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लाल बहादुर शास्‍त्री अंतरराष्‍ट्रीय एयरपोर्ट के विस्‍तारीकरण की राह में आया कब्रिस्‍तान, ग्रामीणों में आक्रोश

लाल बहादुर शास्‍त्री अंतरराष्‍ट्रीय एयरपोर्ट के विस्‍तारीकरण की राह में आया कब्रिस्‍तान, ग्रामीणों में आक्रोश
Jan 19, 2026, 08:03 AM
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Posted By Gaandiv

वाराणसी : लाल बहादुर शास्त्री अंतरराष्ट्रीय एयरपोर्ट के विस्तारीकरण की राह में कब्रिस्‍तान आ गया है. विस्‍तारीकरण के तहत मंगारी गांव स्थित एक पुराने कब्रिस्तान में दो दिन पूर्व कराए गए सफाई कार्य को लेकर ग्रामीणों में नाराजगी है. रविवार को पिंडरा एसडीएम प्रतिभा मिश्रा मौके पर पहुंचीं और ग्रामीणों से बातचीत कर मुआयना किया. कब्रिस्तान की सफाई कराए जाने से नाराज मंगारी गांव एवं नैपुरा क्षेत्र के मुस्लिम समुदाय के लोग मौके पर एकत्र हो गए और विरोध जताया. ग्रामीणों का आरोप है कि यह कब्रिस्तान एयरपोर्ट निर्माण से भी पहले से मौजूद है और लगभग 100 परिवारों द्वारा लंबे समय से उपयोग में लाया जा रहा है.


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जानकारी के अनुसार एयरपोर्ट प्रशासन द्वारा जेसीबी मशीन लगाकर कब्रिस्तान की भूमि को समतल करा दिया गया. इसकी भनक लगते ही मंगारी गांव और समीपवर्ती नैपुरा गांव के मुस्लिम समुदाय के लोग मौके पर पहुंच गए और विरोध प्रदर्शन शुरू कर दिया. ग्रामीण कुद्दुस अंसारी ने बताया कि यह कब्रिस्तान एयरपोर्ट निर्माण से भी पहले से अस्तित्व में था और वर्षों से गांव के लोगों द्वारा उपयोग में लाया जा रहा है. उन्होंने आरोप लगाया कि बिना किसी पूर्व सूचना या नोटिस के कब्रिस्तान को समतल करना न केवल नियमों का उल्लंघन है, बल्कि उनके पूर्वजों के सम्मान के साथ भी अन्याय है.

वहीं लियाकत अली ने कहा कि प्रशासन द्वारा किसी वैकल्पिक कब्रिस्तान की व्यवस्था किए बिना यह कार्रवाई की गई है, जिससे भविष्य में किसी की मृत्यु होने पर दफन की गंभीर समस्या उत्पन्न हो जाएगी. ग्रामीणों का कहना है कि यह कब्रिस्तान करीब 100 परिवारों के उपयोग में था.


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विरोध के दौरान नदीम, बुल्लुर, आरिफ, हारून, मुजम्मिल, खुर्शीद, रफीक, कमालुद्दीन सहित दर्जनों ग्रामीण मौके पर मौजूद रहे. ग्रामीणों ने प्रशासन से मांग की है कि इस मामले में तत्काल हस्तक्षेप कर उचित समाधान निकाला जाए और वैकल्पिक कब्रिस्तान की व्यवस्था सुनिश्चित की जाए.

बीएचयू में 'एक वृक्ष माँ के नाम' अभियान के तहत 111 पौधों का रोपण.
बीएचयू में 'एक वृक्ष माँ के नाम' अभियान के तहत 111 पौधों का रोपण.
वाराणसी : काशी हिन्दू विश्वविद्यालय (बीएचयू) में पर्यावरण संरक्षण और हरित परिसर के विकास को बढ़ावा देने के उद्देश्य से सोमवार को 'एक वृक्ष माँ के नाम' अभियान के अंतर्गत केंद्रीय कार्यालय परिसर में विशेष पौधरोपण कार्यक्रम आयोजित किया गया। अभियान का शुभारंभ कुलपति प्रो. अजित कुमार चतुर्वेदी और कुलसचिव राजन श्रीवास्तव ने केंद्रीय कार्यालय के सामने नीलमोहर का पौधा लगाकर किया।अभियान के तहत विश्वविद्यालय परिसर के विभिन्न स्थानों पर कुल 111 पौधों का रोपण किया गया। इनमें 100 रक्तमंजरी और 11 नीलमोहर के पौधे शामिल हैं। खास बात यह रही कि बीएचयू परिसर में पहली बार नीलमोहर के पौधे लगाए गए हैं। आकर्षक नीले-बैंगनी फूलों वाला नीलमोहर (जैकारैंडा मिमोसिफोलिया) अपनी प्राकृतिक सुंदरता के लिए विश्वभर में प्रसिद्ध है। विश्वविद्यालय प्रशासन का मानना है कि इन पौधों के रोपण से परिसर की जैव विविधता समृद्ध होगी और हरित वातावरण को बढ़ावा मिलेगा।ALSO READ: सावन में कांवड़ मार्गों पर बंद रहेंगी मांस-मछली की दुकानें, उल्लंघन करने पर होगी कानूनी कार्रवाई.कुलपति प्रो. अजित कुमार चतुर्वेदी ने कहा कि यह अभियान पर्यावरण संरक्षण के साथ-साथ प्रकृति के प्रति जिम्मेदारी निभाने का संदेश देता है। वहीं, रक्तमंजरी के पौधे भी परिसर की हरित आभा और सौंदर्य को और आकर्षक बनाएंगे।पौधरोपण कार्यक्रम का आयोजन उद्यान विशेषज्ञ इकाई के आचार्य प्रभारी प्रो. सरफराज आलम के नेतृत्व में किया गया। इस अवसर पर प्रो. अनुराग दवे, प्रो. राकेश कुमार सिंह, डॉ. संजीव सर्राफ, अश्विनी देशवाल, भरत पांडे सहित उद्यान इकाई एवं केंद्रीय कार्यालय के अधिकारी और कर्मचारी उपस्थित रहे।
सावन में कांवड़ मार्गों पर बंद रहेंगी मांस-मछली की दुकानें, उल्लंघन करने पर होगी कानूनी कार्रवाई.
सावन में कांवड़ मार्गों पर बंद रहेंगी मांस-मछली की दुकानें, उल्लंघन करने पर होगी कानूनी कार्रवाई.
वाराणसी : सावन माह में कांवड़ यात्रा के दौरान श्रद्धालुओं और कांवड़ियों की धार्मिक भावनाओं का सम्मान सुनिश्चित करने के लिए नगर निगम ने बड़ा निर्णय लिया है। निगम प्रशासन ने शहरी सीमा के अंतर्गत आने वाले सभी कांवड़ मार्गों पर अवैध रूप से संचालित मांस, मछली और मुर्गा विक्रेताओं की दुकानों को तत्काल प्रभाव से बंद रखने के निर्देश जारी किए हैं।नगर निगम के पशु चिकित्सा कल्याण अधिकारी डॉ. विजय अमृतराज ने बताया कि कांवड़ यात्रा के दौरान मार्गों पर मांस-मछली की दुकानों का संचालन श्रद्धालुओं की आस्था को प्रभावित कर सकता है। इसे देखते हुए सभी जोनों में विशेष अभियान चलाने का निर्णय लिया गया है। नगर निगम की टीमों को अपने-अपने क्षेत्रों में नियमित निरीक्षण कर अवैध रूप से संचालित दुकानों को बंद कराने की जिम्मेदारी सौंपी गई है।निगम प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि आदेश का सख्ती से पालन कराया जाएगा। यदि कोई दुकानदार निर्देशों की अनदेखी करते हुए मांस, मीट या मछली की बिक्री करता पाया गया, तो उसके खिलाफ नियमानुसार कड़ी दंडात्मक और कानूनी कार्रवाई की जाएगी।ALSO READ: बीएचयू के डॉ. राघवेंद्र रमन मिश्र विश्व के शीर्ष 5% वैज्ञानिकों में शामिल.उत्कृष्ट शोध और वैज्ञानिक योगदान के लिए मिला सम्माननगर निगम ने सभी संबंधित विक्रेताओं से अपील की है कि वे सावन माह के दौरान जारी निर्देशों का पालन करें और कांवड़ यात्रा की पवित्रता बनाए रखने में प्रशासन का सहयोग करें।
बीएचयू के डॉ. राघवेंद्र रमन मिश्र विश्व के शीर्ष 5% वैज्ञानिकों में शामिल.उत्कृष्ट शोध और वैज्ञानिक योगदान के लिए मिला सम्मान
बीएचयू के डॉ. राघवेंद्र रमन मिश्र विश्व के शीर्ष 5% वैज्ञानिकों में शामिल.उत्कृष्ट शोध और वैज्ञानिक योगदान के लिए मिला सम्मान
वाराणसी : काशी हिन्दू विश्वविद्यालय (बीएचयू) के राजीव गांधी दक्षिण परिसर, बरकच्छा (मिर्जापुर) स्थित चिकित्सा प्रयोगशाला प्रौद्योगिकी विभाग के सहायक प्रोफेसर डॉ. राघवेंद्र रमन मिश्र ने विश्वविद्यालय का गौरव बढ़ाया है। उन्हें वर्ष 2025 की एससीआई ग्लोबल रजिस्ट्री में विश्व के शीर्ष 5 प्रतिशत वैज्ञानिकों की सूची में स्थान मिला है।डॉ. मिश्र को यह प्रतिष्ठित उपलब्धि उनके उत्कृष्ट वैज्ञानिक अनुसंधान, नवाचारपूर्ण कार्यों और उच्च स्तरीय शैक्षणिक योगदान के आधार पर प्राप्त हुई है। एससीआई ग्लोबल रजिस्ट्री की यह वैश्विक रैंकिंग शोध की गुणवत्ता, प्रकाशित शोधपत्रों के प्रभाव, उद्धरण (साइटेशन) और अन्य शैक्षणिक मानकों के व्यापक मूल्यांकन पर आधारित होती है। इसमें एससीआई जर्नल और कंट्री रैंक (SCR) जैसे महत्वपूर्ण सूचकांकों का उपयोग किया जाता है, जो स्कोपस डाटा के आधार पर तैयार किए जाते हैं।ALSO READ: नगर निगम ने 100 करोड़ की सरकारी संपत्ति मुक्त कराई, 38 साल पुराने विवाद का अंतविश्वविद्यालय ने डॉ. मिश्र की इस उपलब्धि को संस्थान के लिए गर्व का क्षण बताया है। यह सम्मान न केवल बीएचयू की शोध परंपरा को नई पहचान देता है, बल्कि देश के युवा शोधकर्ताओं और विद्यार्थियों के लिए भी प्रेरणा का स्रोत है। डॉ. मिश्र की सफलता वैज्ञानिक अनुसंधान के क्षेत्र में समर्पण, गुणवत्ता और उत्कृष्टता का उदाहरण मानी जा रही है।