बनारस की इन प्राचीन मंदिरों की बदलेगी सूरत, तैयार हुआ मास्टर प्लान

These ancient temples of Banaras will be transformed, master plan ready
वाराणसी: पूर्वांचल के गाजीपुर और वाराणसी के तीन प्राचीन और ऐतिहासिक मंदिरों और खंडहर हो चुके स्थानों को संरक्षित किया जाएगा. इसके लिए पर्यटन और पुरातत्व विभाग ने एक जबरदस्त मास्टर प्लान तैयार किया है. जिस प्राचीन मंदिरों के लिए ये प्लान तैयार किया गया है उनमें अश्वारी शिव मंदिर, गोपाल लाल विला और पाली राधा कृष्ण मंदिर शामिल है, जिनके जर्जर और बेकार हुई संरचनाओं को दुबारा से मजबूत कर यहां श्रद्धालुओं और पर्यटकों के लिए बेहतर सुविधाएं विकसित किये जाने का फैसला लिया गया है.

ऐतिहासिक मंदिरों की जल्द मरम्मत
इस प्राचीन और ऐतिहासिक मंदिरों की मरम्मत कराने में राजातालाब अश्वारी स्थित शिव मंदिर, अर्दली बाजार स्थित गोपाल लाल विला और गाजीपुर के पाली स्थित राधा कृष्ण मंदिर शामिल हैं, जर्जर हुए इन मंदिरों की दुबारा से खूबसूरती निखारी जाएगी, ताकि पर्यटन और श्रद्धालुओं के लायक बन सके. जो विकास के साथ-साथ रोजगार का भी जरिया बनेगा.
बात करें अश्वारी स्थित शिव मंदिर की जो वाराणसी के राजातालाब क्षेत्र के अश्वारी स्थित शिव मंदिर का इतिहास पेशवाओं से जुड़ा है. इस मंदिर की बनावट, विशेषकर इसके शिखर और नक्काशीदार पत्थर, उन उत्तर भारतीय मंदिरों की याद दिलाते हैं, जिनका पुनर्निर्माण पेशवाओं ने 290 वर्ष पहले वाराणसी के धार्मिक पुनरुद्धार के समय कराया था. मंदिर के गर्भगृह और बाहरी दीवारों पर पेशवा कालीन निर्माण शैली स्पष्ट रूप से झलकती है, यह उस दौर की याद दिलाता है जब पेशवाओं ने काशी को सांस्कृतिक रूप से सुदृढ़ करने के लिए शहर के बाहरी इलाकों तक मंदिरों का जाल बिछाया था.
गोपाल लाल विला
अर्दली बाजार, एलटी कॉलेज परिसर में स्थित गोपाल लाल विला आज खंडहर में तब्दील हो चुका है, इस भवन के खंडहर लगभग 50 वर्गमीटर के क्षेत्रफल में स्थित हैं।इसके भीतर छोटे-छोटे कमरे बने हुए हैं. फिलहाल इस संपत्ति पर शिक्षा विभाग का मालिकाना हक है, यहां स्वामी विवेकानंद ने अपने अंतिम दिनों में लगभग सवा महीने तक प्रवास किया था. वर्ष 1902 में जब विवेकानंद बीमार हुए, तब उन्हें यहीं पर स्वास्थ्य लाभ मिला था.

गाजीपुर का राधा कृष्ण मंदिर
400 वर्ष पुराने मंदिर का निर्माण 56 खंभों के साथ किया गया है, पुरनिए बताते हैं कि मंदिर का निर्माण राजस्थानी शैली में हुआ है, मंदिर में राधा कृष्ण की अष्टधातु की मूर्ति मौजूद है, ब्रिटिश हुकूमत के दौरान ब्रिटानी बैंक में मंदिर के नाम से कुछ पैसा भी जमा था, जिसका आज भी कुछ ब्याज मिलता है. गाजीपुर का पंच मंदिर, वाराणसी में पंचकोशी यात्रा मार्ग पर शिव मंदिर एवं एलटी कॉलेज परिसर में स्थित गोपाललाल विला अपनी प्राचीन वास्तुकला और सांस्कृतिक महत्व के लिए प्रसिद्ध हैं, इसे इस आधार पर विकसित किया जा रहा है.
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