बीएचयू में डिजिटल लर्निंग और बदलते शिक्षण तरीकों पर राउंड टेबल संवाद

वाराणसी : काशी हिंदू विश्वविद्यालय के शिक्षा संकाय में डिजिटल लर्निंग एवं शिक्षण विधियों में हो रहे बदलाव को लेकर राउंड टेबल संवाद का आयोजन किया गया. चाणक्य प्रेक्षा गृह के सर्वपल्ली सभागार में आयोजित संवाद में वाराणसी के विभिन्न विद्यालयों के प्राचार्यों और शिक्षकों ने डिजिटल माध्यमों के इस्तेमाल, इसकी उपयोगिता और इससे जुड़ी चुनौतियों पर अपने अनुभव साझा किए.
संवाद में वाराणसी के आठ विद्यालयों के प्रतिनिधियों सहित नवोदय विद्यालय भदोही के प्राचार्य और शिक्षा क्षेत्र से जुड़े विशेषज्ञों ने सहभागिता की. सेंट्रल हिंदू बॉयज स्कूल की सुश्री स्वाति अग्रवाल, श्री रणवीर संस्कृत विद्यालय के विकास शर्मा, इंटरनेशनल हिंदू स्कूल नगवा के संतोष तिवारी, संत अतुलानंद विद्यालय के अविनाश पांडेय, बेसिक शिक्षा परिषद के शैलेंद्र विक्रम सिंह, सेंट्रल हिंदू गर्ल्स स्कूल के सिद्धार्थ चौधरी, केंद्रीय विद्यालय मुगलसराय के अमिताभ मिश्र, पूर्व प्राचार्या एसएस पब्लिक स्कूल सुश्री प्रतिभा सिंह और नवोदय विद्यालय भदोही के प्राचार्य डॉ. इकरामुद्दीन सिद्दीकी ने विद्यालयों में डिजिटल लर्निंग के अपने वास्तविक अनुभव साझा किए.
संवाद में सभी प्रतिभागियों ने माना कि वर्तमान समय में डिजिटल लर्निंग शिक्षा का महत्वपूर्ण हिस्सा बन चुकी है, लेकिन इसके साथ नैतिक सजगता और संतुलित उपयोग भी जरूरी है. ऑनलाइन लर्निंग, दीक्षा, MOOCs, स्मार्ट क्लास, एआई प्रयोगशाला और रोबोटिक लैब जैसे माध्यमों के साथ भारत सरकार की ओर से उपलब्ध बोधन ऐप, पीएम ई-विद्या, निपुण भारत योजना आदि संसाधनों के प्रभावी इस्तेमाल पर चर्चा हुई.
प्रतिभागियों ने कहा कि डिजिटल माध्यमों की मदद से विद्यार्थियों को प्रयोगधर्मी और व्यावहारिक विषयों को समझाना आसान हुआ है. जहां विद्यालयों में प्रयोगशालाओं या अन्य संसाधनों की कमी है, वहां डिजिटल माध्यमों से प्रयोग और विषयों को दृश्य रूप में समझाने में मदद मिल सकती है. हालांकि, विद्यालयों में संसाधनों और इंटरनेट कनेक्टिविटी की कमी अभी भी चुनौती बनी हुई है.
संवाद में शिक्षक प्रशिक्षण और सतत प्रशिक्षण की आवश्यकता पर विशेष जोर दिया गया. कहा गया कि तकनीक तेजी से बदल रही है, इसलिए शिक्षकों को नियमित रूप से नए डिजिटल टूल और शिक्षण तकनीकों का प्रशिक्षण दिया जाना जरूरी है। विद्यार्थियों को भी उचित प्रोत्साहन देकर शिक्षण प्रक्रिया में सक्रिय भागीदार बनाने पर जोर दिया गया.

विशेषज्ञों ने डिजिटल गैजेट के अत्यधिक या अनियंत्रित उपयोग को लेकर भी सावधानी बरतने की बात कही। कहा गया कि डिजिटल माध्यमों का गलत या अत्यधिक इस्तेमाल विद्यार्थियों में तनाव और समय की बर्बादी का कारण बन सकता है. इसलिए डिजिटल लर्निंग का उपयोग आवश्यकता और उद्देश्य के अनुरूप होना चाहिए.
करियर काउंसलिंग और व्यावसायिक कौशल विकास में भी डिजिटल माध्यमों की उपयोगिता पर चर्चा हुई. प्रतिभागियों ने कहा कि डिजिटल लर्निंग को केवल ‘गैप फिलर’ के रूप में इस्तेमाल करना उचित नहीं है। इसके बजाय इसे विद्यार्थियों की समझ, कौशल और रचनात्मकता विकसित करने के प्रभावी माध्यम के तौर पर इस्तेमाल किया जाना चाहिए.
कार्यक्रम का संयोजन प्रो. आलोक गार्डिया, प्रो. मीनाक्षी सिंह और डॉ. अजय सिंह ने किया. स्वागत संकाय प्रमुख प्रो. सुनील कुमार सिंह ने किया, जबकि विषय स्थापना प्रो. मीनाक्षी सिंह ने की. कार्यक्रम का संचालन प्रो. गार्डिया और डॉ. अजय सिंह ने किया. शोध विद्यार्थियों विनायक, अमित एवं अन्य ने आयोजन में सहयोग किया.
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संवाद में डॉ. संजय, डॉ. पंकज, डॉ. मुदित, डॉ. सोमू, डॉ. विनोद, डॉ. अलका, डॉ. सुनीता, डॉ. रश्मि, डॉ. प्रतीक, डॉ. अजीत, डॉ. छाया, डॉ. पूनम और प्रो. शर्मा सहित शिक्षा संकाय के शिक्षकों ने सक्रिय सहभागिता की.



