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बीएचयू में उच्च शिक्षा में एआई के उपयोग पर छह दिवसीय पाठ्यक्रम शुरू, बोले कुलपति - एआई रिप्लेसमेंट नहीं, बल्कि असिस्टेंट है

बीएचयू में उच्च शिक्षा में एआई के उपयोग पर छह दिवसीय पाठ्यक्रम शुरू, बोले कुलपति - एआई रिप्लेसमेंट नहीं, बल्कि असिस्टेंट है
Aug 22, 2026, 11:33 AM
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Posted By gagan arora

वाराणसी : काशी हिंदू विश्वविद्यालय के यूजीसी-मालवीय मिशन शिक्षक प्रशिक्षण केंद्र की ओर से उच्च शिक्षा में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) के उपयोग पर छह दिवसीय अल्पकालिक पाठ्यक्रम का शनिवार को शुभारंभ हुआ. 22 से 27 अगस्त तक चलने वाले इस ऑफलाइन पाठ्यक्रम का उद्देश्य शिक्षकों को एआई के व्यावहारिक उपयोग, शिक्षण-अधिगम, शोध और नवाचार में इसके प्रभावी इस्तेमाल के लिए आवश्यक कौशल से सशक्त बनाना है.


उद्घाटन सत्र को संबोधित करते हुए बीएचयू के कुलपति प्रो. अजित कुमार चतुर्वेदी ने कहा कि “एआई रिप्लेसमेंट नहीं, बल्कि असिस्टेंट है.” उन्होंने कहा कि एआई को किसी चमत्कार की तरह देखने के बजाय तकनीकी विकास के अगले चरण के रूप में समझना चाहिए। कंप्यूटर और इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों की तरह एआई भी धीरे-धीरे हमारे जीवन और कार्यप्रणाली का हिस्सा बन रही है.


कुलपति ने कहा कि एआई केवल सूचना खोजने तक सीमित नहीं है, बल्कि बड़े पैमाने पर उपलब्ध ज्ञान और दस्तावेजों को समझने, उनका विश्लेषण करने और उनसे सार्थक निष्कर्ष निकालने में भी सहायता कर सकती है. अपने अनुभव का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि एक साहित्यिक प्रश्न को समझने के लिए उन्होंने चैटजीपीटी का उपयोग किया. इससे उन्हें महसूस हुआ कि एआई केवल प्रासंगिक सामग्री खोजने के बजाय उसके अर्थ और संदर्भ को समझकर उपयोगी जानकारी एवं दृष्टिकोण भी प्रस्तुत कर सकती है. उन्होंने कहा कि यह केवल गूगल सर्च नहीं, बल्कि उससे आगे की तकनीक है.


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प्रो. चतुर्वेदी ने विभिन्न विषयों और संस्थानों से आए प्रतिभागियों के बीच संवाद और नेटवर्किंग को भी महत्वपूर्ण बताया. उन्होंने कहा कि अलग-अलग विषयों के शिक्षकों को एआई के उपयोग के अपने अनुभव साझा करने चाहिए, ताकि इसके बेहतर और जिम्मेदार इस्तेमाल के नए रास्ते सामने आ सकें.


कार्यक्रम के विशिष्ट अतिथि पर्यावरण एवं धारणीय विकास संस्थान के निदेशक प्रो. अखिलेश सिंह रघुवंशी ने एआई को परिवर्तनकारी तकनीक बताते हुए कहा कि इससे भयभीत होने के बजाय इसे समझने और अपनाने की आवश्यकता है. उन्होंने कहा कि लार्ज लैंग्वेज मॉडल्स (LLMs) ने तकनीक के इस्तेमाल को अधिक आसान बनाया है. अब व्यक्ति सामान्य मानवीय भाषा में तकनीक से संवाद कर जटिल विश्लेषण को भी सरल रूप में प्राप्त कर सकता है.


राष्ट्रीय शैक्षिक योजना एवं प्रशासन संस्थान (NIEPA), नई दिल्ली के प्रो. के. श्रीनिवास ने उच्च शिक्षा में एआई के समावेश की आवश्यकता पर चर्चा की. उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 के उद्देश्यों के अनुरूप एआई शिक्षण-अधिगम को अधिक रोचक, सहभागितापूर्ण, इंटरैक्टिव, लचीला, अनुकूलनशील और विद्यार्थियों की व्यक्तिगत जरूरतों के अनुरूप बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है.


यूजीसी-मालवीय मिशन शिक्षक प्रशिक्षण केंद्र, बीएचयू के निदेशक प्रो. आनंद वर्धन शर्मा ने स्वागत वक्तव्य में केंद्र की ओर से शुरू की गई 12 कार्यक्रमों की श्रृंखला की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि इनमें नौ कार्यक्रम पूरे हो चुके हैं और अब तक 1,248 प्रतिभागी प्रशिक्षण प्राप्त कर चुके हैं. दो कार्यक्रम वर्तमान में संचालित हैं, जबकि यह पाठ्यक्रम इसी श्रृंखला का एक अन्य महत्वपूर्ण कार्यक्रम है.


पाठ्यक्रम समन्वयक डॉ. अवधेश कुमार ने बताया कि छह दिवसीय कार्यक्रम में उच्च शिक्षा में एआई के व्यावहारिक उपयोग के साथ शिक्षकों को तकनीकी दक्षता, शिक्षण संबंधी समझ और नैतिक जागरूकता प्रदान करने पर जोर दिया जाएगा.


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कार्यक्रम के दौरान पाठ योजना निर्माण, शिक्षण संसाधनों के विकास, व्यक्तिगत आवश्यकताओं के अनुरूप अधिगम, मूल्यांकन, शोध, पाठ्यक्रम निर्माण और शैक्षणिक प्रशासन में एआई के उपयोग पर चर्चा की जाएगी. पाठ्यक्रम में महाराष्ट्र, कर्नाटक, गुजरात, झारखंड और केरल सहित देश के विभिन्न राज्यों से आए 50 से अधिक प्रतिभागी हिस्सा ले रहे हैं.

काशी में अमित शाह का दौरा, 7 अक्टूबर को सेवा संकल्प यात्रा का स्वागत
काशी में अमित शाह का दौरा, 7 अक्टूबर को सेवा संकल्प यात्रा का स्वागत
वाराणसी :केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह 7 अक्टूबर को काशी आ सकते हैं। इस दौरान वह गुजरात के वडनगर से काशी पहुंचने वाली सेवा संकल्प यात्रा का स्वागत करेंगे। यात्रा में शामिल लोग गुजरात की नदियों का जल लेकर आएंगे, जिससे बाबा विश्वनाथ का जलाभिषेक किया जाएगा।यह यात्रा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के जन्मदिन, 17 सितंबर से शुरू हुए सेवा संकल्प अभियान का हिस्सा है। यह अभियान 17 सितंबर से 17 अक्टूबर तक चलेगा। इसके तहत देशभर में सेवा, स्वच्छता, पौधरोपण और जनकल्याण से जुड़े कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं।सेवा संकल्प यात्रा वडनगर से काशी तक पहुंच रही है। वडनगर प्रधानमंत्री मोदी का जन्मस्थान है, जबकि काशी उनका संसदीय क्षेत्र है। यात्रा के दौरान कई राज्यों और जिलों से गुजरते हुए लोगों को सेवा और जनभागीदारी का संदेश दिया जा रहा है।काशी पहुंचने पर यात्रा का स्वागत किया जाएगा और बाबा विश्वनाथ के दरबार में विशेष पूजा-अर्चना व जलाभिषेक का कार्यक्रम होगा। इस मौके पर कई जनप्रतिनिधियों और कार्यकर्ताओं के शामिल होने की संभावना है।ALSO READ :पूर्व मुख्य सचिव दुर्गा शंकर मिश्र ने संस्कृत विश्वविद्यालय के विकास कार्यों का किया निरीक्षण
पूर्व मुख्य सचिव दुर्गा शंकर मिश्र ने संस्कृत विश्वविद्यालय के विकास कार्यों का किया निरीक्षण
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वाराणसी: उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्य सचिव एवं सेवानिवृत्त आईएएस अधिकारी दुर्गा शंकर मिश्र ने रविवार को सम्पूर्णानन्द संस्कृत विश्वविद्यालय, वाराणसी पहुंचकर परिसर में चल रहे विकास एवं निर्माण कार्यों का निरीक्षण किया। इस दौरान उन्होंने संग्रहालय, लालभवन, पाणिनी भवन, शताब्दी भवन अतिथि गृह, श्रमण विद्या संकाय, श्री श्री आनंदमयी महिला छात्रावास और ऑनलाइन संस्कृत प्रशिक्षण केंद्र का जायजा लिया।निरीक्षण के दौरान दुर्गा शंकर मिश्र ने संबंधित अधिकारियों और कार्यदायी संस्थाओं से निर्माण कार्यों की प्रगति की जानकारी ली। उन्होंने कार्यों को गुणवत्तापूर्ण तरीके से निर्धारित समय सीमा में पूरा करने और जरूरत के अनुसार कार्यों में तेजी लाने के निर्देश दिए।ऑनलाइन संस्कृत शिक्षा व्यवस्था का लिया जायजाऑनलाइन संस्कृत प्रशिक्षण केंद्र में उन्होंने संचालित ऑनलाइन डिप्लोमा कक्षाओं का भौतिक अवलोकन किया। उन्होंने तकनीकी और शिक्षण व्यवस्था की जानकारी लेते हुए इसे और प्रभावी एवं गुणवत्तापूर्ण बनाने के लिए आवश्यक मार्गदर्शन दिया। साथ ही आधुनिक तकनीक के माध्यम से संस्कृत शिक्षा को देश-विदेश तक पहुंचाने की संभावनाओं पर जोर दिया।पांडुलिपियों को बताया भारतीय ज्ञान परंपरा की अमूल्य निधिदुर्लभ पांडुलिपियों के संरक्षण और डिजिटलीकरण कार्यों का भी उन्होंने निरीक्षण किया। ‘उत्कृष्ट ज्ञान भारतम्’ द्वारा किए जा रहे वैज्ञानिक ट्रीटमेंट और डिजिटलीकरण की जानकारी लेते हुए उन्होंने कहा कि ये पांडुलिपियां भारतीय मनीषा की अमूल्य ज्ञान-संपदा हैं। इनका वैज्ञानिक संरक्षण और डिजिटलीकरण आने वाली पीढ़ियों, विद्यार्थियों और शोधार्थियों के लिए महत्वपूर्ण है।संग्रहालय के निरीक्षण के दौरान उन्होंने ऐतिहासिक एवं ज्ञानपरक सामग्री को देखा और इसके संरक्षण, संवर्धन तथा प्रभावी प्रस्तुतीकरण पर जोर दिया।सीएसआर से हो रहे विकास कार्यों की सराहनादुर्गा शंकर मिश्र ने विश्वविद्यालय में चल रहे विकास कार्यों पर प्रसन्नता व्यक्त की। उन्होंने कहा कि सीएसआर फंड के माध्यम से परिसर में विकास कार्य कराए जा रहे हैं और विद्यार्थियों को शुद्ध पेयजल सहित बेहतर संसाधन उपलब्ध कराने की दिशा में काम हुआ है। उन्होंने विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. बिहारी लाल शर्मा के प्रयासों की सराहना की।इस अवसर पर कुलपति प्रो. बिहारी लाल शर्मा ने दुर्गा शंकर मिश्र का पुष्पगुच्छ भेंट कर स्वागत किया। उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालय की ऐतिहासिक और ज्ञानपरक विरासत को सुरक्षित रखते हुए उसे आधुनिक तकनीक से जोड़ना समय की आवश्यकता है। पांडुलिपियों का संरक्षण, संग्रहालय का संवर्धन और ऑनलाइन संस्कृत शिक्षा का विस्तार इसी दिशा में महत्वपूर्ण कदम हैं।ALSO READ: जम्मू-कटरा के लिए 29 सितंबर को रवाना होंगी यूपी और पूर्वांचल की टीमें...निरीक्षण के दौरान कुलानुशासक, वैज्ञानिक प्रो. जितेन्द्र कुमार अधिकारी, प्रो. दिनेश कुमार गर्ग, डॉ. विशाखा शुक्ला, डॉ. विजेन्द्र आर्य, डॉ. विमल कुमार त्रिपाठी सहित संबंधित कार्यदायी संस्थाओं के प्रतिनिधि मौजूद रहे।
जम्मू-कटरा के लिए 29 सितंबर को रवाना होंगी यूपी और पूर्वांचल की टीमें...
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वाराणसी:T10 टेनिस बॉल क्रिकेट एसोसिएशन ऑफ इंडिया के तत्वावधान में आयोजित होने वाली राष्ट्रीय स्तर की प्रतियोगिता में प्रतिभाग करने के लिए उत्तर प्रदेश और पूर्वांचल की टीमें 29 सितंबर को जम्मू-कटरा के लिए रवाना होंगी। प्रतियोगिता को लेकर खिलाड़ियों में खासा उत्साह देखने को मिल रहा है। राष्ट्रीय स्तर के इस आयोजन में प्रदेश और पूर्वांचल का प्रतिनिधित्व करने जा रहे खिलाड़ियों का उत्साह बढ़ाने के लिए *रमना ग्राम प्रधान अमित कुमार पटेल* और *BHU चौकी इंचार्ज सौरभ तिवारी* बिरला ग्राउंड पहुंचे।इस दौरान दोनों ने खिलाड़ियों से मुलाकात कर उनका हौसला बढ़ाया और आगामी प्रतियोगिता के लिए शुभकामनाएं दीं। उन्होंने खिलाड़ियों से कहा कि राष्ट्रीय स्तर के मंच पर खेलते समय जीत हासिल करना महत्वपूर्ण है, लेकिन इसके साथ अनुशासन, टीम भावना और खेल भावना का पालन करना भी उतना ही जरूरी है। उन्होंने खिलाड़ियों से मैदान पर एकजुट होकर पूरी मेहनत, आत्मविश्वास और सकारात्मक सोच के साथ खेलने का आह्वान किया।उन्होंने कहा कि खिलाड़ी जब राष्ट्रीय प्रतियोगिता में उत्तर प्रदेश और पूर्वांचल का प्रतिनिधित्व करते हैं तो उनके प्रदर्शन के साथ-साथ उनका व्यवहार और अनुशासन भी क्षेत्र की पहचान बनता है। ऐसे में सभी खिलाड़ी आपसी तालमेल बनाए रखते हुए बेहतर प्रदर्शन करें और खेल के नियमों का सम्मान करें।उत्तर प्रदेश की टीम में कप्तान कार्तिक गुप्ता के साथ विनायक जायसवाल, हर्षित विश्वकर्मा, सूरज यादव, उज्जवल, अंकित, रोहित, सिद्धार्थ, मिलित, ऋषभ, हिमांशु, रौनक और हर्ष शामिल हैं।वहीं पूर्वांचल की टीम की कमान कृष्णा जायसवाल संभालेंगे। टीम में प्रथम जायसवाल, आर्यन चौबे, बादल, आयुष चौबे, प्रीतम, सौरभ, वैभव, अनवर, सार्थक, यश सिंह, मयंक और पृथ्वी शामिल हैं।खिलाड़ियों ने भी आगामी राष्ट्रीय प्रतियोगिता को लेकर उत्साह व्यक्त किया। खिलाड़ियों ने कहा कि वे पूरी तैयारी और आत्मविश्वास के साथ जम्मू-कटरा पहुंचेंगे तथा मैदान पर अपना सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन करने का प्रयास करेंगे। खिलाड़ियों ने उत्तर प्रदेश और पूर्वांचल की टीम की गरिमा बनाए रखने तथा खेल भावना के साथ प्रतियोगिता में हिस्सा लेने का संकल्प लिया।ALSO READ: देह व्यापार की सूचना पर पुलिस ने गेस्ट हाउस में मारा छापादेह व्यापार की सूचना पर पुलिस ने गेस्ट हाउस में मारा छापा29 सितंबर को दोनों टीमें जम्मू-कटरा के लिए रवाना होंगी, जहां राष्ट्रीय स्तर की प्रतियोगिता में देश के विभिन्न हिस्सों से पहुंचने वाली टीमों के साथ मुकाबला होगा।