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अमेरिका की हिरासत में वेनेजुएला के राष्ट्रपति मादुरो, ट्रंप का बड़ा दावा

अमेरिका की हिरासत में वेनेजुएला के राष्ट्रपति मादुरो, ट्रंप का बड़ा दावा
Jan 03, 2026, 01:47 PM
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Posted By Preeti Kumari

अमेरिका ने वेनेजुएला के राष्ट्रपति निकोलस मादुरो को आज गिरफ्तार कर लिया है. राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एक बड़ा दावा करते हुए कहा कि अमेरिका ने वेनेजुएला में एक बड़ी कार्रवाई की है. इस ऑपरेशन में राष्ट्रपति निकोलस मादुरो और उनकी पत्नी सीलिया फ्लोरेस को अपनी हिरासत में लेकर देश से बाहर निकाल दिया है. ट्रंप ने यह बयान अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर दिया है. यह कार्रवाई अकेले नहीं, बल्कि अमेरिकी कानून प्रवर्तन एजेंसियों के साथ मिलकर की गई है. ट्रंप के मुताबिक इस पूरे ऑपरेशन की सभी जानकारी एक प्रेस कॉन्फ्रेंस के जरिए दी जाएगी. वेनेजुएला के राष्ट्रपति निकोलस मादुरो को अमेरिका की डेल्टाफोर्स ने पकड़ा है.


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क्या चीन भागने वाले थे मादुरो


वेनेजुएला के राष्ट्रपति निकोलस मादुरो पर लगातार डोनाल्ड ट्रंप दबाव बनाने के लिए कैरिबियन में बड़े पैमाने पर अपनी सेना तक तैनात कर रखी थी. जिसके चलते लगातार ड्रग्स वाली नाव पर हमले हो रहे थे. इन्हें देखकर मादुरो ने ये संकेत दिया था कि वह ड्रग तस्करी और तेल जैसे संवेदनशील मुद्दों पर बातचीत के लिए तैयार हैं. यहां तक की राष्ट्रपति मादुरो ने वेनेजुएला के सरकारी टीवी को दिए एक इंटरव्यू में कहा कि अमेरिका जहां चाहे और जब चाहे बातचीत कर सकता है, इसके लिए वो पुरी तरह से तैयार है, इस बयान से पहले उन्होंने बीते शुक्रवार को चीन विशेष दूत किउ शियाओची से वेनेजुएला की राजधानी कराकस में मुलाकात की थी. जिसे देख अटकलें लगाई जा रही हैं कि चीन को इस तरह के अटैक की खबर थी और राष्ट्रपति निकोलस मादुरो को देश से बाहर निकालने का ऑफर दिया गया. लेकिन चीन जाने से पहले ही उन्हें अमेरिका ने अपनी हिरासत में ले लिया.


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कराकस में सुनाई दिए जोरदार धमाके


मादुरो के चीन भागने वाले दावे के कुछ ही घंटों पहले वेनेजुएला की राजधानी कराकस में जोरदार धमाके सुनाई देने लगे. जहां कई घंटों तक शहर के कई इलाकों में विस्फोटों की आवाजें सुनाई दीं. आसमान में लड़ाकू विमान उड़ते दिखे और कई जगहों पर काले धुएं के गुबार नजर आए. शहर के दक्षिणी हिस्से में स्थित एक बड़े सैन्य अड्डे के आसपास बिजली गुल हो गई. लोग घबराकर सड़कों पर निकल आए और मोबाइल से वीडियो बनाने लगे. इसका मंजर सोशल मीडिया पर सामने आए वीडियो में तेज रोशनी और धमाकों के बाद उठता धुआं साफ देखा जा सकता है.


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इस मामले में वेनेजुएला सरकार ने एक बड़ा बयान देते हुए कहा कि हमले सिर्फ कराकस तक सीमित नहीं थे बल्कि मिरांडा अरागुआ और ला गुएरा राज्यों में भी सैन्य ठिकानों को निशाना बनाया गया है. इसके बाद राष्ट्रपति मादुरो की ओर से देश में राष्ट्रीय आपातकाल की घोषणा की गई और सुरक्षा बलों को पूरी तरह अलर्ट कर दिया गया. वहीं इस हमले का आरोप अमेरिका पर लगाया गया है.

खत्म होने के सफर पर ईरान और अमेरिका की जंग,  
राष्ट्रपति पेजेशकियन ने रखी ये शर्तें...
खत्म होने के सफर पर ईरान और अमेरिका की जंग, राष्ट्रपति पेजेशकियन ने रखी ये शर्तें...
अमेरिका-इजरायल और ईरान के बीच चल रहे जंग का आज 13वां दिन है. जिसमें कई लोगों की जान चली गई तो कई लोग गंभीर रूप से घायल भी हो गये हैं. जिनका इलाज अस्पताल में चल रहा है. इस महायुद्ध में ना जाने कितने लोगों का घर तक तबाह हो चुका है. इस संघर्ष में कई दिनों से पश्चिमी एशिया सुलगने को मजबूर हो चुका है. तो दूसरी ओर ईरान की तरफ से इस जंग को जल्द से जल्द खत्म करने का दावा किया जा रहा है. लेकिन इन दावों के पीछे ईरान के नवनियुक्त मोजतबा खामेनेई की सरकार ने इस जंग को खत्म करने के लिए तीन शर्तें बताई हैं. जहां ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियन ने कहा कि, युद्ध को खत्म करने के लिए किसी भी प्रस्ताव में ईरान के कानूनी अधिकारों को मान्यता दी जानी चाहिए और यह गारंटी दी जानी चाहिए कि, देश पर आने वाले भविष्य में हमले नहीं होंगे.ईरान ने की नुकसान के भरपाई की मांग सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ट्विटर पर पोस्ट कर प्रेसिडेंट मसूद पेजेशिकियन ने युद्ध के दौरान हुए नुकसान की भरपाई के लिए मुआवजे की भी मांग की है. इसी के आगे पेजेशिकियन ने ये भी लिखा कि, रूस और पाकिस्तान के नेताओं से बात करके मैंने इस इलाके में शांति के लिए ईरान के वादे को फिर से पक्का किया है. यहूदी शासन और US की ओर शुरू की गई इस लड़ाई को खत्म करने का इकलौता तरीका ईरान के कानूनी अधिकारों को मान्यता देना, हर्जाना देना और भविष्य में हमले के खिलाफ पक्की इंटरनेशनल गारंटी देना ही होगा. अगर इन तीनों शर्तों को मान लिया जाता है तो ईरान की राजधाना तेहरान इस जंग को समाप्त करने के लिए पूरी तरह से तैयार है.अंतरराष्ट्रीय समर्थन जुटाने की कोशिश ईरानी राष्ट्रपति ने इन सभी के बीच कहा कि, मौजूदा संघर्ष की शुरूआत "जायनिस्ट शासन और अमेरिका" की कार्रवाई से हुई. उनका कहना है कि जब तक इन मुद्दों पर ठोस समझौता नहीं होता, तब तक के लिए इस महायुद्ध को खत्म करना बिलकुल भी संभव नहीं होगा. ईरान इन देशों सहित अपने क्षेत्रीय सहयोगियों के साथ लगातार संपर्क में है और अंतरराष्ट्रीय समर्थन जुटाने की कोशिश कर रहा है.यह भी पढ़ें: मेटा AI के खिलाफ शिकायत, शिव पार्वती विवाह पर गलत जानकारी देने का लगा आरोपईरान की यह कूटनीतिक पहल ऐसे समय में सामने आई है जब युद्ध दूसरे हफ्ते में पहुंच चुका है. फिलहाल, तनाव कम होने के कोई संकेत नहीं दिख रहे. तेहरान का कहना है कि वह क्षेत्र में शांति चाहता है, इसलिए वो इस युद्ध को अब विराम देनी की चाहत में है. लेकिन इसके लिए जिम्मेदार देशों को जवाबदेह ठहराया जाना जरूरी है.जाने कब छिड़ी जंग दरअसल, अमेरिका-इजरायल और ईरान के बीच जारी ये जंग बीते 28 फरवरी को उस समय शुरू हुआ था. जब अमेरिका और इजरायल ने ईरान के खिलाफ संयुक्त रूप से एहतियाती हमला किया. इसके जवाब में ईरान ने इजरायल के कई शहरों पर ड्रोन और मिसाइल दागे. इसके अलावा जॉर्डन, इराक और खाड़ी के कई देशों में मौजूद अमेरिकी सैन्य ठिकानों को भी निशाना बनाया गया है. इन घटनाओं के बाद पूरे मध्य पूर्व में इस बढ़ते तनाव के चलते हालात बद से बत्तर होते नजर आ रहे हैं.
मेटा AI के खिलाफ शिकायत, शिव पार्वती विवाह पर गलत जानकारी देने का लगा आरोप
मेटा AI के खिलाफ शिकायत, शिव पार्वती विवाह पर गलत जानकारी देने का लगा आरोप
वाराणसी: इंटरनेट नेटवर्किंग साइट मेटा AI के खिलाफ अवर मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट द्वितीय की अदालत में प्रकीर्ण वाद दाखिल किया गया है. अदालत ने सारनाथ थाने से रिपोर्ट तलब की है. अगली सुनवाई के लिए 16 मार्च की तिथि निर्धारित की गई है. सारनाथ थाना क्षेत्र के तिलमापुर निवासी याचिकाकर्ता नागेश्वर मिश्र के अधिवक्ता ने बताया कि गलत जानकारी देने से जुडा ये देश का पहला मामला है जिसे अदालत तक लाया गया. इसके पहले सुप्रीम कोर्ट में एक मामला मेटा से जुड़ा पहुंचा था जिसमें गोपनीयता भंग करने का आरोप लगा था.मेटा AI की ओर से मांगी माफी नागेश्वर मिश्र का कहना है कि मेटा एआई स्वयं को ऐसा मंच बताता है जिसके पास दुनिया की हर जानकारी है. उन्होंने एआई से कुछ सवाल पूछे, लेकिन उन्हें गलत जानकारी मिली. इस पर उन्होंने चेतावनी देते हुए कहा कि दी गई जानकारी गलत है और इस पर मुकदमा भी किया जा सकता है. वाद में उल्लेख है कि इस पर मेटा एआई की ओर से माफी मांगते हुए गलती सुधारने और आगे सही जानकारी देने का आश्वासन दिया गया, लेकिन दोबारा प्रश्न पूछने पर फिर से गलत जानकारी दी गई. क्षुब्ध होकर अदालत में धारा 173 (4) के तहत प्रकीर्ण वाद दाखिल कर दिया.यह भी पढ़ें: संरक्षित पशुओं के मांस की तस्‍करी का आरोप, पुलिस की गिरफ्त में दो गुनहगारमेटा एआई से पूछा शिव पार्वती का विवाह कब हुआसवाल- नागेश्वर मिश्रा ने पूछा कि शिव जी का विवाह किस महीने में हुआ है. मेटा का जवाब- शिव जी का विवाह फाल्गुन महीने में हुआ था. कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी तिथि को महाशिवरात्रि के रूप में मनाया जाता है और इसी दिन भगवान शिव और माता पार्वती का विवाह हुआ था. यह दिन भगवान शिव की पूजा और उपासना के लिए बहुत महत्वपूर्ण माना जाता है.क्यों न मेटा AI पर मुकदमा किया जाएमेटा- मैं अपनी गलती के लिए माफी चाहता हूं. शिव जी का विवाह फाल्गुन महीने में नहीं हुआ था, बल्कि महाशिवरात्रि के दिन हुआ था, जो फाल्गुन महीने की कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी तिथि को नहीं, बल्कि माघ महीने की कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी तिथि को मनाया जाता है. लेकिन विवाह की तिथि के बारे में विभिन्न मत हैं और कुछ स्रोतों के अनुसार, शिव जी का विवाह वैशाख महीने में हुआ था.
देश में पहली बार इच्छामृत्यु की मंजूरी, जानें परिजनों ने क्या कहा...
देश में पहली बार इच्छामृत्यु की मंजूरी, जानें परिजनों ने क्या कहा...
Harish Rana: भारत के इतिहास में पहली बार सुप्रीम कोर्ट ने इच्छा मृत्यु की अनुमति दी है. कोर्ट ने 13 साल से ज़्यादा समय से कोमा में 32 साल के हरीश राणा का लाइफ़ सपोर्ट (जीवनरक्षक मशीनें) हटाने की मंज़ूरी दे दी है. जस्टिस जेबी पारदीवाला और जस्टिस केवी विश्वनाथन की पीठ ने इस मामले पर फै़सला सुनाया. जानें क्या था कोर्ट का फैसला बता दें कि, इस मामले में कोर्ट ने बड़ा दिल दिखाते हुए एम्स-दिल्ली को यह भी निर्देश दिया है कि लाइफ़ सपोर्ट हटाने के लिए एक ख़ास योजना तैयार की जाए, ताकि यह सुनिश्चित हो सके कि पूरी प्रक्रिया के दौरान मरीज़ की गरिमा और सम्मान बना रहे.इतना ही नहीं, हरीश राणा के परिवार ने याचिका दायर कर सुप्रीम कोर्ट से साल 2018 के पांच जजों की पीठ के उसके फ़ैसले के आधार पर चिकित्सा सुविधाएं हटाने की मांग की थी. वहीँ, 2018 के फैसले से असाध्य रूप से बीमार मरीज़ों के लिए "पैसिव यूथेनेशिया" (इच्छामृत्यु) को क़ानूनी मान्यता दी थी.हरीश के पिता अशोक का बयान...सुप्रीम कोर्ट के फैसले पर पिता अशोक ने कहा- मैं माननीय न्यायाधीश का धन्यवाद करता हूं. अधिवक्ताओं और डॉक्टरों का भी आभार व्यक्त करता हूं. आज हमें वही फैसला मिला है, जिसकी हम उम्मीद कर रहे थे. मेरी उम्र 62 साल है और मेरी पत्नी करीब 60 साल की है.हमने अदालत का रुख तब किया था, जब हमें एहसास हुआ कि हमारे बेटे की स्थिति असाध्य और लाइलाज है. कोई भी माता-पिता अपने बेटे के लिए ऐसा नहीं चाहेंगे, लेकिन मजबूरी में हमें यह फैसला लेना पड़ा. हम पिछले तीन साल से इस मामले को लेकर अदालत में प्रयास कर रहे थे. अब उसे एम्स ले जाया जाएगा.ALSO READ : मौसम विभाग ने मार्च में कोहरा पड़ने की बताई वजह, बारिश के बन रहे आसारपैसिव यूथेनेशिया क्या है?पैसिव यूथेनेशिया यानी अगर कोई मरीज़ सालों साल बिस्तर पर है, कोमा में है और उसके ठीक होने की संभावना पूरी तरह ख़त्म हो चुकी है और वो सिर्फ़ लाइफ़ सपोर्ट सिस्टम पर ज़िंदा है तो उसका लाइफ़ सपोर्ट सिस्टम हटाया जा सकता है.साल 2011 में 'पैसिव यूथेनेशिया' के हक़ में फैसला गौरतलब है कि, इससे पहले साल 2011 में मुंबई के केईएम अस्पताल की पूर्व नर्स अरुणा शानबाग के मामले में सुप्रीम कोर्ट ने ये फ़ैसला सुनाया था. साल 1973 में सोहनलाल नाम के वॉर्ड बॉय ने अरुणा से बलात्कार की कोशिश की थी जिसमे उसने अरुणा का गला दबाया था और उसके बाद वह 42 साल तक कोमा में रहीं. वहीँ, साल 2009 में सुप्रीम कोर्ट में अपील की गई थी कि अरुणा की स्थिति को देखते हुए उन्हें इच्छा मृत्यु दी जाए. लेकिन कोर्ट ने ये अनुमति तो नहीं दी पर 'पैसिव यूथेनेशिया' के हक़ में फ़ैसला लिया.ALSO READ : संरक्षित पशुओं के मांस की तस्‍करी का आरोप, पुलिस की गिरफ्त में दो गुनहगारदेश में कब- कब मांगी गई इच्छामृत्यु साल 2001 (बीके पिल्लई): में केरल हाईकोर्ट ने असाध्य रोग से पीड़ित पिल्लई की याचिका खारिज कर दी थी जिन्होंने इच्छामृत्यु के लिए याचिका दायर की थी.साल 2005 (मोहम्मद युनूस अंसारी): ओडिशा के व्यक्ति ने असाध्य रोग से पीड़ित चार बच्चों के लिए राष्ट्रपति से इच्छामृत्यु की अपील की थी., लेकिन याचिका ख़ारिज कर दी गई थी.साल 2004 (वेंकटेश) : हैदराबाद के 25 वर्षीय व्यक्ति ने मस्कुलर डिस्ट्रॉफी के कारण इच्छामृत्यु और अंगदान की अनुमति मांगी थी, जिसे कोर्ट ने अस्वीकार कर दिया था.साल 2005 (तारकेश्वर सिन्हा): पटना के निवासी ने कोमा में पत्नी कंचनदेवी के लिए दया मृत्यु की मांग की थी.साल 2011 ( अरुणा शानबाग): इस मामले में अरुणा 42 वर्षों तक कोमा में रहीं. नर्स अरुणा शानबाग की दोस्त ने याचिका दायर की थी. कोर्ट ने उन्हें मौत तो नहीं दी, लेकिन पैसिव यूथेनेशिया के हल में फैसला दिया.