हजरत अली जयंती पर वाराणसी में निकला जुलूस, गूंजा अली-अली का नारा

वाराणसी : पैगंबर मोहम्मद साहब के चचेरे भाई हजरत अली की जयंती पर वाराणसी शहर के टाउनहाल स्थित गांधी भवन से भव्य जुलूस निकाला गया. यह जुलूस दोपहर बाद लल्लापुरा स्थित दरगाह फातमान में समाप्त हो गया. इसमें सैकड़ों की संख्या में शिया मुसलमान शामिल हुए. जुलूस में शिया समुदाय के लोग 'मुबारक हो... मुबारक हो... अली वालों मुबारक हो...' का नारा लगाते चल रहे हैं. इस जुलूस में कई सारे उलेमा और मौलाना शिरकत कर रहे हैं. जुलूस की सुरक्षा में भारी पुलिस फोर्स तैनात है. जुलूस मैदागिन, नीचीबाग, चौक, दालमंडी, नई सड़क, शेख सलीम फाटक, कालीमहल, पितरकुंडा, लालपुरा होता हुआ दरगाह फातमान में समाप्त हुआ.
हजरत अली की पैदाइश का मना रहे जश्न
इस जुलूस और जश्न पर मौलाना जमीरूल हसन ने बताया - 13 रजब को जनशीने रसूल अली इब्ने अबुतालिब की पैदाइश हुई है. उसी का जश्न आज शिया समुदाय मना रहा है. ये वो अजीम शख्सियत है जिन्होंने अपने दौरे हुकूमत पर इंसाफ की हुकूमत की और किसी पर जुल्म नहीं किया. जब अरब में बादशाह जुल्म करने के लिए जाने जाते थे. उस वक्त एक ऐसी मिसाल कायम की जो कयामत तक लोगों के लिए मिसाल है. उन्होंने कभी किसी चीज का हल जंग या तलवार से नहीं निकाला.
हजरत अली की जिंदगी से सीख ले कौम
शिया समुदाय और सभी धर्मों को उन्होंने सन्देश देते हुए कहा- लोगों को आपसी भाईचारे के साथ जिंदगी गुजारनी चाहिए. उन्होंने शिया कौम को सन्देश देते हुए कहा कि कौम को हजरत अली की जिंदगी की रोशनी में आगे बढ़ना चाहिए और उसी से सबक लेना चाहिए.
अली समिति के प्रेजिडेंट जहीर हैदर ने कहा- आज हमारे बीच हमारे बीच हमारे मीडिया प्रभारी फरमान हैदर साहब नहीं है. वो हमारे पूरे जुलूस के इंचार्ज थे। इस मौके पर हमने उन्हें आज याद किया है. उन्होंने बताया - दरगाह फातमान में जुलूस के पहुंचने पर कौमी एकता और हजरत अली की जिंदगी पर एक सेमीनार भी होगा.



