यूजीसी के नए नियम पर रोक के बाद जिला मुख्यालय पर जश्न, अबीर गुलाल लगाए, हवन पूजन

वाराणसी : यूजीसी के नए नियम पर सुप्रीम कोर्ट द्वारा रोक लगाए जाने के बाद वाराणसी में विश्वविद्यालयों और कालेजों संग जिला मुख्यालय पर जश्न का माहौल देखने को मिला. मुख्यालय पर लंबे समय से प्रदर्शन चल रहा था जिसके बाद गुरुवार को हनुमान चालीसा पाठ और हवन पूजन के साथ होली खेलकर जश्न मनाया गया. लोगों ने एक दूसरे को गुलाल लगाकर अपनी खुशी जाहिर की. विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) के नए समता विनियमन पर सुप्रीम कोर्ट द्वारा लगाई गई रोक के बाद सवर्ण समाज का विरोध तीसरे दिन हवन और हनुमान चालीसा का पाठ करके समाप्त हुआ. इस विरोध प्रदर्शन में पूर्वांचल किसान संगठन, हिंदू महासभा और विश्व हिंदू परिषद से जुड़े पदाधिकारी शामिल हुए. सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद जिला मुख्यालय पर सरकार के खिलाफ जमकर नारेबाजी की गई. प्रदर्शनकारियों ने स्पष्ट किया कि जब तक इस इक्विटी रेगुलेशन को वापस नहीं लिया जाता, उनका संघर्ष जारी रहेगा.

धरना प्रदर्शन में केशरिया भारत संगठन के प्रमुख संयोजक कृष्णानंद पांडेय, पूर्वांचल किसान संगठन के अध्यक्ष अजीत सिंह, हिंदू महासभा के प्रदेश प्रभारी श्रीकांत पांडेय, नेशनल पार्टी की अध्यक्ष वंदना सिंह, राष्ट्रीय संस्कार सेवा भारती के अध्यक्ष रघुनाथ उपाध्याय, विश्व हिंदू परिषद के प्रांत प्रभारी लोकनाथ पांडेय, भाजपा मंडल उपाध्यक्ष आशुतोष मिश्रा राणा सहित अन्य प्रमुख नेता उपस्थित रहे. प्रदर्शनकारियों ने कहा कि यूजीसी के नए नियमों के खिलाफ उनका आंदोलन तब तक जारी रहेगा जब तक कि सरकार इस नियम को वापस नहीं लेती. उन्होंने यह भी कहा कि यह नियम सवर्ण समाज के अधिकारों का उल्लंघन करता है और इससे समाज में असमानता बढ़ेगी.

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बीएचयू में हस्ताक्षर अभियान को रोका
प्रदर्शनकारियों ने यह भी आरोप लगाया कि सरकार ने इस नियम के माध्यम से सवर्णों के खिलाफ भेदभाव किया है. इस बीच, काशी हिंदू विश्वविद्यालय के नया विश्वनाथ मंदिर के सामने यूजीसी के नए नियमावली के समर्थन में हस्ताक्षर अभियान चला रहे छात्रों को पुलिस ने हटाया. यह कार्रवाई उस समय की गई जब प्रदर्शनकारी अपनी मांगों को लेकर एकजुट हो रहे थे. पुलिस की इस कार्रवाई ने छात्रों में आक्रोश पैदा कर दिया और उन्होंने इसका विरोध किया.
सवर्ण समाज के नेताओं ने कहा कि वे इस मुद्दे को लेकर आगे भी संघर्ष करेंगे और सभी सवर्णों को एकजुट करने का प्रयास करेंगे. उनका मानना है कि इस नियम के खिलाफ आवाज उठाना आवश्यक है ताकि समाज में समानता और न्याय सुनिश्चित किया जा सके.



