भगवान शिव के लिए क्यों है खास वसंत पंचमी, यह चल रही तैयारियां

वाराणसी : महादेव के लिए वसंत पंचमी खास है और उनकी नगरी काशी में तो रंग अबर गुलाल उडने लगते हैं. हर साल की तरह इस बार भी वसंत पंचमी पर बाबा विश्वनाथ का परंपराओं के अनुरूप तिलक चढ़ेगा और बाबा विश्वनाथ के विवाहोत्सव की तैयारियां इसी दिन से आरंभ हो जाएंगी. बाबा विश्वनाथ के विवाह के अनुष्ठान एवं विधान 23 जनवरी को वसंत पंचमी के दिन तिलकोत्सव के साथ प्रारंभ होंगे.

इस विशेष पर्व पर शुक्रवार को टेढ़ी नीम स्थित पूर्व महंत आवास पर बाबा विश्वनाथ के माथे पर तिलक सजाया जाएगा. भोर में मंगला आरती के बाद दिनभर तिलकोत्सव से संबंधित लोकाचार एवं परंपराएं निभाई जाएंगी. तिलकोत्सव के दिन ब्राह्मणों का समूह चारों वेदों की ऋचाओं का पाठ करेगा. बाबा का दुग्धाभिषेक कर उनका विशेष पूजन भी किया जाएगा. बाबा को फलाहार के साथ विजयायुक्त ठंडाई का भोग अर्पित किया जाएगा. महिलाओं के स्वर में गाए जाने वाले मंगल गीतों से पूरा घर-आंगन गूंज उठेगा. इन सभी विधि-विधानों के बाद सायंकाल बाबा श्रीकाशी विश्वनाथ दूल्हा स्वरूप में दर्शन देंगे. लोकमान्यता के अनुसार, महाशिवरात्रि पर शिव विवाह संपन्न हुआ था और रंगभरी एकादशी पर बाबा गौरा जी का गौना लाए गए थे. इससे पहले वसंत पंचमी के शुभ मुहूर्त पर भगवान शिव का तिलकोत्सव किया गया था. काशीवासी इसी परंपरा के अनुसार वसंत पंचमी के दिन तिलक की रस्म निभाते हैं.
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इस अवसर पर भक्तों की भीड़ उमड़ने की संभावना है, जो बाबा विश्वनाथ के प्रति अपनी श्रद्धा व्यक्त करने के लिए आएंगे. तिलकोत्सव का यह आयोजन न केवल धार्मिक महत्व रखता है, बल्कि यह काशी की सांस्कृतिक धरोहर का भी प्रतीक है. भक्त इस दिन विशेष रूप से तैयारियों में जुटे रहेंगे, ताकि बाबा का स्वागत भव्य तरीके से किया जा सके.
वहीं दूसरी ओर माघ मास की वजह से प्रयाग से आने वाला पलट प्रवाह भी काशी में उमड़ेगा। लिहाजा बाबा दरबार में भी विशेष तैयारियां की जा रही हैं. बाबा दरबार में आस्था का रेला प्रयाग आने वाले श्रद्धालुओं से भी उमड़ेगा. माना जा रहा है कि इस बार महाकुंभ की तरह तो नहीं लेकिन माघ मास के पुण्य के लिए आने वालों की भीड़ भी काशी में उमड़ेगी. इसी दिन सरस्चती पूजन का भी आयोजन होगा.



