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मनीष सिंह हत्‍याकांड में फरार आरोपियों के खिलाफ प्रशासनिक शिकंजा, जमीन की हो रही नापी

मनीष सिंह हत्‍याकांड में फरार आरोपियों के खिलाफ प्रशासनिक शिकंजा, जमीन की हो रही नापी
May 04, 2026, 10:47 AM
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Posted By Preeti Kumari

Administrative action against absconding accused in Manish Singh murder case, land being measured


वाराणसी: जिले के फूलपुर थाना क्षेत्र के भरथरा, घमहापुर गांव में हुए युवा उद्यमी मनीष सिंह हत्याकांड में जहां फरार आरोपियों के खिलाफ इनाम राशि बढाकर 50 हजार रुपये कर दी गई वहीं अब प्रशासनिक शिकंजा भी कसना शुरू हो गया है. इसी क्रम में सोमवार को प्रशासनिक टीम ने गांव पहुंचकर फरार आरोपियों के घरों व उनसे सटी जमीन की नाप-जोख शुरू कर दी है. नापी के दौरान गांव में सुरक्षा के लिए भारी संख्या में पुलिस बल की तैनाती की गई है. दरअसल, यह कार्रवाई मृतक मनीष सिंह के परिजनों द्वारा एसडीएम पिंडरा से की गई शिकायत के बाद शुरू हुई है. परिजनों द्वारा की गई शिकायत के बाद मामले की गंभीरता को देखते हुए एसडीएम पिंडरा प्रतिभा मिश्रा ने राजस्व कर्मियों की एक विशेष टीम गठित की.


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ध्वस्तीकरण की कार्रवाई करेगा


इस टीम में एक तहसीलदार, दो कानूनगो और आठ लेखपालों को शामिल किया गया है. सोमवार दोपहर यह टीम पहले फूलपुर थाने पहुंची और फिर वहां से पुलिस बल को साथ लेकर घमहापुर गांव में दाखिल हुई. टीम ने मौके पर पहुंचकर आरोपियों की संपत्तियों का सीमांकन शुरू कर दिया है. चर्चा है कि यदि पैमाइश के दौरान आरोपियों या उनके परिजनों द्वारा सरकारी भूमि पर किसी भी तरह का अवैध कब्जा या निर्माण पाया जाता है तो प्रशासन उन पर बुलडोजर चलाकर ध्वस्तीकरण की कार्रवाई करेगा.


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बुलडोजर की कार्रवाई को लेकर चर्चा


यह भी बता दें कि रविवार शाम को पिंडरा विधायक डॉ. अवधेश सिंह के महाविद्यालय में एक बैठक हुई थी, जिसमें मृतक मनीष की पत्नी, बहन और परिवार के अन्य सदस्यों के साथ एसडीएम प्रतिभा मिश्रा और डीसीपी नीतू कादयान शामिल थीं. माना जा रहा है कि इसी बैठक में नापी और बुलडोजर की कार्रवाई को लेकर चर्चा की गई थी. वहीं दूसरी ओर, गांव के हालात काफी तनावपूर्ण बने हुए हैं. घटना के बाद से ही आरोपी पक्ष के राजभर और प्रजापति बस्ती के अधिकांश घरों में ताले लटके हुए हैं. गिरफ्तारी और पुलिस के डर से बस्ती के युवा, महिलाएं और पुरुष घर छोड़कर फरार हैं. गांव की गलियों में सन्नाटा पसरा है और केवल कुछ ही घरों में बुजुर्ग महिलाएं दिखाई दे रही हैं.


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स्मार्ट मीटर के विरोध में सपा महिला सभा का MD कार्यालय पर प्रदर्शन, सौंपा ज्ञापन
स्मार्ट मीटर के विरोध में सपा महिला सभा का MD कार्यालय पर प्रदर्शन, सौंपा ज्ञापन
SP Mahila Sabha protests against smart meters at MD's office, submits memorandumवाराणसी: विद्युत विभाग द्वारा स्मार्ट मीटर के माध्यम से उपभोक्ताओं को लूटने एवं मनमानी तरीके से कार्यवाही करने का आरोप लगाते हुए समाजावादी पार्टी की महिला सभा ने सोमवार को कैंट विधानसभा प्रभारी रीबू श्रीवास्तव, महानगर अध्यक्ष संगीता पटेल, जिला अध्यक्ष शशि यादव के नेतृत्व में वाराणसी पूर्वांचल विद्युत निगम लिमिटेड एमडी कार्यालय भिखारीपुर पर जोरदार प्रदर्शन किया. विद्युत विभाग चीफ राकेश कुमार को ज्ञापन सौप कर यह मांग की गई कि स्मार्ट मीटर तत्काल हटाया जाए और जनता से स्मार्ट मीटर के नाम पर जो वसूली की गई है उसको वापस किया जाए.धनराशि स्मार्ट मीटर की खरीदारी रीबू श्रीवास्तव ने कहा कि जब केंद्र सरकार द्वारा 18885 करोड़ रुपए की धनराशि स्मार्ट मीटर की खरीदारी के लिए निर्धारित की गई तो प्रदेश सरकार द्वारा 27 342 करोड रुपए का टेंडर निकालकर जनता पर लगभग 9000 करोड रुपए का अतिरिक्त भार क्यों डाला गया. यह जनता की सरकार है या अडानी अंबानी की. महिला सभा की महानगर अध्यक्ष संगीता पटेल ने कहा कि लाल आंख दिखाने की बात करने वाले चीन के ही स्मार्ट मीटर से जनता का खून चूस रहे हैं. भाजपा का स्मार्ट मीटर पीटी उषा से भी तेज भाग रहा है. मैं मुख्यमंत्री से पूछना चाहती हूं कि स्मार्ट मीटर लगाने वाले क्या देश के कानून से ऊपर हैं, जब केंद्रीय मंत्री और भारत का सर्वोच्च न्यायालय यह कह रहा है कि बिना उपभोक्ता के सहमति के स्मार्ट मीटर नहीं लगाया जा सकते तो किसके आदेश से स्मार्ट मीटर लगाए गए."स्मार्ट मीटर नहीं, भाजपा की लूट मशीन" जिस गरीब को मनरेगा में 100 दिन रोजगार भी नहीं मिल पा रहा है उससे कहा जा रहा है कि पहले रिचार्ज करो फिर इस्तेमाल करो. मैं जानना चाहती हूं कि जब यही स्मार्ट मीटर महाराष्ट्र में ₹2600 और राजस्थान में 2500 रुपये में उपभोक्ताओं को दिए गए तो राम राज्य की सरकार में 6016 रुपए की वसूली उपभोक्ताओं से क्यों की गई या स्मार्ट मीटर नहीं,भाजपा की लूट मशीन है.Also Read: राजातालाब तहसील में लेखपालों का SDM के खिलाफ धरना-प्रदर्शन, लगाए ये आरोपप्रदर्शन में मुख्य रूप से मनीष यादव, पार्वती कन्नौजिया, प्रियांशु यादव,रीना यादव, यासमीन खान, पायल जैसवाल, निशा शर्मा, मीरा मिश्रा, सीमा गुप्ता, प्रमिला यादव,मंजू देवी, सुशील विश्वकर्मा, संजय यादव, राजेश यादव, राजू साहनी, कासिम, विजय जायसवाल, कमलेश यादव, रितिका सेठ, अमिता पटेल, रानी पटेल, संगीता शर्मा, शैलेंद्र कुमार, मनोज चौरसिया आदि लोग शामिल रहे.https://www.youtube.com/watch?v=npNu2v7Tt0c
राजातालाब तहसील में लेखपालों का SDM के खिलाफ धरना-प्रदर्शन, लगाए ये आरोप
राजातालाब तहसील में लेखपालों का SDM के खिलाफ धरना-प्रदर्शन, लगाए ये आरोप
Major breakthrough against superbugs: Scientists discover virus that can eliminate drug-resistant bacteriaवाराणसी: राजातालाब तहसील परिसर में सोमवार को उस समय अफरा तफरी की स्थिति बन गई जब लेखपाल संघ के बैनर तले लेखपालों ने उपजिलाधिकारी (SDM) के खिलाफ धरना-प्रदर्शन शुरू कर दिया. लेखपालों ने एसडीएम पर वाट्सप ग्रुप में अभद्र भाषा का प्रयोग करने और अवकाश के दिनों में भी काम करने का दबाव बनाने का आरोप लगाया.वाट्सएप ग्रुप में अपशब्दों का प्रयोगधरने पर बैठे लेखपालों का आरोप है कि उपजिलाधिकारी सार्वजनिक रूप से वाट्सएप ग्रुप में अपशब्दों का प्रयोग कर उन्हें धमकाते हैं. इस ग्रुप में विभिन्न विभागों के अधिकारी और कर्मचारी भी जुड़े हैं, जिससे लेखपालों की छवि धूमिल हो रही है. हाल ही में, ग्रुप में उनके "जमीर" पर टिप्पणी की गई, जिससे उनमें काफी नाराजगी है.लेखपाल संघ के अध्यक्ष राजेश मौर्य ने बताया कि लेखपालों पर फार्मर आईडी बनाने का अनावश्यक दबाव डाला जाता है. उन्हें रविवार जैसे अवकाश के दिनों में भी काम करने को कहा जाता है, जिसके बदले कोई अतिरिक्त अवकाश नहीं मिलता. उन्होंने मांग की कि यदि यह कार्य कराया जाना है, तो इसके लिए लिखित आदेश जारी किए जाएं.Also Read: सुपरबग्स पर बड़ी कामयाबी: वैज्ञानिकों ने खोजा दवा-प्रतिरोधी बैक्टीरिया को खत्म करने वाला वायरसलेखपालों ने यह मुद्दा भी उठाया कि कई लेखपालों को कार्यालय से अटैच किया गया है. उन्होंने मांग की कि इन लेखपालों को कार्यमुक्त कर फील्ड में तैनात किया जाए, ताकि कामकाज सुचारू रूप से चल सके. लेखपालों ने बताया कि लगभग 15 दिन पहले उपजिलाधिकारी को चार बिंदुओं का एक ज्ञापन सौंपा गया था, लेकिन उस पर अब तक कोई कार्रवाई नहीं हुई है। इसी के विरोध में लेखपालों ने यह धरना प्रदर्शन किया.https://www.youtube.com/watch?v=npNu2v7Tt0c
सुपरबग्स पर बड़ी कामयाबी: वैज्ञानिकों ने खोजा दवा-प्रतिरोधी बैक्टीरिया को खत्म करने वाला वायरस
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Major breakthrough against superbugs: Scientists discover virus that can eliminate drug-resistant bacteriaवाराणसी: अस्पतालों में पनपने वाले खतरनाक और 'दवा-प्रतिरोधी' (ड्रग-रेसिस्टेंट) बैक्टीरिया के खिलाफ जंग में भारत के दो युवा शोधकर्ताओं ने एक ऐतिहासिक सफलता हासिल की है. बीएचयू के प्रोफेसर ज्ञानेश्वर चौबे के मार्गदर्शन में, शोधकर्ताओं ने एक ऐसे 'बैक्टीरियोफेज' (बैक्टीरिया को संक्रमित करने वाले वायरस) की खोज की है, जो एंटीबायोटिक दवाओं को बेअसर कर देने वाले खतरनाक बैक्टीरिया को खत्म करने में सक्षम है. यह महत्वपूर्ण शोध हाल ही में स्प्रिंगर के प्रतिष्ठित जर्नल 'अप्लाइड माइक्रोबायोलॉजी एंड बायोटेक्नोलॉजी' में प्रकाशित हुआ है.कोलकाता के 32 वर्षीय सोवन आचार्य और उत्तर प्रदेश के कन्नौज के 30 वर्षीय परमानंद कुशवाहा ने मिलकर एक नए वायरस की पहचान की है. यह वायरस विशेष रूप से प्रोटीयस मिराबिलिस नामक उस खतरनाक बैक्टीरिया को निशाना बनाता है, जो गंभीर यूरिनरी ट्रैक्ट इन्फेक्शन (यूटीआई) का कारण बनता है. यह खतरनाक बैक्टीरिया अपने चारो ओर एक 'बायोफिल्म' (सुरक्षात्मक परत) बना लेता है, जिससे इस पर दवाओं का असर नहीं होता. प्रयोगशाला में हुए परीक्षणों में पाया गया कि इस नए खोजे गए वायरस ने बैक्टीरिया के बायोफिल्म को लगभग 55% तक कम कर दिया है.इस बड़ी वैज्ञानिक सफलता की पृष्ठभूमि में भारत के दो युवा वैज्ञानिकों का अप्रतिम संघर्ष जुड़ा हुआ है. खोजे गए इस नए बैक्टीरियोफेज को प्रोटीयस फेज़ राम_आरती 1324 नाम दिया गया है. यह नाम शोधकर्ता परमानंद की दिवंगत मां 'राम आरती' को समर्पित है. वर्ष 2024 में जब ये दोनों वैज्ञानिक भुवनेश्वर में इस विषय पर काम कर रहे थे, तब परमानंद की मां को एक गंभीर संक्रमण के कारण आईसीयू में भर्ती कराया गया था. उन पर किसी भी एंटीबायोटिक दवा का असर नहीं हुआ और मल्टी-ऑर्गन फेलियर के चलते उनका निधन हो गया. इस भारी व्यक्तिगत क्षति ने दोनों शोधकर्ताओं के विज्ञान के प्रति संकल्प को और अधिक मजबूत कर दिया.इन वैज्ञानिकों का यहां तक पहुंचने का सफर भी गहरे संघर्षों से भरा रहा है. पश्चिम बंगाल के मिदनापुर के एक गांव से आने वाले सोवन जीवन के शुरुवाती दौर मे आर्थिक तंगी का सामना करना पड़ा. उन्होंने शुरुआत में कोलकाता के एक निजी अस्पताल में 4500 रुपये महिना पर काम किया और बाद में टाटा मेडिकल सेंटर में टेलीफोन ऑपरेटर रहे. तकनीकी योग्यता न होने के कारण उन्हें कई संस्थानों ने रिजेक्ट किया, लेकिन उन्होंने हार नहीं मानी. 2013 में उन्हें कानपुर विश्वविद्यालय में बीएससी मेडिकल माइक्रोबायोलॉजी में दाखिला मिला, जहां उनकी मुलाकात परमानंद कुशवाहा से हुई और दोनों की यह वैज्ञानिक साझेदारी शुरू हुई.उनके इस प्रोजेक्ट को तब असली उड़ान मिली जब वे बीएचयू के जूलॉजी विभाग के प्रो. ज्ञानेश्वर चौबे और मणिपाल यूनिवर्सिटी, जयपुर के प्रोफेसर प्रशांत सुरवझला के संपर्क में आए. इन वरिष्ठ विशेषज्ञों ने न सिर्फ उनका मार्गदर्शन किया, बल्कि शोध को आगे बढ़ाने में मदद भी की. शोधकर्ता सोवन आचार्य ने बताया कि यह नया बैक्टीरियोफेज विशेष रूप से उन लोगों के लिए जीवनरक्षक साबित हो सकता है जिनका इम्यून सिस्टम (रोग प्रतिरोधक क्षमता) बेहद कमजोर होता है. इनमें कीमोथेरेपी ले रहे कैंसर के मरीज, बोन मैरो ट्रांसप्लांट करवाने वाले व्यक्ति या इम्यूनोसप्रेसिव दवाएं लेने वाले मरीज शामिल हैं.Also Read: मनीष सिंह हत्‍याकांड में फरार आरोपियों के खिलाफ प्रशासनिक शिकंजा, जमीन की हो रही नापीवर्तमान में, सोवन तिरुवनंतपुरम स्थित राजीव गांधी सेंटर फॉर बायोटेक्नोलॉजी में सीनियर रिसर्च फेलो (SRF) के पद पर कार्यरत हैं, जबकि परमानंद करनाल स्थित राष्ट्रीय डेयरी अनुसंधान संस्थान के एनिमल बायोटेक्नोलॉजी सेंटर में बतौर सीनियर रिसर्च फेलो अपनी सेवाएं दे रहे हैं. गरीबी, अस्वीकृति और व्यक्तिगत दुखों को पार कर विज्ञान के क्षेत्र में इन दोनों की यह उपलब्धि चिकित्सा जगत में एक नई उम्मीद की किरण बनकर उभरी है.https://www.youtube.com/watch?v=npNu2v7Tt0c