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केंद्रीय खुफिया एजेंसियों के निशाने पर BHU और IIT, 200 से अधिक नियुक्तियों की जांच तेज

केंद्रीय खुफिया एजेंसियों के निशाने पर BHU और IIT, 200 से अधिक नियुक्तियों की जांच तेज
Mar 07, 2026, 08:02 AM
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Posted By Preeti Kumari

वाराणसी: बीएचयू, आईआईटी बीएचयू और अंतर-विश्वविद्यालय शिक्षक शिक्षा केंद्र (आईयूसीटीई) में वर्ष 2022 से 2024 के बीच तीन वर्षों में हुई 200 से अधिक नियुक्तियां केंद्रीय खुफिया एजेंसियों के निशाने पर हैं. इस संबंध में उच्च स्तरीय जांच तेज हो गई है.

पीएमओ की सख्ती के बाद शुक्रवार को इंटेलिजेंस ब्यूरो और दिल्ली विजिलेंस टीम वाराणसी पहुंचीं. बीएचयू के केंद्रीय कार्यालय में रिक्रूटमेंट सेल से जुड़ी महत्वपूर्ण फाइलें तलब कर लीं. विजिलेंस टीम नियुक्तियों में कथित भ्रष्टाचार और खरीद-फरोख्त के आरोपों की जांच कर रही है, जबकि इंटेलिजेंस ब्यूरो (आईबी) भर्ती से जुड़े मनी ट्रेल और संदिग्ध वित्तीय लेन-देन की गोपनीय पड़ताल कर रही है. रिपोर्ट पीएमओ को देनी है.


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शिकायतकर्ता के द्वारा उपलब्ध कराए गए साक्ष्यों के आधार पर जांच में भर्ती प्रक्रिया से जुड़ी कई चौंकाने वाली खामियां सामने आई हैं. कुछ मामलों में एक ही दिन लिखित परीक्षा आयोजित कर उसी दिन परिणाम घोषित कर दिया गया और बिना किसी अंतराल के अगले चरण की परीक्षा भी करा ली गई. नॉन-टीचिंग स्टाफ के अलावा नर्सिंग सहायक पदों पर राजस्थान और केरल के अभ्यर्थियों की नियुक्तियों को विशेष जांच के दायरे में रखा गया है. शिकायतकर्ताओं ने 12 से 15 लाख रुपये तक घूस लेने के आरोपों के साथ मनी ट्रेल के साक्ष्य भी जांच एजेंसियों को उपलब्ध कराए हैं.


सर्विलांस पर लिए गए संदिग्धों के मोबाइल नंबर


12 संदिग्धों के मोबाइल नंबर सर्विलांस पर लिए गए हैं, जिनमें से तीन पर विशेष नजर रखी जा रही है. इनके और इनके स्वजन के बैंक खाते और संपत्तियों की भी जांच की जा रही है. साक्ष्य मिलने पर संबंधित लोगों के खिलाफ एफआइआर दर्ज की जा सकती है.


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सरसुंदरलाल अस्पताल और ट्रॉमा सेंटर भी टारगेट


विजिलेंस टीम ने सर सुंदरलाल अस्पताल और ट्रॉमा सेंटर में मशीनों व दवाओं की खरीद से जुड़ी फाइलों की भी जांच की. हालांकि, प्राथमिक जांच में खरीद से जुड़े दस्तावेज सही पाए गए हैं और वहां गड़बड़ी की शिकायतों की पुष्टि नहीं हुई है. यह उच्च स्तरीय जांच पूरे मार्च महीने तक चलने की संभावना है. जांच का मुख्य फोकस तीनों संस्थानों में सहायक कुलसचिव, जूनियर क्लर्क और नर्सिंग सहायकों की नियुक्तियों पर है.


संदेह के घेरे में पूर्व निदेशक के कार्यकाल की 80 नियुक्तियां


आईआईटी बीएचयू में भर्ती मामलों की जांच पूर्व निदेशक प्रो. पीके जैन के करीबी माने जाने वाले एक प्रोफेसर पर केंद्रित हो रही है. शिकायत के अनुसार, यह प्रोफेसर उनके कार्यकाल में भर्ती प्रक्रियाओं में सक्रिय भूमिका निभा रहे थे. जांच में सामने आया है कि उस अवधि में 80 से अधिक नियुक्तियां की गईं थीं. कई मामलों में क्लर्क पद पर ऐसे अभ्यर्थियों का चयन किया गया, जिन्हें टाइपिंग तक नहीं आती.


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जांच के घेरे में कई अधिकारी


दिसंबर में मिली शिकायत के बाद फरवरी में गठित उच्च स्तरीय जांच टीमों ने कई अधिकारियों को जांच के दायरे में ले लिया है. सूत्रों के अनुसार, टीम को कई ऐसी फाइलें मिली हैं जिनमें गड़बड़ी के संकेत मिले हैं. कई मामलों में अभ्यर्थियों के आवेदन पत्र पर किए गए हस्ताक्षर और नियुक्ति से जुड़ी आधिकारिक फाइलों में मौजूद हस्ताक्षर आपस में मेल नहीं खाते पाए गए हैं. जांच एजेंसियां संदिग्ध अभ्यर्थियों और अधिकारियों के बैंक खातों का विवरण खंगाल रही हैं ताकि कथित घूस के लेन-देन का पता लगाया जा सके. जिन अधिकारियों की भूमिका संदिग्ध पाई गई है, उनकी चल और अचल संपत्तियों की भी जांच की जा रही है, ताकि यह स्पष्ट हो सके कि कहीं उनकी संपत्ति आय के ज्ञात स्रोतों से अधिक तो नहीं है.


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जाने क्या है पूरा मामला


यह पूरा मामला तब सामने आया जब आजमगढ़ निवासी अभिषेक सिंह ने प्रधानमंत्री कार्यालय को विस्तृत शिकायत भेजकर तीनों संस्थानों में भर्ती प्रक्रिया में गंभीर अनियमितताओं का आरोप लगाया. शिकायत में कहा गया है कि पे-लेवल 10 से लेकर लेवल-2 तक के पदों पर नियुक्तियों में स्थापित सरकारी नियमों की अनदेखी की गई और योग्य उम्मीदवारों को दरकिनार कर अपात्र लोगों को नियुक्तियां दी गईं. वहीं, विश्वविद्यालय प्रशासन का कहना है कि विवि में पीएमओ की कोई टीम नहीं आई है.आइआइटी बीएचयू के कुलसचिव सुमीत बिस्वास ने बताया कि नियुक्तियों से संबंधित किसी तरह की जांच के बारे मेें उन्हें कोई जानकारी नहीं है. विश्‍वविद्यालय प्रशासन फिलहाल मुंह खोलने से कतरा रहा है.

IMS-BHU में IASTM तकनीक पर राष्ट्रीय कार्यशाला, कौशल को करेंगे उन्नत
IMS-BHU में IASTM तकनीक पर राष्ट्रीय कार्यशाला, कौशल को करेंगे उन्नत
National Workshop on IASTM Techniques at IMS-BHU to Upgrade Skillsवाराणसी: इंस्टिट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज़ (IMS), बनारस हिंदू विश्वविद्यालय (BHU) के अस्थि रोग विभाग द्वारा 18 एवं 19 अप्रैल 2026 को “इंस्ट्रूमेंट असिस्टेड सॉफ्ट टिश्यू मोबिलाइजेशन (IASTM)” तकनीक पर दो दिवसीय राष्ट्रीय हैंड्स-ऑन कार्यशाला का आयोजन किया जा रहा है. इस कार्यशाला का उद्देश्य फिजियोथेरेपी के क्षेत्र में क्लिनिकल दक्षता को बढ़ाना, साक्ष्य-आधारित उपचार पद्धतियों को बढ़ावा देना तथा प्रतिभागियों को आधुनिक सॉफ्ट टिश्यू मोबिलाइजेशन तकनीकों का व्यावहारिक प्रशिक्षण प्रदान करना है.कार्यशाला का उद्घाटनकार्यशाला का उद्घाटन 18 अप्रैल को प्रातः 10:00 बजे IMS, BHU के NLT कॉन्फ्रेंस हॉल में होगा. इस अवसर पर मुख्य अतिथि के रूप में प्रो. एस. एन. संखवार (निदेशक, IMS, BHU) एवं विशिष्ट अतिथि के रूप में प्रो. संजय गुप्ता (डीन, फैकल्टी ऑफ मेडिसिन) उपस्थित रहेंगे. कार्यक्रम के दौरान विभिन्न विशेषज्ञों द्वारा व्याख्यान एवं व्यावहारिक सत्र आयोजित किए जाएंगे, जिनमें डॉ. संकल्प झा, डॉ. निशांत जेमिनी, डॉ. हंजाबम बरुण शर्मा तथा डॉ. आशीष कुमार यादव एवं डॉ. आशीष कुमार गुप्ता प्रमुख रूप से शामिल हैं.Also read: अक्षय तृतीया से श्रद्धालुओं को मिलेगी यह सुविधा, बाबा दरबार पहुंचने में होगी राहतकार्यशाला में फेशियल सिस्टम, मायोफेशियल रिलीज, पेन मॉड्यूलेशन तथा IASTM तकनीकों पर विशेष ध्यान दिया जाएगा. इस आयोजन के संयोजक डॉ. एस. एस. पांडेय (सहायक प्रोफेसर, फिजियोथेरेपी) एवं सह-संयोजक डॉ. आशीष कुमार यादव (सहायक प्रोफेसर, बायोस्टैटिस्टिक्स) हैं. दो दिवसीय इस कार्यशाला में देशभर से आए फिजियोथेरेपिस्ट, शोधार्थी एवं छात्र भाग लेकर अपने कौशल को उन्नत करेंगे. कार्यक्रम के अंत में प्रतिभागियों को प्रमाण पत्र भी प्रदान किए जाएंगे.https://www.youtube.com/watch?v=FyRyTrkLQZk
अक्षय तृतीया से श्रद्धालुओं को मिलेगी यह सुविधा, बाबा दरबार पहुंचने में होगी राहत
अक्षय तृतीया से श्रद्धालुओं को मिलेगी यह सुविधा, बाबा दरबार पहुंचने में होगी राहत
Devotees will get this facility from Akshaya Tritiya, there will be relief in reaching Baba's court.वाराणसी: महादेव की नगरी काशी में अक्षय तृतीया यानी 19 अप्रैल से श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए एक नई व्यवस्था शुरू होने जा रही है. कबीरचौरा, मैदागिन और बेनिया जैसे प्रमुख स्थानों से श्री काशी विश्वनाथ मंदिर तक गोल्फ कार्ट सेवा शुरू की जाएगी. इस सुविधा के शुरू होने से आम और खास सभी भक्तों को बाबा विश्वनाथ के धाम तक पहुंचने में बड़ी राहत मिलेगी, खासकर बुजुर्गों, महिलाओं और दिव्यांगजनों के लिए यह व्यवस्था काफी उपयोगी साबित होगी. नगर आयुक्त हिमांशु नागपाल ने बताया कि बेनिया स्थित राज नारायण पार्क, कबीरचौरा और मैदागिन समेत कई स्थानों से गोल्फ कार्ट सेवा संचालित की जाएगी, जो सीधे श्री काशी विश्वनाथ मंदिर के गेट नंबर 4 तक पहुंचेगी.देना होगा निर्धारित शुल्‍कप्रारंभिक चरण में करीब 25 गोल्फ कार्ट चलाई जाएंगी, जिन्हें आवश्यकता के अनुसार आगे बढ़ाया भी जा सकता है. उन्होंने बताया कि इस सेवा का लाभ लेने के लिए यात्रियों को निर्धारित शुल्क देना होगा. यह पहल यात्रियों की सुविधा बढ़ाने के साथ-साथ पर्यावरण संरक्षण को ध्यान में रखकर की गई है, क्योंकि ये सभी गोल्फ कार्ट इको-फ्रेंडली इलेक्ट्रिक वाहन होंगे. नगर आयुक्त के अनुसार, गोल्फ कार्ट सेवा प्रतिदिन भोर में 3 बजे से रात 11 बजे तक उपलब्ध रहेगी, ताकि मंगला आरती से लेकर रात्रि दर्शन तक आने वाले श्रद्धालुओं को इसका लाभ मिल सके. गोल्फ कार्ट दो प्रकार की होंगी. एक में छह लोगों के बैठने की क्षमता होगी, जबकि दूसरी में नौ लोग बैठ सकेंगे.Also read: डाॅ. संजय निषाद- पत्रकारों के लिए प्रोटेक्शन एक्ट जरूरी इसके अलावा, मैदागिन स्थित टाउनहॉल और राज नारायण पार्क (बेनियाबाग) में बने आधुनिक पार्किंग स्थलों पर वाहन खड़ा करने के बाद श्रद्धालु गोल्फ कार्ट के माध्यम से आसानी से विश्वनाथ धाम तक पहुंच सकेंगे. आने वाले समय में इस सेवा का विस्तार अन्य स्थानों तक भी किया जा सकता है. इस सुविधा से राहत मिलने की उम्‍मीद जताई जा रही है.https://www.youtube.com/watch?v=FyRyTrkLQZk
डाॅ. संजय निषाद- पत्रकारों के लिए प्रोटेक्शन एक्ट जरूरी
डाॅ. संजय निषाद- पत्रकारों के लिए प्रोटेक्शन एक्ट जरूरी
Dr. Sanjay Nishad – Protection Act is necessary for journalistsवाराणसी: उत्तर प्रदेश के कैबिनेट मंत्री डाॅ. संजय निषाद (मत्स्य पालन विभाग) ने कहा है कि काशी पत्रकार संघ का इतिहास केवल एक संस्था का इतिहास नही है बल्कि यह काशी की सामाजिक चेतना, संघर्ष और संच्चाई की आवाज का एक जीवंत दस्तावेज है. यह वर्षों से पत्रकारिता की परम्पराओं, मूल्यों और जनहित की भावना को जिस समर्पण के साथ संजोकर रखा है वह अत्यंत सराहनीय है. उन्होंने पत्रकारों की समस्याओं पर गंभीर चिंता जताई और उनके लिए एक सशक्त “प्रोटेक्शन एक्ट” लागू करने पर सहमति जताई.क्रांति की चेतना का जन्म शुक्रवार को काशी पत्रकार संघ की पहल पर आयोजित में ‘संवाद कार्यक्रम’ में पराड़कर स्मृति भवन पहुंचे कैबिनेट मंत्री ने कहा कि आज़ादी के आंदोलन में काशी की पत्रकारिता ने अपनी लेखनी के माध्यम से जनजागरण और क्रांति की चेतना को जन्म दिया. कहा कि जिस प्रकार डॉक्टर, अधिवक्ता और इंजीनियर जैसे पेशेवर कभी पूरी तरह से रिटायर नहीं होते, उसी प्रकार पत्रकारों का अनुभव भी अमूल्य होता है और उन्हें जीवनभर सम्मान व सुरक्षा मिलनी चाहिए. उन्होंने जोर देते हुए कहा कि जैसे कार्यपालिका, विधायिका और न्यायपालिका के लिए सुरक्षा प्रावधान मौजूद हैं, वैसे ही पत्रकारों के लिए भी “प्रोटेक्शन एक्ट” जरूरी है. उन्होंने स्पष्ट किया कि पत्रकार समाज को दिशा देने वाला वर्ग है. यदि वही असुरक्षित रहेगा और समस्याओं से जूझता रहेगा, तो समाज की सुरक्षा और जागरूकता भी प्रभावित होगी. ऐसे में पत्रकारों की सुरक्षा, सम्मान और मूलभूत सुविधाएं सुनिश्चित करना अत्यंत आवश्यक है.Also read: स्‍मृति ईरानी ने अखिलेश पर कसा तंज, कह दी ये बातउन्होंने पत्रकारों की समस्याओं को विस्तार से सुना. संघ की ओर से उठाए गए आवास, पेंशन और स्वास्थ्य सेवाओं के मुद्दों को गंभीरता से लेते हुए आश्वासन दिया कि इन्हें मुख्यमंत्री के समक्ष प्रभावी ढंग से रखा जाएगा और समाधान की दिशा में प्रयास किए जाएंगे. इसके पूर्व काशी पत्रकार संघ के अध्यक्ष अरुण मिश्र ने कैबिनेट मंत्री का स्वागत किया. संचालन महामंत्री जितेंद्र श्रीवास्तव ने किया.इस मौके पर काशी पत्रकार संघ के पूर्व अध्यक्ष योगेश कुमार गुप्त, राजनाथ तिवारी, संघ के उपाध्यक्ष सुनील शुक्ला, वरिष्ठ पत्रकार दीनबंधु राय, कैलाश यादव, कृष्ण बहादुर रावत, प्रेस क्लब के अध्यक्ष चंदन रुपाणी, मंत्री विनय शंकर सिंह, अश्वनी कुमार श्रीवास्तव, पंकज त्रिपाठी, शिव प्रकाश राय, अमित शर्मा, देवेश सिंह, शंकर चतुर्वेदी, मनोज राय, रोशन जायसवाल, विजय शंकर गुप्ता, संजय प्रसाद सिंह, आशुतोष पांडेय, राजेश सेठ, दिनेश सिंह, मुन्ना लाल साहनी, हरी बाबू श्रीवास्तव, अरुण सिंह, दिलीप कुमार आदि मौजूद थे.https://www.youtube.com/watch?v=FyRyTrkLQZk