वारा 26 मई 2026 को उत्तर प्रदेश नगर निगम अधिनियम, 1959 की धारा 331 के तहत जारी नोटिस को चुनौती दी गई थी.याचिकाकर्ता की ओर से अदालत में दलील दी गई कि नोटिस जारी करने और ध्वस्तीकरण की प्रक्रिया में प्रक्रियागत अनियमितताएं बरती गई हैं तथा बिना पर्याप्त सुनवाई का अवसर दिए कार्रवाई शुरू कर दी गई.पक्षकार ने इसे प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों के विरुद्ध बताया.मामले की गंभीरता को देखते हुए हाईकोर्ट ने फिलहाल विवादित संपत्ति पर यथास्थिति बनाए रखने का निर्देश दिया है.अदालत ने स्पष्ट किया है कि अगली सुनवाई तक किसी भी प्रकार की ध्वस्तीकरण कार्रवाई नहीं की जाएगी.ALSO READ : बीएचयू के शिक्षा संकाय में संशोधित सिलेबस को मिली मंजूरी, बैठक में हुआ अनुमोदन...गौरतलब है कि दालमंडी मार्ग चौड़ीकरण परियोजना को लेकर पिछले कुछ समय से क्षेत्र में विवाद बना हुआ है.ऐसे में हाईकोर्ट का यह आदेश परियोजना से प्रभावित लोगों के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है.अब सभी की निगाहें मामले की अगली सुनवाई पर टिकी हैं, जहां पक्षकार अपनी विस्तृत दलीलें अदालत के समक्ष प्रस्तुत करेंगे.