संपूर्णानंद संस्कृत विश्वविद्यालय के दीक्षांत समारोह में मुस्लिम छात्रा को मिलेगा गोल्ड मेडल संस्कृत के प्रति समर्पण बना चर्चा का विषय

वाराणसी: संपूर्णानंद संस्कृत विश्वविद्यालय अपने 43वें दीक्षांत समारोह के लिए पूरी तरह तैयार है। इस आयोजन की एक खास चर्चा मुस्लिम समुदाय से आने वाली छात्रा कायनात खातून को लेकर है, जिन्हें इस समारोह में मेडल प्रदान किया जाएगा।
संस्कृत के प्रति अटूट निष्ठा
विभाग के डॉ. रविशंकर पांडेय ने बताया कि कायनात खान ने अपनी शिक्षा की शुरुआत मदरसे से की थी, लेकिन संस्कृत सीखने की उनकी प्रबल इच्छा ने उन्हें इस प्राचीन भाषा से जोड़ दिया। डॉ. रविशंकर पांडेय ने स्पष्ट किया कि विश्वविद्यालय का संस्कृत विभाग धर्म या पंथ से ऊपर उठकर केवल शिक्षा और ज्ञान पर केंद्रित है। कायनात न केवल धाराप्रवाह संस्कृत बोलती हैं, बल्कि वे व्याकरण के गहन ग्रंथों का भी अध्ययन कर रही हैं।
'खान' से 'खानम' बनने का सफर
कायनात के नाम को लेकर भी एक दिलचस्प तथ्य सामने आया है। डॉ. रविशंकर पांडेय के अनुसार, संस्कृत व्याकरण के अध्ययन के दौरान कायनात ने स्वयं अपनी इच्छा व्यक्त की थी कि उनके नाम 'खान' को शुद्ध संस्कृत व्याकरण के अनुसार 'खानम' किया जाए। यह नामकरण पूरी तरह से उनकी अपनी इच्छा और संस्कृत के प्रति उनके प्रेम का परिणाम है।
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भारतीय ज्ञान परंपरा का उदाहरण
विश्वविद्यालय के शिक्षकों का मानना है कि शिक्षा एक प्रकाश की तरह है, जिसमें किसी भी संप्रदाय का भेदभाव नहीं होता। कायनात का उदाहरण यह दर्शाता है कि कैसे भारतीय ज्ञान परंपरा को महत्व देने वाले परिवार अपनी सांस्कृतिक जड़ों से जुड़े रहते हुए भी अन्य विद्याओं को अपना सकते हैं। डॉ. पांडेय ने उन्हें एक 'सनातनी' विद्यार्थी और अपना भाई समान बताते हुए कहा कि ऐसे छात्रों को शिक्षित करना उनके लिए गौरव का विषय है।



