स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद का अल्टीमेटम: गोमाता को ‘राज्यमाता’ दर्जा दो, नहीं तो संत समाज करेगा आंदोलन

वाराणसी : श्रीविद्यामठ, केदारघाट में आयोजित विशेष प्रेस वार्ता में परमाराध्य शंकराचार्य की ओर से उत्तर प्रदेश सरकार और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को लेकर तीखे सवाल खड़े किए. गोमाता की रक्षा, गोहत्या बंदी कानून और मांस निर्यात जैसे मुद्दों पर सरकार की नीतियों पर सवाल उठाते हुए संत समाज ने इसे “धर्म और सत्ता की निर्णायक परीक्षा” करार दिया.
शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद ने कहा कि यदि गोमाता को ‘राज्यमाता’ का दर्जा नहीं दिया गया और गोहत्या पर प्रभावी रोक नहीं लगी, तो योगी सरकार को संत समाज के विरोध का सामना करना पड़ेगा. उन्होंने सरकार को 40 दिनों का अल्टीमेटम देते हुए ,मांगें न माने जाने पर संत समाज के बड़े आंदोलन की चेतावनी दी .

अविमु्क्तेश्वरानंद ने प्रेस वार्ता में कहा कि स्वतंत्र भारत में गोमाता की रक्षा और गोहत्या बंदी कानून की मांग करने वालों के साथ लगातार अत्याचार होते रहे हैं. वक्ताओं ने 1966 के दिल्ली गोरक्षा आंदोलन का उल्लेख करते हुए कहा कि उस समय भी संतों और गोभक्तों पर दमन हुआ था. इसी क्रम में वर्तमान समय में भी गोहत्या बंदी की आवाज उठाने वालों पर उत्पीड़न का आरोप लगाया गया.

शंकराचार्य की ओर से कहा गया कि हाल ही में शासन द्वारा उनसे शंकराचार्य होने की प्रमाणिकता मांगे जाने पर उन्होंने आवश्यक प्रमाण सौंप दिए, लेकिन अब सत्ता से भी अपनी धार्मिक निष्ठा स्पष्ट करने की मांग की जा रही है. वक्तव्य में कहा गया, धर्म किसी प्रमाणपत्र का मोहताज नहीं होता, किंतु सत्ता को अब अपने आचरण से प्रमाण देना होगा.
सरकार के समक्ष दो प्रमुख मांगें रखी गईं -
उत्तर प्रदेश में गोमाता को ‘राज्यमाता’ का दर्जा दिया जाए, जैसे महाराष्ट्र सरकार द्वारा देशी गायों को यह सम्मान दिया गया है.
राज्य से होने वाले सभी प्रकार के मांस निर्यात (Bovine Meat) पर पूर्ण प्रतिबंध लगाया जाए.
मांस निर्यात पर उठाए गए सवाल
संत समाज की ओर से दावा किया गया कि देश के कुल मांस निर्यात में उत्तर प्रदेश की हिस्सेदारी 40 प्रतिशत से अधिक है. आरोप लगाया गया कि भैंस के मांस के नाम पर गोवंश की हत्या हो रही है और बिना वैज्ञानिक जांच के मांस निर्यात किया जा रहा है. इसे “सरकारी मौन स्वीकृति” करार दिया गया.
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40 दिन का अल्टीमेटम
अविमु्क्तेश्वरानंद ने प्रेस वार्ता में सरकार को 40 दिनों का समय देते हुए कहा गया कि यदि इस अवधि में गोमाता को राज्यमाता का दर्जा नहीं मिला और मांस निर्यात पर रोक नहीं लगी, तो 10-11 मार्च को लखनऊ में संत समाज का बड़ा समागम किया जाएगा. उस दिन आगे की रणनीति घोषित करने की चेतावनी भी दी गई.
अंत में संत समाज की ओर से इसे किसी एक व्यक्ति या पद की लड़ाई नहीं, बल्कि “सनातन और गोवंश की रक्षा से जुड़ा विषय” बताया गया और आमजन से समर्थन की अपील की गई.



