जगन्नाथ मंदिर परिसर में करीब 25 लोग अवैध रूप से निवास कर रहे - मंदिर ट्रस्ट सचिव

वाराणसी: अस्सी घाट स्थित श्रीजगन्नाथ मंदिर के पुनर्विकास को लेकर मंदिर न्यास ने अपना रूख स्पष्ट किया है. ट्रस्ट के सचिव शैलेष त्रिपाठी ने मंदिर से जुड़े कुछ विवादों पर भी प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि कुछ लोग स्वयं को चार पीढ़ियों से मंदिर का पुजारी बताकर वेतन की मांग कर रहे हैं, जबकि वर्तमान में मंदिर के प्रधान पुजारी राधेश्याम पांडेय हैं. उन्होंने कहा कि ऐसे दावों का कोई आधार नहीं है. ट्रस्ट सचिव के अनुसार मंदिर परिसर में करीब 25 लोग अवैध रूप से निवास कर रहे. इनमें से कई लोगों ने मकान बनाकर उन्हें किराये पर दे रखा है और आर्थिक लाभ के उद्देश्य से परिसर खाली नहीं कर रहे हैं. हालांकि कुछ परिवार वास्तव में जरूरतमंद हैं, जिनकी सहायता के लिए न्यास पूरी तरह प्रतिबद्ध है. उनके रहने और भोजन की व्यवस्था ट्रस्ट द्वारा की जा रही है और आगे भी जारी रहेगी.
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30 करोड़ रुपये की व्यवस्था
उन्होंने बताया कि मंदिर जीर्णोद्धार के लिए पहले चरण में 30 करोड़ रुपये की व्यवस्था कर ली गई है और जल्द ही निर्माण कार्य शुरू कराया जाएगा. न्यास के अनुसार प्रस्तावित परिसर का विकास पूरी तरह शास्त्रीय नियमों और परंपराओं के अनुरूप किया जाएगा तथा वर्तमान में स्थापित किसी भी विग्रह को नहीं हटाया जाएगा. बुधवार को पत्रकारों से बातचीत में मंदिर ट्रस्ट के सचिव शैलेष त्रिपाठी ने बताया कि पुनर्विकास योजना के तहत भगवान नृसिंह का 151 फीट ऊंचा शिखर तथा भगवान जगन्नाथ का 140 फीट ऊंचा भव्य शिखर निर्मित किया जाएगा. उन्होंने कहा कि मंदिर परिसर की गरिमा और धार्मिक परंपराओं को ध्यान में रखते हुए सभी कार्य किए जाएंगे.

इसी के आगे उन्होंने यह भी कहा कि न्यास अध्यक्ष ब्रजेश सिंह के संबंध में भ्रामक प्रचार किया जा रहा है. उन्होंने स्वयं लोगों के बीच जाकर सहयोग की अपील की थी. साथ ही कहा कि कचहरी पहुंचकर विरोध जताने वाले लोगों में कोई भी अधिकृत पुजारी या सेवायत नहीं था. न्यास ने पुनर्विकास कार्य को लेकर सभी अफवाहों को निराधार बताया है.
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