महाराणा प्रताप के आदर्शों पर चलने का आह्वान, बीएचयू में हुआ भव्य कार्यक्रम...

वाराणसी: काशी हिन्दू विश्वविद्यालय में महाराणा प्रताप जयंती के अवसर पर “महाराणा की शौर्यगाथा” कार्यक्रम का भव्य आयोजन किया गया. बीएचयू के के.एन. उडप्पा सभागार में आयोजित इस कार्यक्रम में बड़ी संख्या में छात्र-छात्राएं, युवा और गणमान्य लोग शामिल हुए. पूरे आयोजन के दौरान देशभक्ति, वीरता और स्वाभिमान का माहौल देखने को मिला.
कार्यक्रम की शुरुआत महाराणा प्रताप के चित्र पर माल्यार्पण और दीप प्रज्वलन के साथ हुई. वक्ताओं ने महाराणा प्रताप के साहस, त्याग और मातृभूमि के प्रति समर्पण को याद करते हुए कहा कि वे केवल एक राजा नहीं बल्कि भारतीय स्वाभिमान और स्वतंत्रता के प्रतीक थे. उन्होंने विपरीत परिस्थितियों में भी कभी हार नहीं मानी और अपने आत्मसम्मान से समझौता नहीं किया.
इस अवसर पर महाराणा प्रताप के संघर्ष में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने वाले आदिवासी समाज के वीर योद्धाओं को भी सम्मानित किया गया. आयोजकों ने कहा कि इतिहास में आदिवासी समाज के योगदान को अक्सर कम महत्व दिया जाता है, जबकि महाराणा प्रताप के संघर्ष में उनकी भूमिका बेहद अहम रही है.
कार्यक्रम के दौरान के.एन. उडप्पा सभागार से मालवीय गेट, लंका तक भव्य झांकी निकाली गई. हाथों में ध्वज और जयघोष के साथ निकली इस झांकी में छात्र-छात्राओं और युवाओं का उत्साह देखने लायक था. झांकी पुनः सभागार पहुंचकर संपन्न हुई.
कार्यक्रम के आयोजक विवेक सिंह अभिषेक ने बताया कि आयोजन का उद्देश्य युवाओं को महाराणा प्रताप के जीवन और संघर्ष से प्रेरणा देना है. उन्होंने कहा कि युवाओं को अपने इतिहास और महान वीरों के संघर्ष के बारे में जानना बेहद जरूरी है.
कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में विनीत सिंह मौजूद रहे, जबकि मुख्य वक्ता चेतन आनंद ने कहा कि महाराणा प्रताप का जीवन आत्मसम्मान, संघर्ष और राष्ट्रभक्ति का प्रेरणास्रोत है इसके अलावा धनंजय कुमार सिंह, संतोष कुमार सिंह, सतेंद्र बारी और डॉ. एस.एन. शंखवार भी कार्यक्रम में उपस्थित रहे.
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कार्यक्रम के अंत में आयोजकों ने सभी अतिथियों, छात्र-छात्राओं और युवाओं का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि इस तरह के आयोजन समाज में राष्ट्रभक्ति और सांस्कृतिक चेतना को मजबूत करने का कार्य करते हैं.



