हथुआ मार्केट में दिखेगा कंबोडिया के अंकोरवाट मंदिर का प्रतिरूप, 35 कारीगर तैयार कर रहे भव्य पंडाल...
वाराणसी : नवरात्र में धर्मनगरी काशी में मां दुर्गा की आराधना के साथ भव्य पंडालों की रौनक भी देखने को मिल रही है। शहर के हथुआ मार्केट में इस बार कंबोडिया के प्रसिद्ध अंकोरवाट मंदिर की तर्ज पर विशाल पंडाल तैयार किया जा रहा है। प्रीमियर ब्वायज क्लब की ओर से आयोजित दुर्गोत्सव को खास बनाने के लिए बंगाल के 35 कारीगर दिन-रात जुटे हुए हैं। पंडाल को लकड़ी से तैयार कर आकर्षक स्वरूप दिया जा रहा है। क्लब इस बार अपनी स्थापना का 51वां वर्ष मना रहा है।
दुर्गोत्सव के दौरान यहां मां दुर्गा की प्रतिमा भी विशेष आकर्षण होगी। क्लब की ओर से इस बार प्रतिमा को पुराने स्वरूप में तैयार कराया जा रहा है, ताकि स्थापना के शुरुआती वर्षों की परंपरा को याद किया जा सके। मां की प्रतिमा अभय मुद्रा में श्रद्धालुओं को आशीर्वाद देती नजर आएगी। इसके साथ ही पंडाल में ऑडियो के माध्यम से मां की महिमा और धार्मिक कथा सुनाई जाएगी।
पंडाल में श्रद्धालुओं की सुरक्षा और भीड़ प्रबंधन को लेकर भी विशेष इंतजाम किए जा रहे हैं। पूरे परिसर को सीसीटीवी कैमरों से लैस किया जाएगा। पुलिसकर्मियों के साथ क्लब के स्वयंसेवक भी तैनात रहेंगे। वहीं, भीड़ को नियंत्रित करने के लिए प्रवेश और निकास के अलग-अलग रास्ते बनाए जाएंगे। आयोजकों को उम्मीद है कि इस भव्य पंडाल को देखने के लिए वाराणसी के साथ आसपास के जिलों से भी बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचेंगे।
हथुआ मार्केट में बन रहा यह पंडाल कंबोडिया के अंकोरवाट मंदिर की स्थापत्य कला से प्रेरित है। अंकोरवाट मंदिर कंबोडिया के सिएम रीप में स्थित विश्वप्रसिद्ध ऐतिहासिक धरोहर है। 12वीं शताब्दी में खमेर राजा सूर्यवर्मन द्वितीय ने इसका निर्माण कराया था। मूल रूप से भगवान विष्णु को समर्पित यह मंदिर अपनी भव्य वास्तुकला, बारीक नक्काशी और विशाल परिसर के लिए जाना जाता है। यूनेस्को की विश्व धरोहर सूची में शामिल अंकोरवाट मंदिर कंबोडिया की सांस्कृतिक पहचान का भी महत्वपूर्ण हिस्सा है।
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वहीं, नवरात्र के चौथे दिन श्रद्धालु मां कुष्मांडा के दर्शन-पूजन करते हैं। वाराणसी के दुर्गाकुंड स्थित मां कुष्मांडा का मंदिर अपनी प्राचीनता और धार्मिक मान्यताओं के लिए प्रसिद्ध है। मंदिर का निर्माण 18वीं शताब्दी में बंगाल की रानी भवानी ने कराया था। धार्मिक मान्यता के अनुसार, मां कुष्मांडा सृष्टि की रचनात्मक ऊर्जा का प्रतीक हैं और उनकी पूजा से भक्तों को सुख-समृद्धि और शक्ति का आशीर्वाद मिलता है।



