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काशी तमिल संगमम के तहत बीएचयू और आईआईटी करेंगे सात शैक्षणिक कार्यक्रमों की संयुक्‍त मेजबानी

काशी तमिल संगमम के तहत बीएचयू और आईआईटी करेंगे सात शैक्षणिक कार्यक्रमों की संयुक्‍त मेजबानी
Nov 29, 2025, 09:01 AM
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Posted By Gaandiv

वाराणसी - काशी तमिल संगमम् 4.0 के तहत बीएचयू और आईआईटी संयुक्त रूप से सात शैक्षणिक कार्यक्रमों की मेजबानी करेंगे. काशी और तमिलनाडु के ऐतिहासिक संबंधों के भव्य उत्सव के चौथे संस्करण की मेजबानी करने के लिए वाराणसी पूरी तरह तैयार है. शिक्षा मंत्रालय, आरत सरकार के तत्वावधान में आयोजित इस कार्यक्रम के लिए काशी हिंदू विश्ववि‌द्यालय और आईआईटी-मद्रास शैक्षणिक साझेदार हैं, जो काशी और तमिलनाडु के बीच सांस्कृतिक आध्यात्मिक और ऐतिहासिक संबंधों का भव्य प्रदर्शन प्रस्तुत करता है. कार्यक्रम के अंतर्गत, बीएचयू और आईआईटी-बीएचयू 2 दिसंबर से 15 दिसंबर के बीच विभिन्न विषयों पर शैक्षणिक सत्रों की श्रृंखला संयुक्त रूप से आयोजित करेंगे. दोनों संस्थान काशी तमिल संगमम् 4.0 के बारे में जन-जागरुकता बढ़ाने और जनसंपर्क हेतु वाराणसी में मुख्य कार्यक्रम से पूर्व अनेक गतिविधियाँ भी आयोजित कर रहे हैं.


कुलपति ने बताई आयोजन की रूपरेखा


शनिवार को बीएचयू की गतिविधियों और सहभागिता पर आयोजित एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में बीएचयू के कुलपति प्रो. अजित कुमार चतुर्वेदी ने कहा कि काशी तमिल संगमम् की शुरुआत से ही सक्रिय भागीदार होना विश्ववि‌द्यालय के लिए गर्व की बात है. 'हम काशी हिंदू विश्ववि‌द्यालय में काशी तमिल संगमम् के प्रमुख सहभागी होने को लेकर उत्साहित हैं. हमने, आईआईटी-बीएचयू के साथ मिलकर, हमारे अतिथियों को ऐसा यादगार अनुभव प्रदान करने के लिए व्यापक तैयारियों की हैं, जिसकी स्मृतियां जीवन भर उनके साथ रहेंगी." प्रो. चतुर्वेदी ने कहा, 'काशी ज्ञान और बौ‌द्धिकता की नगरी है. प्राचीन काल से ही विश्ठ भर से लोग काशी आकर जान अर्जित करते रहे हैं और अपने आंतरिक अस्तित्व का उत्थान करते रहे हैं. काशी तमिल संगमम् हमें जान साझा करने और नई अंतर्दृष्टियाँ विकसित करने का एक अनूठा अवसर प्रदान करता है. एक जान भागीदार के रूप में, बीएचयू ने विविध तरीकों से जान विनिमय को सुगम बनाने की व्यापक योजना बनाई है, जिसमें विभिन्न विषयों पर शैक्षणिक सत्र, बीएचयू के संग्रहालय, पुस्तकालय, शोध प्रयोगशालाओं और शैक्षणिक सुविधाओं का भ्रमण शामिल है, जो विश्ववि‌द्यालय की समृद्ध विरासत को दर्शाते हैं, जैसे महामना अभिलेखागार और जान-संपदाएँ, साथ ही आईआईटी-बीएचयू की उपकरण, नवाचार और अनुसंधान सुविधाएँ."


साझा भारतीय विरासत से जुड़ी है भाषाएं

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काशी तमिल संगमम् 4.0 का विषय "लेट अस लर्न तमिल तमिळ करकलाम" आषाई सदभाव और सांस्कृतिक एकता के केंद्रीय संदेश को दर्शाता है। यह इस बात पर बल देता है कि भारत की सभी भाषाएँ, चाहे वे किसी भी क्षेत्र से हो, साझा भारतीय विरासत से जुड़ी है. कुलपति ने कहा कि यह कार्यक्रम राष्ट्रीय सद्‌भाव का माध्यम है, जो उत्तर और दक्षिण भारत को साझा विरासत के माध्यम से पुनः जोड़ने में मदद करता है, और शैक्षणिक सत्र इसी भावना से तैयार किए गए हैं.

भारतीय प्रौ‌द्योगिकी संस्थान (बीएचयू) के निदेशक प्रो. अमित पात्रा ने कहा, "काशी तमिल संगमम् 4.0 का बीएचयू के साथ संयुक्त रूप से आयोजन करना आईआईटी (बीएचयू) वाराणसी के लिए अत्यंत गौरव की बात है. इस वर्ष के संगमम् का मुख्य विषय-कर्पोम् तमिल' तमिल भाषा सीखने को गहन सांस्कृतिक और बौ‌द्धिक सहभागिता के द्वार के रूप में सुंदर ढंग से प्रस्तुत करता है. भाषा, जब तक परिचित न हो, चुनौतीपूर्ण लग सकती है, लेकिन सीखने पर यह नए विचारों और समझ का सेतु बन जाती है. आज डिजिटल तकनीकों, कृत्रिम बुद्धिमत्ता, मशीन लर्निंग और कम्प्यूटेशनल लिंग्विस्टिक्स में तेज प्रगति के साथ, भाषाओं तक पहुँच काफी आसान और अधिक समावेशी हो गई है. मजबूत शैक्षणिक सहयोग और तकनीकी हस्तक्षेप के साथ, आईआईटी (बीएचयू) का समुदाय, जिसमें हमारी तमिल-भाषी बिरादरी भी शामिल है, इस महत्वपूर्ण राष्ट्रीय पहल के सुचारू और प्रभावी आयोजन की प्रतीक्षा कर रहा है."


शैक्षणिक सत्रों का आयोजन

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काशी तमिल संगमम् के तहत सात विभिन्न समूह काशी हिंदू विश्वविद्यालय परिसर का भ्रमण करेंगे और बीएचयू एवं आईआईटी-बीएचयू द्वारा आयोजित शैक्षणिक सत्रों में भाग लेंगे. पहला समूह, जिसमें वि‌द्यार्थी शामिल हैं, 3 दिसंबर 2025 को 'लमिल कल्पना में काशीः महाकवि सुब्रमण्यम भारती और उनकी विरासत" विषय पर आधारित समूह में हिस्सा लेगा. दूसरा समूह 5 दिसंबर को आएगा जिसमें शिक्षक शामिल होंगे, और उनका विषय होगा "काशी और तमिलनाडु की आध्यात्मिक और दार्शनिक परंपराएँ. तीसरा समूह, जिसमें लेखक और मीडिया पेशेवर शामिल होंगे, 7 दिसंबर को "काशी के समावेशी साहित्य और पत्रकारिता में भारत" विषय का अन्वेषण करेगा. कृषि और संबद्ध क्षेत्रों को समर्पित चौथा समूह 9 दिसंबर को "सतत खाद्य प्रणाली" विषय पर भाग लेगा. 11 दिसंबर को आने बाला पाँचवाँ समूह, जिसमें पेशेवर और कारीगर शामिल होंगे, 'पवित्र संबंध: काशी और कांचीपुरम के बीच संवाद" विषय पर केंद्रित होगा। खता समूह, जिसमें महिलाएँ शामिल होगी, 13 दिसंबर को 'समृ‌द्ध महिलाएँ, समृद्ध भारत विषय पर चर्चा करेगा. अंतिम समूह, जिसमें शास्त्रीय संगीतज, आध्यात्मिक ग्रंथ शिक्षकों और वक्ताओं सहित आध्यात्मिक प्रतिभागी शामिल होंगे, 15 दिसंबर को दिव्य सूत्र विषय पर आधारित सत्र में भाग लेगा.

काशी तमिल संगमम् के अंतर्गत, बीएचयू और आईआईटी-बीएचयू नमी घाट पर अपनी शैक्षणिक उत्कृष्टता और तकनीकी दक्षता को प्रदर्शित करने के लिए विशेष प्रदर्शनी भी लगाएंगे. बीएचयू का स्टॉल बहु-विषयक शिक्षा के विभिन्न पहलुओं को पदर्शित करेगा और यह दर्शाएगा कि विश्वविद्‌यालय मूल्य-आधारित, गुणवत्तापूर्ण शिक्षा के माध्यम से राष्ट्र निर्माण में कैसे योगदान दे रहा है. प्रदर्शनी में विभिन्न संस्थानों और संकायों की शोध उत्कृष्टता और शैक्षणिक विशेषज्ञता भी प्रदर्शित की जाएगी, साथ ही दृश्य कला, प्रदर्शन कला और भारत कला भवन पर विशेष प्रदर्शन भी होंगे. आईआईटी (बीएचयू) का स्टॉल संस्थान की तकनीकी उत्कृष्टता, अत्याधुनिक अनुसंधान, नवाचार पारिस्थितिकी तंत्र और शैक्षणिक योगदानों को प्रदर्शित करेगा.


हिंदी मे दक्ष तमलि शिक्षक लेंगे क्‍लास


इस वर्ष के काशी तमिल संगमम् की एक अनूठी विशेषता है हिंदी में दक्ष तमिल शिक्षकों का वाराणसी आना, जो विभिन्न स्कूलों में वि‌द्यार्थियों को तमिल भाषा के आधारभूत ज्ञान और इसकी विरासत के बारे में पढ़ाएंगे. भारतीय भाषा के विभाग, कला संकाय, बीएचयू के तमिल अनुभाग ‌द्वारा इस पहल का समन्वय, वाराणसी जिला प्रशासन के साथ मिलकर किया जा रहा है. चेन्नई स्थित केंद्रीय शास्त्रीय तमिल संस्थान (CICT) द‌द्वारा तैयार अध्ययन सामग्री के आधार पर 50 शिक्षकों और दो समन्वयकों को प्रशिक्षित किया गया है. इन शिक्षकों को जिला प्रशासन द्वारा चयनित 50 स्कूलों (सरकारी और निजी) में भेजा जाएगा, जहाँ वे 30 छात्रों के चयनित समूह को 15 दिनों तक बुनियादी तमिल संवाद सिखाएँगे. CICT दवारा तैयार पाँच खंडीय अध्ययन सामग्री हिंदी के माध्यम से तमिल सिखाने के लिए डिज़ाइन की गई है. कुल 1.500 वि‌द्यार्थियों को मौखिक तमिल सिखाई जाएगी, जिससे इस वर्ष के काशी तमिल संगमम् का विषय लेट अस लर्न तमिल और सुदृढ़ होगा.


300 छात्र करेंगे तमिलनाडु भ्रमण


काशी तमिल संगमम् 4.0 का एक अन्य विशेष आकर्षण वाराणसी के 300 विद्यार्थियों का तमिलनाडु भ्रमण है. इन छात्रों का चयन एक ऑनलाइन क्विज़ के माध्यम से किया जा रहा है, जिसके लिए काशी हिंदू विश्वविद्‌यालय ने एक समर्पित पोर्टल विकसित किया है. यह क्विज 7 दिसंबर को आयोजित होगी. चयनित वि‌द्यार्थी तमिल भाषा सीखने के साथ-साथ सांस्कृतिक, आध्यात्मिक और ऐतिहासिक महत्व के विभिन्न स्थलों और संस्थानों का भी भ्रमण करेंगे.

इसके अतिरिक्त, काशी हिंदू विश्ववि‌द्यालय का सयाजीराव गायकवाड़ केंद्रीय पुस्तकालय दुर्लभ पाडुलिपियों और पुस्तकों की एक विशेष प्रदर्शनी आयोजित करेगा, जिसमें तमिल शिक्षण संसाधन भी प्रदर्शित किए जाएँगे. यह प्रदर्शनी 3 दिसंबर से पारंभ होगी, जो न केवल तमिलनाडु से आने वाले प्रतिनिधियों बल्कि बीएचयू के वि‌द्यार्थियों और अध्यापकों को भी आकर्षित करेगी.

नोडल अधिकारी डॉ. अंचल श्रीवास्तव ने जानकारी दी कि काशी तमिल संगमम् की तैयारियों के तहत बीएचयू और आईआईटी (बीएचयू) ‌द्वारा वाराणसी में कई पूर्व-कार्यक्रमों का आयोजन किया जा रहा है.

काशी में अमित शाह का दौरा, 7 अक्टूबर को सेवा संकल्प यात्रा का स्वागत
काशी में अमित शाह का दौरा, 7 अक्टूबर को सेवा संकल्प यात्रा का स्वागत
वाराणसी :केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह 7 अक्टूबर को काशी आ सकते हैं। इस दौरान वह गुजरात के वडनगर से काशी पहुंचने वाली सेवा संकल्प यात्रा का स्वागत करेंगे। यात्रा में शामिल लोग गुजरात की नदियों का जल लेकर आएंगे, जिससे बाबा विश्वनाथ का जलाभिषेक किया जाएगा।यह यात्रा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के जन्मदिन, 17 सितंबर से शुरू हुए सेवा संकल्प अभियान का हिस्सा है। यह अभियान 17 सितंबर से 17 अक्टूबर तक चलेगा। इसके तहत देशभर में सेवा, स्वच्छता, पौधरोपण और जनकल्याण से जुड़े कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं।सेवा संकल्प यात्रा वडनगर से काशी तक पहुंच रही है। वडनगर प्रधानमंत्री मोदी का जन्मस्थान है, जबकि काशी उनका संसदीय क्षेत्र है। यात्रा के दौरान कई राज्यों और जिलों से गुजरते हुए लोगों को सेवा और जनभागीदारी का संदेश दिया जा रहा है।काशी पहुंचने पर यात्रा का स्वागत किया जाएगा और बाबा विश्वनाथ के दरबार में विशेष पूजा-अर्चना व जलाभिषेक का कार्यक्रम होगा। इस मौके पर कई जनप्रतिनिधियों और कार्यकर्ताओं के शामिल होने की संभावना है।ALSO READ :पूर्व मुख्य सचिव दुर्गा शंकर मिश्र ने संस्कृत विश्वविद्यालय के विकास कार्यों का किया निरीक्षण
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वाराणसी: उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्य सचिव एवं सेवानिवृत्त आईएएस अधिकारी दुर्गा शंकर मिश्र ने रविवार को सम्पूर्णानन्द संस्कृत विश्वविद्यालय, वाराणसी पहुंचकर परिसर में चल रहे विकास एवं निर्माण कार्यों का निरीक्षण किया। इस दौरान उन्होंने संग्रहालय, लालभवन, पाणिनी भवन, शताब्दी भवन अतिथि गृह, श्रमण विद्या संकाय, श्री श्री आनंदमयी महिला छात्रावास और ऑनलाइन संस्कृत प्रशिक्षण केंद्र का जायजा लिया।निरीक्षण के दौरान दुर्गा शंकर मिश्र ने संबंधित अधिकारियों और कार्यदायी संस्थाओं से निर्माण कार्यों की प्रगति की जानकारी ली। उन्होंने कार्यों को गुणवत्तापूर्ण तरीके से निर्धारित समय सीमा में पूरा करने और जरूरत के अनुसार कार्यों में तेजी लाने के निर्देश दिए।ऑनलाइन संस्कृत शिक्षा व्यवस्था का लिया जायजाऑनलाइन संस्कृत प्रशिक्षण केंद्र में उन्होंने संचालित ऑनलाइन डिप्लोमा कक्षाओं का भौतिक अवलोकन किया। उन्होंने तकनीकी और शिक्षण व्यवस्था की जानकारी लेते हुए इसे और प्रभावी एवं गुणवत्तापूर्ण बनाने के लिए आवश्यक मार्गदर्शन दिया। साथ ही आधुनिक तकनीक के माध्यम से संस्कृत शिक्षा को देश-विदेश तक पहुंचाने की संभावनाओं पर जोर दिया।पांडुलिपियों को बताया भारतीय ज्ञान परंपरा की अमूल्य निधिदुर्लभ पांडुलिपियों के संरक्षण और डिजिटलीकरण कार्यों का भी उन्होंने निरीक्षण किया। ‘उत्कृष्ट ज्ञान भारतम्’ द्वारा किए जा रहे वैज्ञानिक ट्रीटमेंट और डिजिटलीकरण की जानकारी लेते हुए उन्होंने कहा कि ये पांडुलिपियां भारतीय मनीषा की अमूल्य ज्ञान-संपदा हैं। इनका वैज्ञानिक संरक्षण और डिजिटलीकरण आने वाली पीढ़ियों, विद्यार्थियों और शोधार्थियों के लिए महत्वपूर्ण है।संग्रहालय के निरीक्षण के दौरान उन्होंने ऐतिहासिक एवं ज्ञानपरक सामग्री को देखा और इसके संरक्षण, संवर्धन तथा प्रभावी प्रस्तुतीकरण पर जोर दिया।सीएसआर से हो रहे विकास कार्यों की सराहनादुर्गा शंकर मिश्र ने विश्वविद्यालय में चल रहे विकास कार्यों पर प्रसन्नता व्यक्त की। उन्होंने कहा कि सीएसआर फंड के माध्यम से परिसर में विकास कार्य कराए जा रहे हैं और विद्यार्थियों को शुद्ध पेयजल सहित बेहतर संसाधन उपलब्ध कराने की दिशा में काम हुआ है। उन्होंने विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. बिहारी लाल शर्मा के प्रयासों की सराहना की।इस अवसर पर कुलपति प्रो. बिहारी लाल शर्मा ने दुर्गा शंकर मिश्र का पुष्पगुच्छ भेंट कर स्वागत किया। उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालय की ऐतिहासिक और ज्ञानपरक विरासत को सुरक्षित रखते हुए उसे आधुनिक तकनीक से जोड़ना समय की आवश्यकता है। पांडुलिपियों का संरक्षण, संग्रहालय का संवर्धन और ऑनलाइन संस्कृत शिक्षा का विस्तार इसी दिशा में महत्वपूर्ण कदम हैं।ALSO READ: जम्मू-कटरा के लिए 29 सितंबर को रवाना होंगी यूपी और पूर्वांचल की टीमें...निरीक्षण के दौरान कुलानुशासक, वैज्ञानिक प्रो. जितेन्द्र कुमार अधिकारी, प्रो. दिनेश कुमार गर्ग, डॉ. विशाखा शुक्ला, डॉ. विजेन्द्र आर्य, डॉ. विमल कुमार त्रिपाठी सहित संबंधित कार्यदायी संस्थाओं के प्रतिनिधि मौजूद रहे।
जम्मू-कटरा के लिए 29 सितंबर को रवाना होंगी यूपी और पूर्वांचल की टीमें...
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वाराणसी:T10 टेनिस बॉल क्रिकेट एसोसिएशन ऑफ इंडिया के तत्वावधान में आयोजित होने वाली राष्ट्रीय स्तर की प्रतियोगिता में प्रतिभाग करने के लिए उत्तर प्रदेश और पूर्वांचल की टीमें 29 सितंबर को जम्मू-कटरा के लिए रवाना होंगी। प्रतियोगिता को लेकर खिलाड़ियों में खासा उत्साह देखने को मिल रहा है। राष्ट्रीय स्तर के इस आयोजन में प्रदेश और पूर्वांचल का प्रतिनिधित्व करने जा रहे खिलाड़ियों का उत्साह बढ़ाने के लिए *रमना ग्राम प्रधान अमित कुमार पटेल* और *BHU चौकी इंचार्ज सौरभ तिवारी* बिरला ग्राउंड पहुंचे।इस दौरान दोनों ने खिलाड़ियों से मुलाकात कर उनका हौसला बढ़ाया और आगामी प्रतियोगिता के लिए शुभकामनाएं दीं। उन्होंने खिलाड़ियों से कहा कि राष्ट्रीय स्तर के मंच पर खेलते समय जीत हासिल करना महत्वपूर्ण है, लेकिन इसके साथ अनुशासन, टीम भावना और खेल भावना का पालन करना भी उतना ही जरूरी है। उन्होंने खिलाड़ियों से मैदान पर एकजुट होकर पूरी मेहनत, आत्मविश्वास और सकारात्मक सोच के साथ खेलने का आह्वान किया।उन्होंने कहा कि खिलाड़ी जब राष्ट्रीय प्रतियोगिता में उत्तर प्रदेश और पूर्वांचल का प्रतिनिधित्व करते हैं तो उनके प्रदर्शन के साथ-साथ उनका व्यवहार और अनुशासन भी क्षेत्र की पहचान बनता है। ऐसे में सभी खिलाड़ी आपसी तालमेल बनाए रखते हुए बेहतर प्रदर्शन करें और खेल के नियमों का सम्मान करें।उत्तर प्रदेश की टीम में कप्तान कार्तिक गुप्ता के साथ विनायक जायसवाल, हर्षित विश्वकर्मा, सूरज यादव, उज्जवल, अंकित, रोहित, सिद्धार्थ, मिलित, ऋषभ, हिमांशु, रौनक और हर्ष शामिल हैं।वहीं पूर्वांचल की टीम की कमान कृष्णा जायसवाल संभालेंगे। टीम में प्रथम जायसवाल, आर्यन चौबे, बादल, आयुष चौबे, प्रीतम, सौरभ, वैभव, अनवर, सार्थक, यश सिंह, मयंक और पृथ्वी शामिल हैं।खिलाड़ियों ने भी आगामी राष्ट्रीय प्रतियोगिता को लेकर उत्साह व्यक्त किया। खिलाड़ियों ने कहा कि वे पूरी तैयारी और आत्मविश्वास के साथ जम्मू-कटरा पहुंचेंगे तथा मैदान पर अपना सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन करने का प्रयास करेंगे। खिलाड़ियों ने उत्तर प्रदेश और पूर्वांचल की टीम की गरिमा बनाए रखने तथा खेल भावना के साथ प्रतियोगिता में हिस्सा लेने का संकल्प लिया।ALSO READ: देह व्यापार की सूचना पर पुलिस ने गेस्ट हाउस में मारा छापादेह व्यापार की सूचना पर पुलिस ने गेस्ट हाउस में मारा छापा29 सितंबर को दोनों टीमें जम्मू-कटरा के लिए रवाना होंगी, जहां राष्ट्रीय स्तर की प्रतियोगिता में देश के विभिन्न हिस्सों से पहुंचने वाली टीमों के साथ मुकाबला होगा।