आस्था का केंद्र: काशी का प्राचीन बनकटी हनुमान मंदिर
वाराणसी: काशी के प्राचीन हनुमान मंदिरों में बनकटी हनुमान जी का मंदिर विशेष आस्था का केंद्र माना जाता है. यह मंदिर दुर्गाकुंड के पीछे स्थित है.मान्यता है कि प्राचीन काल में इस स्थान पर घना जंगल हुआ करता था, जहां चारों ओर बड़े-बड़े वृक्ष थे.इसी वन क्षेत्र के बीच से हनुमान जी की यह स्वयंभू मूर्ति प्राप्त हुई थी, इसी कारण इन्हें बनकटी हनुमान जी कहा जाता है.

धीरे-धीरे इस स्थान पर श्रद्धालुओं की आस्था बढ़ती गई और बनकटी हनुमान जी की पूजा-अर्चना प्रारंभ हुई. काशी प्रवास के दौरान रामचरितमानस के रचयिता गोस्वामी तुलसीदास जी भी यहां नियमित रूप से दर्शन-पूजन के लिए आते थे। कहा जाता है कि तुलसीदास जी की बनकटी हनुमान जी में गहरी श्रद्धा थी और एक बार हनुमान जी ने कोढ़ी के रूप में उन्हें साक्षात दर्शन दिए थे.

मान्यता है कि जो श्रद्धालु लगातार 41 दिनों तक बनकटी हनुमान जी के दर्शन करते हैं, उनकी सभी मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं.मंदिर के प्रधान पुजारी के अनुसार, काशी हिन्दू विश्वविद्यालय की स्थापना के समय पंडित मदन मोहन मालवीय जी ने भी 41 दिनों तक यहां दर्शन-पूजन किया था.
मंदिर परिसर में हनुमान जी की मूर्ति उत्तर-पूर्व दिशा की ओर स्थापित है.मूर्ति के ठीक सामने श्रीराम-जानकी और शिवालय का छोटा मंदिर भी स्थित है, जो इस स्थल की धार्मिक महत्ता को और बढ़ाता है.
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पुजारी जी ने बताया कि बनकटी हनुमान जी की महिमा देश ही नहीं, बल्कि विदेशों तक फैली हुई है. कई विदेशी श्रद्धालु भी यहां दर्शन करने आते हैं और अपनी मनोकामनाएं पूर्ण होने की आस्था रखते हैं.


