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BHU में ‘UNSEEN Exhibition 2026’ का सफल समापन, प्रतिभागी विद्यार्थियों को किया गया सम्मानित

BHU में ‘UNSEEN Exhibition 2026’ का सफल समापन, प्रतिभागी विद्यार्थियों को किया गया सम्मानित
Jun 07, 2026, 12:07 PM
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Posted By Preeti Kumari

वाराणसी: काशी हिन्दू विश्वविद्यालय के नगर छात्र निकाय स्थित कला सूत्र आर्ट स्टूडियो एवं गैलरी में आयोजित पाँच दिवसीय "UNSEEN Exhibition 2026" का सफलतापूर्वक समापन हुआ. प्रदर्शनी के समापन अवसर पर आयोजित समारोह में प्रतिभागी विद्यार्थियों को उनकी रचनात्मक प्रतिभा एवं उत्कृष्ट सहभागिता के लिए प्रमाण-पत्र एवं पुरस्कार प्रदान कर सम्मानित किया गया.


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यह प्रदर्शनी विश्वविद्यालय के विभिन्न संकायों एवं विभागों के उन विद्यार्थियों को समर्पित थी जिन्होंने चित्रकला, फोटोग्राफी, डिजिटल आर्ट, स्केचिंग एवं अन्य रचनात्मक माध्यमों के जरिए अपनी कलात्मक अभिव्यक्तियों को प्रस्तुत किया, प्रदर्शनी के दौरान प्रदर्शित कृतियों को विद्यार्थियों, शिक्षकों एवं कला प्रेमियों द्वारा सराहा गया. समापन समारोह में प्रदर्शनी के समन्वयक एवं नगर छात्र निकाय, उत्तर निकाय के वार्डन डॉ. आशीष कुमार गुप्ता ने सभी प्रतिभागियों को प्रमाण-पत्र वितरित किए तथा उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले विद्यार्थियों को पुरस्कार प्रदान कर सम्मानित किया.


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पुरस्कार प्राप्त करने वाले विद्यार्थियों में अंशिका आनंद सिंह एवं अर्जुन यादव (विज्ञान संकाय), अनुष्का मोंडल, अनुष्का कुमार, प्रमोद कुमार एवं तमन्ना रॉय (कला संकाय), अर्शिया भटनागर एवं आयुषी पाण्डेय (महिला महाविद्यालय), पायल रिषा (आई.एम.एस.), प्राप्ति अग्रवाल एवं शौभित सिन्हा (विधि संकाय) तथा रितिका कुमारी (सामाजिक विज्ञान संकाय) शामिल रहे. इस अवसर पर उन्होंने विद्यार्थियों की सृजनात्मकता, समर्पण एवं उत्साह की सराहना करते हुए कहा कि कला व्यक्ति के व्यक्तित्व विकास, आत्मविश्वास एवं नवाचार क्षमता को विकसित करने का एक प्रभावी माध्यम है.


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समारोह के दौरान सभी प्रतिभागी विद्यार्थियों ने प्रदर्शनी से जुड़े अपने अनुभव भी साझा किए, विद्यार्थियों ने बताया कि "UNSEEN Exhibition 2026" ने उन्हें अपनी रचनात्मक प्रतिभा को प्रदर्शित करने, नए विचारों का आदान-प्रदान करने तथा विभिन्न विषयों के विद्यार्थियों के साथ संवाद स्थापित करने का एक अनूठा अवसर प्रदान किया. उन्होंने इस पहल को प्रेरणादायक बताते हुए भविष्य में भी ऐसे आयोजनों के निरंतर आयोजन की अपेक्षा व्यक्त की.


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"UNSEEN Exhibition 2026" का संपूर्ण आयोजन, योजना, समन्वय एवं संचालन डॉ. आशीष कुमार गुप्ता एवं मुख्य वार्डन प्रो. ललित मोहन अग्रवाल के निर्देशन एवं मार्गदर्शन में संपन्न हुआ. उनके नेतृत्व में आयोजित इस प्रदर्शनी ने विश्वविद्यालय के विद्यार्थियों को अपनी प्रतिभा प्रदर्शित करने के लिए एक सशक्त मंच प्रदान किया तथा रचनात्मक अभिव्यक्ति को नई ऊर्जा दी. इस सफल आयोजन के साथ "UNSEEN Exhibition 2026" ने एक बार पुनः यह सिद्ध किया कि प्रतिभा किसी एक विषय या संकाय तक सीमित नहीं होती, बल्कि अवसर मिलने पर वह स्वयं अपना मार्ग बना लेती है.


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बीएचयू में 'एक वृक्ष माँ के नाम' अभियान के तहत 111 पौधों का रोपण.
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वाराणसी : काशी हिन्दू विश्वविद्यालय (बीएचयू) में पर्यावरण संरक्षण और हरित परिसर के विकास को बढ़ावा देने के उद्देश्य से सोमवार को 'एक वृक्ष माँ के नाम' अभियान के अंतर्गत केंद्रीय कार्यालय परिसर में विशेष पौधरोपण कार्यक्रम आयोजित किया गया। अभियान का शुभारंभ कुलपति प्रो. अजित कुमार चतुर्वेदी और कुलसचिव राजन श्रीवास्तव ने केंद्रीय कार्यालय के सामने नीलमोहर का पौधा लगाकर किया।अभियान के तहत विश्वविद्यालय परिसर के विभिन्न स्थानों पर कुल 111 पौधों का रोपण किया गया। इनमें 100 रक्तमंजरी और 11 नीलमोहर के पौधे शामिल हैं। खास बात यह रही कि बीएचयू परिसर में पहली बार नीलमोहर के पौधे लगाए गए हैं। आकर्षक नीले-बैंगनी फूलों वाला नीलमोहर (जैकारैंडा मिमोसिफोलिया) अपनी प्राकृतिक सुंदरता के लिए विश्वभर में प्रसिद्ध है। विश्वविद्यालय प्रशासन का मानना है कि इन पौधों के रोपण से परिसर की जैव विविधता समृद्ध होगी और हरित वातावरण को बढ़ावा मिलेगा।ALSO READ: सावन में कांवड़ मार्गों पर बंद रहेंगी मांस-मछली की दुकानें, उल्लंघन करने पर होगी कानूनी कार्रवाई.कुलपति प्रो. अजित कुमार चतुर्वेदी ने कहा कि यह अभियान पर्यावरण संरक्षण के साथ-साथ प्रकृति के प्रति जिम्मेदारी निभाने का संदेश देता है। वहीं, रक्तमंजरी के पौधे भी परिसर की हरित आभा और सौंदर्य को और आकर्षक बनाएंगे।पौधरोपण कार्यक्रम का आयोजन उद्यान विशेषज्ञ इकाई के आचार्य प्रभारी प्रो. सरफराज आलम के नेतृत्व में किया गया। इस अवसर पर प्रो. अनुराग दवे, प्रो. राकेश कुमार सिंह, डॉ. संजीव सर्राफ, अश्विनी देशवाल, भरत पांडे सहित उद्यान इकाई एवं केंद्रीय कार्यालय के अधिकारी और कर्मचारी उपस्थित रहे।
सावन में कांवड़ मार्गों पर बंद रहेंगी मांस-मछली की दुकानें, उल्लंघन करने पर होगी कानूनी कार्रवाई.
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वाराणसी : सावन माह में कांवड़ यात्रा के दौरान श्रद्धालुओं और कांवड़ियों की धार्मिक भावनाओं का सम्मान सुनिश्चित करने के लिए नगर निगम ने बड़ा निर्णय लिया है। निगम प्रशासन ने शहरी सीमा के अंतर्गत आने वाले सभी कांवड़ मार्गों पर अवैध रूप से संचालित मांस, मछली और मुर्गा विक्रेताओं की दुकानों को तत्काल प्रभाव से बंद रखने के निर्देश जारी किए हैं।नगर निगम के पशु चिकित्सा कल्याण अधिकारी डॉ. विजय अमृतराज ने बताया कि कांवड़ यात्रा के दौरान मार्गों पर मांस-मछली की दुकानों का संचालन श्रद्धालुओं की आस्था को प्रभावित कर सकता है। इसे देखते हुए सभी जोनों में विशेष अभियान चलाने का निर्णय लिया गया है। नगर निगम की टीमों को अपने-अपने क्षेत्रों में नियमित निरीक्षण कर अवैध रूप से संचालित दुकानों को बंद कराने की जिम्मेदारी सौंपी गई है।निगम प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि आदेश का सख्ती से पालन कराया जाएगा। यदि कोई दुकानदार निर्देशों की अनदेखी करते हुए मांस, मीट या मछली की बिक्री करता पाया गया, तो उसके खिलाफ नियमानुसार कड़ी दंडात्मक और कानूनी कार्रवाई की जाएगी।ALSO READ: बीएचयू के डॉ. राघवेंद्र रमन मिश्र विश्व के शीर्ष 5% वैज्ञानिकों में शामिल.उत्कृष्ट शोध और वैज्ञानिक योगदान के लिए मिला सम्माननगर निगम ने सभी संबंधित विक्रेताओं से अपील की है कि वे सावन माह के दौरान जारी निर्देशों का पालन करें और कांवड़ यात्रा की पवित्रता बनाए रखने में प्रशासन का सहयोग करें।
बीएचयू के डॉ. राघवेंद्र रमन मिश्र विश्व के शीर्ष 5% वैज्ञानिकों में शामिल.उत्कृष्ट शोध और वैज्ञानिक योगदान के लिए मिला सम्मान
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वाराणसी : काशी हिन्दू विश्वविद्यालय (बीएचयू) के राजीव गांधी दक्षिण परिसर, बरकच्छा (मिर्जापुर) स्थित चिकित्सा प्रयोगशाला प्रौद्योगिकी विभाग के सहायक प्रोफेसर डॉ. राघवेंद्र रमन मिश्र ने विश्वविद्यालय का गौरव बढ़ाया है। उन्हें वर्ष 2025 की एससीआई ग्लोबल रजिस्ट्री में विश्व के शीर्ष 5 प्रतिशत वैज्ञानिकों की सूची में स्थान मिला है।डॉ. मिश्र को यह प्रतिष्ठित उपलब्धि उनके उत्कृष्ट वैज्ञानिक अनुसंधान, नवाचारपूर्ण कार्यों और उच्च स्तरीय शैक्षणिक योगदान के आधार पर प्राप्त हुई है। एससीआई ग्लोबल रजिस्ट्री की यह वैश्विक रैंकिंग शोध की गुणवत्ता, प्रकाशित शोधपत्रों के प्रभाव, उद्धरण (साइटेशन) और अन्य शैक्षणिक मानकों के व्यापक मूल्यांकन पर आधारित होती है। इसमें एससीआई जर्नल और कंट्री रैंक (SCR) जैसे महत्वपूर्ण सूचकांकों का उपयोग किया जाता है, जो स्कोपस डाटा के आधार पर तैयार किए जाते हैं।ALSO READ: नगर निगम ने 100 करोड़ की सरकारी संपत्ति मुक्त कराई, 38 साल पुराने विवाद का अंतविश्वविद्यालय ने डॉ. मिश्र की इस उपलब्धि को संस्थान के लिए गर्व का क्षण बताया है। यह सम्मान न केवल बीएचयू की शोध परंपरा को नई पहचान देता है, बल्कि देश के युवा शोधकर्ताओं और विद्यार्थियों के लिए भी प्रेरणा का स्रोत है। डॉ. मिश्र की सफलता वैज्ञानिक अनुसंधान के क्षेत्र में समर्पण, गुणवत्ता और उत्कृष्टता का उदाहरण मानी जा रही है।