बौद्ध भिक्षु संग सारनाथ पहुंचे देसी नस्ल के श्वान ने लूटी वाहवाही, देश-विदेश में की पदयात्रा...

वाराणसी : विश्व में शांति को लेकर वियतनामी भिक्षु पन्नकारा एक देसी नस्ल के श्वान आलोक के साथ बुधवार की सुबह भगवान बुद्ध की प्रथम उपदेश स्थली सारनाथ में धम्म शिक्षण केंद्र पहुंचे, जहां पर बौद्ध भिक्षुओं ने परंपरानुसार उनका स्वागत किया. इस अवसर पर उन्होंने संंबोधत भी किया. प्रेम दया और करुणा के साथ इस यात्रा के सहयात्री रहे श्वान ने भी सारनाथ में लोगों के बीच वाहवाही लूटी.

धम्म शिक्षण केंद्र के प्रभारी भिक्षु चंदिमा ने बताया कि बौद्ध भिक्षु पन्नकारा थाईलैंड से नई दिल्ली होते हुए सारनाथ पहुंचे. वह सुबह सारनाथ धम्म शिक्षण केंद्र पहुंचे, जहां उनका भारतीय देसी नस्ल का कुत्ता आलोक भी साथ मौजूद रहा और आकर्षण का केंद्र बना. मूलगंध कुटी मंदिर के विहाराधिपति भिक्षु आर सुमित्ता नन्द थेरो ने बताया कि भिक्षु पन्नकारा सुबह 8 बजे मूलगंध कुटी बौद्ध मंदिर में धम्म देशना पाठ भी किया, जिसमें लगभग एक दर्जन बौद्ध भिक्षु शामिल रहे. वियतनाम मूल के अमेरिकन बौद्ध भिक्षु ने विश्व शांति के लिए 108 दिन में देश -विदेश में लगभग 3500 किलोमीटर की पदयात्रा की है. इस यात्रा के दौरान एक बार कलकत्ता से बोध गया तक पदयात्रा करते समय उनके साथ एक भारतीय देसी नस्ल का कुत्ता मिल गया, जो शुरू से ही उनके साथ जुड़कर पदयात्रा करने लगा. इसके बाद उन्होंने उसे भी साथ में ले लिया और उसका नाम आलोक रखा.
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आलोक को मिली वैश्विक पहचान
बौद्ध भिक्षुओं के साथ अंतरमहाद्वीपीय पीस वॉक में शामिल होकर आलोक ने हजारों किलोमीटर की यात्रा की और अमेरिका में 2,300 मील लंबी शांति यात्रा के दौरान सोशल मीडिया पर भी खूब लोकप्रियता हासिल की. अब आलोक भारत लौट आया है, जहां नई दिल्ली में उसका विशेष सम्मान किया गया. आलोक एक रेस्क्यू किया गया देसी डॉग है. वह बौद्ध भिक्षुओं के साथ अंतरमहाद्वीपीय शांति यात्रा का हिस्सा रहा.
आलोक की पहचान शांति और सदभाव से
बौद्ध धर्मावलंबियों के साथ जुड़ाव के बाद इस यात्रा के माध्यम से आलोक शांति का संदेश देने वाला बड़ा पहचान बन गया है. वह सोशल मीडिया पर भी चर्चा में रहता है. आलोक की यात्रा ने यह भी दिखाया कि कैसे एक साधारण कुत्ता भी विश्व शांति के लिए एक महत्वपूर्ण प्रतीक बन सकता है. पशु का कोई धर्म नहीं लेकिन जिस मकसद से बौद्ध मतावलंबी निकले और उनके साथ आलोक चल पड़ा वह अनोखा और रोचक विषय के रूप में देश ही नहीं विदेश में भी पहचान बनाने में सफल हुआ है.



