BHU में संतों का समागम, सोमनाथ स्वाभिमान संगोष्ठी काे सीएम ने किया संबोधित

The Chief Minister addressed the gathering of saints at BHU and the Somnath Swabhiman seminar.
वाराणसी: ‘सोमनाथ स्वाभिमान पर्व, अटूट आस्था की गौरव गाथा’ के अवसर पर मंगलवार को संस्कृति विभाग और जिला प्रशासन ने आध्यात्मिक संगोष्ठी का आयोजन किया. इस संगोष्ठी में देशभर के प्रमुख संत-महात्माओं ने भाग लिया. संगोष्ठी का आयोजन दोपहर दो बजे से बीएचयू के स्वतंत्रता भवन में किया गया. इस सत्र के दौरान उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने भी सभा को संबोधित किया.

भारत की संस्कृति और परंपराएं विश्व में अद्वितीय हैं
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने अपने संबोधन में कहा कि भारत की संस्कृति और परंपराएं विश्व में अद्वितीय हैं. उन्होंने कहा कि सोमनाथ का इतिहास केवल धार्मिक नहीं, बल्कि राष्ट्रीय गौरव का प्रतीक भी है. काशी विश्वनाथ और सोमनाथ धर्म के स्तंभ हैं, उन्होंने कहा कि सरकार संतों के मार्गदर्शन में समाज के उत्थान के लिए कार्य कर रही है. संगोष्ठी में विभिन्न विषयों पर चर्चा की गई, जिसमें भारतीय संस्कृति, योग, ध्यान और आध्यात्मिकता के महत्व पर जोर दिया गया. इस संगोष्ठी का उद्देश्य भारतीय संस्कृति और आध्यात्मिकता को बढ़ावा देना है. संतों ने अपने विचारों के माध्यम से समाज में एकता, भाईचारे और धार्मिक सहिष्णुता का संदेश दिया. संगोष्ठी में उपस्थित संतों ने कहा कि आज के समय में आध्यात्मिकता की आवश्यकता पहले से कहीं अधिक है. उन्होंने युवाओं को सही मार्ग पर चलने और अपने जीवन में नैतिकता को अपनाने की प्रेरणा दी.

इस संगोष्ठी में देशभर के प्रमुख संतों में आचार्य महामंडलेश्वर जूना अखाड़ा हरिद्वार के स्वामी अवधेशानंद गिरि महाराज, पतंजलि योगपीठ हरिद्वार से स्वामी रामदेव और साध्वी देवप्रिया, परमार्थ आश्रम ऋषिकेश के स्वामी चिदानंद सरस्वती, स्वामी नारायण गुजरात के भद्रेश दास महाराज, दिव्य सेवा मिशन हरिद्वार के डा. आशीष गौतम, अयोध्या के जगदगुरु वासुदेवाचार्य विद्याभास्कर महाराज

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सिद्धपीठ हनुमन्निवास के मिथिलेश नंदिनी शरण, महामंडलेश्वर कैलाश मठ काशी निरंजनी अखाड़ा के आशुतोषानंद गिरि, धर्मसंघ पीठाधीश्वर काशी के स्वामी शंकर चैतन्य ब्रह्मचारी, बिहार के स्वामी विश्वंभर दास, राष्ट्रीय संस्कृत विश्वविद्यालय नई दिल्ली के कुलपति प्रो. मुरली मनोहर पाठक, बीएचयू के कुलपति प्रो. अजित कुमार चतुर्वेदी, काशी विद्यापीठ के कुलपति प्रो. एके त्यागी, संपूर्णानंद संस्कृति विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. बिहारी लाल शर्मा आदि भी अपने विचार रख रहे हैं.



