वाराणसी में गंगा बढ़ाव पर, घाट किनारे कई विग्रह डूबे, चिंता बढ़ी...

वाराणसी : पहाड़ों की बारिश ने मैदानी इलाकों में भी प्रभाव डालना शुरू कर दिया है. इसका प्रभाव अब गंगा में स्पष्ट रूप से दिखाई देने लगा है. नदी का जलस्तर निरंतरगंगा के जलस्तर में वृद्धि के साथ ही स्थानीय लोगों में बाढ़ की आशंका को लेकर चिंता बढ़ गई है. कई परिवारों ने सुरक्षित स्थानों पर जाने का निर्णय लिया है. प्रशासन ने बाढ़ से प्रभावित क्षेत्रों में राहत सामग्री पहुंचाने की तैयारी शुरू कर दी है. इस बीच, मौसम विभाग ने आगामी दिनों में और बारिश की संभावना जताई है, जिससे जलस्तर और बढ़ने की आशंका है. स्थानीय लोगों को सलाह दी गई है कि वे सतर्क रहें और किसी भी प्रकार की आपात स्थिति के लिए तैयार रहें.

गंगा नदी का जलस्तर बढ़ने के साथ ही स्थानीय प्रशासन ने सभी आवश्यक उपाय किए हैं ताकि किसी भी प्रकार की आपदा से निपटा जा सके. जल पुलिस और अन्य संबंधित विभागों को अलर्ट पर रखा गया है. इस स्थिति पर केंद्रीय जल आयोग भी नजर बनाए हुए है और जलस्तर की नियमित निगरानी कर रहा है. स्थानीय लोगों से अपील की गई है कि वे प्रशासन के निर्देशों का पालन करें और किसी भी प्रकार की आपात स्थिति में सहयोग करें. पानी बढने के कारण घाटों पर जलकुम्भी किनारों पर आकर लग गई है. रविवार, 19 जुलाई को गंगा का पानी दशाश्वमेध घाट स्थित गंगा सेवा निधि के आरती चबूतरे तक पहुंच गया. आरती स्थल की मढ़ी के नीचे स्थापित मां दुर्गा, भगवान शिव सहित कई देवी-देवताओं की विग्रह बाढ़ के पानी में डूब गए हैं.
जल पुलिस के प्रभारी सुधीर त्रिपाठी ने जानकारी दी कि गंगा में 5 से 7 सेंटीमीटर प्रति घंटे की गति से जलस्तर में वृद्धि दर्ज की जा रही है. जलस्तर बढ़ने के कारण निचले घाटों और तटीय इलाकों में रहने वाले लोगों में बाढ़ को लेकर दहशत का माहौल है. प्रशासन ने लोगों से नदी किनारे न जाने और सावधानी बरतने की अपील की है. नाव संचालन पर भी कड़ी निगरानी रखी जा रही है. केंद्रीय जल आयोग स्थिति पर लगातार नजर बनाए हुए है.
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गंगा के जलस्तर में वृद्धि के कारण घाटों पर स्थित मंदिरों और अन्य धार्मिक स्थलों की सुरक्षा को लेकर भी चिंता बढ़ गई है. स्थानीय प्रशासन ने बाढ़ की स्थिति से निपटने के लिए आवश्यक उपाय किए हैं. लोगों को सुरक्षित स्थानों पर जाने के लिए प्रेरित किया जा रहा है. गंगा नदी का जलस्तर बढ़ने से स्थानीय व्यापार और पर्यटन पर भी असर पड़ सकता है. घाटों पर आने वाले श्रद्धालुओं की संख्या में कमी आ सकती है, जिससे स्थानीय व्यवसायियों को आर्थिक नुकसान हो सकता है. प्रशासन ने इस स्थिति को ध्यान में रखते हुए आवश्यक कदम उठाने का आश्वासन दिया है. उधर, वरुणा नदी का भी जलस्तर बढा है. सेवार और जलकुंभी ने नदी को आगोश में ले लिया है. वरुणा किनारे रहने वालों को चिंता सताने लगी है.



