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वाराणसी में एनसीसी कैडेट्स की 10 दिवसीय जलयात्रा, वायुसेना अधिकारी ने की शुरूआत

वाराणसी में एनसीसी कैडेट्स की 10 दिवसीय जलयात्रा, वायुसेना अधिकारी ने की शुरूआत
Nov 10, 2025, 08:05 AM
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Posted By Gaandiv

वाराणसी - 7 - यूपी नेवल एनसीसी वाराणसी की ओर से सोमवार को उत्तर प्रदेश एनसीसी निदेशालय द्वारा आयोजित नदी नौका अभियान का फ्लैग-ऑफ प्रयागराज से हुआ. यह अभियान गंगा नदी के किनारे करीब 212 किलोमीटर की दूरी तय करेगा. “नदी से नया भारत” थीम के अंतर्गत प्रयागराज से वाराणसी तक आयोजित नदी नौका अभियान 10 दिनों तक चलेगा. इस अभियान में नौकाएँ गंगा नदी के माध्यम से रोमांचक जलयात्रा करते हुए रास्ते में आने वाले 10 विभिन्न गांवों और घाटों पर रुकेंगी.


नदी संरक्षण, स्वच्छता, पर्यावरण जागरूकता पर जोर


प्रत्येक स्थान पर स्थानीय लोगों के बीच नदी संरक्षण, स्वच्छता, पर्यावरण जागरूकता और आत्मनिर्भरता से जुड़ी गतिविधियाँ आयोजित की जायेगी. एनसीसी कैडेट्स और नौसेना के सदस्य जनजागरण रैली, स्वच्छता अभियान, तथा सांस्कृतिक कार्यक्रमों के माध्यम से संदेश फैलाएंगे. अभियान की थीम नदी से नया भारत है, यह एक प्रेरणादायक और दूरदर्शी थीम है, जिसका उद्देश्य भारत की नदियों के महत्व को उजागर करना और उनके माध्यम से देश के विकास, आत्मनिर्भरता और पर्यावरण संतुलन को बढ़ावा देना है. इस दौरान गांवों में जलपान के साथ सांस्‍क2तिक कार्यक्रमों के जरिए लोगों को जागरूक किया जाएगा.

एनसीसी के 60 कैडेट अभियान में शामिल


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ऐसा माना जाता है कि भारत की नदियाँ केवल जल का स्रोत नहीं हैं, बल्कि वे हमारी संस्कृति, सभ्यता, और जीवनधारा का प्रतीक हैं. वहीं, नदियों को स्वच्छ, जीवंत और संरक्षित रखें, तो यही नदियाँ एक नए, समृद्ध और आत्मनिर्भर भारत की नींव बन सकती हैं. एनसीसी के 60 कैडेट अभियान में विविधता में एकता का प्रतीक हैं और पर्यावरण संरक्षण के प्रति जागरूकता फैलाने का कार्य कर रहे हैं.

नदी नौका अभियान अधिकारी कमांडर निखिल वैश ने कहा कि 'यह नदी नौका अभियान एक प्रेरणादायक थीम है, जो भारत के विकास, आत्मनिर्भरता और पर्यावरणीय संतुलन को नदियों से जोड़ती है. इसका मुख्य उद्देश्य यह बताना है कि नदियाँ केवल जल का स्रोत नहीं हैं, बल्कि हमारी संस्कृति, अर्थव्यवस्था, परिवहन, कृषि और जीवन का आधार हैं.

काशी में संतों की बैठक, स्‍वामी अविमुक्‍तेश्‍वरानंद  के बयान का विरोध
काशी में संतों की बैठक, स्‍वामी अविमुक्‍तेश्‍वरानंद के बयान का विरोध
वाराणसी : धर्मनगरी काशी में शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद के बयान को लेकर संत समाज में नाराजगी बढ़ती नजर आ रही है. वाराणसी स्थित पातालपुरी मठ में बुधवार को काशी के कई संतों की बैठक आयोजित की गई, जिसमें रामानंदी संप्रदाय के खिलाफ की गई टिप्पणी की कड़ी आलोचना की गई.बैठक की अध्यक्षता जगद्गुरु बालकदेवाचार्य ने की. इस दौरान संतों ने कहा कि रामानंदी संप्रदाय सनातन धर्म की एक महत्वपूर्ण परंपरा है और उसके खिलाफ इस तरह की टिप्पणी संत समाज को स्वीकार नहीं है.संतों का कहना था कि धर्म और परंपरा से जुड़े विषयों पर विवादित बयान देना उचित नहीं है, क्योंकि इससे समाज में भ्रम और मतभेद पैदा होते हैं. उन्होंने कहा कि सनातन धर्म की परंपराओं और मर्यादाओं का सम्मान सभी को करना चाहिए.ALSO READ : क्या हैं Cluster Bombs, क्यों इन्हें माना जाता है War Crime ...बैठक में मौजूद संतों ने यह भी कहा कि संत समाज किसी भी तरह से सनातन धर्म को बांटने की कोशिशों को स्वीकार नहीं करेगा. संतों ने अपील की कि धार्मिक और सामाजिक मुद्दों पर बयान देते समय संयम और जिम्मेदारी का पालन किया जाना चाहिए. संत समाज ने यह भी स्पष्ट किया कि अगर इस तरह के बयान आगे भी सामने आते हैं तो देशभर के संतों के साथ चर्चा कर आगे की रणनीति तय की जाएगी. साथ ही सभी संतों ने सनातन धर्म की एकता और परंपरा को बनाए रखने का संकल्प दोहराया.
वाराणसी कचहरी के 10 साल पुराने हैंड ग्रेनेड बरामदगी के मामले में कोर्ट सख्त, 13 तक मांगी रिपोर्ट
वाराणसी कचहरी के 10 साल पुराने हैंड ग्रेनेड बरामदगी के मामले में कोर्ट सख्त, 13 तक मांगी रिपोर्ट
वाराणसी: कचहरी में हैंड ग्रेनेड बरामदगी के 10 साल पुराने मामले पर अदालत ने सख्त रुख अपनाया है. मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट मनीष कुमार की अदालत ने कैंट थानाध्यक्ष को पत्र भेजकर विवेचना में प्रगति की रिपोर्ट 13 मार्च तक पेश करने को कहा है. अदालत ने कहा कि कैंट थाने में 2016 में प्राथमिकी दर्ज की गई थी. गंभीर मामला होने के बावजूद अब तक विवेचना पूरी नहीं की गई है, इसलिए 13 मार्च तक प्रगति रिपोर्ट अदालत में भेजी जाए. अधिवक्ता नित्यानंद राय ने बताया कि अदालत ने 9 मार्च को भी आख्या तलब की थी, लेकिन रिपोर्ट प्रस्तुत नहीं की गई. इसके बाद अदालत ने कैंट थानाध्यक्ष को लिखित पत्र जारी कर 13 मार्च तक हर हाल में प्रगति रिपोर्ट प्रस्तुत करने का निर्देश दिया है.यह भी पढ़ें: क्या हैं Cluster Bombs, क्यों इन्हें माना जाता है War Crime ...बता दें कि वाराणसी जिला एवं सत्र न्यायालय में 10 साल पहले मिले ग्रेनेड के मामले में सीजेएम ने रिपोर्ट तलब की थी. मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट ने कैंट थाने से विवेचक को आख्या के साथ कोर्ट बुलाया था. पिछले 10 साल में केस को लेकर प्रगति भी मांगी. इसके लिए नौ मार्च की तारीख तय की गई थी. न्यायिक मजिस्ट्रेट मनीष कुमार की अदालत में बनारस बार के पूर्व महामंत्री नित्यानंद राय ने प्रार्थना पत्र देकर बनारस कचहरी में दिनांक 23 अप्रैल 2016 को हैंड ग्रेनेड बरामद होने के मामले में प्रगति रिपोर्ट तलब करने मांग की थी. वकील ने अदालत को बताया कि कैंट थाने में 23 अप्रैल 2016 को केस दर्ज कराई गई बताया गया कि कचहरी परिसर में चेकिंग के दौरान एक ग्रेनेड जो सेना अथवा अर्धसैनिक बलों के द्वारा विशेष परिस्थिति में युद्ध के दौरान प्रयोग में लाया जाता है.अधिवक्ताओं की चौकी के पास से ग्रेनेड बरामदसंदिग्ध अवस्था में कचहरी के गेट नंबर दो से प्रवेश करने पर नीम के पेङ के पास अधिवक्ताओं की चौकी के पास से ग्रेनेड बरामद हुआ. ग्रेनेड से अज्ञात अपराधियों द्वारा विस्फोट करके कचहरी परिसर में आने वाले अधिवक्ता एवं अधिकारियों के जीवन को ख़तरे में डालने व संपत्ति को गंभीर क्षति पहुंचाने के उद्देश्य ही रखा गया था. ग्रेनेड बरामदगी की सूचना पर अधिवक्ता व वादकारीयो मे भगदड़ की स्थिति पैदा हो गई थी. तब उस वक़्त के बनारस बार के महामंत्री नित्यानंद राय ने साहस का परिचय दिखाते हुए पुलिस के माइक के द्वारा सम्पूर्ण कचहरी को ख़ाली कराने में अभूतपूर्व योगदान दिया था.
क्या हैं Cluster Bombs, क्यों इन्हें माना जाता है War Crime ...
क्या हैं Cluster Bombs, क्यों इन्हें माना जाता है War Crime ...
Cluster Bombs: पश्चिम एशिया में जारी युद्ध में अब ईरान ने इजराइल पर मिसाइल हमलों की एक और लहर शुरू कर दी है. खबरों के अनुसार, क्लस्टर बमों से लैस बैलिस्टिक मिसाइलों ने होलोन और बात याम समेत कई शहरों को निशाना बनाया. ये हमले मोजतबा खामेनेई के सत्ता संभालने के बाद हुए.जानकारी के मुताबिक अब युद्ध में ईरान Cluster Bombs का प्रयोग कर रहा है. तो आइये जानते हैं क्या होते है Cluster Bombs और यह कैसे काम करता है....क्या होते हैं क्लस्टर बमबता दें कि- क्लस्टर बम ऐसे हथियार हैं जिन्हें पारंपरिक हथियारों से अलग विनाशकारी प्रभाव के लिए डिज़ाइन किया गया है. एक बड़े विस्फोटक को ले जाने के बजाय, दर्जनों या सैकड़ों छोटे छोटे विस्फोटक ले जाए जाते हैं. ये छोटे बम एक विस्तृत क्षेत्र में फैल जाते हैं, जिससे बड़ी तबाही मच सकती है, इससे नागरिकों की मौत बड़ी संख्या में हो सकती है और घटनास्थल पर बचाव एवं राहत कार्यों में जटिलता आती है. इसे रोक पाना भी मुश्किल होता है.क्लस्टर बम कई रूपों में हो सकते हैं, जिनमें तोप के गोले, मिसाइलें या हवाई बम शामिल हैं, और इन्हें जमीन, समुद्र या हवा से लॉन्च किया जा सकता है. मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, ईरान की खोर्रमशहर, इमाद और ग़द्र मिसाइल श्रृंखला की कई मिसाइलों में क्लस्टर वॉरहेड लगे हुए हैं.कैसे काम करते हैं क्लस्टर बमबता दें कि,क्लस्टर बम हवा में खुलकर दर्जनों छोटे छोटे बम के रूप में बिखेरते हैं जो बड़े इलाके को निशाना बनाते हैं और बड़ी तबाही मचाते हैं. इजरायल के तेल अवीव जैसी घनी आबादी वाले इलाकों में इनका इस्तेमाल किया गया है. क्लस्टर बम को अंतरराष्ट्रीय कानून वॉर क्राइम मानता है क्योंकि ये छोटे बम जमीन पर गिरते ही बिखर जाते हैं और लंबे समय तक खतरा पैदा करते हैं. क्लस्टर बम आमतौर पर जमीन से कई किलोमीटर ऊपर बिखेरे जाते हैं. एक स्प्रिंग बड़ी संख्या में छोटे छोटे बमों को गुच्छे में छोड़ता है और उन्हें एक बड़े इलाके में बिखेर दिया जाता है, इसे छोड़ने के समय से पहले विस्फोट को रोकने वाले सुरक्षा उपकरण को हटाकर उन्हें सक्रिय भी कर देता है ताकि नुकसान ज्यादा हो. ऊंचाई अधिक होने के कारण मिसाइल रक्षा प्रणालियों के लिए उन्हें रोक पाना बड़ी चुनौती है. कुछ मामलों में, बमों में पैराशूट या अन्य तंत्र लगे होते हैं जो उनके गिरने की गति को धीमा कर देते हैं यदि हवा बमों को लक्ष्य क्षेत्र से दूर ले जाती है तो प्रभावित क्षेत्र का विस्तार ज्यादा हो सकता है.बम में धातु के छर्रेजानकारी के मुताबिक,क्लस्टर बम कई प्रकार के होते हैं जिन्हें विभिन्न उद्देश्यों के लिए डिज़ाइन किया जाता है. इसमें विस्फोटक सामग्री के अलावा धातु के छर्रे भी होते हैं. कई मामलों में, विस्फोट के दौरान धातु का आवरण स्वयं ही टूट जाता है, जिससे नुकीले छर्रे बनते हैं. कुछ बम जमीन पर गिरने से ठीक पहले विस्फोट करने के लिए डिज़ाइन किए जाते हैं ताकि धातु के टुकड़े एक व्यापक क्षेत्र में फैल सकें.ALSO READ : इजराइल में कई जगह बमबारी, ईरान ने खोली पोलक्लस्टर बम वॉर क्राइम क्यों?...क्लस्टर बमों के व्यापक फैलाव और बिना फटे बमों से उत्पन्न जोखिम इन्हें नागरिकों के लिए विशेष रूप से खतरनाक बनाते हैं. इन जोखिमों के कारण, क्लस्टर बमों का उपयोग व्यापक रूप से युद्ध अपराध माना जाता है. आज तक, 111 देशों ने ऐसे हथियारों के उपयोग, उत्पादन और व्यापार पर प्रतिबंध लगाने वाले एक अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन पर हस्ताक्षर किए हैं. ईरान, इज़राइल और अमेरिका ने इनपर हस्ताक्षर नहीं किया है. इज़राइल पर कई बार क्लस्टर बमों का उपयोग करने का आरोप लगा है, विशेष रूप से लेबनान में. संधि पर हस्ताक्षर करने वाले देशों में लेबनान, इराक और "फिलिस्तीन" शामिल हैं, जैसा कि सम्मेलन के दस्तावेजों में कहा गया है.स्ट्रेट ऑफ़ हॉर्मेज़ में ईरान मैरीन माइन CNN की रिपोर्ट के अनुसार, ईरान ने होर्मुज जलडमरूमध्य में बारूदी सुरंगें बिछाना शुरू कर दिया है. इसी बीच, अमेरिकी सेना ने महत्वपूर्ण जहाजरानी मार्ग में बारूदी सुरंगें बिछाने वाली 10 संदिग्ध नौकाओं पर हमला कर उन्हें नष्ट कर दिया.इस बीच अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को लेकर ईरान को कड़ी चेतावनी दी. उन्होंने कहा है कि अगर ईरान ने होर्मुज स्ट्रेट में समुद्री सुरंगें बिछाने की कोशिश की, तो अमेरिका उस पर बड़ी सैन्य कार्रवाई करेगा. बता दें कि होर्मुज स्ट्रेट दुनिया का बहुत अहम समुद्री रास्ता है. हर साल दुनिया के करीब 20 फीसदी तेल इसी रास्ते से होकर गुजरता है. इसलिए यह दुनिया का सबसे अहम एनर्जी चोकपॉइंट है.