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बीएचयू अस्‍पताल के हृदय विभाग की पीड़ा, जहां देखते थे डाक्‍टर अब बनेगी कैंटीन

बीएचयू अस्‍पताल के हृदय विभाग की पीड़ा, जहां देखते थे डाक्‍टर अब बनेगी कैंटीन
Dec 31, 2025, 07:10 AM
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Posted By Gaandiv

वाराणसी - बीएचयू अस्पताल के हृदय रोग विभाग की पीड़ा कम होने का नाम नहीं ले रही है. सालों से विवादों का इस विभाग का गहरा नाता रहा है. इस बीच जिस जगह पर हृदय रोगियों की टूडी इको, टीएमटी जैसी जरूरी जांच होती थी, वहां अब कैंटीन चलाई जाएगी. यहीं नहीं जिस भवन में कैंटीन चलाए जाने की तैयारी है, वहीं बगल में हृदय रोग विभाग के डॉक्टरों(शिक्षकों)के चेंबर भी हैं. जिसमें हर दिन मरीज दिखाने आते हैं, उनके साथ तीमारदार भी आते हैं. विभाग के पूर्व अध्यक्ष प्रो. ओमशंकर ने मंगलवार को प्रेस कांफ्रेंस कर अस्पताल प्रशासन के कैंटीन खोले जाने के फैसले पर आपत्ति जताते हुए जांच करने और दोषियों पर कार्रवाई की मांग की है.


प्रो. ओमशंकर ने कहा कि कैंटीन वाली जगह का ताला भी रात में जबरन तोड़ा गया. इसकी जानकारी विभागाध्यक्ष सहित किसी भी विभाग के सदस्य को भी नहीं दी गई. यहीं नहीं न तो कार्यकारिणी परिषद से मंजूरी ली गई है और न ही टेंडर के नियमों का पालन किया गया है. पहले तो हृदय रोग विभाग की जगह को कम कर मरीजों के हितों के साथ खिलवाड़ किया गया है, अब विभाग की बिल्डिंग में कैंटीन चलाने का फैसला लिया गया, जो कि बहुत गलत है.

एक तो विभाग की जिस बिल्डिंग में कैंटीन चलाने के लिए जगह दी गई है,उसकी फायर एनओसी भी नहीं है. दूसरे यहीं बगल में डॉक्टर बैठकर मरीज देखते हैं और अपना विभागीय कामकाज भी करते हैं. वहां कैंटीन चलने से कोई घटना हो सकती है. ऐसे में कैंटीन चलाने का फैसला अस्पताल प्रशासन की ओर से चिकित्सकों, मरीजों के जान के साथ खिलवाड़ और विभाग को समाप्त करने की सुनियोजित साजिश है.


खाली है कई जगह, फिर भी विभाग में कैंटीन


प्रो. ओमशंकर ने बताया कि अस्पताल परिसर में ही कैंटीन चलाने के लिए कई जगह खाली हैं, इसके बाद भी अस्पताल प्रशासन विभाग में क्यों कैंटीन चलवाना चाहता है, यह समझ से परे हैं. पहले से एमएस आफिस के सामने भुवालका बिल्डिंग में चलने वाले भोजनालय को बंद करवा दियागया. यह जगह भी पूरी तरह खाली पड़ी है. न्यूरोलॉजी विभाग द्वारा खाली की गई जगह और उसके उपर एंडोक्राइन लैब,गैस्ट्रो लैब वाली जगह भी खाली है.

विभागाध्यक्ष और नियमानुसार विभाग के शिक्षकों की समिति को इसकी जानकारी नहीं दी गई है. इस पर विभागीय समिति ने भी आपत्ति की है. पहले ही कार्डियोलॉजी विभाग के 47 बेड, पुराना कैथ लैब और सीसीयू को जबरन अपने कब्जे में अस्पताल प्रशासन ने ले लिया है, अब विभाग के लिए निर्धारित लाइब्रेरी, सेमिनार रूम, कंसल्टेंट चैंबर, पीएचडी शोधार्थियों की रिसर्च लैब जैसी अत्यंत आवश्यक शैक्षणिक-चिकित्सकीय जगहों में कैंटीन चलाने का आदेश दे दिया गया है.

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आईएमएस के निदेशक प्रो.एसएन संखवार कर कहना है कि ट्रॉमा सेंटर की तरह ही अस्पताल में मरीजों के लिए पेशेंट किचन चलाने के लिए टेंडर प्रक्रिया की गई है. जिसको चलाने का टेंडर मिला है, उनको एमएस की ओर से जगह एलाट किया गया है. जब टेंडर हुआ तो ताला तोड़ने की बात भी गलत है. यहां जब से काम शुरू हुआ तब अगर कोई समस्या थी तो लिखित आपत्ति करनी चाहिए थी.

राजातालाब तहसील में लेखपालों का SDM के खिलाफ धरना-प्रदर्शन, लगाए ये आरोप
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Major breakthrough against superbugs: Scientists discover virus that can eliminate drug-resistant bacteriaवाराणसी: अस्पतालों में पनपने वाले खतरनाक और 'दवा-प्रतिरोधी' (ड्रग-रेसिस्टेंट) बैक्टीरिया के खिलाफ जंग में भारत के दो युवा शोधकर्ताओं ने एक ऐतिहासिक सफलता हासिल की है. बीएचयू के प्रोफेसर ज्ञानेश्वर चौबे के मार्गदर्शन में, शोधकर्ताओं ने एक ऐसे 'बैक्टीरियोफेज' (बैक्टीरिया को संक्रमित करने वाले वायरस) की खोज की है, जो एंटीबायोटिक दवाओं को बेअसर कर देने वाले खतरनाक बैक्टीरिया को खत्म करने में सक्षम है. यह महत्वपूर्ण शोध हाल ही में स्प्रिंगर के प्रतिष्ठित जर्नल 'अप्लाइड माइक्रोबायोलॉजी एंड बायोटेक्नोलॉजी' में प्रकाशित हुआ है.कोलकाता के 32 वर्षीय सोवन आचार्य और उत्तर प्रदेश के कन्नौज के 30 वर्षीय परमानंद कुशवाहा ने मिलकर एक नए वायरस की पहचान की है. यह वायरस विशेष रूप से प्रोटीयस मिराबिलिस नामक उस खतरनाक बैक्टीरिया को निशाना बनाता है, जो गंभीर यूरिनरी ट्रैक्ट इन्फेक्शन (यूटीआई) का कारण बनता है. यह खतरनाक बैक्टीरिया अपने चारो ओर एक 'बायोफिल्म' (सुरक्षात्मक परत) बना लेता है, जिससे इस पर दवाओं का असर नहीं होता. प्रयोगशाला में हुए परीक्षणों में पाया गया कि इस नए खोजे गए वायरस ने बैक्टीरिया के बायोफिल्म को लगभग 55% तक कम कर दिया है.इस बड़ी वैज्ञानिक सफलता की पृष्ठभूमि में भारत के दो युवा वैज्ञानिकों का अप्रतिम संघर्ष जुड़ा हुआ है. खोजे गए इस नए बैक्टीरियोफेज को प्रोटीयस फेज़ राम_आरती 1324 नाम दिया गया है. यह नाम शोधकर्ता परमानंद की दिवंगत मां 'राम आरती' को समर्पित है. वर्ष 2024 में जब ये दोनों वैज्ञानिक भुवनेश्वर में इस विषय पर काम कर रहे थे, तब परमानंद की मां को एक गंभीर संक्रमण के कारण आईसीयू में भर्ती कराया गया था. उन पर किसी भी एंटीबायोटिक दवा का असर नहीं हुआ और मल्टी-ऑर्गन फेलियर के चलते उनका निधन हो गया. इस भारी व्यक्तिगत क्षति ने दोनों शोधकर्ताओं के विज्ञान के प्रति संकल्प को और अधिक मजबूत कर दिया.इन वैज्ञानिकों का यहां तक पहुंचने का सफर भी गहरे संघर्षों से भरा रहा है. पश्चिम बंगाल के मिदनापुर के एक गांव से आने वाले सोवन जीवन के शुरुवाती दौर मे आर्थिक तंगी का सामना करना पड़ा. उन्होंने शुरुआत में कोलकाता के एक निजी अस्पताल में 4500 रुपये महिना पर काम किया और बाद में टाटा मेडिकल सेंटर में टेलीफोन ऑपरेटर रहे. तकनीकी योग्यता न होने के कारण उन्हें कई संस्थानों ने रिजेक्ट किया, लेकिन उन्होंने हार नहीं मानी. 2013 में उन्हें कानपुर विश्वविद्यालय में बीएससी मेडिकल माइक्रोबायोलॉजी में दाखिला मिला, जहां उनकी मुलाकात परमानंद कुशवाहा से हुई और दोनों की यह वैज्ञानिक साझेदारी शुरू हुई.उनके इस प्रोजेक्ट को तब असली उड़ान मिली जब वे बीएचयू के जूलॉजी विभाग के प्रो. ज्ञानेश्वर चौबे और मणिपाल यूनिवर्सिटी, जयपुर के प्रोफेसर प्रशांत सुरवझला के संपर्क में आए. इन वरिष्ठ विशेषज्ञों ने न सिर्फ उनका मार्गदर्शन किया, बल्कि शोध को आगे बढ़ाने में मदद भी की. शोधकर्ता सोवन आचार्य ने बताया कि यह नया बैक्टीरियोफेज विशेष रूप से उन लोगों के लिए जीवनरक्षक साबित हो सकता है जिनका इम्यून सिस्टम (रोग प्रतिरोधक क्षमता) बेहद कमजोर होता है. इनमें कीमोथेरेपी ले रहे कैंसर के मरीज, बोन मैरो ट्रांसप्लांट करवाने वाले व्यक्ति या इम्यूनोसप्रेसिव दवाएं लेने वाले मरीज शामिल हैं.Also Read: मनीष सिंह हत्‍याकांड में फरार आरोपियों के खिलाफ प्रशासनिक शिकंजा, जमीन की हो रही नापीवर्तमान में, सोवन तिरुवनंतपुरम स्थित राजीव गांधी सेंटर फॉर बायोटेक्नोलॉजी में सीनियर रिसर्च फेलो (SRF) के पद पर कार्यरत हैं, जबकि परमानंद करनाल स्थित राष्ट्रीय डेयरी अनुसंधान संस्थान के एनिमल बायोटेक्नोलॉजी सेंटर में बतौर सीनियर रिसर्च फेलो अपनी सेवाएं दे रहे हैं. गरीबी, अस्वीकृति और व्यक्तिगत दुखों को पार कर विज्ञान के क्षेत्र में इन दोनों की यह उपलब्धि चिकित्सा जगत में एक नई उम्मीद की किरण बनकर उभरी है.https://www.youtube.com/watch?v=npNu2v7Tt0c
मनीष सिंह हत्‍याकांड में फरार आरोपियों के खिलाफ प्रशासनिक शिकंजा, जमीन की हो रही नापी
मनीष सिंह हत्‍याकांड में फरार आरोपियों के खिलाफ प्रशासनिक शिकंजा, जमीन की हो रही नापी
Administrative action against absconding accused in Manish Singh murder case, land being measuredवाराणसी: जिले के फूलपुर थाना क्षेत्र के भरथरा, घमहापुर गांव में हुए युवा उद्यमी मनीष सिंह हत्याकांड में जहां फरार आरोपियों के खिलाफ इनाम राशि बढाकर 50 हजार रुपये कर दी गई वहीं अब प्रशासनिक शिकंजा भी कसना शुरू हो गया है. इसी क्रम में सोमवार को प्रशासनिक टीम ने गांव पहुंचकर फरार आरोपियों के घरों व उनसे सटी जमीन की नाप-जोख शुरू कर दी है. नापी के दौरान गांव में सुरक्षा के लिए भारी संख्या में पुलिस बल की तैनाती की गई है. दरअसल, यह कार्रवाई मृतक मनीष सिंह के परिजनों द्वारा एसडीएम पिंडरा से की गई शिकायत के बाद शुरू हुई है. परिजनों द्वारा की गई शिकायत के बाद मामले की गंभीरता को देखते हुए एसडीएम पिंडरा प्रतिभा मिश्रा ने राजस्व कर्मियों की एक विशेष टीम गठित की.ध्वस्तीकरण की कार्रवाई करेगाइस टीम में एक तहसीलदार, दो कानूनगो और आठ लेखपालों को शामिल किया गया है. सोमवार दोपहर यह टीम पहले फूलपुर थाने पहुंची और फिर वहां से पुलिस बल को साथ लेकर घमहापुर गांव में दाखिल हुई. टीम ने मौके पर पहुंचकर आरोपियों की संपत्तियों का सीमांकन शुरू कर दिया है. चर्चा है कि यदि पैमाइश के दौरान आरोपियों या उनके परिजनों द्वारा सरकारी भूमि पर किसी भी तरह का अवैध कब्जा या निर्माण पाया जाता है तो प्रशासन उन पर बुलडोजर चलाकर ध्वस्तीकरण की कार्रवाई करेगा.बुलडोजर की कार्रवाई को लेकर चर्चा यह भी बता दें कि रविवार शाम को पिंडरा विधायक डॉ. अवधेश सिंह के महाविद्यालय में एक बैठक हुई थी, जिसमें मृतक मनीष की पत्नी, बहन और परिवार के अन्य सदस्यों के साथ एसडीएम प्रतिभा मिश्रा और डीसीपी नीतू कादयान शामिल थीं. माना जा रहा है कि इसी बैठक में नापी और बुलडोजर की कार्रवाई को लेकर चर्चा की गई थी. वहीं दूसरी ओर, गांव के हालात काफी तनावपूर्ण बने हुए हैं. घटना के बाद से ही आरोपी पक्ष के राजभर और प्रजापति बस्ती के अधिकांश घरों में ताले लटके हुए हैं. गिरफ्तारी और पुलिस के डर से बस्ती के युवा, महिलाएं और पुरुष घर छोड़कर फरार हैं. गांव की गलियों में सन्नाटा पसरा है और केवल कुछ ही घरों में बुजुर्ग महिलाएं दिखाई दे रही हैं.Also Read: BJP की पश्चिम बंगाल में जीत पर काशी में उत्‍सव, मिठाइयां बंटी, पटाखे फोड़े