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बीएचयू के वैज्ञानिकों ने जन्मजात दंत-अभाव के नए जीन का किया खुलासा, रिसर्च में जेनेटिक वैरियंट की हुई पहचान...

बीएचयू के वैज्ञानिकों ने जन्मजात दंत-अभाव के नए जीन का किया खुलासा, रिसर्च में जेनेटिक वैरियंट की हुई पहचान...
Jun 29, 2026, 11:52 AM
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Posted By Isha Yadav

वाराणसी : काशी हिन्दू विश्वविद्यालय (बीएचयू) के वैज्ञानिकों ने जन्मजात दंत-अभाव (Congenital Tooth Agenesis-CTA) के आनुवंशिक कारणों की पहचान में महत्वपूर्ण सफलता हासिल की है. विश्वविद्यालय के इंस्टीट्यूट ऑफ साइंस स्थित सेंटर फॉर जेनेटिक डिसऑर्डर्स के शोधकर्ताओं ने अत्याधुनिक मल्टी-ओमिक्स तकनीक की मदद से इस बीमारी से जुड़े नए जीनों और अन्य गंभीर बीमारियों के बीच संबंधों का खुलासा किया है. यह शोध अंतरराष्ट्रीय वैज्ञानिक पत्रिका Gene के जून 2026 अंक में प्रकाशित हुआ है.


यह शोध कार्य डॉ. प्रशांत रंजन ने अपने पीएचडी शोध के दौरान प्रोफेसर परिमल दास के निर्देशन में पूरा किया. वर्तमान में डॉ. प्रशांत रंजन अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (AIIMS) में प्रोजेक्ट रिसर्च साइंटिस्ट-II के पद पर कार्यरत हैं.


शोधकर्ताओं ने Whole Exome Sequencing, Transcriptomics, Protein Structure Analysis और Bioinformatics जैसी आधुनिक तकनीकों का उपयोग कर जन्मजात दंत-अभाव के जटिल आणविक तंत्र का अध्ययन किया. अध्ययन में कई नए और पहले से ज्ञात आनुवंशिक परिवर्तनों (Genetic Variants) की पहचान की गई.


इस शोध की सबसे बड़ी उपलब्धि OR4F21 जीन को पहली बार जन्मजात दंत-अभाव से संभावित रूप से जोड़ना है. इसके अलावा EDA, WNT10A, PAX9 और TSPEAR जैसे दंत-विकास से जुड़े महत्वपूर्ण जीनों में भी रोग-संबंधी परिवर्तनों की पुष्टि की गई.


शोध में यह भी सामने आया कि जन्मजात दंत-अभाव केवल दांतों तक सीमित विकार नहीं है, बल्कि इसका संबंध शरीर की अन्य गंभीर बीमारियों से भी हो सकता है. वैज्ञानिकों ने इंटीग्रेटिव ओमिक्स विश्लेषण के माध्यम से ऐसे कई आणविक संबंधों की पहचान की है, जो भविष्य में रोगों की प्रारंभिक पहचान, जोखिम मूल्यांकन और प्रिसिजन मेडिसिन के विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं.


अध्ययन के दौरान यह भी पाया गया कि कई आनुवंशिक परिवर्तन न केवल RNA की अभिव्यक्ति को प्रभावित करते हैं, बल्कि प्रोटीन की स्थिरता और उसकी कार्यक्षमता पर भी असर डालते हैं. विशेष रूप से OR4F21 p.(Lys310Arg) और MRTFB p.(Ala135=) वेरिएंट सभी अध्ययन किए गए मरीजों में पाए गए, जिससे इनके रोग के विकास में अहम योगदान की संभावना मजबूत हुई है.


प्रोफेसर परिमल दास ने बताया कि यह अध्ययन मानव दंत-विकास के जटिल आणविक तंत्र को समझने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है. इससे भविष्य में जन्मजात दंत विकारों के लिए सटीक निदान, प्रारंभिक पहचान और लक्षित उपचार विकसित करने में मदद मिलेगी.


इस शोध में इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज के डॉ. नेहा वर्मा, डॉ. राजेश बंसल और डॉ. विनय कुमार श्रीवास्तव ने रोगियों की पहचान, नैदानिक मूल्यांकन और जीन-फेनोटाइप संबंधों के विश्लेषण में महत्वपूर्ण योगदान दिया. वहीं डॉ. चंद्रा देवी और शोधार्थी रिमझिम कुमारी ने प्रयोगात्मक कार्य, डेटा विश्लेषण और मल्टी-ओमिक्स डेटा के एकीकरण में अहम भूमिका निभाई.



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गौरतलब है कि प्रोफेसर परिमल दास पहले भी वर्ष 2000 में प्रकाशित एक ऐतिहासिक शोध में PAX9 जीन और जन्मजात दंत-अभाव के संबंध की खोज में महत्वपूर्ण भूमिका निभा चुके हैं. नवीन अध्ययन उसी वैज्ञानिक विरासत को आगे बढ़ाते हुए भारतीय वैज्ञानिकों की वैश्विक स्तर पर बढ़ती शोध क्षमता का प्रमाण माना जा रहा है.

33 पेड़ों की कटाई और 2.65 करोड़ के NGT जुर्माने को लेकर छात्रों ने EC को सौंपा ज्ञापन
33 पेड़ों की कटाई और 2.65 करोड़ के NGT जुर्माने को लेकर छात्रों ने EC को सौंपा ज्ञापन
वाराणसी : काशी हिंदू विश्वविद्यालय (BHU) में ‘GenZ For BHU’ छात्र आंदोलन के तहत सोमवार को छात्र प्रतिनिधिमंडल ने विश्वविद्यालय की कार्यकारी परिषद (Executive Council) को ज्ञापन सौंपा। छात्रों ने 33 पेड़ों की कटाई, राष्ट्रीय हरित अधिकरण (NGT) की ओर से लगाए गए 2.65 करोड़ रुपये के जुर्माने और छात्रों के साथ कथित मारपीट को लेकर कार्रवाई की मांग की।छात्र प्रतिनिधिमंडल में सत्यम सिंह, रवि सिंह, अमन मौर्य, विवर्त सिंह समेत अन्य छात्र शामिल रहे। छात्रों ने ज्ञापन के माध्यम से पेड़ों की कटाई के मामले में जिम्मेदार अधिकारियों की भूमिका की जांच कराने और दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की।छात्रों की प्रमुख मांगों में U.P. Trees Protection Act और BNS की संबंधित धाराओं के तहत निष्पक्ष जांच कर जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ नामजद एफआईआर दर्ज कराना शामिल है। छात्रों ने यह भी मांग की कि NGT द्वारा लगाए गए 2.65 करोड़ रुपये के जुर्माने की राशि छात्र फंड से नहीं वसूली जाए। उनका कहना है कि इसके लिए जिम्मेदार अधिकारियों से व्यक्तिगत स्तर पर वसूली की जानी चाहिए।इसके अलावा छात्रों ने कुलपति से मिलने गए छात्र-छात्राओं के साथ कथित मारपीट के मामले में सुरक्षाकर्मियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की। छात्र प्रतिनिधियों ने अपने खिलाफ गठित कमेटियों और जारी नोटिस को भी वापस लेने की मांग की है।ALSO READ : बीएचयू के छात्र दुर्गेश यादव का ‘सा रे गा मा पा 2026’ में हुआ चयनपरिसर में पेड़ों की जियो-टैगिंग की मांगछात्रों ने बीएचयू परिसर के सभी पेड़ों का ट्री सेंसस कराने, उनकी जियो-टैगिंग करने और पेड़ों की निगरानी के लिए ‘ट्री मॉनिटरिंग समिति’ गठित करने की मांग भी रखी।छात्रों का कहना है कि परिसर में पर्यावरण से जुड़े मामलों में पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित की जानी चाहिए। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि उनकी मांगों पर कार्रवाई नहीं हुई तो वे आगे शांतिपूर्ण आंदोलन करेंगे।
बीएचयू के छात्र दुर्गेश यादव का ‘सा रे गा मा पा 2026’ में हुआ चयन
बीएचयू के छात्र दुर्गेश यादव का ‘सा रे गा मा पा 2026’ में हुआ चयन
वाराणसी: काशी हिंदू विश्वविद्यालय (बीएचयू) के संगीत एवं मंच कला संकाय के गायन विभाग के छात्र दुर्गेश यादव का ज़ी टीवी के लोकप्रिय गायन रियलिटी शो ‘सा रे गा मा पा 2026’ के लिए चयन हुआ है। शो का प्रसारण 19 सितंबर 2026 से ज़ी टीवी पर शुरू हो चुका है।उत्तर प्रदेश के मऊ जिले के महलीपुर गांव निवासी दुर्गेश यादव, श्री इंद्रजीत यादव और श्रीमती कौशिल्या देवी के पुत्र हैं। उन्होंने बीएचयू से वर्ष 2020-23 में बीपीए (गायन-उत्तर भारतीय शास्त्रीय संगीत) और 2023-25 में एमपीए (गायन-उत्तर भारतीय शास्त्रीय संगीत) की शिक्षा प्राप्त की है। वर्तमान में वह संगीत एवं मंच कला संकाय में डॉ. सर्वपल्ली राधाकृष्णन इंटर्नशिप कर रहे हैं।दुर्गेश यादव ने पं. गिरजा शंकर त्रिपाठी के मार्गदर्शन में उत्तर भारतीय शास्त्रीय संगीत का प्रशिक्षण प्राप्त किया है। शास्त्रीय संगीत की इसी पृष्ठभूमि के साथ उन्होंने गायन के क्षेत्र में अपनी पहचान बनाने की दिशा में कदम बढ़ाया है।उनके ‘सा रे गा मा पा 2026’ में चयन पर संगीत एवं मंच कला संकाय की संकाय प्रमुख एवं गायन विभाग की विभागाध्यक्ष प्रो. संगीता पंडित, डॉ. सर्वपल्ली राधाकृष्णन इंटर्नशिप के समन्वयक प्रो. राम शंकर, प्रो. ज्ञानेश चंद्र पांडेय सहित अन्य संकाय सदस्यों ने उन्हें बधाई एवं शुभकामनाएं दीं।ALSO READ : बेनियाबाग से हड़हा सराय तक चला अतिक्रमण विरोधी अभियान, दुकानदारों से नोकझोंकबीएचयू से शास्त्रीय संगीत की शिक्षा प्राप्त कर राष्ट्रीय स्तर के लोकप्रिय गायन रियलिटी शो में चयन होने से विश्वविद्यालय के संगीत एवं मंच कला संकाय में भी उत्साह का माहौल है।
बेनियाबाग से हड़हा सराय तक चला अतिक्रमण विरोधी अभियान, दुकानदारों से नोकझोंक
बेनियाबाग से हड़हा सराय तक चला अतिक्रमण विरोधी अभियान, दुकानदारों से नोकझोंक
वाराणसी : बेनियाबाग चौराहे से हड़हा सराय मार्केट तक सोमवार को नगर निगम की प्रवर्तन टीम ने अतिक्रमण के खिलाफ अभियान चलाया. टीम ने सड़क पर दुकान लगाकर और अन्य तरीकों से किए गए अतिक्रमण को हटाते हुए मार्ग को कब्जामुक्त कराया. कार्रवाई के दौरान कुछ दुकानदारों की प्रवर्तन टीम से नोकझोंक भी हुई, लेकिन मौके पर मौजूद पुलिस बल के चलते स्थिति नियंत्रित रही.अभियान के दौरान सड़क पर दुकान लगाकर रखा गया सामान नगर निगम की टीम ने वाहनों में लादकर हटाया. सड़क किनारे गिट्टी, बालू और ईंट रखकर बिक्री किए जाने से यातायात प्रभावित हो रहा था. इसके अलावा सड़क पर अवैध रूप से ट्रांसपोर्ट गतिविधियां संचालित किए जाने की शिकायत भी सामने आई थी. नगर निगम की कार्रवाई की जानकारी मिलने पर मौके पर पहुंचे पार्षद इंद्रेश सिंह ने बताया कि बेनियाबाग क्षेत्र में सड़क जाम और अतिक्रमण की शिकायतों के बाद यह अभियान चलाया गया.ALSO READ : सीएम डैशबोर्ड की समीक्षा बैठक, बोले डीएम- किसी भी स्तर पर लापरवाही न बरती जाएउन्होंने कहा कि सड़क पर कब्जे के कारण लोगों को आवागमन में परेशानी हो रही थी. अतिक्रमण हटने से यातायात सुगम होगा और स्थानीय लोगों को अपने घरों तकपहुंचने में भी सुविधा मिलेगी. पार्षद ने कहा कि हड़हा सराय मार्केट तक आवागमन सुचारु रहने से व्यापारिक गतिविधियों को भी सुविधा मिलेगी और ग्राहकों को बाजार तक पहुंचने में परेशानी नहीं होगी. नगर निगम की प्रवर्तन टीम ने सड़क पर दोबारा अतिक्रमण न करने की हिदायत भी दी.