प्रो. बिहारी लाल शर्मा ने दूसरे कार्यकाल के लिए संभाला कुलपति पद का कार्यभार

वाराणसी: सम्पूर्णानंद संस्कृत विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. बिहारी लाल शर्मा ने शनिवार को दूसरे कार्यकाल के लिए पुनः कुलपति पद का कार्यभार ग्रहण किया, कुलपति कार्यालय में वैदिक मंत्रोच्चार के बीच उन्होंने कार्यभार संभाला. इस दौरान उन्होंने विश्वविद्यालय की 235 वर्षों की गौरवशाली परंपरा को आगे बढ़ाते हुए संस्कृत और भारतीय ज्ञान परंपरा को वैश्विक स्तर पर नई पहचान दिलाने का संकल्प जताया.
प्रो. शर्मा ने कहा कि प्राच्य विद्या के इस प्राचीन केंद्र के कुलपति के रूप में दोबारा दायित्व मिलना उनके लिए सम्मान के साथ बड़ी जिम्मेदारी भी है. राज्यपाल एवं कुलाधिपति आनंदीबेन पटेल द्वारा उन पर दोबारा जताए गए विश्वास को वे विश्वविद्यालय परिवार के सामूहिक उत्तरदायित्व के रूप में स्वीकार करते हैं. उन्होंने कहा कि इस विश्वास को पारदर्शिता, अनुशासन, समर्पण और निरंतर कर्मशीलता के साथ सार्थक किया जाएगा.
235 साल पुरानी विरासत को वैश्विक पहचान दिलाने का लक्ष्य
कुलपति ने कहा कि काशी स्थित संस्कृत विश्वविद्यालय 235 वर्षों से संस्कृत और भारतीय ज्ञान परंपरा की धारा को आगे बढ़ा रहा है। यह केवल शिक्षण संस्था नहीं, बल्कि भारत की प्राच्य ज्ञान-संपदा का महत्वपूर्ण केंद्र है। दूसरे कार्यकाल में इस विरासत को संरक्षित करते हुए संस्कृत और भारतीय ज्ञान परंपरा को आधुनिक अकादमिक आवश्यकताओं से जोड़कर वैश्विक स्तर पर स्थापित करने का प्रयास किया जाएगा।
उन्होंने कहा कि पिछले कार्यकाल में शुरू किए गए और लंबित रह गए कार्यों को प्राथमिकता के आधार पर पूरा किया जाएगा। साथ ही विश्वविद्यालय की भविष्य की जरूरतों को देखते हुए नई योजनाओं और विकास कार्यों को स्पष्ट कार्ययोजना के साथ आगे बढ़ाया जाएगा।
विद्यार्थी हित पर रहेगा विशेष जोर
प्रो. शर्मा ने कहा कि विद्यार्थियों को भारतीय परंपरा से जोड़े रखने के साथ उन्हें आधुनिक ज्ञान, तकनीक और समकालीन प्रतिस्पर्धा के लिए तैयार करना जरूरी है। विद्यार्थियों से सीधे संवाद स्थापित कर उनकी शैक्षणिक और मूलभूत समस्याओं का समयबद्ध समाधान किया जाएगा। पठन-पाठन व्यवस्था को अधिक गुणवत्तापूर्ण और विद्यार्थी केंद्रित बनाने के साथ स्वच्छ पेयजल सहित अन्य मूलभूत सुविधाओं में सुधार को भी प्राथमिकता दी जाएगी।
शिक्षकों की कमी दूर करने के लिए होगी नियुक्ति
कुलपति ने कहा कि विश्वविद्यालय में कई शिक्षक और आचार्य सेवानिवृत्त हो चुके हैं, जिससे अध्ययन-अध्यापन प्रभावित हुआ है। निर्धारित विधिक प्रक्रिया के तहत शिक्षकों की नियुक्ति कर इस कमी को दूर किया जाएगा। शिक्षक नियुक्ति से नियमित पठन-पाठन के साथ शोध, प्रकाशन और अन्य अकादमिक गतिविधियों को भी गति मिलेगी।
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राजभवन के निर्देशों का होगा पालन
प्रो. शर्मा ने कहा कि विश्वविद्यालय प्रशासन राजभवन से प्राप्त निर्देशों का अक्षरशः पालन सुनिश्चित करेगा। प्रशासनिक व्यवस्था में अनुशासन, पारदर्शिता और जवाबदेही को मजबूत किया जाएगा। लंबित कार्यों का निर्धारित समयसीमा में निस्तारण करने पर भी जोर रहेगा।
उन्होंने विश्वविद्यालय के शिक्षक, अधिकारी, कर्मचारी और विद्यार्थियों से विकास यात्रा में सक्रिय भागीदारी का आह्वान किया। कहा कि सामूहिक प्रयासों से ही इस प्राचीन ज्ञानपीठ को आधुनिक युग के अनुरूप सशक्त और प्रभावशाली वैश्विक ज्ञान-केंद्र बनाया जा सकता है।
ज्ञात हो कि राज्यपाल एवं कुलाधिपति आनंदीबेन पटेल ने 17 अगस्त 2026 को प्रो. बिहारी लाल शर्मा को विश्वविद्यालय के 38वें कुलपति के रूप में दूसरे कार्यकाल के लिए नियुक्त किया था। इससे पहले उन्होंने 22 अगस्त 2023 को 37वें कुलपति के रूप में कार्यभार संभाला था। पुनर्नियुक्ति के बाद शनिवार को उन्होंने 38वें कुलपति के रूप में दूसरे कार्यकाल का कार्यभार ग्रहण किया।



