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यूजीसी के नए नियम पर रोक के बाद जिला मुख्‍यालय पर जश्‍न, अबीर गुलाल लगाए, हवन पूजन

यूजीसी के नए नियम पर रोक के बाद जिला मुख्‍यालय पर जश्‍न, अबीर गुलाल लगाए, हवन पूजन
Jan 29, 2026, 10:16 AM
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Posted By Diksha Mishra

वाराणसी : यूजीसी के नए नियम पर सुप्रीम कोर्ट द्वारा रोक लगाए जाने के बाद वाराणसी में व‍ि‍श्‍वविद्यालयों और कालेजों संग जिला मुख्यालय पर जश्न का माहौल देखने को मिला. मुख्‍यालय पर लंबे समय से प्रदर्शन चल रहा था ज‍िसके बाद गुरुवार को हनुमान चालीसा पाठ और हवन पूजन के साथ होली खेलकर जश्‍न मनाया गया. लोगों ने एक दूसरे को गुलाल लगाकर अपनी खुशी जाहिर की. विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) के नए समता विनियमन पर सुप्रीम कोर्ट द्वारा लगाई गई रोक के बाद सवर्ण समाज का विरोध तीसरे दिन हवन और हनुमान चालीसा का पाठ करके समाप्त हुआ. इस विरोध प्रदर्शन में पूर्वांचल किसान संगठन, हिंदू महासभा और विश्व हिंदू परिषद से जुड़े पदाधिकारी शामिल हुए. सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद जिला मुख्यालय पर सरकार के खिलाफ जमकर नारेबाजी की गई. प्रदर्शनकारियों ने स्पष्ट किया कि जब तक इस इक्विटी रेगुलेशन को वापस नहीं लिया जाता, उनका संघर्ष जारी रहेगा.

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धरना प्रदर्शन में केशरिया भारत संगठन के प्रमुख संयोजक कृष्णानंद पांडेय, पूर्वांचल किसान संगठन के अध्यक्ष अजीत सिंह, हिंदू महासभा के प्रदेश प्रभारी श्रीकांत पांडेय, नेशनल पार्टी की अध्यक्ष वंदना सिंह, राष्ट्रीय संस्कार सेवा भारती के अध्यक्ष रघुनाथ उपाध्याय, विश्व हिंदू परिषद के प्रांत प्रभारी लोकनाथ पांडेय, भाजपा मंडल उपाध्यक्ष आशुतोष मिश्रा राणा सहित अन्य प्रमुख नेता उपस्थित रहे. प्रदर्शनकारियों ने कहा कि यूजीसी के नए नियमों के खिलाफ उनका आंदोलन तब तक जारी रहेगा जब तक कि सरकार इस नियम को वापस नहीं लेती. उन्होंने यह भी कहा कि यह नियम सवर्ण समाज के अधिकारों का उल्लंघन करता है और इससे समाज में असमानता बढ़ेगी.


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बीएचयू में हस्‍ताक्षर अभियान को रोका


प्रदर्शनकारियों ने यह भी आरोप लगाया कि सरकार ने इस नियम के माध्यम से सवर्णों के खिलाफ भेदभाव किया है. इस बीच, काशी हिंदू विश्वविद्यालय के नया विश्वनाथ मंदिर के सामने यूजीसी के नए नियमावली के समर्थन में हस्ताक्षर अभियान चला रहे छात्रों को पुलिस ने हटाया. यह कार्रवाई उस समय की गई जब प्रदर्शनकारी अपनी मांगों को लेकर एकजुट हो रहे थे. पुलिस की इस कार्रवाई ने छात्रों में आक्रोश पैदा कर दिया और उन्होंने इसका विरोध किया.

सवर्ण समाज के नेताओं ने कहा कि वे इस मुद्दे को लेकर आगे भी संघर्ष करेंगे और सभी सवर्णों को एकजुट करने का प्रयास करेंगे. उनका मानना है कि इस नियम के खिलाफ आवाज उठाना आवश्यक है ताकि समाज में समानता और न्याय सुनिश्चित किया जा सके.

अंतरराष्‍ट्रीय महिला दिवस: काशी विश्‍वनाथ मंदिर में महिलाओं के लिए VIP व्‍यवस्‍था
अंतरराष्‍ट्रीय महिला दिवस: काशी विश्‍वनाथ मंदिर में महिलाओं के लिए VIP व्‍यवस्‍था
वाराणसी: काशी विश्‍वनाथ धाम में अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस के अवसर पर इस बार 8 मार्च 2026 को सभी महिलाओं के लिए विशेष दर्शन व्यवस्था की गई है. इस विशेष व्यवस्था के अंतर्गत द्वार संख्या 4-बी से सभी महिलाओं को, चाहे वे काशी की निवासी हों या बाहर से आई हों, निःशुल्क प्रवेश प्रदान किया जाएगा. इस अवसर पर बाबा विश्वनाथ के दर्शन का लाभ उठाने का अवसर मिलेगा.मंदिर के अधिकारी विश्‍व भूषण मिश्र ने बताया कि इस व्यवस्था में गोद में बच्चों को लिए हुए सभी महिलाओं (चाहे बालक हो या बालिका) को प्राथमिकता दी जाएगी. इन महिलाओं को विशेष रूप से दर्शन की सुविधा उपलब्ध कराई जाएगी. इसके लिए किसी प्रकार का टिकट या शुल्क नहीं लिया जाएगा, जिससे सभी माताएं और महिलाएं बिना किसी बाधा के भगवान के दर्शन कर सकें. उल्लेखनीय है कि प्रातःकाल 4:00 से 5:00 बजे तथा सायंकाल 4:00 से 5:00 बजे तक का समय काशीवासियों के लिए आरक्षित रहेगाृ. इस दौरान पूर्ववत विशेष दर्शन व्यवस्था यथावत जारी रहेगी. शेष समय में सभी महिलाओं के लिए द्वार संख्या 4-बी से यह विशेष प्रवेश व्यवस्था उपलब्ध रहेगी, जिससे वे आसानी से दर्शन कर सकें.यह भी पढ़ें: केंद्रीय खुफिया एजेंसियों के निशाने पर BHU और IIT, 200 से अधिक नियुक्तियों की जांच तेजइस बाबत काशी विश्वनाथ मंदिर न्यास की ओर से यह कामना की गई है कि भगवान विश्वनाथ की कृपा एवं मातृशक्ति का आशीर्वाद संपूर्ण मानवता तथा भगवान शिव के सभी भक्तों पर सदैव बना रहे. इस विशेष अवसर पर मंदिर न्यास समस्त मातृशक्ति, सनातन धर्मावलंबियों एवं भगवान विश्वनाथ के सभी श्रद्धालुओं के सुख, समृद्धि और कल्याण की मंगलकामना करता है. अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस पर यह विशेष आयोजन महिलाओं के प्रति सम्मान और श्रद्धा का प्रतीक माना जा रहा है.
केंद्रीय खुफिया एजेंसियों के निशाने पर BHU और IIT, 200 से अधिक नियुक्तियों की जांच तेज
केंद्रीय खुफिया एजेंसियों के निशाने पर BHU और IIT, 200 से अधिक नियुक्तियों की जांच तेज
वाराणसी: बीएचयू, आईआईटी बीएचयू और अंतर-विश्वविद्यालय शिक्षक शिक्षा केंद्र (आईयूसीटीई) में वर्ष 2022 से 2024 के बीच तीन वर्षों में हुई 200 से अधिक नियुक्तियां केंद्रीय खुफिया एजेंसियों के निशाने पर हैं. इस संबंध में उच्च स्तरीय जांच तेज हो गई है.पीएमओ की सख्ती के बाद शुक्रवार को इंटेलिजेंस ब्यूरो और दिल्ली विजिलेंस टीम वाराणसी पहुंचीं. बीएचयू के केंद्रीय कार्यालय में रिक्रूटमेंट सेल से जुड़ी महत्वपूर्ण फाइलें तलब कर लीं. विजिलेंस टीम नियुक्तियों में कथित भ्रष्टाचार और खरीद-फरोख्त के आरोपों की जांच कर रही है, जबकि इंटेलिजेंस ब्यूरो (आईबी) भर्ती से जुड़े मनी ट्रेल और संदिग्ध वित्तीय लेन-देन की गोपनीय पड़ताल कर रही है. रिपोर्ट पीएमओ को देनी है.शिकायतकर्ता के द्वारा उपलब्ध कराए गए साक्ष्यों के आधार पर जांच में भर्ती प्रक्रिया से जुड़ी कई चौंकाने वाली खामियां सामने आई हैं. कुछ मामलों में एक ही दिन लिखित परीक्षा आयोजित कर उसी दिन परिणाम घोषित कर दिया गया और बिना किसी अंतराल के अगले चरण की परीक्षा भी करा ली गई. नॉन-टीचिंग स्टाफ के अलावा नर्सिंग सहायक पदों पर राजस्थान और केरल के अभ्यर्थियों की नियुक्तियों को विशेष जांच के दायरे में रखा गया है. शिकायतकर्ताओं ने 12 से 15 लाख रुपये तक घूस लेने के आरोपों के साथ मनी ट्रेल के साक्ष्य भी जांच एजेंसियों को उपलब्ध कराए हैं.सर्विलांस पर लिए गए संदिग्धों के मोबाइल नंबर 12 संदिग्धों के मोबाइल नंबर सर्विलांस पर लिए गए हैं, जिनमें से तीन पर विशेष नजर रखी जा रही है. इनके और इनके स्वजन के बैंक खाते और संपत्तियों की भी जांच की जा रही है. साक्ष्य मिलने पर संबंधित लोगों के खिलाफ एफआइआर दर्ज की जा सकती है.सरसुंदरलाल अस्पताल और ट्रॉमा सेंटर भी टारगेटविजिलेंस टीम ने सर सुंदरलाल अस्पताल और ट्रॉमा सेंटर में मशीनों व दवाओं की खरीद से जुड़ी फाइलों की भी जांच की. हालांकि, प्राथमिक जांच में खरीद से जुड़े दस्तावेज सही पाए गए हैं और वहां गड़बड़ी की शिकायतों की पुष्टि नहीं हुई है. यह उच्च स्तरीय जांच पूरे मार्च महीने तक चलने की संभावना है. जांच का मुख्य फोकस तीनों संस्थानों में सहायक कुलसचिव, जूनियर क्लर्क और नर्सिंग सहायकों की नियुक्तियों पर है.संदेह के घेरे में पूर्व निदेशक के कार्यकाल की 80 नियुक्तियांआईआईटी बीएचयू में भर्ती मामलों की जांच पूर्व निदेशक प्रो. पीके जैन के करीबी माने जाने वाले एक प्रोफेसर पर केंद्रित हो रही है. शिकायत के अनुसार, यह प्रोफेसर उनके कार्यकाल में भर्ती प्रक्रियाओं में सक्रिय भूमिका निभा रहे थे. जांच में सामने आया है कि उस अवधि में 80 से अधिक नियुक्तियां की गईं थीं. कई मामलों में क्लर्क पद पर ऐसे अभ्यर्थियों का चयन किया गया, जिन्हें टाइपिंग तक नहीं आती.जांच के घेरे में कई अधिकारी दिसंबर में मिली शिकायत के बाद फरवरी में गठित उच्च स्तरीय जांच टीमों ने कई अधिकारियों को जांच के दायरे में ले लिया है. सूत्रों के अनुसार, टीम को कई ऐसी फाइलें मिली हैं जिनमें गड़बड़ी के संकेत मिले हैं. कई मामलों में अभ्यर्थियों के आवेदन पत्र पर किए गए हस्ताक्षर और नियुक्ति से जुड़ी आधिकारिक फाइलों में मौजूद हस्ताक्षर आपस में मेल नहीं खाते पाए गए हैं. जांच एजेंसियां संदिग्ध अभ्यर्थियों और अधिकारियों के बैंक खातों का विवरण खंगाल रही हैं ताकि कथित घूस के लेन-देन का पता लगाया जा सके. जिन अधिकारियों की भूमिका संदिग्ध पाई गई है, उनकी चल और अचल संपत्तियों की भी जांच की जा रही है, ताकि यह स्पष्ट हो सके कि कहीं उनकी संपत्ति आय के ज्ञात स्रोतों से अधिक तो नहीं है.यह भी पढ़ें: योगी सरकार और अविमुक्‍तेश्‍वरानंद के बीच घमासान, धर्मयुद्ध आंदोलन के लिए किया लखनऊ प्रस्‍थानजाने क्या है पूरा मामला यह पूरा मामला तब सामने आया जब आजमगढ़ निवासी अभिषेक सिंह ने प्रधानमंत्री कार्यालय को विस्तृत शिकायत भेजकर तीनों संस्थानों में भर्ती प्रक्रिया में गंभीर अनियमितताओं का आरोप लगाया. शिकायत में कहा गया है कि पे-लेवल 10 से लेकर लेवल-2 तक के पदों पर नियुक्तियों में स्थापित सरकारी नियमों की अनदेखी की गई और योग्य उम्मीदवारों को दरकिनार कर अपात्र लोगों को नियुक्तियां दी गईं. वहीं, विश्वविद्यालय प्रशासन का कहना है कि विवि में पीएमओ की कोई टीम नहीं आई है.आइआइटी बीएचयू के कुलसचिव सुमीत बिस्वास ने बताया कि नियुक्तियों से संबंधित किसी तरह की जांच के बारे मेें उन्हें कोई जानकारी नहीं है. विश्‍वविद्यालय प्रशासन फिलहाल मुंह खोलने से कतरा रहा है.
योगी सरकार और अविमुक्‍तेश्‍वरानंद के बीच घमासान, धर्मयुद्ध आंदोलन के लिए किया लखनऊ प्रस्‍थान
योगी सरकार और अविमुक्‍तेश्‍वरानंद के बीच घमासान, धर्मयुद्ध आंदोलन के लिए किया लखनऊ प्रस्‍थान
वाराणसी: गौ प्रतिष्‍ठा को लेकर शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने काशी से धर्मयुद्ध आंदोलन का शंखनाद किया. अपने पूर्व निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार प्रदेश सरकार को दी गई 40 दिन की अवधि समाप्त होने से पांच दिन पहले ही आंदोलन की रणनीति के तहत लखनऊ के लिए प्रस्थान किया. बीते शुक्रवार की सुबह केदारघाट स्थित विद्या मठ आश्रम स्थित गौशाला मैं सबसे पहले गौ पूजन किया गया. इसके बाद निकलकर वह पालकी पर सवार हुए और चिंतामणि गणेश मंदिर जा पहुंचे. वहां 11 बटुकों ने मंत्रोच्चार के साथ उनका स्वागत और स्वस्तिवाचन किया. मंदिर में गणेश जी की विधिवत पूजा-अर्चना करने के बाद वह संकट मोचन हनुमान मंदिर पहुंचे, जहां उन्होंने हनुमान चालीसा, हनुमानाष्टक और बजरंग बाण का पाठ किया. इसके बाद जयकारों के साथ अपनी वैनिटी वैन में सवार होकर लखनऊ के लिए प्रस्थान किया.जिंदा हिंदू लखनऊ चलेंस्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने कहा कि यह दुर्भाग्यपूर्ण है कि अपने ही वोट से चुनी गई सरकार के सामने गौ रक्षा के लिए धर्म युद्ध करना पड़ रहा है. इस दौरान उनके शिष्यों ने लोगों के बीच एक पंफलेट वितरित किया, जिसमें लिखा था "जिंदा हिंदू लखनऊ चलें". "गौ माता की जय", "शंकराचार्य भगवान की जय", "हर हर महादेव" के उद्घोष के बीच लगभग 20 गाड़ियों के काफिले के साथ उन्होंने लखनऊ के लिए प्रस्थान किया. पत्रकारों द्वारा उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य के बयान के संदर्भ में पूछे जाने पर कि "गौ माता को कोई खरोच नहीं पहुंचा सकता", स्वामी ने कहा कि यह सही समय है कि जो भी कहना है, वह कह दें. कोई पक्ष में बोलेगा, कोई विपक्ष में, लेकिन जो सच है, वह सभी जानते हैं. उन्होंने यह भी कहा कि जो कालनेमि हैं, वे कुछ नहीं बोलेंगे.यह भी पढ़ें: ईरान को बर्बाद करने में जुटा अमेरिका, आज रात मिसाइल लॉन्चर-फैक्ट्रियां होंगी तबाहसंकट मोचन मंदिर में हनुमान चालीसासंकट मोचन मंदिर में हनुमान चालीसा, बजरंग बाण आदि का पाठ कर लखनऊ के धर्म युद्ध यात्रा के लिए स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद निकले तो वाराणासी के बाबतपुर मार्ग पर पहुंचने के साथ ही रास्‍ते में जगह- जगह उनका स्वागत भी हो रहा है. स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद का यह आंदोलन गौ माता की रक्षा के लिए एक बड़ा कदम माना जा रहा है. उनका मानना है कि गौ माता की सुरक्षा केवल धार्मिक नहीं, बल्कि सामाजिक और सांस्कृतिक दृष्टिकोण से भी अत्यंत आवश्यक है. बता दें कि कांग्रेस और सपा ने भी उनके आंदोलन को समर्थन किया है.शंकराचार्य द्वारा प्रस्तावित सभा कार्यक्रम को अभी तक नहीं मिली है अनुमतिशंकराचार्य के लखनऊ में प्रस्तावित होने वाले सभा कार्यक्रम को अभी तक किसी भी प्रकार के प्रशासनिक अनुमति नहीं मिली है. बावजूद इसके शंकराचार्य कार्यक्रम को लेकर अड़े हुए हैं. उनका मानना है कि जो भी औपचारिकताएं हैं हमने पूरी कर ली है. जो फीस है वह भी हमने जमा कर दिया है. हमें उम्मीद है कि तीन-चार दिनों के अंदर हमें अनुमति मिल जाएगी. वाराणसी प्रशासन से सहयोग के संदर्भ मे बोले शंकराचार्य प्रशासन ने हमें रोक नहीं मतलब यात्रा की अनुमति है. भीड को लेकर के बोले शंकराचार्य मुझे नहीं पता कॉल मेरे साथ है मैं यहां से अकेला निकल रहा हूं जो भी होगा साथ आएगा.