महेश नगर कॉलोनी में दिखेगा मां कामाख्या मंदिर का प्रतिरूप, 60 कारीगर दो महीने से बना रहे भव्य पंडाल...
वाराणसी : धर्मनगरी काशी में दुर्गा पूजा को लेकर तैयारियां जोरों पर हैं। शहर के अलग-अलग इलाकों में देश के प्रसिद्ध मंदिरों की तर्ज पर भव्य पंडाल बनाए जा रहे हैं। इसी क्रम में महेश नगर कॉलोनी में इस बार असम के गुवाहाटी स्थित मां कामाख्या मंदिर का प्रतिरूप तैयार किया जा रहा है। भरत मिलाप क्लब की ओर से आयोजित दुर्गोत्सव में श्रद्धालुओं को शक्तिपीठ की भव्यता की झलक देखने को मिलेगी। पंडाल को आकर्षक स्वरूप देने के लिए बंगाल के 60 कारीगर पिछले दो महीने से जुटे हुए हैं।
समिति की ओर से हर साल देश के प्रसिद्ध मंदिरों की थीम पर पंडाल तैयार कराया जाता है। इस बार नीलाचल पहाड़ी पर स्थित मां कामाख्या मंदिर को थीम बनाया गया है। यह मंदिर देश के प्रमुख शक्तिपीठों में शामिल है और मां शक्ति की उपासना के लिए प्रसिद्ध है। पंडाल को मूल मंदिर की तरह भव्य बनाने का प्रयास किया जा रहा है। इसके निर्माण में लकड़ी का बड़े पैमाने पर इस्तेमाल किया जा रहा है, जबकि कपड़े और आकर्षक सजावटी सामग्री से इसे विशेष रूप दिया जा रहा है। पंडाल की सजावट में स्थानीय कलाकार भी सहयोग कर रहे हैं।
पंडाल का निर्माण पूरा होने के बाद यहां मां दुर्गा की भव्य प्रतिमा स्थापित की जाएगी। प्रतिमा को आकर्षक वस्त्रों और आभूषणों से सजाया जाएगा। सप्तमी से श्रद्धालुओं के लिए दर्शन-पूजन शुरू होने की तैयारी है। पंडाल और वहां तक पहुंचने वाले रास्तों को रंग-बिरंगी रोशनी से सजाया जा रहा है, ताकि पूरा परिसर आकर्षण का केंद्र बने।
श्रद्धालुओं की सुरक्षा और सुविधा को ध्यान में रखते हुए विशेष इंतजाम किए जा रहे हैं। पंडाल में आने और बाहर निकलने के लिए अलग-अलग रास्ते बनाए जाएंगे। पूरे परिसर को सीसीटीवी कैमरों से लैस किया जाएगा, जिससे भीड़ पर नजर रखी जा सके। आयोजकों को उम्मीद है कि मां कामाख्या मंदिर की थीम पर तैयार यह पंडाल बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं को आकर्षित करेगा।
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वहीं, नवरात्र के आठवें दिन मां अन्नपूर्णा के दर्शन-पूजन का विशेष महत्व है। वाराणसी में काशी विश्वनाथ मंदिर के पास स्थित मां अन्नपूर्णा मंदिर श्रद्धालुओं की आस्था का प्रमुख केंद्र है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, मां अन्नपूर्णा अन्न और पोषण की देवी हैं। पौराणिक कथा के मुताबिक, जब काशी में भुखमरी का संकट आया, तब भगवान शिव ने मां अन्नपूर्णा से सहायता मांगी। माता ने काशी में किसी को भूखा न रहने देने का वरदान दिया। इसी मान्यता के कारण मां अन्नपूर्णा को काशी की अन्नदात्री देवी के रूप में पूजा जाता है।



