पूरब अंग गायकी का प्रशिक्षण देने को तीन दिवसीय कार्यशाला शुरू

वाराणसीः बीएचयू के संगीत एवं मंच कला संकाय के गायन विभाग की ओर से 'पूरब के रंग' विषय पर तीन दिवसीय कार्यशाला की शुरुआत सोमवार हुई. कार्यशाला का उद्देश्य विद्यार्थियों को पूरब अंग गायकी की परंपरा, शैलीगत विशेषताओं एवं व्यावहारिक पक्षों का प्रशिक्षण देना है.
संकाय की अधिष्ठाता एवं प्रमुख प्रो. संगीता पंडित तथा आयोजन सचिव डा. मधुमिता भट्टाचार्य एवं डा. श्यामा कुमारी ने बताया कि यह वर्तमान शैक्षणिक सत्र की प्रथम कार्यशाला है. जिसका उद्देश्य विद्यार्थियों को भारतीय शास्त्रीय संगीत की समृद्ध पूरब अंग परंपरा से परिचित कराना तथा इस विशिष्ट गायन शैली का व्यावहारिक प्रशिक्षण प्रदान करना है. कार्यशाला की प्रशिक्षक महिला महाविद्यालय की आचार्य प्रो. ऋचा कुमार हैं जो प्रसिद्ध शास्त्रीय एवं उपशास्त्रीय गायिका हैं। उद्घाटन सत्र में उनका अंगवस्त्र एवं पुष्पगुच्छ भेंट कर स्वागत एवं सम्मान किया गया। उन्होंने पूरब अंग गायकी की शैलीगत विशेषताओं, बोल-बनाव, भावाभिव्यक्ति तथा ठुमरी की प्रस्तुति पर विद्यार्थियों को व्यावहारिक प्रशिक्षण प्रदान किया. उन्होंने कार्यशाला में कला के भाव के साथ विद्यार्थियों को जोड़ने का प्रयास किया.
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कार्यशाला में बीपीए, एमपीए एवं पीएचडी के विद्यार्थियों के साथ महिला महाविद्यालय के छात्र-छात्राओं ने भी उत्साहपूर्वक सहभागिता की। इस अवसर पर संकाय की विशिष्ट पूर्व छात्रा एवं सुप्रसिद्ध गायिका मुंबई की प्रियंका भट्टाचार्य की उपस्थिति रही. संकाय के आचार्यों द्वारा उनका स्वागत एवं सम्मान किया गया.
कार्यक्रम का प्रभावी मंच संचालन गायन विभाग के शोधार्थी कृष्ण कुमार तिवारी ने किया. कार्यशाला का प्रथम दिवस विद्यार्थियों की उत्साहपूर्ण सहभागिता के साथ सफलतापूर्वक संपन्न हुआ.



