दालमंडी में ध्वस्तीकरण की शुरू कार्रवाई, 14 मकानों पर चलाया जा रहा बुलडोजर

Demolition action begins in Dal Mandi, bulldozers are being used on 14 houses.
वाराणसी: उत्तर-प्रदेश के वाराणसी की मशहूर दालमंडी में रविवार सुबह पीडब्ल्यूडी और प्रशासन की टीम ने अवैध घोषित 14 मकानों के खिलाफ फिर से ध्वस्तीकरण अभियान शुरू कर दिया है. जहां बुलडोजर की गड़गड़ाहट के बीच भारी पुलिस बलों की तैनाती की गई है. पूरे इलाके को सुरक्षा के घेरे में लेकर बुलडोजर की कार्रवाई की जा रही है. बता दें, दालमंडी चौड़ीकरण परियोजना के तहत चल रही इस कार्रवाई के लिए 300 से अधिक पुलिसकर्मी, पीएसी और पैरामिलिट्री फोर्स के जवान तैनात किए गए हैं. ड्रोन कैमरों से निगरानी की जा रही है, जबकि प्रशासनिक अधिकारी लगातार मौके पर मौजूद रहकर स्थिति पर नजर बनाए हुए हैं. ताकि किसी तरह की कोई भी अनहोनी ना हो सकें.

दालमंडी में ध्वस्तीकरण की कार्रवाई
बताया जा रहा है कि, दालमंडी में हो रही इस बुलडोजर कार्रवाई के पहले मकान मालिकों को पहले ही नोटिस जारी कर दिया गया था. इतना ही नहीं, बीते शनिवार को मुनादी कराकर भवन खाली करने की अंतिम चेतावनी भी दी गई थी. जिसके बाद से एडीएम सिटी राजेश कुमार, पीडब्ल्यूडी के एक्सईएन के.के. सिंह और एसीपी दशाश्वमेध अतुल अंजन त्रिपाठी की मौजूदगी में ध्वस्तीकरण की कार्रवाई की जा रही है.

दालमंडी के एक दुकानदार ने बताया कि, वीडीए ने जिस हिस्से को अवैध बताया है, वह भवन का ऊपरी भाग है. लेकिन कार्रवाई के दौरान नीचे बनी दुकानों के शटर भी तोड़ दिए गए, इससे दुकानों में रखा लाखों रुपए का सामान खराब हो गया. इतना ही नहीं उन्होंने ये भी कहा कि, मकान की रजिस्ट्री अभी तक नहीं हुई है और कार्रवाई से उन्हें भारी आर्थिक नुकसान भी हुआ है.

14 मकानों को नोटिस जारी
जानकारी के मुताबिक, वीडीए के जोनल अधिकारी वेदप्रकाश ने बताया कि कुल 14 मकानों को नोटिस जारी की गई थी. नोटिस के माध्यम से भवन स्वामियों को अपने मानचित्र और संबंधित दस्तावेज प्रस्तुत करने का अवसर दिया गया था, लेकिन निर्धारित समय के भीतर किसी भी मकान मालिक की ओर से वैध मानचित्र या अन्य साक्ष्य प्रस्तुत नहीं किए गए, इसके बाद इन सभी भवनों के खिलाफ अंतिम ध्वस्तीकरण आदेश जारी किया गया.

हाईकोर्ट की ओर से कोई आदेश नहीं
उसी आदेश के क्रम में रविवार को 14 मकानों पर ध्वस्तीकरण की कार्रवाई की जा रही है. इस मामले में हाईकोर्ट की ओर से कोई स्थगन (स्टे) आदेश नहीं दिया गया है, हाईकोर्ट ने केवल भवन स्वामियों की आपत्तियों (ऑब्जेक्शन) पर नियमानुसार निर्णय लेने के लिए समय दिया है. इसलिए प्राप्त होने वाली सभी आपत्तियों का नियमों के तहत निस्तारण किया जाएगा, जबकि ध्वस्तीकरण की कार्रवाई जारी रहेगी.

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