मनसा राम फाटक में दिखेगा पुरी के जगन्नाथ मंदिर का प्रतिरूप, 42 वर्षों से दुर्गोत्सव मना रही संस्था...
वाराणसी : धर्मनगरी काशी में नवरात्र के साथ दुर्गा पूजा उत्सव की रौनक देखने को मिल रही है। शहर के अलग-अलग इलाकों में आकर्षक पंडाल श्रद्धालुओं को अपनी ओर खींच रहे हैं। इसी क्रम में मनसा राम फाटक में इस बार ओडिशा के पुरी स्थित प्रसिद्ध जगन्नाथ मंदिर की तर्ज पर भव्य पंडाल तैयार किया जा रहा है। निहारिका सामाजिक संस्कृति संस्था की ओर से आयोजित दुर्गोत्सव की यह खास बात है कि पंडाल को संस्था के सदस्य खुद अपने हाथों से तैयार कर रहे हैं। संस्था पिछले 42 वर्षों से दुर्गा पूजा उत्सव का आयोजन कर रही है।
पुरी के जगन्नाथ मंदिर का प्रतिरूप तैयार करने के लिए संस्था के सदस्य पिछले डेढ़ महीने से जुटे हुए हैं। पंडाल को मूल मंदिर की तरह भव्य स्वरूप देने का प्रयास किया जा रहा है। इसके साथ ही पंडाल तक पहुंचने वाले रास्ते को भी आकर्षक ढंग से सजाया जा रहा है। सदस्यों का मानना है कि अपने हाथों से पंडाल तैयार करना मां दुर्गा के प्रति उनकी आस्था और समर्पण को दर्शाता है। इससे संस्था के सदस्यों और आसपास के लोगों के बीच आपसी जुड़ाव भी मजबूत होता है।
इस पंडाल में श्रद्धालुओं को भगवान जगन्नाथ, उनकी बहन सुभद्रा और भाई बलभद्र के दर्शन होंगे। इसके साथ ही मां दुर्गा की आकर्षक प्रतिमा और आस भैरव के दर्शन भी कर सकेंगे। प्रतिमाओं के दर्शन के दौरान श्रद्धालुओं को धार्मिक आस्था और परंपरा का अनूठा संगम देखने को मिलेगा। मां दुर्गा की प्रतिमा का मुस्कुराता हुआ चेहरा भी भक्तों के आकर्षण का केंद्र रहेगा।
दुर्गोत्सव के दौरान सप्तमी, अष्टमी और नवमी को विशेष पूजा-अनुष्ठान आयोजित किए जाएंगे। इसके साथ ही कन्या पूजन और भंडारे का आयोजन भी होगा। श्रद्धालुओं की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए प्रवेश और निकास के लिए अलग-अलग रास्ते बनाए गए हैं। पंडाल परिसर में सीसीटीवी कैमरे भी लगाए गए हैं, ताकि व्यवस्था पर नजर रखी जा सके।
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वहीं, नवरात्र के नौवें दिन मां दुर्गा के नौवें स्वरूप माता सिद्धिदात्री के दर्शन-पूजन का विशेष महत्व है। वाराणसी में कालभैरव मंदिर के पास सिद्धमाता गली में माता सिद्धिदात्री का प्राचीन मंदिर स्थित है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, माता सिद्धिदात्री सभी सिद्धियों को प्रदान करने वाली देवी हैं। उनकी चार भुजाओं में शंख, चक्र, गदा और कमल सुशोभित हैं। मान्यता है कि नवमी के दिन माता के दर्शन-पूजन से भक्तों को सुख, समृद्धि, ज्ञान और सिद्धियों का आशीर्वाद प्राप्त होता है।



