19 साल बाद शिवपुर में फिर बनेगा स्वर्ण मंदिर का प्रतिरूप, 200 कारीगर और वॉलंटियर संभालेंगे आयोजन की तैयारी...
वाराणसी : नवरात्र के साथ ही काशी में दुर्गा पूजा पंडालों की भव्यता देखने को मिल रही है। शहर के अलग-अलग इलाकों में देश के प्रसिद्ध मंदिरों की तर्ज पर पंडाल तैयार किए जा रहे हैं। इसी क्रम में शिवपुर न्यू कॉलोनी में इस बार अमृतसर के प्रसिद्ध स्वर्ण मंदिर का प्रतिरूप बनाया जा रहा है। शिवपुर न्यू कॉलोनी दुर्गापूजा समिति की ओर से आयोजित इस उत्सव में श्रद्धालुओं को स्वर्ण मंदिर की भव्यता और आध्यात्मिक वातावरण की झलक देखने को मिलेगी। खास बात यह है कि वर्ष 2007 के बाद 19 साल के अंतराल पर समिति फिर से स्वर्ण मंदिर की थीम पर पंडाल तैयार करा रही है। इस बार इसे पहले से अधिक भव्य रूप देने की तैयारी है।
पंडाल को स्वर्ण मंदिर की तर्ज पर सुनहरे रंग से सजाया जा रहा है। मंदिर के सामने पवित्र सरोवर का दृश्य भी तैयार किया जाएगा, जिससे श्रद्धालुओं को अमृतसर के स्वर्ण मंदिर जैसा अनुभव मिल सके। पंडाल के निर्माण में कारीगर जुटे हुए हैं और सजावट को आकर्षक बनाने पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है।
दुर्गोत्सव का एक प्रमुख आकर्षण दस मिनट का इलेक्ट्रॉनिक शो भी होगा। इसमें मां दुर्गा के दिव्य स्वरूप और असुर वध की कथा को आधुनिक तकनीक के माध्यम से प्रस्तुत किया जाएगा। पंडाल में आकर्षक लाइटिंग के साथ लेजर लाइट का भी इस्तेमाल किया जाएगा, जिससे इसकी भव्यता दूर से ही दिखाई देगी।
श्रद्धालुओं की सुरक्षा और भीड़ प्रबंधन के लिए समिति की ओर से विशेष इंतजाम किए जा रहे हैं। आयोजन के दौरान करीब 200 स्वयंसेवक भीड़ को नियंत्रित करने और श्रद्धालुओं की सुविधा सुनिश्चित करने के लिए तैनात रहेंगे। समिति का प्रयास है कि भक्त आसानी से पंडाल में पहुंचकर मां दुर्गा के दर्शन कर सकें और इलेक्ट्रॉनिक शो का आनंद ले सकें।
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वहीं, नवरात्र के छठवें दिन मां कात्यायनी के दर्शन-पूजन का विशेष महत्व है। वाराणसी में घासी टोला स्थित सिंधिया घाट के पास मां कात्यायनी का मंदिर है। मां दुर्गा के नौ स्वरूपों में छठवें स्वरूप की पूजा इस दिन की जाती है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, मां कात्यायनी शक्ति, साहस और अभय का प्रतीक हैं। भक्त सुख-समृद्धि और कष्टों से मुक्ति की कामना के साथ मां के दरबार में पहुंचते हैं।



