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भारतीय नौसेना के लिए अत्याधुनिक स्वदेशी तकनीकों का विकास करेगा आईआईटी बीएचयू .....

भारतीय नौसेना के लिए अत्याधुनिक स्वदेशी तकनीकों का विकास करेगा आईआईटी बीएचयू .....
Jul 31, 2026, 01:12 PM
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Posted By gagan arora

वाराणसीःदेश में स्वदेशी रक्षा प्रौद्योगिकियों के विकास और 'आत्मनिर्भर भारत' के लक्ष्य को गति देने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल करते हुए भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (काशी हिन्दू विश्वविद्यालय), वाराणसी और भारतीय नौसेना के बीच 30 जुलाई 2026 को नई दिल्ली स्थित नौसेना मुख्यालय में एक समझौता ज्ञापन (एमओयू) पर हस्ताक्षर किए गए.

एमओयू पर वाइस एडमिरल बी. शिवकुमार, एवीएसएम, वीएसएम, कंट्रोलर ऑफ मैटेरियल (सीओएम), भारतीय नौसेना तथा प्रो. राजेश कुमार, डीन (अनुसंधान एवं विकास), आईआईटी (बीएचयू), वाराणसी ने हस्ताक्षर किए। इस अवसर पर प्रो. सुशांत कुमार श्रीवास्तव, प्रोफेसर इंचार्ज, आउटरीच एंड इंडस्ट्री रिलेशंस तथा डॉ. अजीत कुमार श्रीवास्तव, सलाहकार, आउटरीच एंड इंडस्ट्री रिलेशंस, आईआईटी बीएचयू भी उपस्थित रहे.

यह समझौता अनुसंधान एवं विकास, तकनीकी नवाचार, शैक्षणिक सहयोग, संकाय एवं विद्यार्थियों के आदान-प्रदान तथा क्षमता निर्माण जैसे क्षेत्रों में दोनों संस्थानों के बीच दीर्घकालिक सहयोग का आधार तैयार करेगा. इसका उद्देश्य भारतीय नौसेना की आवश्यकताओं के अनुरूप अत्याधुनिक स्वदेशी तकनीकों का विकास करना है.


इस सहयोग के अंतर्गत उन्नत हथियार एवं सेंसर प्रौद्योगिकी, पानी के भीतर वस्तुओं की पहचान, रडार प्रणाली, कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई), मशीन लर्निंग, क्वांटम प्रौद्योगिकी, साइबर सुरक्षा, रोबोटिक्स, पावर इलेक्ट्रॉनिक्स, उन्नत सामग्री (एडवांस्ड मैटेरियल्स), समुद्री इंजीनियरिंग, नौसैनिक अवसंरचना तथा अन्य उभरती हुई प्रौद्योगिकियों पर संयुक्त अनुसंधान एवं विकास किया जाएगा.

इस अवसर पर वाइस एडमिरल बी. शिवकुमार ने कहा कि यह एमओयू भारतीय नौसेना और देश के अग्रणी शैक्षणिक संस्थानों के बीच सहयोग को नई मजबूती प्रदान करेगा. उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि आईआईटी बीएचयू के साथ संयुक्त अनुसंधान से समुद्री सुरक्षा से जुड़ी भविष्य की चुनौतियों का प्रभावी समाधान विकसित होगा तथा रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता को नई गति मिलेगी.


प्रो. राजेश कुमार, डीन (अनुसंधान एवं विकास), आईआईटी बीएचयू ने कहा कि संस्थान की बहुविषयक अनुसंधान क्षमता भारतीय नौसेना के लिए नवीन तकनीकी समाधान विकसित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी. यह साझेदारी अत्याधुनिक अनुसंधान को बढ़ावा देने के साथ-साथ देश के स्वदेशी रक्षा पारिस्थितिकी तंत्र को और अधिक सशक्त बनाएगी.

प्रो. सुशांत कुमार श्रीवास्तव, प्रोफेसर इंचार्ज, आउटरीच एंड इंडस्ट्री रिलेशंस, ने कहा कि यह समझौता अकादमिक संस्थानों, उद्योग और रणनीतिक संगठनों के बीच सहयोग को नई दिशा देगा. इससे शोधकर्ताओं, शिक्षकों, विद्यार्थियों तथा आईआईटी (बीएचयू) के स्टार्टअप्स को राष्ट्रीय महत्व की प्रौद्योगिकियों के विकास में योगदान देने के नए अवसर प्राप्त होंगे.

समझौते के तहत संयुक्त कार्यशालाओं एवं सेमिनारों का आयोजन, सहयोगात्मक अनुसंधान एवं विकास परियोजनाएं, आईआईटी (बीएचयू) के इनक्यूबेटेड स्टार्टअप्स के साथ सहभागिता तथा भारतीय नौसेना के अनुसंधान प्रतिष्ठानों के साथ अनुसंधान सहयोग को भी बढ़ावा दिया जाएगा, ताकि भविष्य की समुद्री एवं रक्षा चुनौतियों के लिए नवाचार आधारित समाधान विकसित किए जा सकें.


यह एमओयू प्रारंभिक रूप से तीन वर्षों के लिए प्रभावी रहेगा और दोनों संस्थानों के बीच अनुसंधान, नवाचार तथा रणनीतिक रक्षा प्रौद्योगिकियों के क्षेत्र में दीर्घकालिक सहयोग का मजबूत आधार बनेगा.

आईआईटी (बीएचयू) के निदेशक प्रो. अमित पात्रा ने इस समझौते का स्वागत करते हुए कहा कि देश के अग्रणी शैक्षणिक संस्थानों और रणनीतिक राष्ट्रीय संगठनों के बीच इस प्रकार की साझेदारी विकसित भारत और आत्मनिर्भर भारत के निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी. उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि भारतीय नौसेना के साथ यह सहयोग नवाचार को नई गति देगा, स्वदेशी रक्षा प्रौद्योगिकियों के विकास को सशक्त बनाएगा तथा राष्ट्रीय सुरक्षा को और अधिक मजबूत करने में महत्वपूर्ण योगदान देगा.

ALSO READ:राष्ट्रगीत 'वन्दे मातरम्' के 150 वर्ष पूर्ण होने पर आयोजित हुआ सम्मान समारोह...

राष्ट्रगीत 'वन्दे मातरम्' की रचना के 150 वर्ष पूर्ण होने के उपलक्ष्य में शुक्रवार को नई सड़क स्थित कोदई चौकी पर प्रणाम वन्दे मातरम् समिति की ओर से बधाई एवं राष्ट्रभक्ति समारोह का आयोजन किया गया। कार्यक्रम का शुभारंभ भारत माता एवं बंकिमचंद्र चट्टोपाध्याय के चित्र पर माल्यार्पण, पुष्पांजलि तथा सामूहिक रूप से 'वन्दे मातरम्' के गायन के साथ हुआ।

समिति के अध्यक्ष अनुप जायसवाल ने कहा कि वर्ष 2026 राष्ट्रगीत 'वन्दे मातरम्' की रचना के 150 वर्ष पूर्ण होने का ऐतिहासिक अवसर है। उन्होंने कहा कि वर्ष 1875 में बंकिमचंद्र चट्टोपाध्याय द्वारा रचित यह गीत भारतीय स्वतंत्रता संग्राम के दौरान राष्ट्रीय चेतना और देशभक्ति का प्रमुख प्रेरणा स्रोत बना। उन्होंने यह भी कहा कि वर्ष 1905 में वाराणसी में आयोजित भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के अधिवेशन में राष्ट्रगीत के राष्ट्रीय महत्व पर चर्चा हुई थी तथा सरला देवी चौधरानी द्वारा इसके गायन ने इसे राष्ट्रीय आंदोलन का व्यापक स्वर प्रदान किया।

संस्कृत संरक्षण के साथ व्यवहारिक प्रयोग पर जोर, BHU में संस्कृत सप्ताह का शुभारंभ
संस्कृत संरक्षण के साथ व्यवहारिक प्रयोग पर जोर, BHU में संस्कृत सप्ताह का शुभारंभ
वाराणसी : काशी हिन्दू विश्वविद्यालय में मंगलवार को संस्कृत सप्ताह का शुभारंभ हुआ। संस्कृत भारती, काशी तथा संस्कृत विद्या धर्म विज्ञान संकाय, मालवीय भवन, वैदिक विज्ञान केंद्र, संस्कृत विभाग एवं श्री विश्वनाथ मंदिर के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित कार्यक्रम में संस्कृत के संरक्षण, संवर्धन, अध्ययन-अध्यापन के साथ ही इसे दैनिक व्यवहार और संवाद की भाषा बनाने पर जोर दिया गया।कार्यक्रम के मुख्य अतिथि विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. अजित कुमार चतुर्वेदी ने कहा कि संस्कृत केवल एक भाषा नहीं, बल्कि भारत की समृद्ध ज्ञान-विज्ञान, सभ्यता और संस्कृति की संवाहक है। आध्यात्मिक चिंतन, दर्शन, साहित्य और ज्ञान की विभिन्न परंपराओं के विकास में संस्कृत की महत्वपूर्ण भूमिका रही है।उन्होंने कहा कि संस्कृत के संरक्षण के साथ इसके निरंतर और व्यवहारिक प्रयोग पर भी ध्यान देने की जरूरत है। संस्कृत को केवल अध्ययन का विषय न मानकर दैनिक व्यवहार और संवाद की भाषा के रूप में अपनाया जाना चाहिए। विभिन्न संकायों के विद्यार्थी संस्कृत में संवाद की पहल करें और अधिक से अधिक शिक्षक एवं विद्यार्थी इसके व्यवहार को अपनाएं तो संस्कृत को कठिन भाषा मानने की धारणा और झिझक दूर की जा सकती है।कुलपति ने कहा कि संस्कृत का अध्ययन केवल संस्कृत विषय के विद्यार्थियों तक सीमित नहीं रहना चाहिए। विभिन्न विषयों के विद्यार्थियों को भी भारतीय ज्ञान परंपरा की इस समृद्ध भाषा से जुड़ना चाहिए। उन्होंने विश्वविद्यालय के सभी संकायों और विद्यार्थियों से संस्कृत के व्यवहारिक प्रयोग को बढ़ावा देने का आह्वान करते हुए कहा, “जयतु संस्कृतम्, जयतु भारतम्।”उन्होंने संस्कृत सप्ताह के दौरान लिए जाने वाले संकल्पों को केवल कार्यक्रम तक सीमित न रखकर जीवन और व्यवहार में उतारने की आवश्यकता बताई। उन्होंने संस्कृत भारती के प्रयासों की सराहना करते हुए विश्वविद्यालय में कुछ संकायों और विद्यार्थियों से संस्कृत में सामान्य बोलचाल की शुरुआत कर इसे व्यापक स्तर तक ले जाने पर जोर दिया।कार्यक्रम की अध्यक्षता संस्कृत विद्या धर्म विज्ञान संकाय के संकाय प्रमुख प्रो. राजाराम शुक्ल ने की। उन्होंने उपस्थित विद्वानों, आचार्यों, शिक्षकों और विद्यार्थियों का स्वागत करते हुए संस्कृत सप्ताह के आयोजन के उद्देश्य और उपयोगिता पर प्रकाश डाला।संस्कृत भारती के अखिल भारतीय शिक्षण प्रमुख डॉ. संजीव कुमार ने कहा कि विश्वविद्यालय जैसे प्रतिष्ठित संस्थान में संस्कृत के उत्थान और संवर्धन के लिए इस प्रकार का आयोजन गौरव की बात है। उन्होंने कहा कि महामना पंडित मदन मोहन मालवीय की संस्कृत के प्रति गहरी आस्था थी और संस्कृत के संरक्षण एवं संवर्धन की उनकी भावना को आगे बढ़ाना सभी की जिम्मेदारी है। संस्कृत को किसी एक विषय या वर्ग तक सीमित न रखकर इसके अध्ययन, अध्यापन और व्यवहारिक प्रयोग को व्यापक स्तर पर बढ़ावा देने की जरूरत है।ALSO READ : बीएचयू लॉ फैकल्टी की राष्ट्रीय रैंकिंग में बड़ी उपलब्धि, वैल्यू-फॉर-मनी लॉ कॉलेजों में देश में नंबर-1कार्यक्रम में डॉ. जगद्गुरु परमहंस, छावनी पीठ अयोध्या, व्याकरण विभागाध्यक्ष प्रो. रामनारायण द्विवेदी, संस्कृत भारती के अध्यक्ष प्रो. रविशंकर पाण्डेय, डॉ. सरोज कुमार पाण्डेय, श्री अशोक चौधरी और श्री अमरचन्द शुक्ल समेत अनेक आचार्य, विद्वान, शिक्षक और विद्यार्थी मौजूद रहे।संस्कृत सप्ताह के तहत पूरे सप्ताह संस्कृत से संबंधित विभिन्न कार्यक्रम और गतिविधियां आयोजित की जाएंगी। इनका उद्देश्य संस्कृत के प्रति जागरूकता बढ़ाने, अध्ययन-अध्यापन को प्रोत्साहित करने और संस्कृत को व्यवहार की भाषा के रूप में स्थापित करने के प्रयासों को गति देना है। कार्यक्रम के अंत में संस्कृत विभागाध्यक्ष प्रो. सदाशिव कुमार द्विवेदी ने धन्यवाद ज्ञापन किया।
बीएचयू लॉ फैकल्टी की राष्ट्रीय रैंकिंग में बड़ी उपलब्धि, वैल्यू-फॉर-मनी लॉ कॉलेजों में देश में नंबर-1
बीएचयू लॉ फैकल्टी की राष्ट्रीय रैंकिंग में बड़ी उपलब्धि, वैल्यू-फॉर-मनी लॉ कॉलेजों में देश में नंबर-1
वाराणसी : काशी हिन्दू विश्वविद्यालय (BHU) के लॉ फैकल्टी ने वर्ष 2026 की प्रमुख राष्ट्रीय रैंकिंग में शानदार प्रदर्शन करते हुए कानूनी शिक्षा के क्षेत्र में अपनी मजबूत पहचान कायम की है। बेस्ट कॉलेज सर्वे 2026 में फैकल्टी ने देश के 10 बेस्ट वैल्यू-फॉर-मनी लॉ कॉलेजों की श्रेणी में पहला स्थान हासिल किया है। फैकल्टी का रिटर्न ऑन इन्वेस्टमेंट (ROI) स्कोर 78.53 रहा। वहीं सभी लॉ संस्थानों की समग्र रैंकिंग में 1428.1 के कंपोजिट स्कोर के साथ इसे देश में 13वां स्थान मिला।फैकल्टी ने द वीक-हंसा रिसर्च सर्वे 2026 में भी देशभर में आठवीं रैंक हासिल की है। इसके अलावा आउटलुक सर्वे 2026 में लॉ फैकल्टी को देश में 11वां स्थान मिला, जबकि IIRF लॉ रैंकिंग 2026 में फैकल्टी देश में 13वें और उत्तर प्रदेश में तीसरे स्थान पर रही। IIRF में फैकल्टी का ओवरऑल इंडेक्स स्कोर 70.84 रहा।सुप्रीम कोर्ट की रिपोर्ट में भी बीएचयू के योगदान का उल्लेखराष्ट्रीय रैंकिंग के अलावा बीएचयू लॉ फैकल्टी के क्लिनिकल लीगल एजुकेशन और न्याय तक पहुंच सुनिश्चित करने के ऐतिहासिक योगदान को भारत के सुप्रीम कोर्ट की आधिकारिक रिपोर्ट में भी प्रमुखता से रेखांकित किया गया है। सेंटर फॉर रिसर्च एंड प्लानिंग द्वारा अक्टूबर 2024 में प्रकाशित “लीगल एड थ्रू लॉ स्कूल्स: ए रिपोर्ट ऑन वर्किंग ऑफ लीगल एड सेल्स इन इंडिया” में बीएचयू के योगदान का उल्लेख किया गया है।रिपोर्ट के अनुसार, बीएचयू ने 1970 के दशक की शुरुआत में भारत के शुरुआती क्लिनिकल लॉ कोर्स में से एक शुरू किया था। इसके तहत सेवानिवृत्त न्यायाधीश की देखरेख में क्लिनिक आधारित कानूनी सहायता, अदालतों का दौरा और अधिवक्ताओं के साथ इंटर्नशिप जैसी व्यवस्थाओं को जोड़ा गया था।रिपोर्ट में बीएचयू के लीगल एड एंड सर्विसेज क्लिनिक की ओर से 2017 में इलाहाबाद हाईकोर्ट में दायर क्रिमिनल पब्लिक इंटरेस्ट लिटिगेशन (PIL) का भी उल्लेख है। इस मामले के बाद उत्तर प्रदेश सरकार को कैदियों की दैनिक मजदूरी बढ़ाने और जेलों में भीड़ कम करने के लिए अतिरिक्त सुधार गृहों के निर्माण की दिशा में कदम उठाने पड़े।ALSO READ : वैदिक मंत्रोच्चार के बीच हुआ पूजन-अर्चन, पुष्पों और फलों से सजा माँ गंगा का दिव्य स्वरूपआधुनिक सुविधाओं और शोध पर रहेगा जोरलॉ फैकल्टी के प्रमुख एवं डीन प्रो. (डॉ.) प्रदीप कुमार सिंह ने इन उपलब्धियों पर प्रसन्नता व्यक्त करते हुए कहा कि फैकल्टी अपनी समृद्ध विरासत को आगे बढ़ाने के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने कहा कि आने वाले समय में बुनियादी ढांचे के आधुनिकीकरण, अत्याधुनिक कानूनी शोध, उद्योग और न्यायपालिका के साथ साझेदारी मजबूत करने तथा छात्रों की प्रो-बोनो कानूनी सेवा पहलों को सक्रिय करने पर विशेष जोर दिया जाएगा।उन्होंने कहा कि शैक्षणिक और विकास के सभी मानकों को बेहतर बनाते हुए फैकल्टी की रैंकिंग में निरंतर सुधार का प्रयास किया जाएगा। साथ ही नैतिक मूल्यों से युक्त और विश्वस्तरीय कानूनी पेशेवर तैयार करने की दिशा में संस्थान को और मजबूत किया जाएगा।


वैदिक मंत्रोच्चार के बीच हुआ पूजन-अर्चन, पुष्पों और फलों से सजा माँ गंगा का दिव्य स्वरूप
वैदिक मंत्रोच्चार के बीच हुआ पूजन-अर्चन, पुष्पों और फलों से सजा माँ गंगा का दिव्य स्वरूप
वाराणसी : पावन नगरी काशी के दशाश्वमेध घाट पर मंगलवार को गंगोत्री सेवा समिति की ओर से आयोजित भव्य गंगा आरती के दौरान माँ गंगा का विशेष हरियाली एवं झूला श्रृंगार किया गया। इस अवसर पर विधि-विधान से पूजन-अर्चन के बाद माँ गंगा का मनोहारी श्रृंगार किया गया। हरियाली, रंग-बिरंगे पुष्पों, विभिन्न प्रकार के फूलों और फलों से सुसज्जित माँ गंगा का दिव्य स्वरूप श्रद्धालुओं के आकर्षण का केंद्र रहा।कार्यक्रम की शुरुआत माँ गंगा के पूजन-अर्चन से हुई। आचार्यों एवं समिति के सदस्यों द्वारा वैदिक मंत्रोच्चार के बीच माँ गंगा का विधिवत पूजन किया गया। गंगाजल, पुष्प, अक्षत, रोली, चंदन, फल एवं अन्य पूजन सामग्री अर्पित कर माँ गंगा का आह्वान किया गया। इसके बाद धूप-दीप प्रज्वलित कर आरती और स्तुति की गई। श्रद्धालुओं ने भी माँ गंगा के चरणों में पुष्प अर्पित कर सुख-समृद्धि और परिवार के मंगल की कामना की।— फूलों और फलों से हुआ आकर्षक श्रृंगारपूजन के उपरांत माँ गंगा का विशेष हरियाली श्रृंगार किया गया। विभिन्न प्रकार के हरे पत्तों, बेल-पत्र, मौसमी हरियाली और सुगंधित पुष्पों से घाट पर आकर्षक सजावट की गई। इसके साथ ही अनेक प्रकार के फूलों और फलों से माँ गंगा के श्रृंगार को भव्य रूप दिया गया। प्राकृतिक सामग्री से तैयार श्रृंगार ने पूरे आयोजन को विशेष आकर्षण प्रदान किया।— झूला श्रृंगार ने मोहा श्रद्धालुओं का मनहरियाली श्रृंगार के साथ माँ गंगा का झूला श्रृंगार भी किया गया। आकर्षक फूलों और हरियाली से सजे झूले को विशेष रूप से सजाया गया। झूला श्रृंगार के दर्शन के लिए घाट पर मौजूद श्रद्धालुओं में विशेष उत्साह दिखाई दिया। माँ गंगा का मनोहारी स्वरूप देखते ही बन रहा था। श्रद्धालुओं ने दर्शन कर पुष्प अर्पित किए और भक्ति भाव से आरती में सहभागिता की।— गंगा आरती के दौरान गूंजे मंत्र और जयकारेविशेष श्रृंगार के बाद दशाश्वमेध घाट पर भव्य गंगा आरती का आयोजन हुआ। आरती के दौरान शंखनाद, घंटियों और मंत्रोच्चार से पूरा घाट गूंज उठा। दीपों की रोशनी और फूलों से सजे माँ गंगा के स्वरूप ने वातावरण को आध्यात्मिक बना दिया। गंगा आरती के दर्शन के लिए घाट पर बड़ी संख्या में श्रद्धालु मौजूद रहे।ALSO READ : बाढ़ प्रभावित क्षेत्र में एड्स जागरूकता अभियान, दिए गए चिकित्‍सकीय परामर्शगंगोत्री सेवा समिति के पदाधिकारियों ने बताया कि माँ गंगा के प्रति श्रद्धा और आस्था को समर्पित इस विशेष आयोजन का उद्देश्य सनातन परंपराओं एवं धार्मिक संस्कृति को जीवंत बनाए रखने के साथ ही प्रकृति और पर्यावरण के प्रति प्रेम का संदेश देना है। हरियाली एवं प्राकृतिक वस्तुओं से किए गए श्रृंगार के माध्यम से लोगों को प्रकृति के संरक्षण के प्रति जागरूक करने का प्रयास भी किया गया। समिति की ओर से बताया गया कि माँ गंगा भारतीय संस्कृति और आध्यात्मिक चेतना की प्रमुख धारा हैं। इसलिए उनकी आराधना के साथ स्वच्छता, हरियाली और पर्यावरण संरक्षण का संकल्प लेना भी प्रत्येक व्यक्ति की जिम्मेदारी है।