सनातन धर्म इंटर कॉलेज में दिखेगी 30 फीट ऊंची मां ललिता देवी की प्रतिमा, बद्रीनाथ धाम की थीम पर बनेगा पंडाल...
वाराणसी : धर्मनगरी काशी में दुर्गोत्सव की तैयारियां जोर-शोर से चल रही हैं। शहर के प्रमुख पूजा पंडालों में इस बार श्रद्धालुओं को भव्यता के साथ धार्मिक कथाओं की झलक भी देखने को मिलेगी। नई सड़क स्थित सनातन धर्म इंटर कॉलेज में श्री दुर्गा पूजा समिति की ओर से 47वें वर्ष दुर्गोत्सव का आयोजन किया जा रहा है। इस बार यहां 30 फीट ऊंची और 15 फीट चौड़ी मां ललिता देवी की प्रतिमा स्थापित की जाएगी। वहीं, पंडाल को बद्रीनाथ धाम का स्वरूप दिया जा रहा है। दिल्ली और कोलकाता से आए कारीगर पिछले एक महीने से इसे तैयार करने में जुटे हैं।
समिति इस बार अपने आयोजन के जरिए गोल्डन जुबली की ओर बढ़ते सफर की झलक भी दिखाएगी। हर साल की तरह इस बार भी पंडाल, मां दुर्गा की प्रतिमा और धार्मिक कथा पर आधारित वीडियो शो श्रद्धालुओं के आकर्षण का केंद्र होंगे। मां ललिता देवी के स्वरूप में तैयार की जा रही प्रतिमा को विशेष रूप दिया जा रहा है।
दुर्गोत्सव के दौरान यहां करीब दस मिनट का विशेष वीडियो शो भी दिखाया जाएगा। इसमें राक्षस भंडासुर की उत्पत्ति, उसके अत्याचार और देवताओं को परेशान करने की कथा दिखाई जाएगी। धार्मिक आख्यान के अनुसार, भंडासुर के आतंक से मुक्ति दिलाने और देवताओं की रक्षा के लिए मां ललिता देवी प्रकट होती हैं और उसका वध करती हैं। शो में मां के इसी दिव्य स्वरूप और असुर पर विजय की कथा को दर्शाया जाएगा।
सनातन धर्म इंटर कॉलेज में हर साल धार्मिक और पौराणिक कथाओं को आधुनिक तकनीक के जरिए प्रस्तुत किया जाता है। इस बार भी आकर्षक सजावट, रोशनी और वीडियो शो के माध्यम से श्रद्धालुओं को एक विशेष अनुभव देने की तैयारी है। पंडाल निर्माण का काम अब अंतिम चरण में है। दुर्गोत्सव के दौरान यहां बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं के पहुंचने की उम्मीद है।
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वहीं, नवरात्र के तीसरे दिन श्रद्धालु मां चंद्रघंटा के दर्शन-पूजन भी करेंगे। वाराणसी के बांसफाटक स्थित चित्रघंटा गली में माता चंद्रघंटा का मंदिर है। मां दुर्गा के नौ स्वरूपों में तीसरे स्वरूप की पूजा नवरात्र के तीसरे दिन की जाती है। धार्मिक मान्यता के अनुसार, मां चंद्रघंटा साहस, शक्ति और पराक्रम की प्रतीक हैं।



