मनीष सिंह हत्याकांड में फरार आरोपियों के खिलाफ प्रशासनिक शिकंजा, जमीन की हो रही नापी

Administrative action against absconding accused in Manish Singh murder case, land being measured
वाराणसी: जिले के फूलपुर थाना क्षेत्र के भरथरा, घमहापुर गांव में हुए युवा उद्यमी मनीष सिंह हत्याकांड में जहां फरार आरोपियों के खिलाफ इनाम राशि बढाकर 50 हजार रुपये कर दी गई वहीं अब प्रशासनिक शिकंजा भी कसना शुरू हो गया है. इसी क्रम में सोमवार को प्रशासनिक टीम ने गांव पहुंचकर फरार आरोपियों के घरों व उनसे सटी जमीन की नाप-जोख शुरू कर दी है. नापी के दौरान गांव में सुरक्षा के लिए भारी संख्या में पुलिस बल की तैनाती की गई है. दरअसल, यह कार्रवाई मृतक मनीष सिंह के परिजनों द्वारा एसडीएम पिंडरा से की गई शिकायत के बाद शुरू हुई है. परिजनों द्वारा की गई शिकायत के बाद मामले की गंभीरता को देखते हुए एसडीएम पिंडरा प्रतिभा मिश्रा ने राजस्व कर्मियों की एक विशेष टीम गठित की.

ध्वस्तीकरण की कार्रवाई करेगा
इस टीम में एक तहसीलदार, दो कानूनगो और आठ लेखपालों को शामिल किया गया है. सोमवार दोपहर यह टीम पहले फूलपुर थाने पहुंची और फिर वहां से पुलिस बल को साथ लेकर घमहापुर गांव में दाखिल हुई. टीम ने मौके पर पहुंचकर आरोपियों की संपत्तियों का सीमांकन शुरू कर दिया है. चर्चा है कि यदि पैमाइश के दौरान आरोपियों या उनके परिजनों द्वारा सरकारी भूमि पर किसी भी तरह का अवैध कब्जा या निर्माण पाया जाता है तो प्रशासन उन पर बुलडोजर चलाकर ध्वस्तीकरण की कार्रवाई करेगा.

बुलडोजर की कार्रवाई को लेकर चर्चा
यह भी बता दें कि रविवार शाम को पिंडरा विधायक डॉ. अवधेश सिंह के महाविद्यालय में एक बैठक हुई थी, जिसमें मृतक मनीष की पत्नी, बहन और परिवार के अन्य सदस्यों के साथ एसडीएम प्रतिभा मिश्रा और डीसीपी नीतू कादयान शामिल थीं. माना जा रहा है कि इसी बैठक में नापी और बुलडोजर की कार्रवाई को लेकर चर्चा की गई थी. वहीं दूसरी ओर, गांव के हालात काफी तनावपूर्ण बने हुए हैं. घटना के बाद से ही आरोपी पक्ष के राजभर और प्रजापति बस्ती के अधिकांश घरों में ताले लटके हुए हैं. गिरफ्तारी और पुलिस के डर से बस्ती के युवा, महिलाएं और पुरुष घर छोड़कर फरार हैं. गांव की गलियों में सन्नाटा पसरा है और केवल कुछ ही घरों में बुजुर्ग महिलाएं दिखाई दे रही हैं.

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