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बीएचयू में डिजिटल लर्निंग और बदलते शिक्षण तरीकों पर राउंड टेबल संवाद

बीएचयू में डिजिटल लर्निंग और बदलते शिक्षण तरीकों पर राउंड टेबल संवाद
Aug 22, 2026, 11:25 AM
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Posted By gagan arora

वाराणसी : काशी हिंदू विश्वविद्यालय के शिक्षा संकाय में डिजिटल लर्निंग एवं शिक्षण विधियों में हो रहे बदलाव को लेकर राउंड टेबल संवाद का आयोजन किया गया. चाणक्य प्रेक्षा गृह के सर्वपल्ली सभागार में आयोजित संवाद में वाराणसी के विभिन्न विद्यालयों के प्राचार्यों और शिक्षकों ने डिजिटल माध्यमों के इस्तेमाल, इसकी उपयोगिता और इससे जुड़ी चुनौतियों पर अपने अनुभव साझा किए.


संवाद में वाराणसी के आठ विद्यालयों के प्रतिनिधियों सहित नवोदय विद्यालय भदोही के प्राचार्य और शिक्षा क्षेत्र से जुड़े विशेषज्ञों ने सहभागिता की. सेंट्रल हिंदू बॉयज स्कूल की सुश्री स्वाति अग्रवाल, श्री रणवीर संस्कृत विद्यालय के विकास शर्मा, इंटरनेशनल हिंदू स्कूल नगवा के संतोष तिवारी, संत अतुलानंद विद्यालय के अविनाश पांडेय, बेसिक शिक्षा परिषद के शैलेंद्र विक्रम सिंह, सेंट्रल हिंदू गर्ल्स स्कूल के सिद्धार्थ चौधरी, केंद्रीय विद्यालय मुगलसराय के अमिताभ मिश्र, पूर्व प्राचार्या एसएस पब्लिक स्कूल सुश्री प्रतिभा सिंह और नवोदय विद्यालय भदोही के प्राचार्य डॉ. इकरामुद्दीन सिद्दीकी ने विद्यालयों में डिजिटल लर्निंग के अपने वास्तविक अनुभव साझा किए.


संवाद में सभी प्रतिभागियों ने माना कि वर्तमान समय में डिजिटल लर्निंग शिक्षा का महत्वपूर्ण हिस्सा बन चुकी है, लेकिन इसके साथ नैतिक सजगता और संतुलित उपयोग भी जरूरी है. ऑनलाइन लर्निंग, दीक्षा, MOOCs, स्मार्ट क्लास, एआई प्रयोगशाला और रोबोटिक लैब जैसे माध्यमों के साथ भारत सरकार की ओर से उपलब्ध बोधन ऐप, पीएम ई-विद्या, निपुण भारत योजना आदि संसाधनों के प्रभावी इस्तेमाल पर चर्चा हुई.


प्रतिभागियों ने कहा कि डिजिटल माध्यमों की मदद से विद्यार्थियों को प्रयोगधर्मी और व्यावहारिक विषयों को समझाना आसान हुआ है. जहां विद्यालयों में प्रयोगशालाओं या अन्य संसाधनों की कमी है, वहां डिजिटल माध्यमों से प्रयोग और विषयों को दृश्य रूप में समझाने में मदद मिल सकती है. हालांकि, विद्यालयों में संसाधनों और इंटरनेट कनेक्टिविटी की कमी अभी भी चुनौती बनी हुई है.


संवाद में शिक्षक प्रशिक्षण और सतत प्रशिक्षण की आवश्यकता पर विशेष जोर दिया गया. कहा गया कि तकनीक तेजी से बदल रही है, इसलिए शिक्षकों को नियमित रूप से नए डिजिटल टूल और शिक्षण तकनीकों का प्रशिक्षण दिया जाना जरूरी है। विद्यार्थियों को भी उचित प्रोत्साहन देकर शिक्षण प्रक्रिया में सक्रिय भागीदार बनाने पर जोर दिया गया.


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विशेषज्ञों ने डिजिटल गैजेट के अत्यधिक या अनियंत्रित उपयोग को लेकर भी सावधानी बरतने की बात कही। कहा गया कि डिजिटल माध्यमों का गलत या अत्यधिक इस्तेमाल विद्यार्थियों में तनाव और समय की बर्बादी का कारण बन सकता है. इसलिए डिजिटल लर्निंग का उपयोग आवश्यकता और उद्देश्य के अनुरूप होना चाहिए.


करियर काउंसलिंग और व्यावसायिक कौशल विकास में भी डिजिटल माध्यमों की उपयोगिता पर चर्चा हुई. प्रतिभागियों ने कहा कि डिजिटल लर्निंग को केवल ‘गैप फिलर’ के रूप में इस्तेमाल करना उचित नहीं है। इसके बजाय इसे विद्यार्थियों की समझ, कौशल और रचनात्मकता विकसित करने के प्रभावी माध्यम के तौर पर इस्तेमाल किया जाना चाहिए.


कार्यक्रम का संयोजन प्रो. आलोक गार्डिया, प्रो. मीनाक्षी सिंह और डॉ. अजय सिंह ने किया. स्वागत संकाय प्रमुख प्रो. सुनील कुमार सिंह ने किया, जबकि विषय स्थापना प्रो. मीनाक्षी सिंह ने की. कार्यक्रम का संचालन प्रो. गार्डिया और डॉ. अजय सिंह ने किया. शोध विद्यार्थियों विनायक, अमित एवं अन्य ने आयोजन में सहयोग किया.


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संवाद में डॉ. संजय, डॉ. पंकज, डॉ. मुदित, डॉ. सोमू, डॉ. विनोद, डॉ. अलका, डॉ. सुनीता, डॉ. रश्मि, डॉ. प्रतीक, डॉ. अजीत, डॉ. छाया, डॉ. पूनम और प्रो. शर्मा सहित शिक्षा संकाय के शिक्षकों ने सक्रिय सहभागिता की.

वाराणसी में 11 वर्षीय बालिका से छेड़छाड़ का आरोप, सेना के कर्मचारी पर केस,मासूम से छेड़खानी के आरोप में सेना के हलवदार के खिलाफ मुकदमा ...
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वाराणसीःमासूम से छेड़खानी के आरोप में सेना के हलवदार के खिलाफ कैंट थाना में मुकदमा दर्ज किया गया है. इस मामले में कैंट थाना प्रभारी का कहना है कि पुलिस मामले की जांच कर रही है. जांच में जो तथ्य सामने आएंगे उसके मुताबिक आगे की कार्रवाई की जाएगी.परिजनों ने पुलिस को बताया कि 11 साल की बच्ची दूध लेने के लिए घर से बाहर गई थी. इसी दौरान पड़ोस में रहने वाले सेना के हवालदार ने उसे अपने कमरे में बुलाया. कमरे के अंदर उसने बच्ची के साथ गलत हरकत शुरू कर दिया. घटना के बाद बच्ची वहां से अपने घर पहुंची और परिजनों को पूरी बात बताई. बच्ची की बात सुनकर परिवार के लोग परेशान हो गए.उन्होंने मामले की जानकारी कैंट थाना पुलिस को दी और आरोपी के खिलाफ शिकायत दर्ज कराई. शिकायत मिलने के बाद पुलिस ने मामले को गंभीरता से लेते हुए मुकदमा दर्ज किया. पुलिस अब घटना से जुड़े सभी पहलुओं की जांच कर रही है. बच्ची और उसके परिजनों से भी जानकारी ली जा रही है.ALSO READ:ओवरलोड बालू वाहनों पर कार्रवाई की मांग, ट्रक ऑपरेटर एसोसिएशन ने अधिकारियों को सौंपा पत्रसाथ ही पुलिस आरोपों की पुष्टि के लिए जरूरी साक्ष्य जुटा रही है. जांच के आधार पर आगे की कानूनी कार्रवाई की जाएगी. मामला नाबालिग से जुड़ा होने के कारण पुलिस और परिवार की ओर से बच्ची की पहचान को सार्वजनिक नहीं किया गया है.आरोपी के खिलाफ केस दर्ज हो चुका है और पुलिस पूरे मामले की जांच में जुटी है। पुलिस का कहना है कि जांच में सामने आने वाले तथ्यों और साक्ष्यों के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी।
बनारस में नदी में होगी जलयानों की मरम्मत....
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वाराणसीः इनलैंड वाटरवे ऑथोरिटी ऑफ इंडिया ने रामनगर में बंदरगाह के उत्तरी छोर पर चार बीघा क्षेत्र में बनने वाले शिप रिपेयरिंग सेन्टर की शुरुआत की है. इसके साथ ही वाराणसी देश का पहला शहर होगा जहां नदी में जलयानों की मरम्मयत की जाएगी.कार्यदायी संस्था लार्सन एन्ड टुब्रो जिओ स्ट्रक्चर के कर्मचारियों ने प्राथमिक कार्य शुरू कर दिया है. यहां जहाजों को रिपेयर करने के लिए उत्त्तरी छोर पर एक वाटर चैनल बनाया जाएगा जहा जहाज नदी की मुख्य धारा से अंदर चैनल में रिपेयर होने के लिए आएंगे.कार्यदायी संस्था फिलहाल रिपेयर फैसिलिटी के प्लेटफार्म को बनाने का काम कर रही है उनके मुख्य अभियंता रमेश जोशी ने बताया कि प्रोजेक्ट को दो साल में पूरा करना है. बताया कि बारिश खत्म होने का इंतजार कर रहे थे लेकिन प्रोजेक्ट को जल्दी खत्म करने के लिए जल्दी ही काम शुरू करना पड़ा.ALSO READ: ओवरलोड बालू वाहनों पर कार्रवाई की मांग, ट्रक ऑपरेटर एसोसिएशन ने अधिकारियों को सौंपा पत्रइस बाबत उन्होंने बताया कि देश मे किसी भी नदी पर बनने वाला यह पहला शिप रिपेयरिंग सेंटर है. यहां कुछ जहाजों को क्रेन के माध्यम से ड्राई डाक सूखी सतह पर लाकर रिपेयर करने की सुविधा होगी। इसके साथ ही जहाज में पानी की सतह से ऊपर की खराबी को नदी में ही ठीक कर दिया जाएगा.बताया रि देश मे अभी तक शिप रिपेयरिंग सेन्टर समुद्रों के किनारे ही बनाये जाते है देश मे किसी नदी के ऊपर पहली बार शिप रिपेयरिंग सेन्टर बन रहा है. पहले जहाजों को रिपेयरिंग के लिए कोलकाता जाना होता था जो अब बनारस में भी संभव है.
ओवरलोड बालू वाहनों पर कार्रवाई की मांग, ट्रक ऑपरेटर एसोसिएशन ने अधिकारियों को सौंपा पत्र
ओवरलोड बालू वाहनों पर कार्रवाई की मांग, ट्रक ऑपरेटर एसोसिएशन ने अधिकारियों को सौंपा पत्र
वाराणसी। बालू परिवहन में ओवरलोडिंग और बिना आवश्यक वैध दस्तावेजों के वाहनों के संचालन को लेकर बनारस ट्रक ऑपरेटर एसोसिएशन ने प्रशासन और खनन विभाग से सख्त कार्रवाई की मांग की है। एसोसिएशन के अध्यक्ष अंशुमान सिंह ने संबंधित अधिकारियों को पत्र सौंपकर ओवरलोड एवं बिना आवश्यक आईएसटीपी/वैध कागजात के बालू परिवहन करने वाले वाहनों के खिलाफ तत्काल अभियान चलाने की मांग की।एसोसिएशन के पदाधिकारियों का कहना है कि कुछ समय पहले प्रशासन की ओर से ओवरलोड वाहनों के खिलाफ विशेष अभियान चलाया गया था। इस दौरान विभिन्न थाना क्षेत्रों में बड़ी संख्या में ओवरलोड वाहनों को पकड़ा गया और कार्रवाई की गई। अभियान का असर यह रहा कि कुछ समय तक ओवरलोड बालू वाहनों का संचालन काफी हद तक नियंत्रित रहा, लेकिन कार्रवाई की गति धीमी पड़ने के बाद एक बार फिर ऐसे वाहनों के संचालन की शिकायतें सामने आने लगी हैं।ओवरलोडिंग से वैध ट्रक ऑपरेटरों को नुकसानएसोसिएशन के संरक्षक विजय सिंह ने कहा कि ओवरलोडिंग का सीधा असर निर्धारित क्षमता के अनुसार वाहन चलाने वाले ट्रक मालिकों पर पड़ रहा है। वैध तरीके से क्षमता के अनुरूप बालू परिवहन करने वाले वाहन संचालकों की लागत अधिक आती है, जबकि ओवरलोड वाहन कम लागत में अधिक माल पहुंचाकर अनुचित प्रतिस्पर्धा पैदा करते हैं। इससे नियमों का पालन करने वाले ट्रक ऑपरेटरों के सामने आर्थिक संकट की स्थिति बन रही है।एसोसिएशन ने प्रशासन से मांग की कि पूर्व की तरह नियमित और प्रभावी अभियान चलाया जाए तथा बालू लदे प्रत्येक वाहन के भार और दस्तावेजों की जांच सुनिश्चित की जाए।सड़क क्षति और राजस्व नुकसान की भी जताई आशंकाट्रक ऑपरेटर एसोसिएशन ने कहा कि ओवरलोडिंग का असर केवल परिवहन कारोबार तक सीमित नहीं है। क्षमता से अधिक भार लेकर चलने वाले भारी वाहनों से सड़कों पर अतिरिक्त दबाव पड़ता है, जिससे सड़कें समय से पहले क्षतिग्रस्त हो सकती हैं। वहीं, नियमों का उल्लंघन होने की स्थिति में सरकारी राजस्व को भी नुकसान पहुंचने की आशंका है।बैठक के दौरान एसोसिएशन के पदाधिकारियों और बालू मंडी से जुड़े व्यापारियों ने ओवरलोडिंग के मुद्दे पर चर्चा की। इसके बाद प्रशासन और खनन विभाग से प्रभावी कार्रवाई के लिए पत्र सौंपने का निर्णय लिया गया।ALSO READ: BHU में शुरू हुआ रविवासरीय गीता प्रवचन, कुलसचिव बोले- विद्यार्थियों में भारतीय ज्ञान परंपरा से जुड़ाव जरूरीमिलीभगत के आरोपों की जांच की मांगएसोसिएशन से जुड़े कुछ ऑपरेटरों ने ओवरलोड वाहनों को कथित रूप से पास कराने में बालू माफिया और जिम्मेदार विभागीय अधिकारियों की मिलीभगत के आरोप भी लगाए हैं। हालांकि इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है। एसोसिएशन ने प्रशासन से इन आरोपों की निष्पक्ष जांच कराने की मांग की है। संगठन का कहना है कि आरोप गलत पाए जाएं तो स्थिति स्पष्ट की जाए और यदि किसी स्तर पर नियमों का उल्लंघन या मिलीभगत सामने आती है तो संबंधित लोगों के खिलाफ कार्रवाई की जाए।इस दौरान एसोसिएशन के अध्यक्ष अंशुमान सिंह, संरक्षक विजय सिंह, उपाध्यक्ष कुंवर सिंह, राकेश सिंह, नीतेश सिंह, महामंत्री आनंद भूषण सिंह, उपमहामंत्री शुभांशु सिंह, मंत्री मुकुंद सिंह, धर्मेंद्र यादव, जितेंद्र सिंह, मीडिया प्रभारी अजित कुमार शर्मा, कोषाध्यक्ष अनुराग सिंह (गुड्डू सिंह), सचिव दीपू यादव समेत अन्य पदाधिकारी एवं सदस्य मौजूद रहे।